18/07/2018

सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है

सफर जिन्दगी का ये कटता नही है 

सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है
कहाँ चल दिये खुद को हमसे मिलाकर

शहर अजनबी सा ये हमको लगे है
कहाँ चल दिये साथी हमें आज़मा कर

कहाँ तुम चले से गये हो बता दो
दिखाओ नही प्यार अपना जता दो
इबादत तुम्हारी सदा है मेरे संग
कहाँ आ गया तुमको अपना बनाकर

ज़िन्दगी ये तेरे बिन सिमट सी गई है
मैं सच कह रहा यारा , मिट सी गई है
मुकम्मल बयाँ थी तुम्हारी वो बातें
ये क्या कर दिया तुमनें सपने सजाकर

तड़पता मेरा मन तुम्हारे बिना है
कि आओगे कब तुम दिनों-दिन गिना है
बहुत दिन सोयी पड़ी थी ये आँखें
ये क्या कर दिया तुमनें इनको जगाकर

सुनहरा सफर था, सुनहरी थी राहें
सुनहरा था जीवन , सुनहरी वो बाँहें
नज़ारे बदलते गये ज़िन्दगी के -
ये क्या कर दिया तुमनें नज़रें चुराकर

@नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

09/06/2018

क्या करना

Poem 

कपड़ों का बाजार बनाकर क्या करना
जीवन को किरदार बनाकर क्या करना
हम भी जी लेंगें मुर्दों की दुनिया में
फिर झूठी सरकार बनाकर क्या करना

घर का मालिक देख रहा मरते भाई
ये पिद्दी सरदार बनाकर क्या करना

बच जाएँ माँ ,बहनें तब तो बात बनें
अथवा ये आचार बनाकर क्या करना

मैं पागल हूँ, अच्छा हूँ, मैं ज़िन्दा हूँ
झूठा - मूठा प्यार बनाकर क्या करना

एक रहे कोई पर जीवन भर अपना
गैरों का संसार बनाकर क्या करना

साँसें , नब्ज़, हवा गर्मी से व्याकुल हैं
ऐसे अँखियाँ चार मिलाकर क्या करना

जिस घर की दहलीज मुझे घुसने न दे
ऐसे घर परिवार बनाकर क्या करना

18/05/2018

मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं



वही अब दूर जाने लग गये हैं 
हमें अनहद रुलाने लग गये हैं 

जवानी भी अभी देखा नही मैं 
मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं 

बहुत दिन बाद आया गाँव अपने 
कि शायद इक ज़माने लग गये हैं 

मैं जिनके संग अक्सर खेलता था अँख - मिचौली 
वही आँखें चुराने लग गये हैं 

बहुत ज्ञानी हैं वो, ध्यानी हैं वो हर शास्त्र पढ़कर 
मुझे पागल बुलाने लग गये हैं 

जियेंगे साथ हम ये जिंदगी वादे किये थे 
मेरी मय्यत सजाने लग गये हैं 

हमारी जिन्दगी पावन हुई इन दोस्तों से 
मुझे अपना बनाने लग गये हैं 

बहुत ही क्रोध आता था उन्हें तब देखकर मुझको 
वही अब गीत गाने लग गये हैं 


जो आया है उसका जाना स्वाभाविक है

Farewell Pictures Of Varun Sir 
जीवन में सुख - दुःख का आना स्वाभाविक है 
जीवन को हर पल समझाना स्वाभाविक है 

जीवन के हर पहलू पर सब साथ न होंगे
जो आया है उसका जाना स्वाभाविक है 

गुरु ईश्वर हैं, मात - पिता हैं, भाई - बन्धु 
इन सबमें भी खुद को पाना स्वाभाविक है 

भावुक - हृदय हमेशा बस रोना ही सीखा 
आँखों में आँसू का आना स्वाभाविक है 

जीवन में टकराते हैं कुछ प्यार भरे पल 
उन सब में इस पल का आना स्वाभाविक है 

हम संसार बदलने वाले बच्चे सारे 
हम सबका यूँ उड़ते जाना स्वाभाविक है 

इक प्यारे शिक्षक से यारों दूरी होना 
ऐसे में मन का घबराना स्वाभाविक है 


जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएँ वरुन सर आप यूँ ऊँचाइयाँ छूते रहें 
और जीवन को एक प्रोफेसर की भाँति नही अपितु एक शिक्षक की तरह जीते रहें जैसे हम सभी के लिए यहाँ थे आप ईश्वर से यही प्रार्थना है मेरी 
आपके असंख्य शिष्य हों जो आपको हम सभी से भी ज्यादा प्यार दे सकें और आपका जीवन खुशियों से भरा रहे ।

04/05/2018

आदमी ही थे वो ऐसे खुदा नही होते




मौज़ में गालियाँ दो - चार निकल जाती हैं
हमारे यार हैं अच्छे खफ़ा नही होते

रोंकना था उन्हें, बाँधा था पैर में उसके
इश्क फरियाद है " दो दिल " जुदा नही होते

वो जो करते रहे दिन - रात हुकूमत तुम पर
आदमी ही थे वो ऐसे खुदा नही होते

मौज़ - प्यार 

01/05/2018

कविताएँ


कविताएँ जब तक हैं तब तक हम तुम हैं
कविताओं के बाद घना अंधेरा है
कविताएँ ही शाम हृदय के आँगन की
कविताएँ ही खिलता हुआ सवेरा हैं

कविताओं में जीवन है अपनापन है
कविताएँ ही होने का एहसास तेरे
कविताओं को देखो गहन समंदर हैं
कविताएँ हैं तो तुम अक्सर पास मेरे

कविताओं में एक गज़ब की खुश्बू है
कविताएँ हैं जीवन की महबूब मेरी
कविताओं के बिन जीवन है व्यर्थ मेरा
कविताएँ हैं सर्द माह में धूप मेरी

कविताएँ हैं सपना इक , इक ख्वाब मेरा
कविताओं में रहना जीवन जीना है
कविताएँ ही उन्नति का संदेश यहाँ
कविताएँ ही जीवनभँवर सफीना हैं

कविताओं में प्यार सदा देखा मैंने
कविताएँ हैं सम्बल, हैं जज़्बात मेरे
कविताएँ मेरे जीवन की दुल्हन हैं
कविताएँ ही सुख दुःख में हैं साथ मेरे

24/04/2018

मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है

मुझे मालूम है इतना तुम्हें मुझसे मोहब्बत है
मुझे तेरी जरूरत है , तुम्हें मेरी जरूरत है

नज़र के सामने रहती है हो तुम मेरे खुदा होकर
मिलन अपना मुकम्मल हो खुदा से ये इबादत है

न जाने कौन सी मिट्टी से उसका तन बनाया है
मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है

कभी माँ उसमें दिखती है कभी वो प्रेमिका दिखती
कभी पत्नी नज़र आती अजब सी एक मूरत है

नही चाहा कभी कुछ पल की खुशियाँ आज तक तुमसे
तुम्हीं बोलो ये झूठा है या फिर कह दो हकीकत है

मुनासिब है मुझे हर पल तुम्हारे देह का पाना
छुपे बिन रूह तक पहुँचूँ सुनो ऐ " नील " आदत है


20/04/2018

"नील" तुम्हारा फैन हुआ

नील तुम्हारा फैन हुआ 
जब जब पायल छनकी तेरी , दिल को मेरे चैन हुआ
वो आँखों से तीर चलाना " नील " तुम्हारा फैन हुआ

इन आँखों में वो ही सूरत , वो हम दोनों का जीवन
बहुत दूर सब भेज दिये हैं , मिलना तुमसे बैन हुआ

पंक्षी भी अब कम दिखते हैं , पवन तुम्हीं छूकर आओ
कहना उनसे चाँद निहारें , मैं बिल्कुल बेचैन हुआ

नींद नही आती अब मुझको , न दिन में, न रातों में
इन्तज़ार में तेरे हमदम ! मैं खुद अपना नैन हुआ

काली , घनी , सुहानी रातें , उसमें ये तेरी यादें
आँखों से क्या बारिश करना , जीवन मेरा रैन 

18/04/2018

जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम

Jindagi Na Milegi Dodara 

सूरज की आँखों में आँखें डालो तुम
सारे सपने आँखों में यूँ पालो तुम

ब्रह्मा का सिंहासन सारा हिल जाए
उठो शेर, अब तो दहाड़ कर बोलो तुम

क्यूँ डरते हो जीवन को आसाँ समझो
बंद पड़े सारे दरवाजे खोलो तुम

इक माँ है, इक बहना है, इक तात तेरे
इक भाई की आँख के आँसू ले लो तुम

जीवन को खुश रखना है , इक काम करो
सारे रिस्ते हँसते हुए सम्हालो तुम

मुझपे रंग चढ़ाना है तो कुछ सोचो
प्यार का रंग पहले अच्छे से घोलो तुम

तुमपे जीवन लुटा दिया हूँ अब क्या दूँ
दे दूँगा बस हँसते - हँसते बोलो तुम

सारे दर्द निकल कर बाहर होंगे तब
जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम

मैं पागल हूँ , मुझे छोड़ उसको देखो
"नील" कभी तो गज़ल मेरी भी गा लो तुम

नोट : यहाँ तात सिर्फ पिता के लिए प्रयोग किया गया है ।

16/04/2018

चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं

Clicked By Me ....
    

चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं
                       तुम्हारे साथ हूँ हरदम ऐ हमदम! इस जहाँ में मैं

                       मुझे तुम यूँ भुलाकर तो नही जी पाओगे
                       जहाँ तेरी नज़र जाएँगी आऊँगा वहाँ पे मैं

                       तुम्हारी सादगी पर है निछावर ज़िन्दगी मेरी
                       मुझे अपना बनाओ तुम महक जाऊँ फिज़ा में मैं

                       मेरा घर - द्वार कुछ न है , तुम्हारा प्यार है सबकुछ
                       लिपट कर आ मिलो हमसे कहो आऊँ कहाँ पे मैं

                       नही जाना बताये बिन मुझे तनहा यहाँ करके
                       मुझे भी साथ ही रखना जहाँ तुम हो वहाँ पे मैं

                       करूँगा क्या ज़माने में अकेले दूर मैं तुमसे
                       कि घुट - घुटकर मरूँगा,और क्या होगा,यहाँ पे मैं

                       मैं अपने ज़िन्दगी की डोर तेरे हाँथ में रखकर
                       मिटूँगा इस कदर यारा न आऊँगा यहाँ पे मैं 

21/03/2018

मेरे अपने कुछ पसंदीदा शे'र

1. जवानी भी अभी देखा नही मैं 
     मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं 

2. कट गए दिन, कटे हैं माह, कटे वर्ष कई 
     तुम्हारी याद में ये जिन्दगी न कट जाए 

3. सियासत की नज़र हों इस तरफ भी 
     मेरे पैरों में छाले पड़ गये हैं 

4. क्या कहूँ मैं दिन पे दिन हूँ बढ़ रहा 
      जिन्दगी सैलाब होती जा रही 

5. ये जरूरी नही तुम मिलो बस मुझे 
     पर जरूरी है के याद आती रहो

6. बगावत के उसूलों में मुझे जलकर नही मरना 
    मुझे हिन्दू भी प्यारा है मुझे मुस्लिम भी प्यारा है 

7. मुझे तिरछी नज़र से देखना यूँ 
     कहो क्या कत्ल करना चाहती हो 

8. तुम्हारी नींद क्यों उड़ने लगी है 
     तुम्हें हमसे मुहब्बत हो गई क्या 

9. मुझे परिवार पे है गर्व अपने 
    मेरे घर में अभी भी एकता है 

10. मैं हट कर बैठने वाला नही हूँ 
      लडूँगा जब तलक है जान मुझमें 

11. इन्हें कैसे निकालूँ तुम बताओ 
      मेरी आँखों में सपने गड़ गये हैं 

12. फलक से चाँद-तारे तोड़ लाऊँ 
       महज़ इस हाँथ में तुम हाँथ रख दो 

13. जमीं क्या, आसमाँ बौना लगेगा 
       तुम्हारा साथ गर मिल जाए मुझको 

14. मेरे दिल से अन्धेरा हट गया है 
      कोई दीपक जला गया शायद 

15. नही कुछ और मेरी जिन्दगी में 
       महज़ तुम और हैं यादें तुम्हारी 

16. तुम्हारे सामने यारा सम्हल पाता नही हूँ ,
      न जाने कौन से जन्मों के हैं सम्बन्ध गहरे

17. मेरे सुख दुःख सभी कुछ बँट गये हैं  
       तुम्हारा साथ जब से पा लिया हूँ 

18. हमारे दिल के अन्दर चाँद है इक 
       तेरा चेहरा वहीं देखा है मैंने

19. गज़ल से लबलबाते होंठ तेरे 
      मिले अनुमति मुझे कुछ पाठ कर लूँ

20. तुम्हारी नाक पे वो कील है या
       कोई तारा युँ ही बैठा हुआ है

21. मैं ये दिल रोंक पाऊँ आज कैसे 
      तुम्हारी रूह ने दस्तक दिया है

22. केसरी हम, हरा तुम उड़ाते रहो 
       यूँ ही भारत बनाते रहें उम्रभर

23. पूरा घर देखने जब गया गाँव को
       सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी

24. हमारे पास रखती हो बड़े एहसास रखती हो
      मुझे तुम साँस देने के तज़ुर्बे - खास रखती हो

25. हार कर मत बैठना तुम ज़िन्दगी की दौड़ में
       युद्ध का परिणाम आता है सदा लड़ने के बाद

26. बहुत खामोश हैं लफ्ज़ - ए - बयाँ उनकी अदाएँ पर
      उतरती यूँ दिल - ओ - दरिया में हैं शाहिल नही दिखता

27. एक निर्णय ले लिए फिर क्या फ़रक पड़ता खुदा
         या तो जन्नत राह होगी या तो दोजख का सफर

28. अपनी भी कुछ ख्वाहिशें हैं अपने भी कुछ स्वप्न हैं
         छोड़कर इनको बताओ आप ही जाऊँ किधर 

29. इस दिलो - दीमाग में क्या कर गई
       ज़िक्र होता है तेरा हर बात में

30. मैं फ़लक से भी तोड़ लाऊँ चाँद - तारों को
        कभी - कभी मेरा जो साथ तुम निभाया करो

31. ख़ुद ब ख़ुद किस्मत बदल जायेगी बस
       ख़ुद के सपनों में ही खुद को देख तू

32. धूप में यूँ ही भटकता रहा सपनें लेकर
       छाँव की चाह में अक्सर तेरा आँचल आया

33. इक संसार मेरा था बचपन की यादों का
       उसमें तेरा झूम के आना याद अभी है

34. इस देश की रक्षा में अगर प्राण भी जाँए
       मिट जाऊँ सर कलम हो शहादत के वास्ते

35. तेरी गोदी में माँ के आँचल का सुख
         दिखता प्रेम अपार तुम्हारे चेहरे पर

36.  जी करता है जन्मदिवस के अवसर पर
        लिख दूँ सारा प्यार तुम्हारे चेहरे पर ।।

37. मैं मन्दिर ,मस्जिद गिरिजाघर को क्यों जाऊँ
      खुद को मेरा भगवान बना सकती हो क्या 

38. माँ की दुवाएँ साथ हैं, बहनों की इबादत
       गुस्से भरे पिता हैं मगर प्यार बहुत है

39. बहनें हों उन्मुक्त हमारी जितना चाहें पढ़ पाएँ,
       बाबू जी को समझाने की कोशिश करता हूँ

40. चाचा चाची,मामा मामी,भाई भौजी सब
       सारे रिस्तों को पाने की कोशिश करता हूँ

41. आज सारे धर्म का बस चाहता हूँ इल्म मैं
       कौन ऐसा मंत्र बोलूँ मुक्त कर दूँ जाप से

42. कई दिन, दोपहर हैं साल बीते
       गये बचपन से उनको आज देखे 

43. यह प्रकृति,यह भोग,वैभव शान्त यह वातावरण
       यह धरा पूरी तुम्हारी इस धरा को जीत लो 

44. राजधानी देश की रखे रहो दिल्ली मगर,
      राजसिंहासन पे अब मजदूर होने चाहिए

45. अधूरी जिन्दगी मैं ढूढता हूँ
       कहाँ ये जिन्दगी कुर्बान कर दी 

46. दबे  पैरों से रेतों पर  चली क्यों
       मेरी जन्नत !अभी  तो  दोपहर है 

47. मेरे होंठों के मद्धम हैं दबे से
       तुम्हारी उँगलियाँ हैं या अधर है 

48. इधर तनहा ,अकेला हूँ सदा खुश
       तेरी परछाइयाँ जो हमसफ़र हैं

49. मैं झुका न हूँ , झुकूँ न चापलूसों की तरह ,
        फिर नही इस देश को आशाभरी सरकार देना

50. बड़ा भोला सा था उस वक़्त जब तुम सीख देती थी  ,
        किसी से प्राप्त वो शिक्षा - सयानी याद आती है

51. तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ 
      मैं लिखता हूँ कि मैं ज़िन्दा हूँ ये तुम जान पाओ 

धन्यवाद 
नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

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सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है

सफर जिन्दगी का ये कटता नही है  सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है कहाँ चल दिये खुद को हमसे मिलाकर शहर अजनबी सा ये हमको लगे है कहाँ चल ...