19/11/2018
12/11/2018
हे सखे! राजा रहो तुम मैं विदूषक ही भला हूँ
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| Neel |
हे सखे! राजा रहो तुम मैं विदूषक ही भला हूँ
खुद हँसू, जग को हँसाऊँ एक अद्भुद सी कला हूँ
तुम रहो जाकर भवन में मैं यहाँ पर ठीक हूँ
तुम हँसी हो दिव्यजन की मैं किसी की छींक हूँ
आसमाँ में , उन सितारों में चमकते चाँद तुम
मैं हमेशा ही दिखूँगा हो कहाँ गुमनाम तुम
फिर हँसे हैं लोग मुझपे चाल कुछ ऐसी चला हूँ
दिन तुम्हारे काट रहे होंगे बहुत ही खूब अब
पास परियों के रहो , बनते रहो महबूब अब
रेत की बंजर ज़मीं मुझमें तुम्हे मिल जायेगी
वो नहीं आई जिसे कहते रहे तुम आएगी
मैं किसी बेकार,बदबूदार फल जैसे गला हूँ
तुम सुनाते दण्ड प्यारे, मैं हँसी का मीत हूँ
तुम निकालो गालियाँ बस मैं सुनाता गीत हूँ
तुम इन्हें देते रहो दुःख , मैं हँसाऊँगा इन्हें
जो कहे दुत्कार कर ,वो सब भुलाउँगा इन्हें
क्या करूँ ऐसी प्रकृति में जन्म से ही मैं पला हूँ
कष्ट से लड़ता रहा रोना नहीं आया मुझे
क्या सुनोगे बात न, अब तक समझ पाया मुझे
इस कदर मदहोश हो, पैसों में खोये हो सदा
जिन्दगी में त्याग की तालीम सीखो सर्वदा
क्या करूँ आँसू नहीं आते मुझे ऐसे ढला हूँ
ये मुझे जीवन मिला हंसने - हंसाने के लिए
उन गरीबों के यहाँ महफ़िल सजाने के लिए
जिनके चहरे की शिकन हटती नहीं है उम्रभर
मैं उन्हीं लोगों का बच्चा हूँ ,यहाँ हूँ बेफ़िकर
हूँ बहुत निर्धन मगर अब तक नहीं तुमको छला हूँ
मैं हजारों दुःख लिए सबको हँसाता ही रहा
हर कदम पे मैं तुम्हें अपना बनाता ही रहा
चाहने वाले बहुत पर प्यार न देता कोई
मुझको वो ख़ुशियों भरा संसार न देता कोई
मैं किसी को कष्ट में छोड़ूँ , नहीं कोई बला हूँ
हे सखे! राजा रहो तुम मैं विदूषक ही भला हूँ
खुद हँसू, जग को हँसाऊँ एक अद्भुद सी कला हूँ
08/11/2018
बाकी है
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| Neel |
कुछ कर चुका हूँ , कुछ काम अभी बाकी है
अभी तो आगाज़ है , अंजाम अभी बाकी है
बहुत कहते रहे के क्या है तेरे आँगन में
ये सुबह-ए-बनारस है अवध की शाम अभी बाकी है
मानता हूँ कि नही दूध का धुला मैं , पर
बचाए रख तेरा भी नाम अभी बाकी है
दोस्ती को बना रहा जो आजकल दिलकश
वही है दोस्तों ये जाम अभी बाकी है
रोज़ गीता पे हाँथ रख के कसम खाता है
और कहता है कि ईमान अभी बाकी है
30/10/2018
मैं अपने अंतिम समय में
Pic Credit - Rahul Sharma
मैं तुमसे ठीक वैसे ही
प्यार करता हूँ, जैसे
एक माता - पिता अपने बच्चे से
एक रिसर्चर अपने रिसर्च सेजैसे एक कुम्हार अपने
बनाए हुए मिट्टी के पात्रों से
एक पाठक अपनी किताब से
लेखक विचारों के साथ पेन और कागज से
समुद्र साहिल से
औरएक प्रेमी अपनी प्रेमिका से ....ठीक वैसे ही मैं भी तुम्हेंप्यार करता हूँमैंनें तुमसे बेइन्तिहाँमुहब्बत कीतुमसे इस बात का जिक्र किये बिनमैं अपने अन्तिम समय मेंकिसी पागल की तरहसमुद्र के किनारे बैठउतनी बार लिखूँगा तुम्हारा नामजितनी बार समुद्र की लहरें उसे मिटाएंगीजितनी बार लोग मुझे पागल कह के सम्बोधित करेंगेजितनी बार तुम्हारा नाम मेरी आँखों से ओझल होगालिखते - मिटते लिखते - मिटतेएक दिन मैं खुदतुम्हारे नाम के साथउसी समुद्र में लिख - मिट जाऊँगापर तुम रोना नहींन ही मेरे न होने का शोक मनानातुम मुझे खुद में महसूस करनामैं वहीं कहीं तुम्हें मिलूँगातुम्हारी आत्मा की अनन्त गहराइयों मेंतुम्हारे साथ ।
मैं किसी का कुछ उधार
नहीं रखना चाहता,
बहुत अधिक दिनों तक
मैंने वादा किया है
मिटृटी से, हवा से ,पानी से ,आकाश से और
अग्नि से
सभी अपना - अपना हिस्सा ले जाएँँगें मुझसे
जब मैं यहाँ से विदा लूँगा
हाँ ,मेरे पास
तुम सभी की यादें हैं , प्यार है ,मुहब्बत है
जो इस धरती की
सबसे - खूबसूरत चीजें हैं मेरे हिसाब से
आप मुझसे वो मत माँगिएगा
माफ़ कीजिएगा, उसे मैं नहीं दे पाउँगा
माफ़ कीजिएगा, उसे मैं नहीं दे पाउँगा
मैं अपने अन्तिम समय में
जैसे लोगों के द्वारा देव ईश्वर अल्लाह
महसूस किये जाते हैं
वैसे ही मैं तुम्हें महसूस करूँगा
तुम्हारे प्यार को पूजात्मक - क्रिया मानकर
माँ ये उमर तुम्हें लग जाए
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| माँ |
मेरी उमर तुम्हें लग जाए
माँ ये उमर तुम्हें लग जाए
लोरी गाती, थपकी देती
आँचल में माँ मुझे सुलाए
जन्म दिया, धरती पे लाई
छाती से माँ मुझे लगाई
सदा हंसाए, सदा दुलारे
कान्हा जैसे मुझे सँवारे
जिसकी प्यारी मीठी - मीठी
बातों से ही मन भर जाए
थम जाती हैं साँसें जिसकी
मुझको गिरता देखकर
खिल जाता है चेहरा जिसका
मुझको उठता देखकर
गिरना उठना और सम्हलना
माँ मुझको चलना सिखलाए
लड़ जाती है मेरी खातिर
जो बेदर्द - जमाने से
अब तक फ़िक्र करे माँ मेरी
इक बच्चे - अन्जाने से
मुझको थोड़ी चोट लगे जो
आँखों में आँसू आ जाए
मेरी उमर तुम्हें लग जाए
माँ ये उमर तुम्हें लग जाए
लोरी गाती, थपकी देती
आँचल में माँ मुझे सुलाए
27/10/2018
नील गए जब से तुम दिल से गीत गया
ऐसे धीरे - धीरे जीवन बीत गया
जैसे कोई अपना हमदम मीत गया
बचपन माँ की गोद में गुजरा
और जवानी प्यार में
पत्नी संग फिर उम्र बिताया
और बुढ़ापा याद में
जीवन का बस लक्ष्य था इतना
जितना मैंने पाया है
खुश हूँ अपने इस जीवन से
जिसमें रंग समाया है
ऐसे ही इस जीवन को मैं लम्हा - लम्हा जीत गया
फिर से पा लूँ तुमको
ये जी करता है
गोद में ले लूँ तुमको
पर दिल डरता है
संग सदा तेरे मैं भी
रहना चाहूँ
तुमसे दिल की बातें सब
कहना चाहूँ
जब - जब मेरे साथ रहा तू भीत गया
तेरी भोली बातों का मैं दीवाना
पागल था थोड़ा , थोड़ा सा बेगाना
बातें दिल की सुनता
और सुनाता था
अब तक मैं छुप - छुप के
तुमको गाता था
नील गए जब से तुम दिल से गीत गया
ऐसे धीरे - धीरे जीवन बीत गया
जैसे कोई अपना हमदम मीत गया
24/10/2018
19/10/2018
सपनें सच होते देर नहीं लगते
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| नीलेन्द्र शुक्ल " नील " |
सपनें सच होते देर नहीं लगते
बस आपको खुद पर भरोसा
और अपनें कर्मों में श्रद्धा होनी चाहिए
ये सारी धरती, ये खुला सारा आसमान
तुम्हारा है ,
और तुम्हीं हो इसके सही हक़दार
तुम्हारा सही किरदार जब तक
तुम्हें नहीं मिल जाता
जीवन के इस रंगमंच पे
लड़ते रहो , संघर्ष करते रहो
उसे हासिल करने के लिए
नहीं बनो तुम " गीता के अर्जुन "
जिसे किसी कृष्ण की जरुरत पड़े
मत रखो अपने मन के भीतर
किसी प्रकार का द्वंद्व
उखाड़ फेंको वो सारी वासनाएँ
जो तुम्हारे लक्ष्य में रोड़ा बनें
प्रयास करो इन्द्रियों को संयमित
करने का
ये मन का द्वंद्व , ये वासनाएँ
और इन इन्द्रियों पर संयम खुद - ब - खुद
हो जाएगा
मैं सच कहता हूँ ,
सपनें सच होते देर नहीं लगते
बस आपको खुद पर भरोसा
और अपनें कर्मों में श्रद्धा होनी चाहिए
देश में हैं दो बन्दर
का बतियाएँ काका तुमसे
देश में हैं दो बन्दर
एक शहर का नाम बदलता
दूजा घूमे जमकर
जितना वो कहते हैं ,जितना
बोलें उतना लिखो
कान, आँख, मुँह बन्द करो
जों बोलें उसको सीखो
सुनो सदा अनुकूल रहो और
चलना ज़रा सम्हलकर
प्यार , मुहब्बत किये नही वो
और नही कुछ समझें
बदल रहे वो दुनिया यारों
खुद को कभी न बदलें
दोनों कृत्रिम - बातें करते
फेंक रहे हैं छककर
मानवीयता तनिक नही है
सदा काटने दौड़ें
छप्पन इंच की छाती दिखलाकर
होते हैं चौड़े
दोनों की मति भ्रष्ट हुई है
दोनों हैं घनचक्कर
का बतियाएँ काका तुमसे
देश में हैं दो बन्दर
एक शहर का नाम बदलता
दूजा घूमे जमकर
12/10/2018
मोदी जी
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| Modi Ji |
खेलें खाएँ घूमें नाचें धूम मचाएँ मोदी जी
भाषण देते गला फाड़ के खुब चिल्लाएँ मोदी जी
काशी को दिखला कर सपना क्योटो का फिर निकल लिए
प्लेन में बैठें , आसमान से हाँथ हिलाएँ मोदी जी
क्या बदलाव हुआ है आखिर अच्छे - दिन के आने पर
नन्हें मुन्हें बच्चों से अब भीख मगाएँ मोदी जी
राजनीति हो मानवीयता को लेकर इस भारत में
जाति धर्म मजहब को लेकर नहीं लड़ाएँ मोदी जी
हम गुमराह नहीं होंगें इन लोगों की मौतें लेकर
सबकी खातिर सीमा पे जो जान गवाएँ मोदी जी
गाँवों में घुसकर देखो , बोलो बतियाओ तो समझो
दूर - दूर से " मन की बातें " नहीं सुनाएँ मोदी जी
संस्कृत की क्या दशा हुई है विद्यालय जा - जा देखें
बाहर जाकर ऐसे न भौकाल बनाएँ मोदी जी
लोकतंत्र को लोकतंत्र के जैसे ही रहने देना
लोकतंत्र का लिए पताका न फहराएँ मोदी जी
परेशान हैं अगर बुढ़ापे से सुनिए !इक काम करें
किसी योग्य का राजतिलक करके बैठाएँ मोदी जी
मैंने भी सोचा था कुछ अच्छा होगा इस शासन में
अच्छे - खासे प्यारे - प्यारे ख्वाब दिखाए मोदी जी
10/10/2018
कइसन - कइसन खेल देखावेला ईश्वर
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| Neel |
कइसन - कइसन खेल देखावेला ईश्वर
खुद ही जन्मे , खुदै मुआवेला ईश्वर
का तोहके बतियाई कुछ तुहूँ समझा
ईश्वर के ही नाच नचावेला ईश्वर
देखनी करम करत जेनहन के बचपन से
ओनहन के न बड़ा बनावेला ईश्वर
सुन ला " मँगरू " हाँथ नही हौ कुछ तोहरे
खुदै रोवावे , खुदै हँसावेला ईश्वर
का हो ईश्वर आँधर हौ कि बहिरा हौ
लइकन के हर घड़ी सतावेला ईश्वर
08/10/2018
जितने में तुम रहते हो उतना तो साफ रखो यारों
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| Neel |
जो करते हो , जितना भी उसमें इन्साफ रखो यारों
जीतोगे तुम भी इक दिन ऐसा विश्वास रखो यारों
कुत्ते भी जब बैठे हैं तो पूँछ - झाड़कर बैठे हैं
जितने में तुम रहते हो उतना तो साफ रखो यारों
घर का कूड़ा - कचरा सारा बच्चों संग भिजवाते हो
गंगा में मत छोड़ो उसको अपने पास रखो यारों
कुण्ठित - मन हो गया तुम्हारा माँ को गाली देते हो
कुछ अच्छे पण्डित बुलवाओ घर पर जाप रखो यारों
मुझे माफ करना पापा
![]() |
| Neel |
मुझे माफ करना पापा
मैं अपनी जिन्दगी
एक भरी हुई पेन
और सादे कागजों
के साथ गुजारना चाहता हूँ
मुझे माफ करना
उन सभी सपनों के लिए
जो आप मेरे लिए या मुझको लेकर
देख रहे हैं
मुझे माफ करना पापा
पर मैं सच - सच कहूँ तो
मेरा कोई इन्ट्रेस्ट नही है
मेरे स्लेबस की इन मोटी - मोटी किताबों में
दिन - दिन भर के लेक्चरों में
और इस झूठी शानो - शौकत में
मैं अब और नहीं इनमें बर्बाद करना
चाहता आपका पैसा और अपना समय
मुझे मालूम है आपकी एक बिन ब्याही बेटी
भी अभी है ,
और आपकी नौकरी कोई सरकारी नहीं
और ना ही उतनी खेती है
अब मैं आपकी सहायता और अपनें सपनों को
पूरा करना चाहता हूँ ,
जिन्हें मैं अपनी खुली आँखों से
हर घड़ी देखता हूँ पापा
मेरी कोई अभिलाषा नही
सरकारी प्रोफेसर, लेक्चरार या अध्यापक बनने की
अब मैं पढ़ना चाहता हूँ
जीवन की वो किताबें जिसमें सच को मैं
सामने से देख सकूँ
महसूस करना चाहता हूँ
जीवन के हर एक चैप्टर को बिल्कुल करीब से
जिनसे अभी तक आपनें मुझे अनभिज्ञ रखा
मुझे मालूम है रास्ता बहुत ही कठिन है
मेरी मन्जिल का
पर मैं लड़ना चाहता हूँ पापा
लड़कर मरना चाहता हूँ
कभी - कभी
हर विषय में समझौता करना अच्छा नही होता
मुझे माफ करना पापा
मैं अपनी जिन्दगी
एक भरी हुई पेन
और सादे कागजों
के साथ गुजारना चाहता हूँ
मुझे माफ करना पापा
मुझे माफ करना ।
06/10/2018
महज़ दिखाना लगा रहा
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| Neel |
झूठी - मूठी इस दुनिया का
ताना - बाना लगा रहा
शानों - शौकत में खोए थे
महज़ दिखाना लगा रहा
मक्कारी बेमानी चार सौ बीसी
सबकी दिखती है
कुछ कह के देखो इनको
बत्तीसी सबकी दिखती है
खींच - तान के इधर - उधर से
महज़ कमाना लगा रहा
लड़की - लड़कों की बातें
दिन भर बतियाया करते हैं
मैडम के छत आते ही
सर भी छत आया करते हैं
इधर - उधर की बातों में
बस समय बिताना लगा रहा
बेवकूफ है इंकलाब का नारा
लेकर क्या होगा
क्या गीता , क्या भारत
चाँद - सितारा लेकर क्या ह
तू पीछे रह गया " नील "
ये गज़ब जमाना लगा रहा
01/10/2018
Lyrics
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| Neel |
तेरी साँसों से हवा चलती है
चाँद चेहरे से बना है तेरे
मेरी आँखों में अगर देखे तू
देख लेगी सभी सपने मेरे
इतना चाहूँ तुझे कहूँ कैसे
तेरे दीदार बिन रहूँ कैसे
किसी उड़ते हुए पंक्षी की तरह
उड़ते रहते विचार हैं तेरे
दूर भी है बहुत तू पास भी है
गुज़रे लम्हों के वो एहसास भी हैं
दूरियों को समेट लेता हूँ
देख कितने करीब है मेरे
बदन में फूल है या फूल ही बदन है तेरा
![]() |
| Neel |
जितना हम कह रहे उससे भी पाक मन है तेरा
होंठ में कंपकपी , मदहोश ये यौवन है तेरा
तेरे आते ही महक उठता है ज़र्रा - ज़र्रा
बदन में फूल है या फूल ही बदन है तेरा
खूबियाँ क्यों न कहूँ उसकी वो दिखती ऐसी
जमीं पे उतरा हुआ चाँद सा सनम है तेरा
रोज़ कहता है कि तस्वीर बदल दूँगा मैं
मुझे दिखता नही ऐसा कहाँ चमन है तेरा
सोंचती क्यों है ये इक तू ही तड़पती धरती
पूँछ उससे कभी क्या हाल ये गगन है तेरा
तेरी आवाज़ है श्रीहर्ष की दमयन्ती सी
युँ ही गाती रहो प्यारा बहुत भजन है तेरा
29/09/2018
मुबारक हो तुझे रमजान तेरा
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| Neel |
किताबों से बढ़ा अभिमान तेरा
स्वयं की आत्मा को जान ले तू
यही सबसे बड़ा है ज्ञान तेरा
हकीकत की जमीं पर देख आके
सफल हो जाएगा अभियान तेरा
लड़ाई धर्म है तो छोड़ता हूँ
बहुत खतरे भरा परिणाम तेरा
गले मिलते रहो इक दूसरे से
मुबारक हो तुझे रमजान तेरा
निकलता ही नही है देखने को
बहुत ही क्रूर है भगवान तेरा
26/09/2018
बगल बैठल हँई भइया के साली
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| Neel |
चटक चेहरा पे दमके होंठ - लाली
हँसावेली करेली गुदगुदी ऊ
बगल बैठल हँई भइया के साली
लगे सूरुज नियन हम का बताई
चोंधावता सुनहली कान - बाली
भँवर के काम हौ मड़राइ हैं सन
कहा कब ले बचाई फूल - माली
नहीं मन दोस्तन के बिन लगेला
कि जब तक होय ना दू - चार गाली
चलल बाड़न उहौ अब राज थाम्हें
हवन राजा मगर दिमाग खाली
बहुत मन खुश भइल बा आज हमरो
हमर माई जे खइली भर के थाली
कदम बढ़ते हैं मेरे पर मेरा मन बढ़ नही पाता
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| Neel |
बनाना चाहता हूँ मैं बहुत पर गढ़ नही पाता
मेरा दीमाग खाली है मैं औरों को पढूँगा क्या
मैं जितना चाहता हूँ खुद को उतना पढ़ नही पाता
सुनो पापा! न जाने डर कहाँ से आ गया भीतर
कदम बढ़ते हैं मेरे पर मेरा मन बढ़ नही पाता
नदी चुपके से आ पूछी समन्दर क्यों उछलता है
नदी ! सुन बिन तेरे मैं भी किसी से लड़ नही पाता
पता मेरा कोई आवाज मुझसे पूछती अक्सर
बताना चाहता हूँ मैं, मगर वो घर नही पाता
25/09/2018
24/09/2018
हिजड़े जनम लिए हैं हिन्दोस्तान में
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| Neel |
वो घर बनाने जा रहे हैं आसमान में
गैरों से कभी हमको मुहब्बत नही हुई
अपना कोई नही था मेरा इस जहान में
कैसे भला पूरी हों मनोकामनाएँँ आज
सेल्फी सहित हैं लोग अब पूजा - अज़ान में
लोगों में जिसे खोजता रहा मैं आज तक
वो सच सही दिखा मुझे जाकर श्मशान में
डर - डर के जिए जा रही हैं नारियाँँ यहाँ
हिजड़े जनम लिए हैं हिन्दोस्तान में
22/09/2018
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा
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| Shraddha |
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, है जन्मदिन तुम्हारा
ऐसे प्रगति का परचम लहराओ प्यारा - प्यारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा
डरना नही किसी से , न भयभीत कभी हो
जिस राह पे बढे़ तू बस जीत तेरी हो
कठिनाइयों मेंं बढ़ना है कर्मदिन तुम्हारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, है जन्मदिन तुम्हारा
तुम जो भी हो जैसे भी हो मुझको भले लगे
सब नेक आदमी हों जो भी तुम्हें मिलें
इन्सानियत को पढ़ना है मर्मदिन तुम्हारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, है जन्मदिन तुम्हारा
खुशियाँ बटोर लो सब , उल्लास मनाओ
आशीष लो बड़ो से छोटों को सिखाओ
करना भजन जरा सा है धर्मदिन तुम्हारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, है जन्मदिन तुम्हारा
ऐसे प्रगति का परचम लहराओ प्यारा - प्यारा
शुभ जन्मदिन तुम्हारा, ये जन्मदिन तुम्हारा
पंख नहीं कतरो मुझको उड़ जाने दो
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| Nandiny Y |
भइया मुझको सपनों से जुड़ जाने दो
जितनी कठिनाई आएँगी सह लूंगी मैं
हवा तेज बहनें दो संग - संग बह लूंगी मैं
रोकों मत मुझको सबसे लड़ जाने दो
सबपे वार करूंगी सबको देखूंगी मैं
उठकर - गिरना गिरकर - उठना सीखूंगी मैं
मुझको ऊँँचे पर्वत पर चढ़ जाने दो
जग को दिया दिखाऊँँ जग रौशन कर जाऊँँ
किसी के सपनों का मैं घर - आँँगन बन जाऊँँ
ऐसे ही इन राहों पे बढ़ जाने दो
पंख नहीं कतरो मुझको उड़ जाने दो
भइया मुझको सपनों से जुड़ जाने दो
कुछ खोना पड़ेगा तुम्हें कुछ पाने कि खातिर
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| Neel |
कुछ खोना पड़ेगा तुम्हें कुछ पाने कि खातिर
दुनिया को दिखा सच उन्हें समझाने कि खातिर
इतना नहीं अमीर कि खुशियाँँ तुझे मिले
खुशियाँँ तुझे मिले कि ये दुनिया तुझे मिले
तुमको मैं साथ रखता हूँँ जी पाने कि खातिर
दुख में दिखे हैं लोग न जाने क्यूं इस कदर
मिलना - बिछड़ना सत्य है जीवन है इक सफर
ऐसे न जनम ले यहाँँ मर जाने कि खातिर
ये लोग एक हों करें इक - दूजे का सहयोग
जब तक रहूँँ, जहाँँ रहूँँ, हंसते ही रहें लोग
जीवन मिला है खुशियों को फ़ैलाने कि खातिर
पागल हूँँ मैं मूरख नहीं आता है मुझे कुछ
जादू दिखा कोई के चमक जाऊँँ मैं सचमुच
तुम साथ रहो मन मेरा बहलाने कि खातिर
कुछ खोना पड़ेगा तुम्हें कुछ पाने कि खातिर
दुनिया को दिखा सच उन्हें समझाने कि खातिर
कुछ खोना पड़ेगा तुम्हें कुछ पाने कि खातिर
20/09/2018
मुहब्बत है , किसी के बाप की जागीर थोड़ी है
![]() |
| Neel |
जफ़र कोई नहीं ,ग़ालिब यहाँ अब मीर थोड़ी हैं
जो उसनें लिख रखी उतनी मेरी तकदीर थोड़ी है
खुले दिल से सभी के सामने भर - भर लुटाऊँगा
मुहब्बत है , किसी के बाप की जागीर थोड़ी है
हुआ है क्या तुम्हें क्यों आजकल दहशत में दिखते हो
उठाया लेखनी हूँ ये कोई शमशीर थोड़ी है
तुम्हें बदला करूँ इसकी कभी नौबत नहीं आती
हमारे दिल में मूरत है ,कोई तस्वीर थोड़ी है
बहुत ही ख़ूबसूरत हैं इन्हें काजल लगा के रख
तेरी आँखें समन्दर हैं ये खञ्जर ,तीर थोड़ी हैं
मेरी बहना बनाकर रेशमी धागा मुझे बोली
बँधा लो ये कवच है कोई ये जंजीर थोड़ी है
भरम को छोड़ दे अपने कयासों को बचाकर रख
महज़ तू " नील " है शहरूख़ या रणवीर थोड़ी है
किसी माँ बाप के सर बेटियाँ भारी नहीं होती
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| Daughters Day |
मुहब्बत में तुम्हारे गर अदाकारी नहीं होती
सही कहता हूँ हम दोनों में यूँ यारी नहीं होती
इशक के नाम पर बकवास करते लोग अक्सर हैं
मुहब्बत की तनिक उनमें समझदारी नहीं होती
नहीं छेड़ो युँही इन माँओं बहनों प्रेमिकाओं को
हमारे घर की हैं इज्ज़त ये सरकारी नहीं होती
सुनो मारो नहीं इनको जनम लेने से पहले तुम
किसी माँ बाप के सर बेटियाँ भारी नहीं होती
छुपाकर बेटियों को मैं रखूँ कातिल जमाने से
मगर मजबूर हूँ ऐसी भी अलमारी नहीं होती
सुबह उठकर मेरी दादी निकलती फूल चुनने को
अहद !मेरे जमाने में तो फुलवारी नहीं होती
16/09/2018
छोड़कर तुमको नहीं जाऊँगा मैं उस पार बहना
![]() |
| Stop Rape |
छोड़कर तुमको नहीं जाऊँगा मैं उस पार बहना
वहसियों से भर गया है ये भरा संसार बहना
यातनायें जो मिलेंगीं हम सहेंगें साथ में
पर नहीं होंगे अकेले हम जियेंगें साथ में
हों भले दो - चार रोटी उसमें भी सूखी सही
भूख थोड़ी तो मिटेगी एक दिन भूखी सही
भूख में जीना कठिन पर ,छोड़ना दुश्वार बहना
कंपकपांता हूँ ,अकेले भेजकर तुमको सदा
प्रार्थना करता हूँ मैं नित, हों नहीं हम तुम जुदा
क्या कभी डरते नहीं दिखती नहीं मूरत उन्हें
क्या कभी दिखती नहीं मासूम सी सूरत उन्हें
कौन किस पल क्या करेगा किसका क्या आचार बहना
मर मिटूँगा छोड़कर तुम यूँ चली जाओगी तो
जिन्दगी की रौशनी तुम यूँ मिटा जाओगी तो
प्यार से होती लड़ाई पास जब रहता हूँ मैं
ये कलाई सूनी रह जाँएगी सच कहता हूँ मैं
व्यर्थ हो जायेगा ये रक्षा का शुभ त्यौहार बहना
इस धरा रखते कदम ही खा गये वहसी उसे
एक छोटी सी परी थी ले गये रहसि उसे
और फिर क्या - क्या हुआ मैं कह नहीं पाऊँगा सब
खून मेरा खौलता है याद आ जाती है जब
सोंच भी सकता नहीं मैं क्रूर वो व्यापार बहना
शब्द से मैं क्या कहूँगा वो घनी पीड़ा मगर
शून्य हो जाता हूँ मैं आँसू निकलते फूटकर
सोंचता हूँ कौन से स्वातंत्र्य हैं हमको मिले
पूँछता हूँ कौन से संस्कार में हैं हम पले
ये वही भारत जहाँ पलते बहुत संस्कार बहना
छोड़कर तुमको नहीं जाऊँगा मैं उस पार बहना
वहसियों से भर गया है ये भरा संसार बहना
डरना छोड़ो, लड़ना सीखो
![]() |
| Salutations |
जीवन की हर विषम परिस्थिति में
प्यारे कुछ करना सीखो ,
डरना छोड़ो, लड़ना सीखो
एक - एक कर ख़त्म हुए सब
जहाँ से जो थे गये वहाँ सब
आग लगे या पत्थर बरसें
तूफानों में बढ़ना सीखो
जीवन की हर ........
मन को सदा जिताकर रखो
इन्द्रिय को समझाकर रखो
जितनी ऊँची रहे चढ़ाई
उस चोटी पे चढ़ना सीखो
जीवन की हर ........
अपनों को समझाते जाओ
ग़ैरों को अपनाते जाओ
अभिमानी आदत छोड़ो अब
ज़रा मुहब्बत करना सीखो
जीवन की हर ........
आओ युवा शक्तियों आओ
जीवन में अनुशासन लाओ
भारत को इक नई दिशा दें
उस साँचे में ढ़लना सीखो
जीवन की हर विषम परिस्थिति में
प्यारे कुछ करना सीखो ,
डरना छोड़ो, लड़ना सीखो
15/09/2018
तुमको आगे आना होगा
तुमको उसे मनाना होगा
जीवन की हर कठिनाई में
तुमको आगे आना होगा
जहाँ शराबों और शबाबों में
मदमस्त युवा हो जाएँ
जहाँ गली ,चौराहे नुक्क्ड़ का
हर खेल जुआ हो जाए
ऐसे वर्तमान को स्वामी
दिशा दिखाने आना होगा
जहाँ कहीं मन ........
बढ़ो अकेले ,साथ न हो जब
रुको मनन , चिन्तन के ख़ातिर
अंधेरों में दीप जलाओ
मिटते अन्धकार हैं आख़िर
उठो , बढ़ो इन लोगों से अब
तुमको देश बचाना होगा
जहाँ कहीं मन.........
होगा ये जग रौशन तुमसे
ऐसी सोंच बनाकर रखो
धीरे - धीरे तजो बुराई
अच्छाई अपनाकर रखो
ऐसे ही इस जीवन को कुछ
आत्मबोध सिखलाना होगा
जहाँ कहीं मन रोंके तुमको
तुमको उसे मनाना होगा
जीवन की हर कठिनाई में
तुमको आगे आना होगा
07/09/2018
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ
![]() |
| Neel |
नही कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ
जब से मेरा जन्म हुआ है
व्यक्त हूँ मैं, अव्यक्त नही हूँ
मुझे हर जगह भेद दिखे है
सुखद - दुखद परिवेश दिखे है
यथाशक्ति सब देखूँ - समझूँ
किसी का अन्धा भक्त नही हूँ
नही कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ
रक्षक , कृषक , गरीबों का हूँ
इस धरती भारत माँ का हूँ
मरते हुए उन्हीं देवों की
साँस बनूँ मैं रक्त नही हूँ
नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ
भूत - प्रेत चण्डाल के जैसे
है मन महाकाल के जैसे
मुझसे इतना नही डरो तुम
इतना भी मैं सख़्त नहीं हूँ
नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ
खुद को मुझ तक लाकर देखो
अपना मुझे बनाकर देखो
जीवन अर्पित कर दूँगा बस
बैठा हूँ मैं , मैं पस्त नही हूँ
नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ
जब से मेरा जन्म हुआ है
व्यक्त हूँ मैं , अव्यक्त नही हूँ ।
06/09/2018
नज़र कैसे मिलाऊँ मैं
![]() |
| Give Me Right Path... |
मेरे अन्दर छुपा है क्या
तुम्हें कैसे दिखाऊँ मैं
नज़र के सामने हो तुम
नज़र कैसे मिलाऊँ मैं
मेरे अन्दर .......
बहुत ही सुर्ख़ - आरिज़ हैं
सुनो इस वक्त बारिश है
नही जाओ युँ ही बाहर
मेरी कुछ और साजिश है
तुझे देखूँ , तुझे सोंचूँ
तुझे खुद में ही पाऊँ मैं
मेरे अन्दर ......
हया अपनी हटाओ तुम
मुझे साक़ी पिलाओ तुम
ज़रा रुख़्सार को अपने
हमारे पास लाओ तुम
गुलाबी - होंठ से तेरे
ये लब कैसे मिलाऊँ मैं
मेरे अन्दर ......
बहुत ही खूबसूरत है बनाया
तुमको कुदरत नें
हमारे दिल में इक हलचल
मचा रखी है क़ुर्बत नें
मेरा मन हर घड़ी कहता
तुम्हें दुल्हन बनाऊँ मैं
मेरे अन्दर ......
मेरे अन्दर छुपा है क्या
तुम्हें कैसे दिखाऊँ मैं
नज़र के सामने हो तुम
नज़र कैसे मिलाऊँ मैं
आकाश में उड़ जाने दे
![]() |
| Akash & Neel |
उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में, उड़ जाने दे
जुड़ जाने दे जुड़ जाने
मुझको हवा संग जुड़ जाने दे
कुछ स्वप्न हैं कुछ ख्वाब हैं
हर पल यहाँ इक आप हैं
इस राह में बेचैन हूँ
उस राह में मुड़ जाने दे ....
उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में , उड़ जाने दे
कर दे मुझे आजाद तू
न कर मुझे बर्बाद तू
वो मञ्जिलें हैं , मञ्जिलें
मुझको उधर बढ़ जाने दे
उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में, उड़ जाने दे
है लक्ष्य बस मेरा यही
तू साथ दे सब है सही
लम्बा सफर ऊँची डगर
हर हाल में चढ़ जाने दे
उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में उड़ जाने दे
जुड़ जाने दे जुड़ जाने दे
मुझको हवा संग जुड़ जाने दे
03/09/2018
लड़कियाँ जन्नत की कोई हूर थोड़ी हैं
छोड़ दे ऐसे नशे मजबूर थोड़ी है
आ गई दिल्ली, बहुत अब दूर थोड़ी है
फूँकना मत ये जवानी इस नशे की आग में
लड़कियाँ जन्नत की कोई हूर थोड़ी हैं
हर घड़ी बस तुम विवश हो ये कहाँ की बात है
इस जमाने में यही दस्तूर थोड़ी है
उसको गर होगी मुहब्बत आएगी वो दौड़कर
हैं महज़ नखरे , कोई मजबूर थोड़ी है
हमको भी उसकी अदाएँ देखकर अच्छी लगी
पर उसी के दायरे में चूर थोड़ी हैं
तुम कोई जारा नही न वीर कोई मैं रहा
छोड़ दे तू इस अहद मशहूर थोड़ी हैं
भग गये वो राह में हमको अकेले छोड़कर
ये मेरी शुरुआत थी भरपूर थोड़ी है
01/09/2018
किसे अपना कहूँ कहूँ किसे पराया मैं
किसे अपना कहूँ कहूँ किसे पराया मैं
दूर वो ही रहे जिनको करीब पाया मैं
उन्हें पसन्द है लोगों से खेलना शायद
यही धोखा हुआ अपनों को ही अपनाया मैं
हृदय - दहक उठा है दिल में शोले फूटे हैं
किसी ने आग लगाई या खुद जलाया मैं
उसे मंजूर ही नही थी मुहब्बत मेरी
मैं ही पागल था जो यारों अलख जगाया मैं
मैंने चाहा कि चलो मार दूँ मैं भी ठोकर
गया शराब पी दौलत सभी लुटाया मैं
नशा कहाँ है उस शराब में जो उसमें है
खुद को भूला नही उसको कहाँ भुलाया मैं
30/08/2018
तू जीत गई मैं हार गया
तू जीत गई मैं हार गया
अब आजा मेरे आँगन में
वर्ना मेरा संसार गया । तू जीत ...
दो दिल की बात समझना था
मुझको जीवन में भरना था
मैंने तुमको अपनाया है
दिल के अन्दर ही पाया है
मैं खुद को भूलना चाहा पर
न दिल से तेरा प्यार गया ।
तू जीत गई मैं हार गया -2
दिल के दरवाजों पे है तू
मन सपनों, ख्वाबों में है तू
तेरी बाँहों की जन्नत में
खुद को पाऊँ मैं मन्नत में
यारा इक तेरे जाने से
मेरा प्यारा - परिवार गया ।
तू जीत गई मैं हार गया - 2
हर माह तुम्हारे होने से
मुझको सावन से लगते थे
पलकों पे बैठाकर तुमको
मेरे दिन पावन लगते थे
तुम आ जाओ इस जीवन में
मैंने ये जीवन वार दिया ।
तू जीत गई मैं हार गया - 2
उड़ के आजा इस आँगन में
वर्ना मेरा संसार गया ।
तू जीत गई मैं हार गया ।
क्लेशों में
प्रियतम नें अलगाव लिखा है खत में और संदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
मानव देखा जाता है अब रंग रुपों और वेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
देखता हूँ मैं जब जिसको सब रहते हैं आवेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
खेतों में है आग लगी जीते हैं कुछ अवशेषों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
ज्ञान अथाह भले ही हो नौकरी नही है रेसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
लोग स्वयं का मान बेंच देते हैं रुपयों - पैसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
मानव देखा जाता है अब रंग रुपों और वेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
देखता हूँ मैं जब जिसको सब रहते हैं आवेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
खेतों में है आग लगी जीते हैं कुछ अवशेषों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
ज्ञान अथाह भले ही हो नौकरी नही है रेसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
लोग स्वयं का मान बेंच देते हैं रुपयों - पैसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में
25/08/2018
रक्षाबंधन
मेरी बहना , मेरी बहना , मेरी बहना तू - 2
साथ दूँगा जिन्दगी भर याद रखना तू ।।
तेरे दम पर जिन्दगी हंसकर गुज़रती है
तू रहे जो साथ ये सजती - सँवरती है
हौंसलों में पर लगा आकाश रहना तू ।।
मेरी बहना , मेरी बहना , मेरी बहना तू - 2
रेशमी - धागों का कैसे कर्ज चुकताऊँ
तेरे चेहरे की हंसी वाज़िब सदा पाऊँ
जो भी चाहे, जब कभी भी आके कहना तू ।।
मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू
एक माँ से हम नही पर एक माँ से हैं
जिस्म दो हैं पर कसम से एक जाँ से हैं
यूँ किसी मद्धम पवन सी संग बहना तू ।।
मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू
ख्वाहिशें हैं छीनकर खाने की संग रोटी
क्या हैं ये सोना हो या हीरा हो या मोती
मेरे जीवन का अनोखा एक गहना तू ।।
मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू - 2
साथ दूँगा जिन्दगी भर याद रखना तू
मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू ।।
23/08/2018
खुदा खैर करे
इतनी मीठी तेरी पुकार खुदा खैर करे
लौट आए वो बरकरार खुदा खैर करे
इतनी भोली सी है नादान - सादगी उसकी
सादगी में बसा खुमार खुदा खैर करे
मुंतज़िर था मैं जिस वख़त का उसी को लेकर
सामने आ गया है यार खुदा खैर करे
आँख मिलती रही हर रोज़ हम मिले ही नही
बीच में उफ्फ ये संसार खुदा खैर करे
उसके लफ्ज़ों से शहद गिरती रही शामो - सहर
भा गया मुझको वो रुख़्सार खुदा खैर करे
18/08/2018
मानव हो तो मानव का सम्मान करो
मानवता थोड़ी भी हो तो दान करो
हे ईश्वर! हम लोगों का कल्याण करो
हम सब हैं नादान नही मालुम हमको
बच जाएँ ये जान ज़रा वरदान करो
रोते और बिलखते बच्चे दिखते हैं
आँखें खोलो ईश्वर! इनका ध्यान करो
अपने लोगों का जीवन खतरे में है
जागो यारों पूजा और अज़ान करो
भाषाओं को लेकर वैर नही पालो
मानव हो तो मानव का सम्मान करो
जीवन में सुख - दुःख हर इक पे आते हैं
हर पल लोगों में रहकर कुछ काम करो
प्यार - मुहब्बत से ही धरती चलती है
कुछ सीखो जीवन में कुछ आयाम करो
वो अंधा , पागल है, बहरा, गूँगा है
यारों हाँथ बढ़ाओ न अभिमान करो
सबको रहने, खाने - पीने का सुख हो
ऐसा ही कुछ दिग्विजयी अभियान करो
केरला के हालात देखकर यहाँ के लोगों को देखकर बहुत ही परेशान हूँ
कहने को बहुत कुछ कह सकता हूँ पर ये भाषणबाजी का वक्त नही है
ये वक्त है साथ देने का , मदद करने का और अपनों को बचाने का तो मैं आप सभी से ये उम्मीद करता हूँ कि Please As Much As Possible Donate प्रिय भाइयों , बहनों , मित्रों गुरुजनों और स्वजनों मैं आप सभी से विनम्र - निवेदन करता हूँ जितना हो सके उतना ही मदद करें पर करें जरूर आपको अगर पैसे Donate करने हैं तो Please आप खुलकर कहें हम आपको Valid Account देंगे जहाँ आप अपनी तरफ से इन भाइयों बहनों माताओं की सहायता कर सकें ।
Please Contact - 9645668581 - Nischal Prakash
9009228090 - Harsh Agrawal
8573934590 - Neelendra Shukla
9304184366 - Aaditya Raja
10/08/2018
गीत
![]() |
| Pic Credit - Shiksha Mishra |
सोच ले कुछ धर्म अपना शर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......
सोच मत फल के लिए
जो फल मिले या न
भज ले ईश्वर को ज़रा
ये कल मिले या न
जो मिले हैं ग्रन्थ उनका मर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......
दान दे थोड़ा भजन कर
और निजचिन्तन
क्यों बना है ? क्या करेगा ?
इसपे कुछ मन्थन
धर्म से गद्दी तू अपनी गर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......
छोड़ने में तू सतत प्रेरित
हो राग - द्वेष
और अभिवर्धन करे सम्पन्न
हो यह देश
त्याग दे तू क्रोध खुद को नर्म (नम्र) करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर .......
क्या पता ये जिन्दगी
फिर से मिले या न
क्या पता ये कर्मभूमि
फिर मिले या न
दूर कर खुद की कमी कुछ धर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर कर्म करते चल -2
सोच ले कुछ धर्म अपना शर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ...... कर्म करते चल ।।
09/08/2018
18/07/2018
सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है
सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है
कहाँ चल दिये खुद को हमसे मिलाकर
शहर अजनबी सा ये हमको लगे है
कहाँ चल दिये साथी हमें आज़मा कर
कहाँ तुम चले से गये हो बता दो
दिखाओ नही प्यार अपना जता दो
इबादत तुम्हारी सदा है मेरे संग
कहाँ आ गया तुमको अपना बनाकर
ज़िन्दगी ये तेरे बिन सिमट सी गई है
मैं सच कह रहा यारा , मिट सी गई है
मुकम्मल बयाँ थी तुम्हारी वो बातें
ये क्या कर दिया तुमनें सपने सजाकर
तड़पता मेरा मन तुम्हारे बिना है
कि आओगे कब तुम दिनों-दिन गिना है
बहुत दिन सोयी पड़ी थी ये आँखें
ये क्या कर दिया तुमनें इनको जगाकर
सुनहरा सफर था, सुनहरी थी राहें
सुनहरा था जीवन , सुनहरी वो बाँहें
नज़ारे बदलते गये ज़िन्दगी के -
ये क्या कर दिया तुमनें नज़रें चुराकर
@नीलेन्द्र शुक्ल " नील "
09/06/2018
क्या करना
![]() |
| Poem |
कपड़ों का बाजार बनाकर क्या करना
जीवन को किरदार बनाकर क्या करना
हम भी जी लेंगें मुर्दों की दुनिया में
फिर झूठी सरकार बनाकर क्या करना
घर का मालिक देख रहा मरते भाई
ये पिद्दी सरदार बनाकर क्या करना
बच जाएँ माँ ,बहनें तब तो बात बनें
अथवा ये आचार बनाकर क्या करना
मैं पागल हूँ, अच्छा हूँ, मैं ज़िन्दा हूँ
झूठा - मूठा प्यार बनाकर क्या करना
एक रहे कोई पर जीवन भर अपना
गैरों का संसार बनाकर क्या करना
साँसें , नब्ज़, हवा गर्मी से व्याकुल हैं
ऐसे अँखियाँ चार मिलाकर क्या करना
जिस घर की दहलीज मुझे घुसने न दे
ऐसे घर परिवार बनाकर क्या करना
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रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!
देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...
-
स्त्रियों, क्या चाहती हो ? हमेशा की तरह अब भी पुरुषों के तलवों तले रहना उनके हाँ में हाँ मिलाना या खुद को अधिकृत समझ ली हो उनक...
-
बस तुम्हारे लिए........... मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ - 2 मैं कहूँ कैसे तुम्हारी...










































