29/03/2019
28/03/2019
Massage From Soldier
![]() |
| Indian - Army |
सना लतपत लहू से लाल होकर के लड़ूँगा,
जब तलक मुझमें ज़रा भी साँस होगी
जब तलक धरती बचा पाऊँगा मैं उन कायरों से और उनकी दोगली रणनीति जो है खोखली
जिसमें महज़ है युद्ध बाकी कुछ नहीं है।
मैं तिरंगे में लिपटकर सामने जब भी कभी आऊँ मेरी माँ
है कसम तुमको हमारे इस शहीद - ए - जिस्म से निकले हुए एक - एक कतरों की,
कभी भी देखकर या सोचकर मुझको नहीं रोना मेरी माँ
इस शहीद - ए - जिस्म को आशीष देना तुम बहुत ही गर्व से कहना यही कि
फिर हमारी कोख में आना मेरे बेटे
इसी धरती इसी झण्डे की ख़ातिर।
तीन रंगों से सजाता देश को मेरे,
भरे सन्देश देता विश्व को सारे हवा से डोलता, गुलज़ार होता है सभी के सामने मन यूँ लहकता है
कि जैसे खेत में फसलें, कि जैसे वृक्ष वन उपवन नदी तालाब झरने और जैसे
गाँव की ठण्डी हवाएँ छू रही हों जिस्म में घुसकर मेरे अन्तःकरण, मन, और चिन्तन को
बनाती और ही पावन,
कि जिनसे सोचता हूँ मैं हमेशा मुल्क की आबोहवा किस ओर है किस ओर जाना चाहिए इसको।
और भी माओं के बेटे आज मेरे साथ ही इस युद्ध में मारे गए हैं
और भी बहनें सदा रोएँगी, भइयादूज रक्षासूत्र के पावन दिनों में
और सारी पत्नियाँ जो थी सुहागन अब तलक वो आज से विधवा बनेंगी
तुम हमारे नाम की जो चूड़ियाँ पहनी हो उनको तोड़ देना,
होंठ की लाली, महावर पैर का पायल, लगे उन आँख का काजल, सजी बिंदी लगा सिन्दूर
अपना तुम मिटा लेना।
हमारी याद के बादल उमड़ते हों तो उनको भूलकर, अपनी सजाओ जिन्दगी फिर से
तुम्हें देखूँगा ऊपर से हमेशा खुश रहूँगा, देखकर तुमको
की अब मैं फिर कभी उस देह में न आ सकूँगा और ना ही इस जनम में मिल सकूँगा
ये मेरा दुर्भाग्य है पर क्या करूँ, सौभाग्य था कि मैं मरा अपने वतन के आन की ख़ातिर।
और उनकी बेटियों से बोलना पापा तुम्हारे कह रहे थे, जिस तरह हँसते हुए कुर्बान मैं होता गया हर बार,
इससे सीख लें वो भी उन्हें लड़ना है दुश्मन से, उन्हें बढ़ना है तन - मन से,
उन्हें है जिंदगी की हर परिस्थितियों का डट कर सामना करना, परिस्थितियाँ अभी तक सामने आई नहीं हैं।
और बेटे जो नशे में हैं उन्हें कहना की अब तो खोलकर आँखें ज़रा देखें कहाँ था देश ये अब तक
कहाँ अब जा रहा है।
सौंपता हूँ मैं उन्हें इस देश की इज्जत सरेबाज़ार इसको तुम नहीं नीलाम कर देना मेरे बेटों,
तुम्हारे हाँथ में है एक अच्छा चित्र उसको तुम सजा लेना ज़रा सा और भी सुंदर, सुनहरा चित्र वो
दिखने लगेगा।
हाँ मुझे मालूम है पापा हमारे हैं बहुत गम्भीर फिर भी देखकर ये शव, कहीं पर भाग जायेँगे अकेले में
बहुत ही फूटकर रोएँगे, उनकी आँख से आँसू नहीं सागर बहेगा।
और ऑंखे लाल होंगी यूँ कि जैसे आग में तपकर अभी निकली हुई हैं, जो निगलना चाहती हैं
उस भरे आतंक को, जो आये दिन नदियाँ बहाता खून की, जो घूमते बेख़ौफ़ कुछ भी कर रहे हैं ,
मारते हैं फौजियों के साथ इस निर्दोष जनता को समझ आता नहीं कुछ क्या करूँ इस मुल्क की खातिर अभी मैं
आज फिर से उठ रही चिंगारियाँ हैं जो अभी, वो शांत हो जाएँगी, मुद्दे दूसरे उठने लगेंगे।
आज फिर से खून उबलेगा सभी का कुछ दिनों तक का मुकम्मल एक ड्रामा फिर चलेगा।
आज फिर से फेसबुक व्हाट्स अप के स्टेटस बनेंगे और फिर रिप डालकर रोते हुए से कुछ इमोजि
टाँक देंगे कि लगे दुःख का चरम है आ गया सर आज उनके।
आज फिर से मन्त्रियों की बोलती यूँ बंद होगी कि उन्हें जैसे किसी भी साँप ने सूँघा हुआ है,
आज वो घर से, सुनहली कार या संसद भवन से तो नहीं निकलेंगे बाहर ,
या चलो आ भी गए तो सांत्वना देंगे नहीं तो झूठ बोलेंगे, कई वादे करेंगे जो अभी तक कर रहे हैं और भी आगे सदा करते रहेंगे।
और मेरे देश की जनता करेगी रोड पे धरना, जलेंगे आठ दस पुतले, भरी संख्या में कैंडिल मार्च होगा
और चौराहों फिर से देशभक्ति से भरे नारे लगेंगे, देशभक्ति की सही पहचान शायद अब यहाँ इस
देश में नारों में छिपकर रह गई है
और मेरे भाइयों - बहनों हमारे देश के, मेरे लिए रोना नहीं तुम, मैं अभी तक हूँ तुम्हारे बीच में हाज़िर ज़रा देखो
मुझे खुद में, मुझे महसूस करना रूह में अपने वहीं मेरा भवन है
ये हमारे ग्रन्थ कहते हैं कभी भी आत्मा मारती नहीं है।
!!हर हर महादेव !!
26/03/2019
तुम मेरे जीवन से हो
![]() |
| Sarvesh Tripathi "Bhaiya" - ( Great Poet ) |
कैसे कह दूँ कैसे हो
तुम भी बिल्कुल ऐसे हो
देख नहीं पाता जिनको
ईश्वर अल्लाह जैसे हो
मैं कौड़ी हूँ पहले की
तुम तो अब के पैसे हो
मुझको देखी बोल पड़ी
जो सोची थी वैसे हो
सत्ता कहाँ तुम्हारी है
पूरे गगनकुसुम से हो
खाओ खटिया तोड़ो बस
तुम इस घर के भैंसे हो
मैं जीवन हूँ, जीवन का
तुम मेरे जीवन से हो
22/03/2019
मुझको देखोगी या मेरा पागलपन
![]() |
| Neel |
हँसती जाओ नहीं करो यूँ आँखेँ नम
इस लम्हें को जी लो भूलो सारे गम
जीवन को किरदारों में बाँटा हूँ मैं
मुझको देखोगी या मेरा पागलपन
पापा बैठ किनारे घर के रोते हैं
बेटे संग शायद फिर आज हुई अनबन
घर से बाहर निकल रहा हूँ पढ़ने को
मम्मी कहती है बेटा न जा लन्दन
बहना को जब भी देखूँ दिल रोता है
बहना के हाँथो में न दिखते कंगन
भाई को समझा - समझा कर हार गया
भाई केवल बातों में है नंबर वन
जब भी ऐसी दशा देखता हूँ घर की
बाहर खुश दिखता हूँ, अंदर रोता मन
तुम्हारे इस शहर से जो गुज़र जाऊँगा मैं
![]() |
| Cover Page Of My First Poetry Book. |
जिधर होगा इशारा बस उधर जाऊँगा मैं
यही सच है अगर ऐसे सुधर जाऊँगा मैं
भुलाना यूँ मुझे जैसे क़यामत आ पड़ी हो
तुम्हारे इस शहर से जो गुज़र जाऊँगा मैं
हुकूमत की जमी होगी जहाँ न मैं रहूँगा
भले राजा रहो तुम पर मुकर जाऊँगा मैं
इबादत मैं करूँगा सिर्फ़ इस हिन्दोस्ताँ की
तुम्हारे सामने बनकर कहर आऊँगा मैं
मुहब्बत आज़माना है तुम्हें लो आज़मा लो
मुहब्बत की जमीं पर फ़िर नहीं आऊँगा मैं
हुकूमत की जमी होगी जहाँ न मैं रहूँगा
भले राजा रहो तुम पर मुकर जाऊँगा मैं
इबादत मैं करूँगा सिर्फ़ इस हिन्दोस्ताँ की
तुम्हारे सामने बनकर कहर आऊँगा मैं
मुहब्बत आज़माना है तुम्हें लो आज़मा लो
मुहब्बत की जमीं पर फ़िर नहीं आऊँगा मैं
21/03/2019
बाहर निकलो तुम्हें लगाएंगे होली
![]() |
| Happy Holi, World Poetry day & Birthday of Aaiyappa |
रंगों का त्यौहार मनाएंगे होली
गुझिया पापड़ भाँग पिलाएंगे होली
धरती से आकाश तलक रंग बिखरेगा
जहाँ रहेंगें वहीं मनाएंगे होली
इंद्रधनुष भी सात रंग में डूबा है
तुमको भी हम आज डुबाएंगे होली
कम से कम इस दिन सब भूले - बिसरेंगे
दुश्मन को भी गले लगाएंगे होली
रंगों से है प्रेम, स्नेह सौहार्द बढ़े
सबको इसका पाठ पढ़ाएंगे होली
महादेव से खेल लिए जब रंग यारों
औरों से हम क्या शर्माएंगे होली
नील तुम्हारे लिए खड़ा दरवाजे पर
बाहर निकलो तुम्हें लगाएंगे होली
17/03/2019
नील किसको मना रहे हो तुम
![]() |
| Neel |
आज रूठे से लग रहे हो तुम
बात दिल की न कर रहे हो तुम
मात देने की बात करते हो
शर्त किससे लगा रहे हो तुम
याद आती है तेरी सुबह से
आज इतना सता रहे हो तुम
टूट जाएगा दिल मेरा सुन लो
प्यार झूठा जता रहे हो तुम
जानता हूँ मैं, ये जहाँ क्या है
इत्तला क्या सुना रहे हो तुम
डूबते हो महज़ तसव्वुर में
जिन्दगी यूँ बिता रहे हो तुम
आदमी है, ज़रा सा पागल है
दिल्लगी यूँ निभा रहे हो तुम
बात करते हो मार देने की
और उसके खुदा रहे हो तुम
मुफ्त में है नहीं जहर यारों
कौन से देश आ रहे हो तुम
एक ही है दिया मेरे घर में
और उसको बुझा रहे हो तुम
बोल तो, कौन किसकी सुनता है
नील किसको मना रहे हो तुम
डूबते हो महज़ तसव्वुर में
जिन्दगी यूँ बिता रहे हो तुम
आदमी है, ज़रा सा पागल है
दिल्लगी यूँ निभा रहे हो तुम
बात करते हो मार देने की
और उसके खुदा रहे हो तुम
मुफ्त में है नहीं जहर यारों
कौन से देश आ रहे हो तुम
एक ही है दिया मेरे घर में
और उसको बुझा रहे हो तुम
बोल तो, कौन किसकी सुनता है
नील किसको मना रहे हो तुम
15/03/2019
कोई भी आये मग़र इस क़दर न आएगा
कोई भी आये मग़र इस क़दर न आएगा
आप जलवों की नुमाइश में खड़े मत होना
आपका रूप ही लोगों पे कहर ढायेगा
प्यार की चाह वहाँ है, जहाँ नहीं नफ़रत
निशाँ ए प्यार का होठों पे असर आएगा
आज फिर से ये चमकदार जहाँ देखूँगा
आज बोला है वो, मेरे ही शहर आएगा
चाह सारी बताओ आज मुहब्बत से तुम
जहाँ कहोगी वहाँ जन्मदिन मनाएगा
आज ये मुल्क़ तमाशा भी मुझे बोले तो
आज दिल खोल के ये नील गुनगुनाएगा
14/03/2019
कहाँ दूध के धुले हुये हो तुम यारा
![]() |
| The Habitat |
बस थोड़ा सा खुले हुये हो तुम यारा
कहाँ सभी संग अभी घुले हो तुम यारा
बात मुकम्मल है तेरी, मैं दोषी हूँ
कहाँ दूध के धुले हुये हो तुम यारा
तुम्हीं कहो विश्वास भला कैसे कर लूँ
दुश्मन से भी मिले हुये हो तुम यारा
अभी उम्र जो ढ़ली लगे सिखलाने तुम
यौवन में क्या नहीं किये हो तुम यारा
जो भी देना है दे दो, या जाने दो
मुझको मेरे देश भगाओ तुम यारा
सबकुछ रहने पर भी सदा परीशाँ हो
मुझको जीना नहीं सिखाओ तुम यारा
12/03/2019
काहे भउजी दुबरानि अहा
काहे भउजी दुबरानि अहा
बाबा - आजी घर से बाहर
मम्मी - पापा के नंबर है
न जाने ई जुग कउन आय
नीचे आवत अब अम्बर है
जब से यैह घर मा आय गयू
तब से नखरा तगड़ा होय गा
भाइन मा अलगा बाँटी भै
पूरे घर मा झगड़ा होइ गा
हम रोय रहिन ई दशा देख
अपने घर के दुर्दशा देख
हम सोंचे तू अच्छी बाट्यू
लेकिन तू तौ शैतानि अहा
मंतर तू कउन चलाय दिहू
भइया हमरे अन्जान अहैं
जब से वै पाय गये तोहका
तब से ओनहू पगलान अहैं
जीवन खुशहाल रहा सबके
अब देखा यही खिन्न होइगा
बाबू पापा दादा चाचा के
सपना छिन्न - भिन्न होइगा
ना जाने श्राप कहाँ मिलिगा
आचरण कबो न शुद्ध भवा
मम्मिउ तौ कबो पतोह रहीं
उनसे तौ नाही जुद्ध भवा
तू सुधर गई होत्यू लेकिन
भइया के तू भगवानि अहा
घर चाय - समोसा चलत रहै
पिच्चर पै पिच्चर चलत रहै
घुस के कमरा मा बैठि अहा
काहे एतना तू ऐंठि अहा
तू कामचोर एक नंबर के
बोलत बाट्यू ठण्डी बाटै
भइया तौ अहैं गुलामी मा
उनसे हरकी झण्डी बाटै
लबराय गये भइया हमरे
दिनभर कोठरी मा घुसा रहैं
आँखी मा सरम नहीं रहिगै
मेहरी संग बेड पै परा रहैं
जीवन भर साथ रहै का है
काहे एतना मेहरानि अहा
पापा तौ बहुत बखानें पर
बिटिया न वह लायक निकरी
दस बजे उठैं गुंगुआत रहैं
वै बाथरूम गायक निकरीं
एकौ गुण अबै देखान नहीं
भइया एतनी चोबर बाटीं
मम्मी बोलीं गुणवानि अहैं
लेकिन यै गुणगोबर बाटीं
हमरेव सपूत बेशर्म अहैं
पापा दुवरा पै आय कहिन
मम्मी से कहत - कहत पापा
आँखी से लोर बहाय दिहिन
केहू कुछ बोलत नहीं अहै
यह बरे बड़ी लहरानि अहा
बाबा जब से यह देखे हैं
तब से एकदम गुस्सान अहैं
भइया - भउजी का डाट दिहिन
बोलें घर के कुछ शानि अहै
भउजी का डाट पची नाही
कुछ बोल परी उल्टा - सीधा
गुस्सा से चेहरा लाल भवा
एतना ज्यादा ई मन खीझा
लेकिन खुद का हम शांत कीन
खुद का ओहसे अंजान कीन
लेकिन पापा से नहीं रहा
पापा दुई थप्पण दै बैठें
घर मा दिनभर हुड़दंग मचा
भइया घूमें ऐठें - ऐठें
केवल ई तौ शुरुआत आय
अबहीं से तू घबरानि अहा
दूसरे दिन सब सामान लिहिन
घरवाली संग ससुराल गये
सारा पइसा खाली होइगा
सारी - सरहज संग मॉल गये
बीबी जेतना आदेश करैं
उतनै भइया कइ पावत थीं
बस एक इशारा कॉफी है
वै दौड़े - दौड़े आवथीं
जैसे कुछ हप्ता बीत नहीं
मम्मी घर पै रोवै लागीं
बड़का बेटवा न बात करिस
वै सारी रात रहीं जागी
जैसे मोबाइल हाँथ लाग
झट से वै फोन मिलाय दिहीं
बिन गलती के मॉफी माँगी
आपन सब दुखड़ा गाय दिहीं
मम्मिउ के बात नहीं मानें
तू उनके गीता - ज्ञानि अहा
काहे भउजी दुबरानि अहा
घर चाय - समोसा चलत रहै
पिच्चर पै पिच्चर चलत रहै
घुस के कमरा मा बैठि अहा
काहे एतना तू ऐंठि अहा
तू कामचोर एक नंबर के
बोलत बाट्यू ठण्डी बाटै
भइया तौ अहैं गुलामी मा
उनसे हरकी झण्डी बाटै
लबराय गये भइया हमरे
दिनभर कोठरी मा घुसा रहैं
आँखी मा सरम नहीं रहिगै
मेहरी संग बेड पै परा रहैं
जीवन भर साथ रहै का है
काहे एतना मेहरानि अहा
पापा तौ बहुत बखानें पर
बिटिया न वह लायक निकरी
दस बजे उठैं गुंगुआत रहैं
वै बाथरूम गायक निकरीं
एकौ गुण अबै देखान नहीं
भइया एतनी चोबर बाटीं
मम्मी बोलीं गुणवानि अहैं
लेकिन यै गुणगोबर बाटीं
हमरेव सपूत बेशर्म अहैं
पापा दुवरा पै आय कहिन
मम्मी से कहत - कहत पापा
आँखी से लोर बहाय दिहिन
केहू कुछ बोलत नहीं अहै
यह बरे बड़ी लहरानि अहा
बाबा जब से यह देखे हैं
तब से एकदम गुस्सान अहैं
भइया - भउजी का डाट दिहिन
बोलें घर के कुछ शानि अहै
भउजी का डाट पची नाही
कुछ बोल परी उल्टा - सीधा
गुस्सा से चेहरा लाल भवा
एतना ज्यादा ई मन खीझा
लेकिन खुद का हम शांत कीन
खुद का ओहसे अंजान कीन
लेकिन पापा से नहीं रहा
पापा दुई थप्पण दै बैठें
घर मा दिनभर हुड़दंग मचा
भइया घूमें ऐठें - ऐठें
केवल ई तौ शुरुआत आय
अबहीं से तू घबरानि अहा
दूसरे दिन सब सामान लिहिन
घरवाली संग ससुराल गये
सारा पइसा खाली होइगा
सारी - सरहज संग मॉल गये
बीबी जेतना आदेश करैं
उतनै भइया कइ पावत थीं
बस एक इशारा कॉफी है
वै दौड़े - दौड़े आवथीं
जैसे कुछ हप्ता बीत नहीं
मम्मी घर पै रोवै लागीं
बड़का बेटवा न बात करिस
वै सारी रात रहीं जागी
जैसे मोबाइल हाँथ लाग
झट से वै फोन मिलाय दिहीं
बिन गलती के मॉफी माँगी
आपन सब दुखड़ा गाय दिहीं
मम्मिउ के बात नहीं मानें
तू उनके गीता - ज्ञानि अहा
काहे भउजी दुबरानि अहा
ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के क्लेशों में
मानव देखा जाता है अब रंग, रूपों, और वेशों में
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में
देखता हूँ मैं जब जिसको सब रहते हैं आवेशों में
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में
खेतों में है आग लगी जीते हैं कुछ अवशेषों में
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में
ज्ञान अथाह भले ही हो नौकरी नहीं है रेसों में
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में
लोग स्वयं का मान बेंच देते हैं रुपयों - पैसों में
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में
ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में
यह मेरी पहली कविता है जब मैं रणवीर संस्कृत विद्यालय ( BHU,कमच्छा, वाराणसी ) में बारहवीं का छात्र था।
मैंने इसे " सुशील सुमन सर " की विदाई के उपलक्ष्य में गुरुदक्षिणा के लिए लिखा था, मुझे अवसर भी मिला अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का और मैंने ये कविता सुनाई।
सुशील सुमन सर नें कविता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कविता बहुत ही अच्छी है पर इसकी दूसरी लाइन का प्रयोग बार - बार हो रहा है इसलिए थोड़ी कमज़ोर हो रही है बाकी कविता में विभिन्न विषय हैं, कविता में बहुत सारा सन्देश है, इन्हीं संदेशों के साथ ही मुझे तुममें बहुत सारी उम्मीदें दिख रही हैं ।
सुशील सुमन सर नें उस दिन बातों को कहने के क्रम में एक बहुत ही ख़ूबसूरत बात बोली थी, जिसका प्रभाव मेरे ऊपर हमेशा रहा है उनके लफ़्ज़ थे कि " विचार किसी के बाप की जागीर नहीं हैं जो कुछ ही लोगों के पास रहें विचार कोई भी दे सकता है और जरूरी नहीं की हमेशा जो बड़ा बोले वही सही हो, छोटे भी सही हो सकते हैं और होते हैं ।"
बड़े दिनों बाद आज ये कविता मुझे मिली मैंने सोचा इससे पहले कि ये कहीं इधर - उधर हो इससे जुड़ी यादें और ये कविता आप सभी के साथ साझा ही कर लेता हूँ।
सुशील सुमन सर को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ और मेरा प्रणाम।
11/03/2019
तुम्हारा मुल्क दहशत खा गया क्या
कहो कोई कहीं से आ रहा क्या
सुनो तो ग़ौर से क्या कह रहा है
मेरे घर का पता बतला रहा क्या
गए थे आबरू से खेलने तुम
सुनाओ तो सही महंगा पड़ा क्या
बहाया है बहुत ही ख़ून मेरा
बता जन्नत में गद्दी पा गया क्या
खिला जैसे निकल कर आ गई तुम
ज़रा देखो कमल मुरझा गया क्या
रुका हनुमान सा लंका समझकर
तुम्हारा मुल्क दहशत खा गया क्या
बहाया है बहुत ही ख़ून मेरा
बता जन्नत में गद्दी पा गया क्या
खिला जैसे निकल कर आ गई तुम
ज़रा देखो कमल मुरझा गया क्या
रुका हनुमान सा लंका समझकर
तुम्हारा मुल्क दहशत खा गया क्या
तिरंगा झूमता है आसमाँ में
मेरा भाई इसे लहरा गया क्या
तुम संग नैय्या पार करूँगा
![]() |
| Before - 5 year |
इक तेरा चेहरा देखूँगा
जीवन - भर दीदार करूँगा
बहुत हुई ऐय्याशी यारा
अब इक तुमसे प्यार करूँगा
डूब रहा था मैं दलदल में
देख नहीं पाता ये कल मैं
पापों से मैं फूल चुका हूँ
गुजरा कल मैं भूल चुका हूँ
सबकुछ तुम्हें बताऊँगा मैं
तनिक नहीं व्यभिचार करूँगा
तुमको पाकर हर्षित हूँ मैं
जीवन गतिमय विकसित हूँ मैं
अन्धकार हटता जाता है
अब प्रकाश तेरा आता है
जीवन है रंगीन हमारा
और इसे गुलज़ार करूँगा
संकल्पित मन, वचन, कर्म से
अपनाता हूँ एक धर्म से
वही धर्म जो प्यार सिखाये
मानवीय - संस्कार सिखाए
इसी सादगी में रहकर के
तुम संग नैय्या पार करूँगा
10/03/2019
07/03/2019
गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ
![]() |
| Happy Women's Day |
ना जाने दो अब और कहीं
गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ
बहना रक्षा की डोरी है
मैं उसका भइयादूज हूँ माँ
बचपन से लेकर आज तलक
तेरा आँचल मुझको भावे
तेरी गोदी में सर रखूँ
सो जाऊँ ऐसी नींद आवे
फिर क्या है जन्नत और स्वर्ग
फिर क्या मन्दिर क्या मस्जिद है
छोटा सा बच्चा बन जाऊँ
माँ, बस मेरी इतनी जिद है
मैं तेरा अपना बेटा हूँ
ना यादों का सन्दूक हूँ माँ
बहना मेरी परछाई सी
चलती रहती आगे पीछे
थोड़ा भी डाट लगाऊँ तो
वो देखे बस ऊपर नीचे
ना मुझसे आँख मिलाती वो
रोती अन्दर भग जाती वो
फिर हँसकर वो बाहर आती
कहती है भइया भूत बनो
शंकर, भोलेबाबा, काशी के
शुद्धरूप अवधूत बनो
वो मेरी रानी गुड़िया है
मैं उसका प्यारा भूत हूँ माँ
अब रही तुम्हारी बात प्रिये
तुम मेरे जीवनसाथी हो
मैं जलता हूँ गर दीपक सा
है प्यार तेल, तुम बाती हो
इतनी सुमधुर आवाज़ तेरी
लगती है माँ की लोरी सी
जितना मन ऊपर भेजो तुम
मैं पतंग और तुम डोरी सी
हम दोनों हैं इक दूजे के
वो कोयल है मैं कूक हूँ माँ
हम दोनों कर्म करें मिलकर
वो गोली मैं बन्दूक हूँ माँ
भारत में अपनापन देखो
शबरी का दिल - दर्पण देखो
वो राम, राम गर कहे गए
सीता का पावन - मन देखो
उर्मिला बेचारी कहाँ गई
पति से वियोग उसका भी था
लक्ष्मण भटकें वन - उपवन में
कैसा दुर्योग ये उसका था
लड़कर यमराज से ले आई
प्राणों को सत्यवती जाकर
विष पी डाला सब मीरा नें
कान्हा की भक्ति में खोकर
इनकी गौरव - गाथा सम्मुख
मैं शब्दों में दो टूक हूँ माँ
अब वर्तमान इस भारत के
बारे में अनुसंधान करें
रौशन भारत करने वाली
महिलाओं का कुछ ज्ञान करें
पूरी सेना को धूल चटाने
वाली लक्ष्मीबाई थी
कल्पना उड़ी तो आसमान से
मिलकर वापस आई थी
मस्तानी पद्मावती प्रेम की
अद्भुद अमिट कहानी थी
पद्मा थी पतिव्रता यारों
मस्तानी तो दीवानी थी
सानिया और पी.वी सिंधू
मैदानों में डट जाती हैं
भारत का ध्वजा - पताका ले
सबसे ऊपर लहराती हैं
बबिता, पी. टी. ऊषा नें
अपने लक्ष्यों पे बस ध्यान दिया
इसलिए हमारे भारत नें
महिलाओं का सम्मान किया
मैं सुनो इसी वंशज का हूँ
इसलिए तेरे अनुरूप हूँ माँ
भारत में अपनापन देखो
शबरी का दिल - दर्पण देखो
वो राम, राम गर कहे गए
सीता का पावन - मन देखो
उर्मिला बेचारी कहाँ गई
पति से वियोग उसका भी था
लक्ष्मण भटकें वन - उपवन में
कैसा दुर्योग ये उसका था
लड़कर यमराज से ले आई
प्राणों को सत्यवती जाकर
विष पी डाला सब मीरा नें
कान्हा की भक्ति में खोकर
इनकी गौरव - गाथा सम्मुख
मैं शब्दों में दो टूक हूँ माँ
अब वर्तमान इस भारत के
बारे में अनुसंधान करें
रौशन भारत करने वाली
महिलाओं का कुछ ज्ञान करें
पूरी सेना को धूल चटाने
वाली लक्ष्मीबाई थी
कल्पना उड़ी तो आसमान से
मिलकर वापस आई थी
मस्तानी पद्मावती प्रेम की
अद्भुद अमिट कहानी थी
पद्मा थी पतिव्रता यारों
मस्तानी तो दीवानी थी
सानिया और पी.वी सिंधू
मैदानों में डट जाती हैं
भारत का ध्वजा - पताका ले
सबसे ऊपर लहराती हैं
बबिता, पी. टी. ऊषा नें
अपने लक्ष्यों पे बस ध्यान दिया
इसलिए हमारे भारत नें
महिलाओं का सम्मान किया
मैं सुनो इसी वंशज का हूँ
इसलिए तेरे अनुरूप हूँ माँ
ना जाने दो अब और कहीं
गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ
बहना रक्षा की डोरी है
मैं उसका भइयादूज हूँ माँ
02/03/2019
पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा
![]() |
| Rahul Gandhi Ji |
पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा
तू साठ साल न दै पाया
अब तू सबका सोना देब्या
आलू डइहिं सोना निकरी
घर मा ना इक कोना देब्या
अब तुहीं बतावा का करब्या
बुद्धि चकराति अहै तोहर
कइ ल्या बियाह दुलहिन लावा
तू मजा करा बनके सौहर
यातौ जस लरका अहा अबै
लरिकै जइसे बर्ताव करा
जेतना होय पावै कम बोला
जनता मा ना दुर्भाव भरा
निर्लज्ज बहुत होय गा बाट्या
माई के बारे मा सोचा
पूरा ई देश हँसत बाटै
कुछ जान समझ ल्या तौ बोला
अइसेन नीलाम करा इज्जत
कुछ थोर बहुत जउनै बाटै
तोहका सुन ल्या सुधरै चाही
बुध्दि कुछ बाटै की नाही
जउनै मुँह आवै नहीं कहा
चालीस - पैतालिस उमरि अहै
अब तक ना तू कुछ कइ पाया
अपनै तू क्षेत्र नहीं देख्या
केहू का न सुख दै पाया
फिर तोहसे का उम्मीद रहै
तू का कइ पउब्या भारत मा
आपन छत न सम्हार पाया
तू का कइ पउब्या हर छत मा
पहिले कुछ ट्यूसन कोंचिंग ल्या
फिर तू भाषण खातिर आया
बेटवा देख्या घर बचा रहै
घर चोर बहुत सातिर आवा
स्विस मा सब पइसा भरि आईं
भउजी फिर से लूटै आईं
लेकिन अब कहाँ लूट पउबू
सब समझ गएन बेउहार हियाँ
माई बेटवा घर वापस जा
गिर गा सारा आचार हियाँ
मेहमान नवाजी बहुत कीन
मेहमान चला रस्ता नापा
तू एक बार खोखला किहा
भारत फिर से तू ना भापा
ल्या बैग उठावा घरै बढ़ा
बस तुम्हरे दूइनौ के कारण
दद्दू कुछ बोल नहीं पायें
उनके काहे मन मोह लिहू
ओनहू नाही कुछ दइ पायें
विद्वान रहें वै बहुत मगर
उनके संगति गड़बड़ होइ गै
गद्दी पै बइठे रहें मगर
घर मलकिन तौ बंचड़ होइ गै
यह बरे कुछू न कइ पायें
सत्ता मा बस जागें सोएँ
गलती वै कउनो करे रहें
अइसेन तौ वै चुप नहीं रहें
अब जउन भवा होइगा छोड़ा
पपुआ तोहार होइ गा घोड़ा
अपने बेटवा का समझावा
मुड़वा मा कुछ बुद्धि डावा
मोदी बाबा जब डाटत थीं
चड्ढी पकड़े ऊ भागत थै
पगलाय जात है कबो - कबो
आँखी ऊ मारै लागत थै
खेलिस हरदम आइस - पाइस
ऊ अउर कुछू न कइ पाइस
बस आँख मिचौली करत रहा
बस तुम्हरे दूइनौ के कारण
दद्दू कुछ बोल नहीं पायें
उनके काहे मन मोह लिहू
ओनहू नाही कुछ दइ पायें
विद्वान रहें वै बहुत मगर
उनके संगति गड़बड़ होइ गै
गद्दी पै बइठे रहें मगर
घर मलकिन तौ बंचड़ होइ गै
यह बरे कुछू न कइ पायें
सत्ता मा बस जागें सोएँ
गलती वै कउनो करे रहें
अइसेन तौ वै चुप नहीं रहें
अब जउन भवा होइगा छोड़ा
पपुआ तोहार होइ गा घोड़ा
अपने बेटवा का समझावा
मुड़वा मा कुछ बुद्धि डावा
मोदी बाबा जब डाटत थीं
चड्ढी पकड़े ऊ भागत थै
पगलाय जात है कबो - कबो
आँखी ऊ मारै लागत थै
खेलिस हरदम आइस - पाइस
ऊ अउर कुछू न कइ पाइस
बस आँख मिचौली करत रहा
पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा
01/03/2019
तुम साथ नहीं, ये गम न हो
![]() |
| नील |
तुम साथ नहीं, ये गम न हो
पर प्यार हमारा कम न हो
जिन यादों से दुनिया देखी
उन यादों के मरहम न हों
चलती सनसनी हवाएँ हैं
पर आती नहीं दुवाएँ हैं
मैं नफ़रत की दीवारों को
तोड़ूँ सारे व्यभिचारों को
चलती सनसनी हवाएँ हैं
पर आती नहीं दुवाएँ हैं
मैं नफ़रत की दीवारों को
तोड़ूँ सारे व्यभिचारों को
ऐसा पल न हो जीवन में
तुम पास रहो हमदम न हो
तुम किसी फूल की तरह खिलो
बन धार नदी की सदा मिलो
सागर से थोड़ा प्यार करो
मैं तुम्हें भरूँ, तुम मुझे भरो
इस कदर हमारा प्यार पले
उन्मुक्त रहें बन्धन न हो
जीवन में जितने मोड़ मिले
मुझको सारे बेजोड़ मिले
मैं खुलकर ये कह सकता हूँ
सबसे दूरी सह सकता हूँ
जिससे दूरी बनती जाए
हो और कोई दुल्हन न हो
तुम किसी फूल की तरह खिलो
बन धार नदी की सदा मिलो
सागर से थोड़ा प्यार करो
मैं तुम्हें भरूँ, तुम मुझे भरो
इस कदर हमारा प्यार पले
उन्मुक्त रहें बन्धन न हो
जीवन में जितने मोड़ मिले
मुझको सारे बेजोड़ मिले
मैं खुलकर ये कह सकता हूँ
सबसे दूरी सह सकता हूँ
जिससे दूरी बनती जाए
हो और कोई दुल्हन न हो
27/02/2019
जोगी के भेष मा भोगी हैं
![]() |
| ढोंगी - बाबा |
जोगी के भेष मा भोगी हैं
खुद का वै किशन बतावथीं
रोमंटिक गाना गावत थीं
अंग्रेजी - पिक्चर वै देखैं
गोपियन का साथ देखावत थीं
पकड़ाय गएन कइयौ बाबा
देख्या नाही नम्बर आवै
पिछवाड़े पै डण्डा परिहैं
लगब्या खुद ही कूदै - फांदै
हम नहीं कुछू अब अउर सुनब
जउनै देखब हम वही कहब
सन्यासी नाहीं ढ़ोगी हैं
हाँथन मा हाँथ मिलाय रहें
चिकनी - चुपड़ी बतियाय रहें
लइकिनियौ अब पगलानि अहैं
बाबा खातिर दुबरानि अहैं
इनहू के बुद्धि मरी अहै
इनका का बोली चाड़ि अहैं
बाबा का तौ समझै चाही
उनपै समाज केतना थूकी
अब अउर कुछू ना कहि जाई
उनपै श्रद्धा न होए पाई
कामुकता के वै रोगी हैं
गोड़े पै पीठि पै डण्डा
जब परै लाग खुलगा झण्डा
सारा सन्यास उतर भागी
मूड़े पै जब सोंटा बाजी
यैह बरे अबै समझाय रहिन
दलदल छोड़ौ, गोहराय रहिन
कुछ देखौ समझौ जान लियौ
कुछ बात हमारौ मान लियौ
न कुछू बताउब, अहन निडर
बोलथिं, पूछा बहुत मगर
बोलते नाही यै घोघी हैं
गोड़े पै पीठि पै डण्डा
जब परै लाग खुलगा झण्डा
सारा सन्यास उतर भागी
मूड़े पै जब सोंटा बाजी
यैह बरे अबै समझाय रहिन
दलदल छोड़ौ, गोहराय रहिन
कुछ देखौ समझौ जान लियौ
कुछ बात हमारौ मान लियौ
न कुछू बताउब, अहन निडर
बोलथिं, पूछा बहुत मगर
बोलते नाही यै घोघी हैं
26/02/2019
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
![]() |
| Chennai - Trip |
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
मिलती हैं मुझसे आकर मैं चाहूँ मुझमें ठहरें
मैं क्या हूँ, मुझमें क्या है सबकुछ वो मुझे बताती
जब भी लहरों को सुनता हूँ अपना मुझे बनाती
मुझको मुझे मिलाती हैं वो मुझमें आकर तैरें
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
सारा जग है शोर मचाता मेरे अगल - बगल में
पर वो नहीं सुनाई देता है मुझको उस पल में
आवाजें आती हैं मुझ तक दिखे न इक भी चेहरे
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
लहरों पर लहरों को देखा साँझ हुआ मन गदगद
तिस पर सूरज की किरणें दिखती हैं सुन्दर - अद्भुद
डूब रहा था मैं खुद में वो मिलीं डुबा दी गहरे
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
मिलती हैं मुझसे आकर मैं चाहूँ मुझमें ठहरें
19/02/2019
तुम्हारे होंठ का गर आचमन कर लूँ प्रिये
![]() |
| Akanksha Ji |
कहो तो खुशनुमा अपना चमन कर लूँ प्रिये
जमीं क्या आसमाँ को भी नमन कर लूँ प्रिये
मिलेगा फल मुझे उस दिव्य चारो - धाम का
तुम्हारे होंठ का गर आचमन कर लूँ प्रिये
जुबाँ से जो बयाँ न हो सके वो खूबसूरत
तुम्हारे रूप को, तुमको सनम कर लूँ प्रिये
बहुत तड़पा चुकी हैं आप मुझसे दूर होकर
अजी अब पास भी आओ सितम कर लूँ प्रिये
रहूँ गाता तुम्हें हर वक़्त अपनी जिन्दगी में
तुम्हारे गीत को अपना भजन कर लूँ प्रिये
रहूँ संग - संग विधाता की बनाई सृष्टि में
तुम्हारे नाम अपना हर जनम कर लूँ प्रिये
17/02/2019
मृगतृष्णा से सम्बन्ध न हो
![]() |
| Akanksha Ji |
विश्वास रहे पर अंध न हो
मृगतृष्णा से सम्बन्ध न हो
जब प्रेम शाश्वत सत्य दिखे
उस पर कोई प्रतिबन्ध न हो
गतिशील बनाओ जीवन को
उन्नति के पथ पर बढ़ो सदा
इतना खुदपर विश्वास रहे
जीवन में कोई द्वंद्व न हो
जो ठान लिए वो कर गुजरें
जीवन के लक्ष्य से न मुकरें
माँ और पिता के शरण रहें
आज़ाद रहें स्वच्छंद न हों
तुम प्रेम लिखो सौ बार मगर
सामाजिक - गतिविधियाँ भी हों
भावों की हो परिपक्व - दशा
कविता हो केवल छ्न्द न हो
जो बीत गया वो जाने दो
अपनों को गले लगाने दो
जीवन में ऐसे कर्म करो
खुश्बू हों, पर दुर्गन्ध न हो
मुझपे वो चाल चले जायें
हर बार मारने को आयें
माता के भाई होने से -
मामा तो हों, पर कंस न हों
कितने भी तुम विख्यात रहो
कितना भी ज्ञान अथाह रखो
जीवन को ऐसे सरल रखो
जीवन में कोई दम्भ न हो
15/02/2019
13/02/2019
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
हमरे भइया भउजी अच्छे
उनके सबके प्यारे बच्चे
सब तोहका चाची मानत थीं
फोटू देखतै पहिचानत थीं
फोनवा पै हमसे कहत रहें
हमहू मिलबै अब चाची से
छोटकी बहिनी हमसे बोलीं
बतियाइब नवकी भाभी से
मम्मिउ तोहका अपनाय लिहीं
पहिलेन ऊ लड्डू खाय लिहीं
पापा का जइसेन खबर मिली
अँखियन के तारा होय गयू
हमरे घर मा सब अच्छे हैं
जेतना मन चाहै पड्यू - लिख्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
ना चाही हो घोड़ा, हाँथी
हमका चाही जीवनसाथी
जेहिके साथे जीवन काटब
आपन सुख - दुःख संग संग बाँटब
लड़ि मरि के खाब - खियाइब सब
सपना हम पूर कराइब सब
दुनिया वालेन के काम अहै
वै चिल्लइहैं, चिल्लाए द्या
हरदम हम तोहरे साथ रहब
उनका सबका तू जाये द्या
ई वादा है हमार तुमसे
आपन बियाह होई झम से
दुनिया केतनीउ शैतान बनै
केतनौ तुमका परशान करै
हम जउन कही बस सुनत रह्यू
छोड़िउ ना संगे - साथ बह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
तोहरौ आपन बिचार होइहैं
जे जगह - जगह पै समझइहैं
मिलके जीवन - गति बढ़त रही
सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़त रही
जेतनी उन्नति हम कइ पउबै
ओतने ऊपर तोहका लउबै
तोहका हम आपन मान लेहे
तोहका आखिर पहिचान लेहे
बस हमहीं बोली ठीक नहीं
बोला आखिर आजादि अहा
हमरे घर आवै का तोहका
अब पापा के औलादि अहा
मन मा जब जउन रहै तोहरे
कहि दिहू न ज्यादा कष्ट सह्यू
ई कउनो नहीं जरूरी है
हम जउन कही तू वही कह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
09/02/2019
का हो दादा रामबचन
![]() |
| Goolge |
का हो दादा रामबचन
मूँछ तोहारौ फरिकै लाग
देखा हम पानी मा आग
जब से बेटवा अफ़सर होइगा
भाव तोहारौ अब सर होइगा
पैसा, गाड़ी, गहना माँग्या
खाना, पीना , रहना माँग्या
समधी के इक बाल न पूछ्या
का बीतत है हाल न पूछ्या
तोहका सब स्टंडर चाही
तोहरेव बिटिया का बर चाही
सुना ध्यान से जउन कहा सब
बेटवा बेंचै जात अहा अब
बिटिया से तू लइके धन
तोहका एक सिकन्दर चाही
खुला गगन ई अम्बर चाही
कला, संस्कृति सीख्या नाही
तोहका केवल नम्बर चाही
काहे हरदम हड़कावत ह्या
काहे ओहके गरियावत ह्या
थोर से ओहके अबै जियै द्या
घूमै,टहरै, खाय पियै द्या
ज्यादा गरम करा न पारा
माना तीर बहुत तू मार् या
वहू के कुछ अभिलाषा होई
कुछू बनै के आशा होई
बेटवव के अब पढ़ ल्या मन
घर - दुवार के पता नहीं बा
बहुत फकीरी छाइ बाटै
जब आई बाबा के पेन्सन
बुवौ घरे पै धाई बाटै
जीवन नाही नरक होइ गवा
बाबौ का अब स्वरग होइ गवा
नहीं देखातै अब घर केहू
कपड़ा का अब धोवै रेहू
आँसू नाही खून चुवत है
बहुत गरीबी है, रोवत है
होली अउर दिवाली नाही
बिन पैसा घरवाली नाही
ओहके खातिर कउन चमन
पुलिस गाँव मा घुसी अहै अब
कउनो शायद चक्कर होइगा
जर - जोरू के बात करिन
दूनौ भाई मा टक्कर होइगा
मूड़ फुरौव्वल कइके राजू
दुइनौ अस्पताल मा बाटें
एक दिना मा करें लड़ाई
दुसरे दिन घर पतरी चाटें
होतै ठीक पुलिस घर धमकी
पइसा लइके ठोंकेस सोटा
बप्पा सर पै हाँथ रखे सोचैं
ई सिक्का खोंटा होइगा
नहीं बतावा ढ़ेर जतन
लागत है सठियात अहा तू
दिन पै दिन बौरात अहा तू
लरिकन के दौड़ावत बाट्या
मतलब बिना, थकावत बाट्या
ई लै आवा, ऊ लै आवा
कुछ ना कुछ तौ अबै खियावा
छिनभर मा तोहका सब चाही
नहीं बना अब एतना हाही
राम नाम तौ लिहा नही तू
दान - पुन्न कुछ किहा नहीं तू
गुस्सा नाक पै रखा नाही
बाट्या तू अब बच्चा नाही
जब देखा तानत थ्या गन
घर - दुवार के पता नहीं बा
बहुत फकीरी छाइ बाटै
जब आई बाबा के पेन्सन
बुवौ घरे पै धाई बाटै
जीवन नाही नरक होइ गवा
बाबौ का अब स्वरग होइ गवा
नहीं देखातै अब घर केहू
कपड़ा का अब धोवै रेहू
आँसू नाही खून चुवत है
बहुत गरीबी है, रोवत है
होली अउर दिवाली नाही
बिन पैसा घरवाली नाही
ओहके खातिर कउन चमन
पुलिस गाँव मा घुसी अहै अब
कउनो शायद चक्कर होइगा
जर - जोरू के बात करिन
दूनौ भाई मा टक्कर होइगा
मूड़ फुरौव्वल कइके राजू
दुइनौ अस्पताल मा बाटें
एक दिना मा करें लड़ाई
दुसरे दिन घर पतरी चाटें
होतै ठीक पुलिस घर धमकी
पइसा लइके ठोंकेस सोटा
बप्पा सर पै हाँथ रखे सोचैं
ई सिक्का खोंटा होइगा
नहीं बतावा ढ़ेर जतन
लागत है सठियात अहा तू
दिन पै दिन बौरात अहा तू
लरिकन के दौड़ावत बाट्या
मतलब बिना, थकावत बाट्या
ई लै आवा, ऊ लै आवा
कुछ ना कुछ तौ अबै खियावा
छिनभर मा तोहका सब चाही
नहीं बना अब एतना हाही
राम नाम तौ लिहा नही तू
दान - पुन्न कुछ किहा नहीं तू
गुस्सा नाक पै रखा नाही
बाट्या तू अब बच्चा नाही
जब देखा तानत थ्या गन
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ
लेकर चलना मुझे भी तू जाए जहाँ
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ
तुमको पलकों पे रखा हूँ शाम ओ सहर
दिल में उठती तरंगें हैं , उठती लहर
नीदें मेरी चुराने की क्या दूँ सज़ा
दिल की धड़कन बढ़ाती है तू आजकल
संग - संग रहना मेरे साथी तू साथ चल
रखना मुझको भी हमदम, रहना जहाँ
मैं गुज़रा हुआ ज़माना हूँ
![]() |
तुम मुझे भुला ना पाओगी
मैं किस्सा बहुत सुहाना हूँ
मैं सदा तुम्हें याद आऊँगा
मैं गुज़रा हुआ ज़माना हूँ
फिर से आओ संसार - जियें
फिर से आओ इक साथ चलें
फिर नदियों में कलकल हो
फिर से मन में कुछ हलचल हो
मुझपे थोड़ा विश्वास करो
फिर से आओ आगाज़ करो
कल तक जो साथ तुम्हारे था
देखो तो वही खज़ाना हूँ
जब तक हम दोनों संग - संग हैं
तब तक ये चाँद सितारे हैं
जब तक संगम हम दोनों का
बस तब तक ही ये प्यारे हैं
अब पास महज़ कुछ यादें हैं
जीवन की यही मुरादें हैं
फुर्सत हो तो, आ जाना तुम
मैं बन्दा वही पुराना हूँ
08/02/2019
मेरी माँ का हाँथ मेरे सर रहता है
![]() |
| From Google |
सबके सर पर इक - इक छप्पर रहता है
वो दुखिया है शायद बेघर रहता है
मैं बढ़ता हूँ इसमें नहीं अजूबा कुछ
मेरी माँ का हाँथ मेरे सर रहता है
एड़ी से चोटी तक ज़ोर लगाओ तुम
हर पंक्षी के पास सुनो पर रहता है
बाहर का माहौल बहुत ही बत्तर है
जब तक बहन नहीं आये, डर रहता है
मत घबराओ प्रिये ! तुम्हारी यादों का
इस दिल में मदमस्त - समन्दर रहता है
06/02/2019
सुना लरिकवा करिया रहि गा
![]() |
| Me With My One Of Best Brother Manu Bhai |
सुना लरिकवा करिया रहि गा
सेन्ट मार के जाए ऑफिस
फेरन - हन्डसम खूब चपोतिस
रगरेस पूरा चेहरा आपन
रोजै गरल - फ्रेंड के ख्वाहिस
तनिकौ नहीं बदल पाएस ई
जइसे रहल हौ, वइसे रहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
हीरो बनबै कहत रहा ऊ
घूमत,नाचत फिरत रहा ऊ
चक्कर मारै गली - गली के
प्यार मुहब्बत करत रहा ऊ
पप्पा बोलेन माई से के, देख
बेटवना तोहर बहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
दारू, हुक्का, चिलम लगावै
ऐय्यासी मा खूब लुटावै
कहनी - करनी मा अंतर हौ
रात - रात भर घरे न आवे
कइसे लाई वापस ओहके
नाही कउनो जरिया रहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
मारै - पीटै महतारी के
झरी लगावै ऊ गारी के
उल्टा - सीधा बकत रहत है
खात पियत है परा रहत है
तनिकौ नहीं चलै पावै अब
लरिका नाहीं लढ़िया रहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
दादी जब - जब काम बतावें
गुर्रावे ,संग आँख दिखावे
दादा ओहके देख जरत हैं
बोलें, काहे नहीं मरत है
पूरा गाँव मोहल्ला बोले
पेट गइल अब हड़िया रहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
05/02/2019
मैं लिखता हूँ शब के साये में बैठा
![]() |
| BHU - Ruiya ( Sanskrit Blok ) |
वो कहता है उसको जहाँ झुकाना है
मैं कहता हूँ मुझे दिलों तक जाना है
सबका अपना - अपना यहाँ सफ़र यारों
सबको अपनी - अपनी मंज़िल जाना
मैं लिखता हूँ शब के साये में बैठा
उनको अब्भी भी महफ़िल तक जाना है
बच्चों को खुश रखते हैं पापा मेरे
ज्ञानी हैं, फिर भी ज़ाहिल तक जाना है
मैंनें भी कुछ सोच रखा है जीवन में
इस साहिल से उस साहिल तक जाना है
02/02/2019
कविता, नज़्मों, गज़लों सी बन जाती है
वो हँसती है मेरा दिल बहलाती है
दिल की सारी बातें मुझे बताती है
उससे बातें कर के मेरा दिन गुज़रे
उसके फोटो संग रातें कट जाती हैं
ज़िक्र हमारा करती बातों - बातों में
बातों - बातों में परिचय दे जाती है
Fb, Whats app, Insta ,Twitter सब पे है
सबसे मुझको इश्क बहुत समझाती है
दिल की बातें वो भी कहना चाहे पर
ना जाने क्यों कहने में शर्माती है
दिन, तारीख़ महीना सबकुछ याद उसे
इक मुद्दत से मुझको पढ़ती जाती है
छोटी - छोटी बातों पर लड़ती रहती
वो मेरी जीवन - साथी बन जाती है
छोटी - छोटी बातों पर लड़ती रहती
वो मेरी जीवन - साथी बन जाती है
जब भी उसको लिखने बैठा सिद्दत से
कविता, नज़्मों, गज़लों सी बन जाती है
तुम्हें नसीब सोचता हूँ मैं
उसे रक़ीब सोचता हूँ मैं
आज इज़हार करूँगा तुमको
रोज़ तरक़ीब सोचता हूँ मैं
बाँह में तुम बिखर गई मेरे
तुम्हें हबीब सोचता हूँ मैं
एक तुम हो, हसीन जीवन है
मुझे, अमीर सोचता हूँ मैं
सीखता हूँ मैं बारहाँ तुमसे
तुम्हें अदीब सोचता हूँ मैं
आज सबकुछ मेरे तुम्हीं तुम हो
तुम्हें नसीब सोचता हूँ मैं
आज सबकुछ मेरे तुम्हीं तुम हो
तुम्हें नसीब सोचता हूँ मैं
Subscribe to:
Posts (Atom)
रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!
देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...
-
स्त्रियों, क्या चाहती हो ? हमेशा की तरह अब भी पुरुषों के तलवों तले रहना उनके हाँ में हाँ मिलाना या खुद को अधिकृत समझ ली हो उनक...
-
बस तुम्हारे लिए........... मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ - 2 मैं कहूँ कैसे तुम्हारी...






































