30/10/2018

माँ ये उमर तुम्हें लग जाए

माँ 
मेरी उमर तुम्हें लग जाए 
माँ ये उमर तुम्हें लग जाए 

लोरी गाती, थपकी देती 
आँचल में माँ मुझे सुलाए

जन्म दिया, धरती पे लाई 
छाती से माँ मुझे लगाई 
सदा हंसाए, सदा दुलारे 
कान्हा जैसे मुझे सँवारे 

जिसकी प्यारी मीठी - मीठी 
बातों से ही मन भर जाए

थम जाती हैं साँसें जिसकी 
मुझको गिरता देखकर 
खिल जाता है चेहरा जिसका 
मुझको उठता देखकर 

गिरना उठना और सम्हलना 
माँ मुझको चलना सिखलाए 

लड़ जाती है मेरी खातिर 
जो बेदर्द - जमाने से 
अब तक फ़िक्र करे माँ मेरी 
इक बच्चे - अन्जाने से 

मुझको थोड़ी चोट लगे जो 
आँखों में आँसू आ जाए 

मेरी उमर तुम्हें लग जाए 
माँ ये उमर तुम्हें लग जाए 

लोरी गाती, थपकी देती 
आँचल में माँ मुझे सुलाए

27/10/2018

नील गए जब से तुम दिल से गीत गया



ऐसे धीरे - धीरे जीवन बीत गया 
जैसे कोई अपना हमदम मीत गया  

बचपन माँ की गोद में गुजरा 
और जवानी प्यार में 
पत्नी संग फिर उम्र बिताया 
और बुढ़ापा याद में 
जीवन का बस लक्ष्य था इतना 
जितना मैंने पाया है 
खुश हूँ अपने इस जीवन से 
जिसमें रंग समाया है 

ऐसे ही इस जीवन को मैं लम्हा - लम्हा जीत गया 

फिर से पा लूँ तुमको 
ये जी करता है 
गोद में ले लूँ तुमको 
पर दिल डरता है 
संग सदा तेरे मैं भी 
रहना चाहूँ 
तुमसे दिल की बातें सब 
कहना चाहूँ 

जब - जब मेरे साथ रहा तू भीत गया 

तेरी भोली बातों का मैं दीवाना 
पागल था थोड़ा , थोड़ा सा बेगाना 
बातें दिल की सुनता 
और सुनाता था 
अब तक मैं छुप - छुप के 
तुमको गाता था 

नील गए जब से तुम दिल से गीत गया 


ऐसे धीरे - धीरे जीवन बीत गया 
जैसे कोई अपना हमदम मीत गया  


24/10/2018

प्रेम



चलो अब शान्त होते हैं 
उन कहकशाओं में कि 
जहाँ से न तुम इस बेसुर्ख़ धरती पे आओ 
और न ही मैं 
उड़ चलते हैं 
अंतरिक्ष में। 

19/10/2018

सपनें सच होते देर नहीं लगते

नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

सपनें सच होते देर नहीं लगते
बस आपको खुद पर भरोसा
और अपनें कर्मों में श्रद्धा होनी चाहिए

ये सारी धरती, ये खुला सारा आसमान
तुम्हारा है ,
और तुम्हीं हो इसके सही हक़दार

तुम्हारा सही किरदार जब तक
तुम्हें नहीं मिल जाता
जीवन के इस रंगमंच पे
लड़ते रहो , संघर्ष करते रहो
उसे हासिल करने के लिए

नहीं बनो तुम " गीता के अर्जुन "
जिसे किसी कृष्ण की जरुरत पड़े

मत रखो अपने मन के भीतर
किसी प्रकार का द्वंद्व

उखाड़ फेंको वो सारी वासनाएँ
जो तुम्हारे लक्ष्य में रोड़ा बनें

प्रयास करो इन्द्रियों को संयमित
करने का

ये मन का द्वंद्व , ये वासनाएँ
और इन इन्द्रियों पर संयम खुद - ब - खुद
हो जाएगा

मैं सच कहता हूँ ,
सपनें सच होते देर नहीं लगते
बस आपको खुद पर भरोसा 
और अपनें कर्मों में श्रद्धा होनी चाहिए


देश में हैं दो बन्दर



का बतियाएँ काका तुमसे
देश में हैं दो बन्दर

एक शहर का नाम बदलता
दूजा घूमे जमकर

जितना वो कहते हैं ,जितना
बोलें उतना लिखो
कान, आँख, मुँह बन्द करो
जों बोलें उसको सीखो
सुनो सदा अनुकूल रहो और
चलना ज़रा सम्हलकर

प्यार , मुहब्बत किये नही वो
और नही कुछ समझें
बदल रहे वो दुनिया यारों
खुद को कभी न बदलें
दोनों कृत्रिम - बातें करते
फेंक रहे हैं छककर

मानवीयता तनिक नही है
सदा काटने दौड़ें
छप्पन इंच की छाती दिखलाकर
होते हैं चौड़े
दोनों की मति भ्रष्ट हुई है
दोनों हैं घनचक्कर

का बतियाएँ काका तुमसे
देश में हैं दो बन्दर

एक शहर का नाम बदलता
दूजा घूमे जमकर

12/10/2018

मोदी जी

Modi Ji 

खेलें खाएँ घूमें नाचें धूम मचाएँ मोदी जी
भाषण देते गला फाड़ के खुब चिल्लाएँ मोदी जी

काशी को दिखला कर सपना क्योटो का फिर निकल लिए
प्लेन में बैठें , आसमान से हाँथ हिलाएँ मोदी जी

क्या बदलाव हुआ है आखिर अच्छे - दिन के आने पर
नन्हें मुन्हें बच्चों से अब भीख मगाएँ मोदी जी

राजनीति हो मानवीयता को लेकर इस भारत में
जाति धर्म मजहब को लेकर नहीं लड़ाएँ मोदी जी

हम गुमराह नहीं होंगें इन लोगों की मौतें लेकर
सबकी खातिर सीमा पे जो जान गवाएँ मोदी जी

गाँवों में घुसकर देखो , बोलो बतियाओ तो समझो
दूर - दूर से " मन की बातें " नहीं सुनाएँ मोदी जी

संस्कृत की क्या दशा हुई है विद्यालय जा - जा देखें
बाहर जाकर ऐसे न भौकाल बनाएँ मोदी जी

लोकतंत्र को लोकतंत्र के जैसे ही रहने देना
लोकतंत्र का लिए पताका न फहराएँ मोदी जी

परेशान हैं अगर बुढ़ापे से सुनिए !इक काम करें
किसी योग्य का राजतिलक करके बैठाएँ मोदी जी

मैंने भी सोचा था कुछ अच्छा होगा इस शासन में
अच्छे - खासे प्यारे - प्यारे ख्वाब दिखाए मोदी जी


10/10/2018

कइसन - कइसन खेल देखावेला ईश्वर

Neel

कइसन - कइसन खेल देखावेला ईश्वर
खुद ही जन्मे , खुदै मुआवेला ईश्वर

का तोहके बतियाई कुछ तुहूँ समझा
ईश्वर के ही नाच नचावेला ईश्वर

देखनी करम करत जेनहन के बचपन से
ओनहन के न बड़ा बनावेला ईश्वर

सुन ला " मँगरू " हाँथ नही हौ कुछ तोहरे
खुदै रोवावे , खुदै हँसावेला ईश्वर

का हो ईश्वर आँधर हौ कि बहिरा हौ
लइकन के हर घड़ी सतावेला ईश्वर 

08/10/2018

उसी में आज रावण देखता हूँ


अधूरा आज सावन देखता हूँ 
कि बस बादल लुभावन देखता हूँ 

जिसे कहता रहा मैं रोज़ ईश्वर 
उसी में आज रावण देखता हूँ 

जितने में तुम रहते हो उतना तो साफ रखो यारों

Neel

जो करते हो , जितना भी उसमें इन्साफ रखो यारों
जीतोगे तुम भी इक दिन ऐसा विश्वास रखो यारों

कुत्ते भी जब बैठे हैं तो पूँछ - झाड़कर बैठे हैं
जितने में तुम रहते हो उतना तो साफ रखो यारों

घर का कूड़ा - कचरा सारा बच्चों संग भिजवाते हो
गंगा में मत छोड़ो उसको अपने पास रखो यारों

कुण्ठित - मन हो गया तुम्हारा माँ को गाली देते हो
कुछ अच्छे पण्डित बुलवाओ घर पर जाप रखो यारों 

मुझे माफ करना पापा

Neel

मुझे माफ करना पापा
मैं अपनी जिन्दगी
एक भरी हुई पेन
और सादे कागजों
के साथ गुजारना चाहता हूँ

मुझे माफ करना
उन सभी सपनों के लिए
जो आप मेरे लिए या मुझको लेकर
देख रहे हैं

मुझे माफ करना पापा
पर मैं सच - सच कहूँ तो
मेरा कोई इन्ट्रेस्ट नही है
मेरे स्लेबस की इन मोटी - मोटी किताबों में
दिन - दिन भर के लेक्चरों में
और इस झूठी शानो - शौकत में

मैं अब और नहीं इनमें बर्बाद करना
चाहता आपका पैसा और अपना समय

मुझे मालूम है आपकी एक बिन ब्याही बेटी
भी अभी है ,
और आपकी नौकरी कोई सरकारी नहीं
और ना ही उतनी खेती है
अब मैं आपकी सहायता और अपनें सपनों को
पूरा करना चाहता हूँ ,
जिन्हें मैं अपनी खुली आँखों से
हर घड़ी देखता हूँ पापा

मेरी कोई अभिलाषा नही
सरकारी प्रोफेसर, लेक्चरार या अध्यापक बनने की

अब मैं पढ़ना चाहता हूँ
जीवन की वो किताबें जिसमें सच को मैं
सामने से देख सकूँ

महसूस करना चाहता हूँ
जीवन के हर एक चैप्टर को बिल्कुल करीब से
जिनसे अभी तक आपनें मुझे अनभिज्ञ रखा

मुझे मालूम है रास्ता बहुत ही कठिन है
मेरी मन्जिल का
पर मैं लड़ना चाहता हूँ पापा
लड़कर मरना चाहता हूँ
कभी - कभी
हर विषय में समझौता करना अच्छा नही होता

मुझे माफ करना पापा
मैं अपनी जिन्दगी
एक भरी हुई पेन
और सादे कागजों
के साथ गुजारना चाहता हूँ

मुझे माफ करना पापा
मुझे माफ करना ।



06/10/2018

महज़ दिखाना लगा रहा

Neel

झूठी - मूठी इस दुनिया का
ताना - बाना लगा रहा

शानों - शौकत में खोए थे
महज़ दिखाना लगा रहा

मक्कारी बेमानी चार सौ बीसी
सबकी दिखती है
कुछ कह के देखो इनको
बत्तीसी सबकी दिखती है

खींच - तान के इधर - उधर से
महज़ कमाना लगा रहा

लड़की - लड़कों की बातें
दिन भर बतियाया करते हैं
मैडम के छत आते ही
सर भी छत आया करते हैं

इधर - उधर की बातों में
बस समय बिताना लगा रहा

बेवकूफ है इंकलाब का नारा
लेकर क्या होगा
क्या गीता , क्या भारत
चाँद - सितारा लेकर क्या ह

तू पीछे रह गया " नील "
ये गज़ब जमाना लगा रहा 

01/10/2018

Lyrics

Neel

तेरी साँसों से हवा चलती है
चाँद चेहरे से बना है तेरे

मेरी आँखों में अगर देखे तू
देख लेगी सभी सपने मेरे

इतना चाहूँ तुझे कहूँ कैसे
तेरे दीदार बिन रहूँ कैसे
किसी उड़ते हुए पंक्षी की तरह
उड़ते रहते विचार हैं तेरे

दूर भी है बहुत तू पास भी है
गुज़रे लम्हों के वो एहसास भी हैं
दूरियों को समेट लेता हूँ
देख कितने करीब है मेरे


बदन में फूल है या फूल ही बदन है तेरा

Neel

जितना हम कह रहे उससे भी पाक मन है तेरा
होंठ में कंपकपी , मदहोश ये यौवन है तेरा

तेरे आते ही महक उठता है ज़र्रा - ज़र्रा
बदन में फूल है या फूल ही बदन है तेरा

खूबियाँ क्यों न कहूँ उसकी वो दिखती ऐसी
जमीं पे उतरा हुआ चाँद सा सनम है तेरा

रोज़ कहता है कि तस्वीर बदल दूँगा मैं
मुझे दिखता नही ऐसा कहाँ चमन है तेरा

सोंचती क्यों है ये इक तू ही तड़पती धरती
पूँछ उससे कभी क्या हाल ये गगन है तेरा

तेरी आवाज़ है श्रीहर्ष की दमयन्ती सी
युँ ही गाती रहो प्यारा बहुत भजन है तेरा 

29/09/2018

मुबारक हो तुझे रमजान तेरा

Neel
बहुत ही हो रहा सम्मान तेरा
किताबों से बढ़ा अभिमान तेरा

स्वयं की आत्मा को जान ले तू
यही सबसे बड़ा है ज्ञान तेरा

हकीकत की जमीं पर देख आके
सफल हो जाएगा अभियान तेरा

लड़ाई धर्म है तो छोड़ता हूँ
बहुत खतरे भरा परिणाम तेरा

गले मिलते रहो इक दूसरे से
मुबारक हो तुझे रमजान तेरा

निकलता ही नही है देखने को
बहुत ही क्रूर है भगवान तेरा




26/09/2018

बगल बैठल हँई भइया के साली

Neel
कहानी आ रहल बा प्रेम वाली 
चटक चेहरा पे दमके होंठ - लाली 

हँसावेली करेली गुदगुदी ऊ 
बगल बैठल हँई भइया के साली 

लगे सूरुज नियन हम का बताई
चोंधावता सुनहली कान - बाली

भँवर के काम हौ मड़राइ हैं सन
कहा कब ले बचाई फूल - माली 

नहीं मन दोस्तन के बिन लगेला 
कि जब तक होय ना दू - चार गाली 

चलल बाड़न उहौ अब राज थाम्हें
हवन राजा मगर दिमाग खाली 

बहुत मन खुश भइल बा आज हमरो
हमर माई जे खइली भर के थाली


कदम बढ़ते हैं मेरे पर मेरा मन बढ़ नही पाता

Neel
बहुत डरता हूँ मैं ऊँचाइयों पर चढ़ नही पाता 
बनाना चाहता हूँ मैं बहुत पर गढ़ नही पाता 

मेरा दीमाग खाली है मैं औरों को पढूँगा क्या
मैं जितना चाहता हूँ खुद को उतना पढ़ नही पाता 

सुनो पापा! न जाने डर कहाँ से आ गया भीतर 
कदम बढ़ते हैं मेरे पर मेरा मन बढ़ नही पाता 

नदी चुपके से आ पूछी समन्दर क्यों उछलता है 
नदी ! सुन बिन तेरे मैं भी किसी से लड़ नही पाता 

पता मेरा कोई आवाज मुझसे पूछती अक्सर
बताना चाहता हूँ मैं, मगर वो घर नही पाता 

25/09/2018

उन्हें कह दो भरम ये सच नहीं है

Me With My Heart
हमारे पास यारों कुछ नही है 
उन्हें जो चाहिए सचमुच नहीं है 

वो कहती हैं उन्हें मैं देखता हूँ
उन्हें कह दो भरम ये सच नहीं है 

बहुत से लोग अब भी सो रहे हैं 
कोई हमदर्द या रक्षक नही है 


24/09/2018

हिजड़े जनम लिए हैं हिन्दोस्तान में

Neel
आती नहीं है नींद उन्हें इस मकान में 
वो घर बनाने जा रहे हैं आसमान में 

गैरों से कभी हमको मुहब्बत नही हुई 
अपना कोई नही था मेरा इस जहान में 

कैसे भला पूरी हों मनोकामनाएँँ आज 
सेल्फी सहित हैं लोग अब पूजा - अज़ान में

लोगों में जिसे खोजता रहा मैं आज तक 
वो सच सही दिखा मुझे जाकर श्मशान में

डर - डर के जिए जा रही हैं नारियाँँ यहाँ
हिजड़े जनम लिए हैं हिन्दोस्तान में 

22/09/2018

शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा


Shraddha
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, है जन्मदिन तुम्हारा 

ऐसे प्रगति का परचम लहराओ प्यारा - प्यारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा 

डरना नही किसी से , न भयभीत कभी हो 
जिस राह पे बढे़ तू बस जीत तेरी हो 
कठिनाइयों मेंं बढ़ना है कर्मदिन तुम्हारा 

शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा 
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, है जन्मदिन तुम्हारा 

तुम जो भी हो जैसे भी हो मुझको भले लगे
सब नेक आदमी हों जो भी तुम्हें मिलें
इन्सानियत को पढ़ना है मर्मदिन तुम्हारा 

शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा 
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, है जन्मदिन तुम्हारा 

खुशियाँ बटोर लो सब , उल्लास मनाओ 
आशीष लो बड़ो से छोटों को सिखाओ 
करना भजन जरा सा है धर्मदिन तुम्हारा 

शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा 
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, है जन्मदिन तुम्हारा 
ऐसे प्रगति का परचम लहराओ प्यारा - प्यारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा 

पंख नहीं कतरो मुझको उड़ जाने दो

Nandiny Y
पंख नहीं कतरो मुझको उड़ जाने दो
भइया मुझको सपनों से जुड़ जाने दो

जितनी कठिनाई आएँगी सह लूंगी मैं
हवा तेज बहनें दो संग - संग बह लूंगी मैं

रोकों मत मुझको सबसे लड़ जाने दो

सबपे वार करूंगी सबको देखूंगी मैं
उठकर - गिरना गिरकर - उठना सीखूंगी मैं

मुझको ऊँँचे पर्वत पर चढ़ जाने दो

जग को दिया दिखाऊँँ जग रौशन कर जाऊँँ
किसी के सपनों का मैं घर - आँँगन बन जाऊँँ

ऐसे ही इन राहों पे बढ़ जाने दो

पंख नहीं कतरो मुझको उड़ जाने दो
भइया मुझको सपनों से जुड़ जाने दो

कुछ खोना पड़ेगा तुम्हें कुछ पाने कि खातिर

Neel
कुछ खोना पड़ेगा तुम्हें कुछ पाने कि खातिर
दुनिया को दिखा सच उन्हें समझाने कि खातिर


इतना नहीं अमीर कि खुशियाँँ तुझे मिले
खुशियाँँ तुझे मिले कि ये दुनिया तुझे मिले

तुमको मैं साथ रखता हूँँ जी पाने कि खातिर

दुख में दिखे हैं लोग न जाने क्यूं इस कदर
मिलना - बिछड़ना सत्य है जीवन है इक सफर

ऐसे न जनम ले यहाँँ मर जाने कि खातिर

ये लोग एक हों करें इक - दूजे का सहयोग
जब तक रहूँँ, जहाँँ रहूँँ, हंसते ही रहें लोग

जीवन मिला है खुशियों को फ़ैलाने कि खातिर

पागल हूँँ मैं मूरख नहीं आता है मुझे कुछ
जादू दिखा कोई के चमक जाऊँँ मैं सचमुच

तुम साथ रहो मन मेरा बहलाने कि खातिर

कुछ खोना पड़ेगा तुम्हें कुछ पाने कि खातिर

दुनिया को दिखा सच उन्हें समझाने कि खातिर
कुछ खोना पड़ेगा तुम्हें कुछ पाने कि खातिर

20/09/2018

मुहब्बत है , किसी के बाप की जागीर थोड़ी है

Neel

जफ़र कोई नहीं ,ग़ालिब यहाँ अब मीर थोड़ी हैं
जो उसनें लिख रखी उतनी मेरी तकदीर थोड़ी है

खुले दिल से सभी के सामने भर - भर लुटाऊँगा
मुहब्बत है , किसी के बाप की जागीर थोड़ी है

हुआ है क्या तुम्हें क्यों आजकल दहशत में दिखते हो
उठाया लेखनी हूँ ये कोई शमशीर थोड़ी है

तुम्हें बदला करूँ इसकी कभी नौबत नहीं आती
हमारे दिल में मूरत है ,कोई तस्वीर थोड़ी है

बहुत ही ख़ूबसूरत हैं इन्हें काजल लगा के रख
तेरी आँखें समन्दर हैं ये खञ्जर ,तीर थोड़ी हैं

मेरी बहना बनाकर रेशमी धागा मुझे बोली
बँधा लो ये कवच है कोई ये जंजीर थोड़ी है

भरम को छोड़ दे अपने कयासों को बचाकर रख
महज़ तू " नील " है शहरूख़ या रणवीर थोड़ी है 

किसी माँ बाप के सर बेटियाँ भारी नहीं होती

Daughters Day

मुहब्बत में तुम्हारे गर अदाकारी नहीं होती
सही कहता हूँ हम दोनों में यूँ यारी नहीं होती

इशक के नाम पर बकवास करते लोग अक्सर हैं
मुहब्बत की तनिक उनमें समझदारी नहीं होती

नहीं छेड़ो युँही इन माँओं बहनों प्रेमिकाओं को
हमारे घर की हैं इज्ज़त ये सरकारी नहीं होती

सुनो मारो नहीं इनको जनम लेने से पहले तुम
किसी माँ बाप के सर बेटियाँ भारी नहीं होती

छुपाकर बेटियों को मैं रखूँ कातिल जमाने से
मगर मजबूर हूँ ऐसी भी अलमारी नहीं होती

सुबह उठकर मेरी दादी निकलती फूल चुनने को
अहद !मेरे जमाने में तो फुलवारी नहीं होती 

16/09/2018

छोड़कर तुमको नहीं जाऊँगा मैं उस पार बहना

Stop Rape

छोड़कर तुमको नहीं जाऊँगा मैं उस पार बहना
वहसियों से भर गया है ये भरा संसार बहना

यातनायें जो मिलेंगीं हम सहेंगें साथ में
पर नहीं होंगे अकेले हम जियेंगें साथ में
हों भले दो - चार रोटी उसमें भी सूखी सही
भूख थोड़ी तो मिटेगी एक दिन भूखी सही

भूख में जीना कठिन पर ,छोड़ना दुश्वार बहना

कंपकपांता हूँ ,अकेले भेजकर तुमको सदा
प्रार्थना करता हूँ मैं नित, हों नहीं हम तुम जुदा
क्या कभी डरते नहीं दिखती नहीं मूरत उन्हें
क्या कभी दिखती नहीं मासूम सी सूरत उन्हें

कौन किस पल क्या करेगा किसका क्या आचार बहना

मर मिटूँगा छोड़कर तुम यूँ चली जाओगी तो
जिन्दगी की रौशनी तुम यूँ मिटा जाओगी तो
प्यार से होती लड़ाई पास जब रहता हूँ मैं
ये कलाई सूनी रह जाँएगी सच कहता हूँ मैं

व्यर्थ हो जायेगा ये रक्षा का शुभ त्यौहार बहना

इस धरा रखते कदम ही खा गये वहसी उसे
एक छोटी सी परी थी ले गये रहसि उसे
और फिर क्या - क्या हुआ मैं कह नहीं पाऊँगा सब
खून मेरा खौलता है याद आ जाती है जब

सोंच भी सकता नहीं मैं क्रूर वो व्यापार बहना

शब्द से मैं क्या कहूँगा वो घनी पीड़ा मगर
शून्य हो जाता हूँ  मैं आँसू निकलते फूटकर
सोंचता हूँ कौन से स्वातंत्र्य हैं हमको मिले
पूँछता हूँ कौन से संस्कार में हैं हम पले

ये वही भारत जहाँ पलते बहुत संस्कार बहना

छोड़कर तुमको नहीं जाऊँगा मैं उस पार बहना
वहसियों से भर गया है ये भरा संसार बहना

  

डरना छोड़ो, लड़ना सीखो


Salutations

जीवन की हर विषम परिस्थिति में
प्यारे कुछ करना सीखो ,
डरना छोड़ो, लड़ना सीखो

एक - एक कर ख़त्म हुए सब
जहाँ से जो थे गये वहाँ सब
आग लगे या पत्थर बरसें
तूफानों में बढ़ना सीखो

जीवन की हर ........

मन को सदा जिताकर रखो
इन्द्रिय को समझाकर रखो
जितनी ऊँची रहे चढ़ाई
उस चोटी पे चढ़ना सीखो

जीवन की हर ........

अपनों को समझाते जाओ
ग़ैरों को अपनाते जाओ
अभिमानी आदत छोड़ो अब
ज़रा मुहब्बत करना सीखो

जीवन की हर ........

आओ युवा शक्तियों आओ
जीवन में अनुशासन लाओ
भारत को इक नई दिशा दें
उस साँचे में ढ़लना सीखो

जीवन की हर विषम परिस्थिति में
प्यारे कुछ करना सीखो ,
डरना छोड़ो, लड़ना सीखो






15/09/2018

तुमको आगे आना होगा


जहाँ कहीं मन रोंके तुमको
तुमको उसे मनाना होगा

जीवन की हर कठिनाई में
तुमको आगे आना होगा

जहाँ शराबों और शबाबों में
मदमस्त युवा हो जाएँ
जहाँ गली ,चौराहे नुक्क्ड़ का
हर खेल जुआ हो जाए

ऐसे वर्तमान को स्वामी
दिशा दिखाने आना होगा

जहाँ कहीं मन ........

बढ़ो अकेले ,साथ न हो जब
रुको मनन , चिन्तन के ख़ातिर
अंधेरों में दीप जलाओ
मिटते अन्धकार हैं आख़िर

उठो , बढ़ो इन लोगों से अब
तुमको देश बचाना होगा

जहाँ कहीं मन.........

होगा ये जग रौशन तुमसे
ऐसी सोंच बनाकर रखो
धीरे - धीरे तजो बुराई
अच्छाई अपनाकर रखो

ऐसे ही इस जीवन को कुछ
आत्मबोध सिखलाना होगा

जहाँ कहीं मन रोंके तुमको
तुमको उसे मनाना होगा

जीवन की हर कठिनाई में
तुमको आगे आना होगा

07/09/2018

राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

Neel

नही कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

जब से मेरा जन्म हुआ है
व्यक्त हूँ मैं, अव्यक्त नही हूँ

मुझे हर जगह भेद दिखे है
सुखद - दुखद परिवेश दिखे है
यथाशक्ति सब देखूँ - समझूँ
किसी का अन्धा भक्त नही हूँ

नही कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

रक्षक , कृषक , गरीबों का हूँ
इस धरती भारत माँ का हूँ
मरते हुए उन्हीं देवों की
साँस बनूँ मैं रक्त नही हूँ

नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

भूत - प्रेत चण्डाल के जैसे
है मन महाकाल के जैसे
मुझसे इतना नही डरो तुम
इतना भी मैं सख़्त नहीं हूँ

नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

खुद को मुझ तक लाकर देखो
अपना मुझे बनाकर देखो
जीवन अर्पित कर दूँगा बस
बैठा हूँ मैं , मैं पस्त नही हूँ

नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

जब से मेरा जन्म हुआ है
व्यक्त हूँ मैं , अव्यक्त नही हूँ ।

06/09/2018

नज़र कैसे मिलाऊँ मैं

Give Me Right Path...

मेरे अन्दर छुपा है क्या
तुम्हें कैसे दिखाऊँ मैं

नज़र के सामने हो तुम
नज़र कैसे मिलाऊँ मैं

मेरे अन्दर .......

बहुत ही सुर्ख़ - आरिज़ हैं
सुनो इस वक्त बारिश है
नही जाओ युँ ही बाहर
मेरी कुछ और साजिश है

तुझे देखूँ , तुझे सोंचूँ
तुझे खुद में ही पाऊँ मैं

मेरे अन्दर ......

हया अपनी हटाओ तुम
मुझे साक़ी पिलाओ तुम
ज़रा रुख़्सार को अपने
हमारे पास लाओ तुम

गुलाबी - होंठ से तेरे
ये लब कैसे मिलाऊँ मैं

मेरे अन्दर ......

बहुत ही खूबसूरत है  बनाया
तुमको कुदरत नें
हमारे दिल में इक हलचल
मचा रखी है क़ुर्बत नें

मेरा मन हर घड़ी कहता
तुम्हें दुल्हन बनाऊँ मैं

मेरे अन्दर ......

मेरे अन्दर छुपा है क्या
तुम्हें कैसे दिखाऊँ मैं

नज़र के सामने हो तुम
नज़र कैसे मिलाऊँ मैं 

आकाश में उड़ जाने दे

Akash & Neel

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में, उड़ जाने दे

जुड़ जाने दे जुड़ जाने
मुझको हवा संग जुड़ जाने दे

कुछ स्वप्न हैं कुछ ख्वाब हैं
हर पल यहाँ इक आप हैं
इस राह में बेचैन हूँ
उस राह में मुड़ जाने दे ....

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में , उड़ जाने दे

कर दे मुझे आजाद तू
न कर मुझे बर्बाद तू
वो मञ्जिलें हैं , मञ्जिलें
मुझको उधर बढ़ जाने दे

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में, उड़ जाने दे

है लक्ष्य बस मेरा यही
तू साथ दे सब है सही
लम्बा सफर ऊँची डगर
हर हाल में चढ़ जाने दे

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में उड़ जाने दे

जुड़ जाने दे जुड़ जाने दे
मुझको हवा संग जुड़ जाने दे


03/09/2018

लड़कियाँ जन्नत की कोई हूर थोड़ी हैं


छोड़ दे ऐसे नशे मजबूर थोड़ी है 
आ गई दिल्ली, बहुत अब दूर थोड़ी है 

फूँकना मत ये जवानी इस नशे की आग में 
लड़कियाँ जन्नत की कोई हूर थोड़ी हैं 

हर घड़ी बस तुम विवश हो ये कहाँ की बात है 
इस जमाने में यही दस्तूर थोड़ी है 

उसको गर होगी मुहब्बत आएगी वो दौड़कर 
हैं महज़ नखरे , कोई मजबूर थोड़ी है 

हमको भी उसकी अदाएँ देखकर अच्छी लगी 
पर उसी के दायरे में चूर थोड़ी हैं 

तुम कोई जारा नही न वीर कोई मैं रहा 
छोड़ दे तू इस अहद मशहूर थोड़ी हैं 

भग गये वो राह में हमको अकेले छोड़कर 
ये मेरी शुरुआत थी भरपूर थोड़ी है 

01/09/2018

किसे अपना कहूँ कहूँ किसे पराया मैं


किसे अपना कहूँ कहूँ किसे पराया मैं
दूर वो ही रहे जिनको करीब पाया मैं

उन्हें पसन्द है लोगों से खेलना शायद
यही धोखा हुआ अपनों को ही अपनाया मैं

हृदय - दहक उठा है दिल में शोले फूटे हैं
किसी ने आग लगाई या खुद जलाया मैं

उसे मंजूर ही नही थी मुहब्बत मेरी
मैं ही पागल था जो यारों अलख जगाया मैं

मैंने चाहा कि चलो मार दूँ मैं भी ठोकर
गया शराब पी दौलत सभी लुटाया मैं

नशा कहाँ है उस शराब में जो उसमें है
खुद को भूला नही उसको कहाँ भुलाया मैं

30/08/2018

तू जीत गई मैं हार गया


तू जीत गई मैं हार गया 

अब आजा मेरे आँगन में 
            वर्ना मेरा संसार गया ।  तू जीत ...
      
     दो दिल की बात समझना था 
    मुझको जीवन में भरना था 
मैंने तुमको अपनाया है 
    दिल के अन्दर ही पाया है 
      मैं खुद को भूलना चाहा पर 
     न दिल से तेरा प्यार गया ।

       तू जीत गई मैं हार गया -2 

   दिल के दरवाजों पे है तू 
    मन सपनों, ख्वाबों में है तू 
तेरी बाँहों की जन्नत में 
खुद को पाऊँ मैं मन्नत में 
यारा इक तेरे जाने से 
मेरा प्यारा - परिवार गया ।

तू जीत गई मैं हार गया - 2 

हर माह तुम्हारे होने से 
मुझको सावन से लगते थे 
पलकों पे बैठाकर तुमको 
मेरे दिन पावन लगते थे 
तुम आ जाओ इस जीवन में 
मैंने ये जीवन वार दिया ।

तू जीत गई मैं हार गया - 2 
उड़ के आजा इस आँगन में 
वर्ना मेरा संसार गया ।

तू जीत गई मैं हार गया ।

क्लेशों में

प्रियतम नें अलगाव लिखा है खत में और संदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

मानव देखा जाता है अब रंग रुपों और वेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

देखता हूँ मैं जब जिसको सब रहते हैं आवेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

खेतों में है आग लगी जीते हैं कुछ अवशेषों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

ज्ञान अथाह भले ही हो नौकरी नही है रेसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

लोग स्वयं का मान बेंच देते हैं रुपयों - पैसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में 

25/08/2018

रक्षाबंधन


मेरी बहना , मेरी बहना , मेरी बहना तू - 2
साथ दूँगा जिन्दगी भर याद रखना तू ।।

तेरे दम पर जिन्दगी हंसकर गुज़रती है
तू रहे जो साथ ये सजती - सँवरती है
हौंसलों में पर लगा आकाश रहना तू ।।

मेरी बहना , मेरी बहना , मेरी बहना तू - 2

रेशमी - धागों का कैसे कर्ज चुकताऊँ
तेरे चेहरे की हंसी वाज़िब सदा पाऊँ
जो भी चाहे, जब कभी भी आके कहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू

एक माँ से हम नही पर एक माँ से हैं
जिस्म दो हैं पर कसम से एक जाँ से हैं
यूँ किसी मद्धम पवन सी संग बहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू

ख्वाहिशें हैं छीनकर खाने की संग रोटी
क्या हैं ये सोना हो या हीरा हो या मोती
मेरे जीवन का अनोखा एक गहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू - 2
साथ दूँगा जिन्दगी भर याद रखना तू
मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू ।।







23/08/2018

खुदा खैर करे


इतनी मीठी तेरी पुकार खुदा खैर करे
लौट आए वो बरकरार खुदा खैर करे

इतनी भोली सी है नादान - सादगी उसकी
सादगी में बसा खुमार खुदा खैर करे

मुंतज़िर था मैं जिस वख़त का उसी को लेकर
सामने आ गया है यार खुदा खैर करे

आँख मिलती रही हर रोज़ हम मिले ही नही
बीच में उफ्फ ये संसार खुदा खैर करे

उसके लफ्ज़ों से शहद गिरती रही शामो - सहर
भा गया मुझको वो रुख़्सार खुदा खैर करे 

18/08/2018

मानव हो तो मानव का सम्मान करो



मानवता थोड़ी भी हो तो दान करो
हे ईश्वर! हम लोगों का कल्याण करो

हम सब हैं नादान नही मालुम हमको
बच जाएँ ये जान ज़रा वरदान करो

रोते और बिलखते बच्चे दिखते हैं
आँखें खोलो ईश्वर! इनका ध्यान करो

अपने लोगों का जीवन खतरे में है
जागो यारों पूजा और अज़ान करो

भाषाओं को लेकर वैर नही पालो
मानव हो तो मानव का सम्मान करो

जीवन में सुख - दुःख हर इक पे आते हैं
हर पल लोगों में रहकर कुछ काम करो

प्यार - मुहब्बत से ही धरती चलती है
कुछ सीखो जीवन में कुछ आयाम करो

वो अंधा , पागल है, बहरा, गूँगा है
यारों हाँथ बढ़ाओ न अभिमान करो

सबको रहने, खाने - पीने का सुख हो
ऐसा ही कुछ दिग्विजयी अभियान करो

केरला के हालात देखकर यहाँ के लोगों को देखकर बहुत ही परेशान हूँ
कहने को बहुत कुछ कह सकता हूँ पर ये भाषणबाजी का वक्त नही है
ये वक्त है साथ देने का , मदद करने का और अपनों को बचाने का तो मैं आप सभी से ये उम्मीद करता हूँ कि Please As Much As Possible Donate प्रिय भाइयों , बहनों , मित्रों गुरुजनों और स्वजनों मैं आप सभी से विनम्र - निवेदन करता हूँ जितना हो सके उतना ही मदद करें पर करें जरूर आपको अगर पैसे Donate करने हैं तो Please आप खुलकर कहें हम आपको Valid Account देंगे जहाँ आप अपनी तरफ से इन भाइयों बहनों माताओं की सहायता कर सकें ।

Please Contact - 9645668581 - Nischal Prakash
                              9009228090 - Harsh Agrawal
                              8573934590 - Neelendra Shukla
                              9304184366 - Aaditya Raja
                

10/08/2018

गीत

Pic Credit - Shiksha Mishra 
कर्म करते चल मुसाफिर कर्म करते चल - 2
सोच ले कुछ धर्म अपना शर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर  ......

सोच मत फल के लिए
जो फल मिले या न
भज ले ईश्वर को ज़रा
ये कल मिले या न

जो मिले हैं ग्रन्थ उनका मर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......

दान दे थोड़ा भजन कर
और निजचिन्तन
क्यों बना है ? क्या करेगा ?
इसपे कुछ मन्थन

धर्म से गद्दी तू अपनी गर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......

छोड़ने में तू सतत प्रेरित
हो राग - द्वेष
और अभिवर्धन करे सम्पन्न
हो यह देश

त्याग दे तू क्रोध खुद को नर्म (नम्र) करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर .......

क्या पता ये जिन्दगी
फिर से मिले या न
क्या पता ये कर्मभूमि
फिर मिले या न

दूर कर खुद की कमी कुछ धर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर कर्म करते चल -2

सोच ले कुछ धर्म अपना शर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर  ...... कर्म करते चल ।।

09/08/2018

एक ही सच है हमारी जिन्दगी का


ठोकरें खाते रहे हर वक्त लेकिन
होशियारी अब तलक आई नही है

दूरियाँ कुछ यूँ हुई इस जिन्दगी में
लग रहा है पास परछाई नही है

जब कभी ये मन मेरा रोता है जीभर
चुप कराने को कोई भाई नही है

एक ही सच है हमारी जिन्दगी में
मौत वो जो अब तलक आई नही है 

18/07/2018

सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है



सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है
कहाँ चल दिये खुद को हमसे मिलाकर

शहर अजनबी सा ये हमको लगे है
कहाँ चल दिये साथी हमें आज़मा कर

कहाँ तुम चले से गये हो बता दो
दिखाओ नही प्यार अपना जता दो
इबादत तुम्हारी सदा है मेरे संग
कहाँ आ गया तुमको अपना बनाकर

ज़िन्दगी ये तेरे बिन सिमट सी गई है
मैं सच कह रहा यारा , मिट सी गई है
मुकम्मल बयाँ थी तुम्हारी वो बातें
ये क्या कर दिया तुमनें सपने सजाकर

तड़पता मेरा मन तुम्हारे बिना है
कि आओगे कब तुम दिनों-दिन गिना है
बहुत दिन सोयी पड़ी थी ये आँखें
ये क्या कर दिया तुमनें इनको जगाकर

सुनहरा सफर था, सुनहरी थी राहें
सुनहरा था जीवन , सुनहरी वो बाँहें
नज़ारे बदलते गये ज़िन्दगी के -
ये क्या कर दिया तुमनें नज़रें चुराकर

@नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

09/06/2018

क्या करना

Poem 

कपड़ों का बाजार बनाकर क्या करना
जीवन को किरदार बनाकर क्या करना
हम भी जी लेंगें मुर्दों की दुनिया में
फिर झूठी सरकार बनाकर क्या करना

घर का मालिक देख रहा मरते भाई
ये पिद्दी सरदार बनाकर क्या करना

बच जाएँ माँ ,बहनें तब तो बात बनें
अथवा ये आचार बनाकर क्या करना

मैं पागल हूँ, अच्छा हूँ, मैं ज़िन्दा हूँ
झूठा - मूठा प्यार बनाकर क्या करना

एक रहे कोई पर जीवन भर अपना
गैरों का संसार बनाकर क्या करना

साँसें , नब्ज़, हवा गर्मी से व्याकुल हैं
ऐसे अँखियाँ चार मिलाकर क्या करना

जिस घर की दहलीज मुझे घुसने न दे
ऐसे घर परिवार बनाकर क्या करना

18/05/2018

मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं



वही अब दूर जाने लग गये हैं 
हमें अनहद रुलाने लग गये हैं 

जवानी भी अभी देखा नही मैं 
मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं 

बहुत दिन बाद आया गाँव अपने 
कि शायद इक ज़माने लग गये हैं 

मैं जिनके संग अक्सर खेलता था अँख - मिचौली 
वही आँखें चुराने लग गये हैं 

बहुत ज्ञानी हैं वो, ध्यानी हैं वो हर शास्त्र पढ़कर 
मुझे पागल बुलाने लग गये हैं 

जियेंगे साथ हम ये जिंदगी वादे किये थे 
मेरी मय्यत सजाने लग गये हैं 

हमारी जिन्दगी पावन हुई इन दोस्तों से 
मुझे अपना बनाने लग गये हैं 

बहुत ही क्रोध आता था उन्हें तब देखकर मुझको 
वही अब गीत गाने लग गये हैं 


जो आया है उसका जाना स्वाभाविक है

Farewell Pictures Of Varun Sir 
जीवन में सुख - दुःख का आना स्वाभाविक है 
जीवन को हर पल समझाना स्वाभाविक है 

जीवन के हर पहलू पर सब साथ न होंगे
जो आया है उसका जाना स्वाभाविक है 

गुरु ईश्वर हैं, मात - पिता हैं, भाई - बन्धु 
इन सबमें भी खुद को पाना स्वाभाविक है 

भावुक - हृदय हमेशा बस रोना ही सीखा 
आँखों में आँसू का आना स्वाभाविक है 

जीवन में टकराते हैं कुछ प्यार भरे पल 
उन सब में इस पल का आना स्वाभाविक है 

हम संसार बदलने वाले बच्चे सारे 
हम सबका यूँ उड़ते जाना स्वाभाविक है 

इक प्यारे शिक्षक से यारों दूरी होना 
ऐसे में मन का घबराना स्वाभाविक है 


जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएँ वरुन सर आप यूँ ऊँचाइयाँ छूते रहें 
और जीवन को एक प्रोफेसर की भाँति नही अपितु एक शिक्षक की तरह जीते रहें जैसे हम सभी के लिए यहाँ थे आप ईश्वर से यही प्रार्थना है मेरी 
आपके असंख्य शिष्य हों जो आपको हम सभी से भी ज्यादा प्यार दे सकें और आपका जीवन खुशियों से भरा रहे ।

04/05/2018

आदमी ही थे वो ऐसे खुदा नही होते




मौज़ में गालियाँ दो - चार निकल जाती हैं
हमारे यार हैं अच्छे खफ़ा नही होते

रोंकना था उन्हें, बाँधा था पैर में उसके
इश्क फरियाद है " दो दिल " जुदा नही होते

वो जो करते रहे दिन - रात हुकूमत तुम पर
आदमी ही थे वो ऐसे खुदा नही होते

मौज़ - प्यार 

01/05/2018

कविताएँ


कविताएँ जब तक हैं तब तक हम तुम हैं
कविताओं के बाद घना अंधेरा है
कविताएँ ही शाम हृदय के आँगन की
कविताएँ ही खिलता हुआ सवेरा हैं

कविताओं में जीवन है अपनापन है
कविताएँ ही होने का एहसास तेरे
कविताओं को देखो गहन समंदर हैं
कविताएँ हैं तो तुम अक्सर पास मेरे

कविताओं में एक गज़ब की खुश्बू है
कविताएँ हैं जीवन की महबूब मेरी
कविताओं के बिन जीवन है व्यर्थ मेरा
कविताएँ हैं सर्द माह में धूप मेरी

कविताएँ हैं सपना इक , इक ख्वाब मेरा
कविताओं में रहना जीवन जीना है
कविताएँ ही उन्नति का संदेश यहाँ
कविताएँ ही जीवनभँवर सफीना हैं

कविताओं में प्यार सदा देखा मैंने
कविताएँ हैं सम्बल, हैं जज़्बात मेरे
कविताएँ मेरे जीवन की दुल्हन हैं
कविताएँ ही सुख दुःख में हैं साथ मेरे

24/04/2018

मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है

मुझे मालूम है इतना तुम्हें मुझसे मोहब्बत है
मुझे तेरी जरूरत है , तुम्हें मेरी जरूरत है

नज़र के सामने रहती है हो तुम मेरे खुदा होकर
मिलन अपना मुकम्मल हो खुदा से ये इबादत है

न जाने कौन सी मिट्टी से उसका तन बनाया है
मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है

कभी माँ उसमें दिखती है कभी वो प्रेमिका दिखती
कभी पत्नी नज़र आती अजब सी एक मूरत है

नही चाहा कभी कुछ पल की खुशियाँ आज तक तुमसे
तुम्हीं बोलो ये झूठा है या फिर कह दो हकीकत है

मुनासिब है मुझे हर पल तुम्हारे देह का पाना
छुपे बिन रूह तक पहुँचूँ सुनो ऐ " नील " आदत है


20/04/2018

"नील" तुम्हारा फैन हुआ

नील तुम्हारा फैन हुआ 
जब जब पायल छनकी तेरी , दिल को मेरे चैन हुआ
वो आँखों से तीर चलाना " नील " तुम्हारा फैन हुआ

इन आँखों में वो ही सूरत , वो हम दोनों का जीवन
बहुत दूर सब भेज दिये हैं , मिलना तुमसे बैन हुआ

पंक्षी भी अब कम दिखते हैं , पवन तुम्हीं छूकर आओ
कहना उनसे चाँद निहारें , मैं बिल्कुल बेचैन हुआ

नींद नही आती अब मुझको , न दिन में, न रातों में
इन्तज़ार में तेरे हमदम ! मैं खुद अपना नैन हुआ

काली , घनी , सुहानी रातें , उसमें ये तेरी यादें
आँखों से क्या बारिश करना , जीवन मेरा रैन 

18/04/2018

जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम

Jindagi Na Milegi Dodara 

सूरज की आँखों में आँखें डालो तुम
सारे सपने आँखों में यूँ पालो तुम

ब्रह्मा का सिंहासन सारा हिल जाए
उठो शेर, अब तो दहाड़ कर बोलो तुम

क्यूँ डरते हो जीवन को आसाँ समझो
बंद पड़े सारे दरवाजे खोलो तुम

इक माँ है, इक बहना है, इक तात तेरे
इक भाई की आँख के आँसू ले लो तुम

जीवन को खुश रखना है , इक काम करो
सारे रिस्ते हँसते हुए सम्हालो तुम

मुझपे रंग चढ़ाना है तो कुछ सोचो
प्यार का रंग पहले अच्छे से घोलो तुम

तुमपे जीवन लुटा दिया हूँ अब क्या दूँ
दे दूँगा बस हँसते - हँसते बोलो तुम

सारे दर्द निकल कर बाहर होंगे तब
जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम

मैं पागल हूँ , मुझे छोड़ उसको देखो
"नील" कभी तो गज़ल मेरी भी गा लो तुम

नोट : यहाँ तात सिर्फ पिता के लिए प्रयोग किया गया है ।

16/04/2018

चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं

Clicked By Me ....
    

चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं
                       तुम्हारे साथ हूँ हरदम ऐ हमदम! इस जहाँ में मैं

                       मुझे तुम यूँ भुलाकर तो नही जी पाओगे
                       जहाँ तेरी नज़र जाएँगी आऊँगा वहाँ पे मैं

                       तुम्हारी सादगी पर है निछावर ज़िन्दगी मेरी
                       मुझे अपना बनाओ तुम महक जाऊँ फिज़ा में मैं

                       मेरा घर - द्वार कुछ न है , तुम्हारा प्यार है सबकुछ
                       लिपट कर आ मिलो हमसे कहो आऊँ कहाँ पे मैं

                       नही जाना बताये बिन मुझे तनहा यहाँ करके
                       मुझे भी साथ ही रखना जहाँ तुम हो वहाँ पे मैं

                       करूँगा क्या ज़माने में अकेले दूर मैं तुमसे
                       कि घुट - घुटकर मरूँगा,और क्या होगा,यहाँ पे मैं

                       मैं अपने ज़िन्दगी की डोर तेरे हाँथ में रखकर
                       मिटूँगा इस कदर यारा न आऊँगा यहाँ पे मैं 

रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...