12/03/2019

ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में

Salutations to Both Sir & His Wife.
प्रियतम नें अलगाव लिखा है ख़त में और सन्देशों में 
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के क्लेशों में 

मानव देखा जाता है अब रंग, रूपों, और वेशों में 
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में 

देखता हूँ मैं जब जिसको सब रहते हैं आवेशों में 
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में 

खेतों में है आग लगी जीते हैं कुछ अवशेषों में 
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में 

ज्ञान अथाह भले ही हो नौकरी नहीं है रेसों में 
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में 

लोग स्वयं का मान बेंच देते हैं रुपयों - पैसों में 
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में 

ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में 
ज्यादा है कुछ बात नहीं बस तरह - तरह के कलेशों में 


यह मेरी पहली कविता है जब मैं रणवीर संस्कृत विद्यालय ( BHU,कमच्छा, वाराणसी ) में बारहवीं का छात्र था।
मैंने इसे " सुशील सुमन सर " की विदाई के उपलक्ष्य में गुरुदक्षिणा के लिए लिखा था, मुझे अवसर भी मिला अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का और मैंने ये कविता सुनाई। 

सुशील सुमन सर नें कविता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कविता बहुत ही अच्छी है पर इसकी दूसरी लाइन का प्रयोग बार - बार हो रहा है इसलिए थोड़ी कमज़ोर हो रही है बाकी कविता में विभिन्न विषय हैं, कविता में बहुत सारा सन्देश है, इन्हीं संदेशों के साथ ही मुझे तुममें बहुत सारी उम्मीदें दिख रही हैं । 

सुशील सुमन सर नें उस दिन बातों को कहने के क्रम में एक बहुत ही ख़ूबसूरत बात बोली थी, जिसका प्रभाव मेरे ऊपर हमेशा रहा है उनके लफ़्ज़ थे कि " विचार किसी के बाप की जागीर नहीं हैं जो कुछ ही लोगों के पास रहें विचार कोई भी दे सकता है और जरूरी नहीं की हमेशा जो बड़ा बोले वही सही हो, छोटे भी सही हो सकते हैं और होते हैं ।" 

बड़े दिनों बाद आज ये कविता मुझे मिली मैंने सोचा इससे पहले कि ये कहीं इधर - उधर हो इससे जुड़ी यादें और ये कविता आप सभी के साथ साझा ही कर लेता हूँ। 

सुशील सुमन सर को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ और मेरा प्रणाम।

11/03/2019

तुम्हारा मुल्क दहशत खा गया क्या

Wing Commander - Abhinandan
कोई पत्थर यहाँ पिघला रहा क्या 
कहो कोई कहीं से आ रहा क्या 

सुनो तो ग़ौर से क्या कह रहा है 
मेरे घर का पता बतला रहा क्या 

गए थे आबरू से खेलने तुम 
सुनाओ तो सही महंगा पड़ा क्या

 बहाया है बहुत ही ख़ून मेरा
बता जन्नत में गद्दी पा गया क्या

खिला जैसे निकल कर आ गई तुम
ज़रा देखो कमल मुरझा गया क्या

रुका हनुमान सा लंका समझकर
तुम्हारा मुल्क दहशत खा गया क्या 

तिरंगा झूमता है आसमाँ में 
मेरा भाई इसे लहरा गया क्या


तुम संग नैय्या पार करूँगा

Before - 5 year

इक तेरा चेहरा देखूँगा 
जीवन - भर दीदार करूँगा 

बहुत हुई ऐय्याशी यारा 
अब इक तुमसे प्यार करूँगा 

डूब रहा था मैं दलदल में 
देख नहीं पाता ये कल मैं 
पापों से मैं फूल चुका हूँ 
गुजरा कल मैं भूल चुका हूँ 

सबकुछ तुम्हें बताऊँगा मैं 
तनिक नहीं व्यभिचार करूँगा 

तुमको पाकर हर्षित हूँ मैं 
जीवन गतिमय विकसित हूँ मैं 
अन्धकार हटता जाता है 
अब प्रकाश तेरा आता है  

जीवन है रंगीन हमारा 
और इसे गुलज़ार करूँगा 

संकल्पित मन, वचन, कर्म से 
अपनाता हूँ एक धर्म से 
वही धर्म जो प्यार सिखाये 
मानवीय - संस्कार सिखाए 

इसी सादगी में रहकर के 
तुम संग नैय्या पार करूँगा 







10/03/2019

किसी मन्दिर की मूरत लग रही हो

Neel

सुनो मेरी जरूरत लग रही हो 
बहुत ही खूबसूरत लग रही हो 

जिसे बदला नहीं जाता जनम-भर 
किसी मन्दिर की मूरत लग रही हो 

बहुत ऊँचाइयों तक ले चले जो 
वही अतिशुभ मुहूरत लग रही हो 



07/03/2019

गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ

Happy Women's Day 

ना जाने दो अब और कहीं
गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ

बहना रक्षा की डोरी है
मैं उसका भइयादूज हूँ माँ

बचपन से लेकर आज तलक
तेरा आँचल मुझको भावे
तेरी गोदी में सर रखूँ
सो जाऊँ ऐसी नींद आवे
फिर क्या है जन्नत और स्वर्ग
फिर क्या मन्दिर क्या मस्जिद है
छोटा सा बच्चा बन जाऊँ
माँ, बस मेरी इतनी जिद है
मैं तेरा अपना बेटा हूँ
ना यादों का सन्दूक हूँ माँ

बहना मेरी परछाई सी
चलती रहती आगे पीछे
थोड़ा भी डाट लगाऊँ तो
वो देखे बस ऊपर नीचे
ना मुझसे आँख मिलाती वो
रोती अन्दर भग जाती वो
फिर हँसकर वो बाहर आती
कहती है भइया भूत बनो
शंकर, भोलेबाबा, काशी के
शुद्धरूप अवधूत बनो
वो मेरी रानी गुड़िया है
मैं उसका प्यारा भूत हूँ माँ

अब रही तुम्हारी बात प्रिये
तुम मेरे जीवनसाथी हो
मैं जलता हूँ गर दीपक सा
है प्यार तेल, तुम बाती हो
इतनी सुमधुर आवाज़ तेरी 
लगती है माँ की लोरी सी
जितना मन ऊपर भेजो तुम
मैं पतंग और तुम डोरी सी
हम दोनों हैं इक दूजे के
वो कोयल है मैं कूक हूँ माँ
हम दोनों कर्म करें मिलकर
वो गोली मैं बन्दूक हूँ माँ

भारत में अपनापन देखो
शबरी का दिल - दर्पण देखो
वो राम, राम गर कहे गए
सीता का पावन - मन देखो
उर्मिला बेचारी कहाँ गई
पति से वियोग उसका भी था
लक्ष्मण भटकें वन - उपवन में
कैसा दुर्योग ये उसका था
लड़कर यमराज से ले आई
प्राणों को सत्यवती जाकर
विष पी डाला सब मीरा नें
कान्हा की भक्ति में खोकर
इनकी गौरव - गाथा सम्मुख
मैं शब्दों में दो टूक हूँ माँ

अब वर्तमान इस भारत के
बारे में अनुसंधान करें
रौशन भारत करने वाली
महिलाओं का कुछ ज्ञान करें
पूरी सेना को धूल चटाने
वाली लक्ष्मीबाई थी
कल्पना उड़ी तो आसमान से
मिलकर वापस आई थी
मस्तानी पद्मावती प्रेम की
अद्भुद अमिट कहानी थी
पद्मा थी पतिव्रता यारों
मस्तानी तो दीवानी थी
सानिया और पी.वी सिंधू
मैदानों में डट जाती हैं
भारत का ध्वजा - पताका ले
सबसे ऊपर लहराती हैं
बबिता, पी. टी. ऊषा नें
अपने लक्ष्यों पे बस ध्यान दिया
इसलिए हमारे भारत नें
महिलाओं का सम्मान किया

मैं सुनो इसी वंशज का हूँ
इसलिए तेरे अनुरूप हूँ माँ 

ना जाने दो अब और कहीं
गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ

बहना रक्षा की डोरी है
मैं उसका भइयादूज हूँ माँ




02/03/2019

पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा

Rahul Gandhi Ji

पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा 

तू साठ साल न दै पाया 
अब तू सबका सोना देब्या 
आलू डइहिं सोना निकरी 
घर मा ना इक कोना देब्या 
अब तुहीं बतावा का करब्या 
बुद्धि चकराति अहै तोहर 
कइ ल्या बियाह दुलहिन लावा 
तू मजा करा बनके सौहर 
यातौ जस लरका अहा अबै 
लरिकै जइसे बर्ताव करा 
जेतना होय पावै कम बोला 
जनता मा ना दुर्भाव भरा 
निर्लज्ज बहुत होय गा बाट्या 
माई के बारे मा सोचा 
पूरा ई देश हँसत बाटै 
कुछ जान समझ ल्या तौ बोला 
अइसेन नीलाम करा इज्जत 
कुछ थोर बहुत जउनै बाटै 
तोहका सुन ल्या सुधरै चाही 
बुध्दि कुछ बाटै की नाही 

जउनै मुँह आवै नहीं कहा 

चालीस - पैतालिस उमरि अहै 
अब तक ना तू कुछ कइ पाया 
अपनै तू क्षेत्र नहीं देख्या 
केहू का न सुख दै पाया 
फिर तोहसे का उम्मीद रहै 
तू का कइ पउब्या भारत मा
आपन छत न सम्हार पाया 
तू का कइ पउब्या हर छत मा 
पहिले कुछ ट्यूसन कोंचिंग ल्या 
फिर तू भाषण खातिर आया 
बेटवा देख्या घर बचा रहै 
घर चोर बहुत सातिर आवा 
स्विस मा सब पइसा भरि आईं 
भउजी फिर से लूटै आईं 
लेकिन अब कहाँ लूट पउबू 
सब समझ गएन बेउहार हियाँ 
माई बेटवा घर वापस जा 
गिर गा सारा आचार हियाँ 
मेहमान नवाजी बहुत कीन 
मेहमान चला रस्ता नापा 
तू एक बार खोखला किहा 
भारत फिर से तू ना भापा 

ल्या बैग उठावा घरै बढ़ा

बस तुम्हरे दूइनौ के कारण
दद्दू कुछ बोल नहीं पायें
उनके काहे मन मोह लिहू
ओनहू नाही कुछ दइ पायें
विद्वान रहें वै बहुत मगर
उनके संगति गड़बड़ होइ गै
 गद्दी पै बइठे  रहें मगर
घर मलकिन तौ बंचड़ होइ गै
यह बरे कुछू न कइ पायें
सत्ता मा बस जागें सोएँ
गलती वै कउनो करे रहें
अइसेन तौ वै चुप नहीं रहें
अब जउन भवा होइगा छोड़ा
पपुआ तोहार होइ गा घोड़ा
अपने बेटवा का समझावा
मुड़वा मा कुछ बुद्धि डावा
मोदी बाबा जब डाटत थीं
चड्ढी पकड़े ऊ भागत थै
पगलाय जात है कबो - कबो
आँखी ऊ मारै लागत थै
खेलिस हरदम आइस - पाइस
ऊ अउर कुछू न कइ पाइस

बस आँख मिचौली करत रहा 

पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा 

01/03/2019

तुम साथ नहीं, ये गम न हो

नील 

तुम साथ नहीं, ये गम न हो 
पर प्यार हमारा कम न हो 

जिन यादों से दुनिया देखी 
उन यादों के मरहम न हों

चलती सनसनी हवाएँ हैं
पर आती नहीं दुवाएँ हैं
मैं नफ़रत की दीवारों को
तोड़ूँ सारे व्यभिचारों को 

ऐसा पल न हो जीवन में 
तुम पास रहो हमदम न हो

तुम किसी फूल की तरह खिलो
बन धार नदी की सदा मिलो
सागर से थोड़ा प्यार करो
मैं तुम्हें भरूँ, तुम मुझे भरो

इस कदर हमारा प्यार पले
उन्मुक्त रहें बन्धन न हो

जीवन में जितने मोड़ मिले
मुझको सारे बेजोड़ मिले
मैं खुलकर ये कह सकता हूँ
सबसे दूरी सह सकता हूँ

जिससे दूरी बनती जाए
हो और कोई दुल्हन न हो


मेरी आँखों में तेरा चेहरा है

Google

मेरी धड़कन में तेरी धड़कन है 
मेरी आँखों में तेरा चेहरा है 

मेरे लफ्जों में तेरी बातें हैं 
मुझे लगता है प्यार गहरा है 

जिस्म क्या रूह तक मेरी छू लो 
मुझमें खो जाओ ये जहाँ भूलो 
इश्क में है खुदा, खुदाई भी 
इश्क में प्यार है, जुदाई भी 

तुम ना आ पाये आज फिर मिलने 
मुझे लगता है घर पे पहरा है


27/02/2019

बहुत दिनों से माँ से बातें नहीं हुई



पूरी अभी तुम्हारी यादें नहीं हुई 
लगता है दिल से फरियादें नहीं हुई 

मैं रोता हूँ खुद को अब तनहा पाकर 
बहुत दिनों से माँ से बातें नहीं हुई 

जोगी के भेष मा भोगी हैं

ढोंगी - बाबा 

जोगी के भेष मा भोगी हैं 

खुद का वै किशन बतावथीं 
रोमंटिक गाना गावत थीं 
अंग्रेजी - पिक्चर वै देखैं 
गोपियन का साथ देखावत थीं 
पकड़ाय गएन कइयौ बाबा 
देख्या नाही नम्बर आवै 
पिछवाड़े पै डण्डा परिहैं 
लगब्या खुद ही कूदै - फांदै 
हम नहीं कुछू अब अउर सुनब 
जउनै देखब हम वही कहब 

सन्यासी नाहीं ढ़ोगी हैं 

हाँथन मा हाँथ मिलाय रहें 
चिकनी - चुपड़ी बतियाय रहें 
लइकिनियौ अब पगलानि अहैं 
बाबा खातिर दुबरानि अहैं 
इनहू के बुद्धि मरी अहै 
इनका का बोली चाड़ि अहैं 
बाबा का तौ समझै चाही 
उनपै समाज केतना थूकी 
अब अउर कुछू ना कहि जाई 
उनपै श्रद्धा न होए पाई 

कामुकता के वै रोगी हैं

गोड़े पै पीठि पै डण्डा
जब परै लाग खुलगा झण्डा
सारा सन्यास उतर भागी
मूड़े पै जब सोंटा बाजी
यैह बरे अबै समझाय रहिन
दलदल छोड़ौ, गोहराय रहिन
कुछ देखौ समझौ जान लियौ
कुछ बात हमारौ मान लियौ
न कुछू बताउब, अहन निडर
बोलथिं, पूछा बहुत मगर

बोलते नाही यै घोघी हैं  

26/02/2019

ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें

Chennai - Trip

ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें 
मिलती हैं मुझसे आकर मैं चाहूँ मुझमें ठहरें 

मैं क्या हूँ, मुझमें क्या है सबकुछ वो मुझे बताती 
जब भी लहरों को सुनता हूँ अपना मुझे बनाती 
मुझको मुझे मिलाती हैं वो मुझमें आकर तैरें 

ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें 

सारा जग है शोर मचाता मेरे अगल - बगल में 
पर वो नहीं सुनाई देता है मुझको उस पल में 
आवाजें आती हैं मुझ तक दिखे न इक भी चेहरे 

ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें 

लहरों पर लहरों को देखा साँझ हुआ मन गदगद 
तिस पर सूरज की किरणें दिखती हैं सुन्दर - अद्भुद 
डूब रहा था मैं खुद में वो मिलीं डुबा दी गहरे 

ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें 
मिलती हैं मुझसे आकर मैं चाहूँ मुझमें ठहरें 




19/02/2019

तुम्हारे होंठ का गर आचमन कर लूँ प्रिये

Akanksha Ji

कहो तो खुशनुमा अपना चमन कर लूँ प्रिये 
जमीं क्या आसमाँ को भी नमन कर लूँ प्रिये 

मिलेगा फल मुझे उस दिव्य चारो - धाम का 
तुम्हारे होंठ का गर आचमन कर लूँ प्रिये 

जुबाँ से जो बयाँ न हो सके वो खूबसूरत 
तुम्हारे रूप को, तुमको सनम कर लूँ प्रिये 

बहुत तड़पा चुकी हैं आप मुझसे दूर होकर 
अजी अब पास भी आओ सितम कर लूँ प्रिये 

रहूँ गाता तुम्हें हर वक़्त अपनी जिन्दगी में 
तुम्हारे गीत को अपना भजन कर लूँ प्रिये 

रहूँ संग - संग विधाता की बनाई सृष्टि में 
तुम्हारे नाम अपना हर जनम कर लूँ प्रिये


17/02/2019

मृगतृष्णा से सम्बन्ध न हो

Akanksha Ji
विश्वास रहे पर अंध न हो 
मृगतृष्णा से सम्बन्ध न हो 

जब प्रेम शाश्वत सत्य दिखे 
उस पर कोई प्रतिबन्ध न हो 

गतिशील बनाओ जीवन को 
उन्नति के पथ पर बढ़ो सदा 
इतना खुदपर विश्वास रहे 
जीवन में कोई द्वंद्व न हो 

जो ठान लिए वो कर गुजरें 
जीवन के लक्ष्य से न मुकरें 
माँ और पिता के शरण रहें 
आज़ाद रहें स्वच्छंद न हों 

तुम प्रेम लिखो सौ बार मगर 
सामाजिक - गतिविधियाँ भी हों 
भावों की हो परिपक्व - दशा 
कविता हो केवल छ्न्द न हो 

जो बीत गया वो जाने दो 
अपनों को गले लगाने दो 
जीवन में ऐसे कर्म करो 
खुश्बू हों, पर दुर्गन्ध न हो 

मुझपे वो चाल चले जायें 
हर बार मारने को आयें 
माता के भाई होने से -
मामा तो हों, पर कंस न हों 

कितने भी तुम विख्यात रहो 
कितना भी ज्ञान अथाह रखो 
जीवन को ऐसे सरल रखो 
जीवन में कोई दम्भ न हो 

15/02/2019

मुहब्बत ज़ख्म है जन्नत मुहब्बत

At New Kashi Vishwanath in BHU.
मुहब्बत है ख़ुशी नफ़रत मुहब्बत 
मुहब्बत हार है हिम्मत मुहब्बत 

मुहब्बत की बड़ी बातें सुना हूँ 
मुहब्बत ज़ख्म है जन्नत मुहब्बत 




13/02/2019

जीवन भर हमरे साथ रह्यू

Memory of Chinmaya University

जीवन भर हमरे साथ रह्यू 
जीवन भर हमरे साथ रह्यू 

हमरे भइया भउजी अच्छे 
उनके सबके प्यारे बच्चे 
सब तोहका चाची मानत थीं 
फोटू देखतै पहिचानत थीं 
फोनवा पै हमसे कहत रहें 
हमहू मिलबै अब चाची से 
छोटकी बहिनी हमसे बोलीं 
बतियाइब नवकी भाभी से 
मम्मिउ तोहका अपनाय लिहीं 
पहिलेन ऊ लड्डू खाय लिहीं 
पापा का जइसेन खबर मिली 
अँखियन के तारा होय गयू 
हमरे घर मा सब अच्छे हैं 
जेतना मन चाहै पड्यू - लिख्यू 

जीवन भर हमरे साथ रह्यू 
जीवन भर हमरे साथ रह्यू 

ना चाही हो घोड़ा, हाँथी 
हमका चाही जीवनसाथी 
जेहिके साथे जीवन काटब 
आपन सुख - दुःख संग संग बाँटब 
लड़ि मरि के खाब - खियाइब सब 
सपना हम पूर कराइब सब 
दुनिया वालेन के काम अहै 
वै चिल्लइहैं, चिल्लाए द्या 
हरदम हम तोहरे साथ रहब 
उनका सबका तू जाये द्या 
ई वादा है हमार तुमसे 
आपन बियाह होई झम से 
दुनिया केतनीउ शैतान बनै 
केतनौ तुमका परशान करै 
हम जउन कही बस सुनत रह्यू 
छोड़िउ ना संगे - साथ बह्यू 

जीवन भर हमरे साथ रह्यू 
जीवन भर हमरे साथ रह्यू 

तोहरौ आपन बिचार होइहैं 
जे जगह - जगह पै समझइहैं 
मिलके जीवन - गति बढ़त रही 
सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़त रही 
जेतनी उन्नति हम कइ पउबै 
ओतने ऊपर तोहका लउबै
तोहका हम आपन मान लेहे 
तोहका आखिर पहिचान लेहे 
बस हमहीं बोली ठीक नहीं 
बोला आखिर आजादि अहा 
हमरे घर आवै का तोहका 
अब पापा के औलादि अहा 
मन मा जब जउन रहै तोहरे 
कहि दिहू न ज्यादा कष्ट सह्यू 
ई कउनो नहीं जरूरी है 
हम जउन कही तू वही कह्यू 

जीवन भर हमरे साथ रह्यू 
जीवन भर हमरे साथ रह्यू 





09/02/2019

का हो दादा रामबचन

Goolge

का हो दादा रामबचन 

मूँछ तोहारौ फरिकै लाग 
देखा हम पानी मा आग 
जब से बेटवा अफ़सर होइगा 
भाव तोहारौ अब सर होइगा 
पैसा, गाड़ी, गहना माँग्या 
खाना, पीना , रहना माँग्या 
समधी के इक बाल न पूछ्या 
का बीतत है हाल न पूछ्या 
तोहका सब स्टंडर चाही 
तोहरेव बिटिया का बर चाही 
सुना ध्यान से जउन कहा सब 
बेटवा बेंचै जात अहा अब 

बिटिया से तू लइके धन 

तोहका एक सिकन्दर चाही 
खुला गगन ई अम्बर चाही 
कला, संस्कृति सीख्या नाही 
तोहका केवल नम्बर चाही 
काहे हरदम हड़कावत ह्या 
काहे ओहके गरियावत ह्या 
थोर से ओहके अबै जियै द्या 
घूमै,टहरै, खाय पियै द्या 
ज्यादा गरम करा न पारा 
माना तीर बहुत तू मार् या 
वहू के कुछ अभिलाषा होई 
कुछू बनै के आशा होई 

बेटवव के अब पढ़ ल्या मन

घर - दुवार के पता नहीं बा
बहुत फकीरी छाइ बाटै
जब आई बाबा के पेन्सन
बुवौ घरे पै धाई बाटै
जीवन नाही नरक होइ गवा
बाबौ का अब स्वरग होइ गवा
नहीं देखातै अब घर केहू
कपड़ा का अब धोवै रेहू
आँसू नाही खून चुवत है
बहुत गरीबी है, रोवत है
होली अउर दिवाली नाही
बिन पैसा घरवाली नाही

ओहके खातिर कउन चमन

पुलिस गाँव मा घुसी अहै अब
कउनो शायद चक्कर होइगा
जर - जोरू के बात करिन
दूनौ भाई मा टक्कर होइगा
मूड़ फुरौव्वल कइके राजू
दुइनौ अस्पताल मा बाटें
एक दिना मा करें लड़ाई
दुसरे दिन घर पतरी चाटें
होतै ठीक पुलिस घर धमकी
पइसा लइके ठोंकेस सोटा
बप्पा सर पै हाँथ रखे सोचैं
ई सिक्का खोंटा होइगा

नहीं बतावा ढ़ेर जतन

लागत है सठियात अहा तू
दिन पै दिन बौरात अहा तू
लरिकन के दौड़ावत बाट्या
मतलब बिना, थकावत बाट्या
ई लै आवा, ऊ लै आवा
कुछ ना कुछ तौ अबै खियावा
छिनभर मा तोहका सब चाही
नहीं बना अब एतना हाही
राम नाम तौ लिहा नही तू
दान - पुन्न कुछ किहा नहीं तू
गुस्सा नाक पै रखा नाही
बाट्या तू अब बच्चा नाही

जब देखा तानत थ्या गन










तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ



तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ 
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ 

लेकर चलना मुझे भी तू जाए जहाँ 
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ 

तुमको पलकों पे रखा हूँ शाम ओ सहर 
दिल में उठती तरंगें हैं , उठती लहर 
नीदें मेरी चुराने की क्या दूँ सज़ा 

दिल की धड़कन बढ़ाती है तू आजकल 
संग - संग रहना मेरे साथी तू साथ चल 
रखना मुझको भी हमदम, रहना जहाँ 


मैं गुज़रा हुआ ज़माना हूँ

Google 

तुम मुझे भुला ना पाओगी 
मैं किस्सा बहुत सुहाना हूँ 

मैं सदा तुम्हें याद आऊँगा 
मैं गुज़रा हुआ ज़माना हूँ  

फिर से आओ संसार - जियें 
फिर से आओ इक साथ चलें 
फिर नदियों में कलकल हो 
फिर से मन में कुछ हलचल हो 
मुझपे थोड़ा विश्वास करो 
फिर से आओ आगाज़ करो 

कल तक जो साथ तुम्हारे था 
देखो तो वही खज़ाना हूँ 

जब तक हम दोनों संग - संग हैं 
तब तक ये चाँद सितारे हैं 
जब तक संगम हम दोनों का 
बस तब तक ही ये प्यारे हैं 
अब पास महज़ कुछ यादें हैं 
जीवन की यही मुरादें हैं 

फुर्सत हो तो, आ जाना तुम 
मैं बन्दा वही पुराना हूँ 


08/02/2019

मेरी माँ का हाँथ मेरे सर रहता है

From Google

सबके सर पर इक - इक छप्पर रहता है 
वो दुखिया है शायद बेघर रहता है 

मैं बढ़ता हूँ इसमें नहीं अजूबा कुछ 
मेरी माँ का हाँथ मेरे सर रहता है 

एड़ी से चोटी तक ज़ोर लगाओ तुम 
हर पंक्षी के पास सुनो पर रहता है 

बाहर का माहौल बहुत ही बत्तर है 
जब तक बहन नहीं आये, डर रहता है 

मत घबराओ प्रिये ! तुम्हारी यादों का 
 इस दिल में मदमस्त - समन्दर रहता है 

06/02/2019

सुना लरिकवा करिया रहि गा

Me With My One Of Best Brother Manu Bhai 

सुना लरिकवा करिया रहि गा

सेन्ट मार के जाए ऑफिस 
फेरन - हन्डसम खूब चपोतिस 
रगरेस पूरा चेहरा आपन 
रोजै गरल - फ्रेंड के ख्वाहिस 
तनिकौ नहीं बदल पाएस ई 
जइसे रहल हौ, वइसे रहि गा   

सुना लरिकवा करिया रहि गा

हीरो बनबै कहत रहा ऊ 
घूमत,नाचत फिरत रहा ऊ 
चक्कर मारै गली - गली के 
प्यार मुहब्बत करत रहा ऊ 
पप्पा बोलेन माई से के, देख 
बेटवना तोहर बहि गा 

सुना लरिकवा करिया रहि गा

दारू, हुक्का, चिलम लगावै 
ऐय्यासी मा खूब लुटावै 
कहनी - करनी मा अंतर हौ 
रात - रात भर घरे न आवे 
कइसे लाई वापस ओहके 
नाही कउनो जरिया रहि गा 

सुना लरिकवा करिया रहि गा

मारै - पीटै महतारी के 
झरी लगावै ऊ गारी के 
उल्टा - सीधा बकत रहत है 
खात पियत है परा रहत है 
तनिकौ नहीं चलै पावै अब 
लरिका नाहीं लढ़िया रहि गा 

सुना लरिकवा करिया रहि गा

दादी जब - जब काम बतावें 
गुर्रावे ,संग आँख दिखावे 
दादा ओहके देख जरत हैं 
बोलें, काहे नहीं मरत है 
पूरा गाँव मोहल्ला बोले 
पेट गइल अब हड़िया रहि गा 

सुना लरिकवा करिया रहि गा



05/02/2019

मैं लिखता हूँ शब के साये में बैठा

BHU - Ruiya ( Sanskrit Blok )

वो कहता है उसको जहाँ झुकाना है 
मैं कहता हूँ मुझे दिलों तक जाना है 

सबका अपना - अपना यहाँ सफ़र यारों 
सबको अपनी - अपनी मंज़िल जाना 

मैं लिखता हूँ शब के साये में बैठा 
उनको अब्भी भी महफ़िल तक जाना है 

बच्चों को खुश रखते हैं पापा मेरे 
ज्ञानी हैं, फिर भी ज़ाहिल तक जाना है 

मैंनें  भी कुछ सोच रखा है जीवन में 
इस साहिल से उस साहिल तक जाना है 

भूखों की नज़र हर घड़ी रोटी पे रही है



आशिक की नज़र हर घड़ी चोटी पे रही है 
गिद्धों की नज़र हर घड़ी बोटी पे रही है 

मानो नहीं मानो मगर ये सत्य है साहब 
भूखों की नज़र हर घड़ी रोटी पे रही है 


04/02/2019

दिल की बात निकलकर बाहर आ जाए



बातें बोलो आँख सजल कर आ जाएँ 
झूमें नाचें और सम्हलकर आ जाएँ 

इतना प्यार करो, इतनी बेचैनी दो 
दिल की बात निकलकर बाहर आ जाए 

मौका दो  उसको, पूरी आज़ादी दो 
क्या मालूम संसार बदलकर आ जाए

इतना उन्हें खिलाओ, इतनी सेवा दो
बाबा सौ वर्षों तक चलकर आ जाएँ 


मेरी माँ सामने जब हो उदासी दूर रहती है

कन्हैय्या यशोदा और देवकी के साथ 

दवा लेता हूँ अक्सर और खाँसी दूर रहती है 
मुहब्बत गर हकीकत हो तो राशी दूर रहती है 

बहुत ही याद आती है तुम्हारी अब अकेले में 
 मेरी माँ सामने हो तो उदासी दूर रहती है 

जिसे मैं चाहता हूँ हे प्रिये! मैं नाम दे बैठा
 है इस दिल में, मग़र कॉलेज से थोड़ा दूर रहती है 

02/02/2019

कविता, नज़्मों, गज़लों सी बन जाती है



वो हँसती है मेरा दिल बहलाती है 
दिल की सारी बातें मुझे बताती है 

उससे बातें कर के मेरा दिन गुज़रे 
उसके फोटो संग रातें कट जाती हैं 

ज़िक्र हमारा करती बातों - बातों में 
बातों - बातों में परिचय दे जाती है 

Fb, Whats app, Insta ,Twitter सब पे है 
सबसे मुझको इश्क बहुत समझाती  है 

दिल की बातें वो भी कहना चाहे पर 
ना जाने क्यों कहने में शर्माती है 

दिन, तारीख़ महीना सबकुछ याद उसे 
इक मुद्दत से मुझको पढ़ती जाती है

छोटी - छोटी बातों पर लड़ती रहती
वो मेरी जीवन - साथी बन जाती है 

जब भी उसको लिखने बैठा सिद्दत से 
कविता, नज़्मों, गज़लों सी बन जाती है 


तुम्हें नसीब सोचता हूँ मैं




बहुत अजीब सोचता हूँ मैं 
उसे रक़ीब सोचता हूँ मैं

आज इज़हार करूँगा तुमको 
रोज़ तरक़ीब सोचता हूँ मैं 

बाँह में तुम बिखर गई मेरे 
तुम्हें हबीब सोचता हूँ मैं

एक तुम हो, हसीन जीवन है 
मुझे, अमीर सोचता हूँ मैं 

सीखता हूँ मैं बारहाँ तुमसे 
तुम्हें अदीब सोचता हूँ मैं

आज सबकुछ मेरे तुम्हीं तुम हो
तुम्हें नसीब सोचता हूँ मैं 








29/01/2019

बातों - बातों में गज़ले बन जाती हैं

Neel

बातों - बातों में घर तक आ जाती है 
बातों - बातों में दुनिया बन जाती है 

बातों - बातों में निकले हैं शे'र कई 
बातों - बातों में गज़ले बन जाती हैं 

बातों - बातों से दुश्मन बढ़ते जाते 
बातों - बातों में संधि हो जाती है 

बातों - बातों में बहनों से प्यार हुआ 
बातों - बातों में मुझको पा जाती हैं 

बातों - बातों में वर्षा की बात चली 
बातों - बातों में बारिश हो जाती है 

बातों - बातों में माँ नें थप्पड़ मारा 
बातों - बातों में ही खुद रो जाती है 

बातों - बातों में सपनों नें रुख़ बदला 
बातों - बातों में किस्मत बन जाती है 

बातों - बातों में मेरी जाने - जाना 
बातों - बातों में मुझको बहलाती है 

बातों - बातों में जीवन कट जाता है 
बातों - बातों में यादें रह जाती हैं 

28/01/2019

" नील " तमाशेबाज़ नहीं है, दर्पण है



Akanksha Joshi

ना जाने क्यों आज बहुत वो बेमन हैं 
उनको कोई छोड़ गया है, उलझन है 

मेरा अब तक दुश्मन नहीं बना कोई 
उनकी ख़ातिर पूरी दुनिया दुश्मन है 

जितनी माँग हुई थी, वो न दे पाए 
शादी में उखड़ी - उखड़ी सी समधन है 

सबकुछ छोड़ सकूँ तुझको कैसे छोड़ू 
तू ही तो मेरी बहना! जीवन - धन है 

इक अर्शे के बाद सही उस तट जाओ 
मुक्ति मिल जायेगी प्यारे! संगम है 

पूरी दुनिया मुझको सुन्दर दिखती है 
इस पल मेरे साथ, हमारी हमदम हैं 

तुमको हँसना है मुझपे, हँसते रहना 
" नील " तमाशेबाज़ नहीं है, दर्पण है 

22/01/2019

किसी पे आ गया जो दिल तो मुहब्बत कीजे

Neel At Chinmaya Vishwavidyapeeth

तमाशाई बहुत हैं लोग मगर क्या कीजे
किसी पे आ गया जो दिल तो मुहब्बत कीजे 

हौंसलों में उड़ान भर के आसमाँ चूमूँ 
मेरे हिस्से की आज फिर से इबादत कीजे 

छोड़ देते हैं सब, हमराज़ नहीं है कोई 
खुद ही, खुद को सदा ख़ुश रखने की आदत कीजे 

मुझे जो बोलना है बोल, मग़र प्यारे सुन 
नहीं परिवार को कुछ कहने की जुरअत कीजे 

पाक - ए -हिज्राँ की नज़र है जो बढ़ रहा हूँ मैं 
छोड़ भी दीजिये अब यूँ नहीं कुर्बत कीजे 

काम करना है अगर देख कभी सड़कों पर 
अपने इस मुल्क के बच्चों की हिफ़ाजत कीजे 

छोड़कर द्वेष, भेदभाव सभी आज यहाँ 
सारा संसार मिलाकर इसे भारत कीजे 


पाक - ए -हिज्राँ - विरह का पवित्र दुःख 
कुर्बत - निकटता , सामीप्य 

21/01/2019

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा

Neel At Panjabi Dhaba In Kerala.

जिन्दगी की कश्मक़श में उलझनें 
आती हैं लेकिन 
उलझनों से भागना सीख़ा नहीं मैंने 
कभी भी 
जब तलक हैं प्राण, हैं साँसें 
मुक़म्मल जिन्दगी है 
तब तलक मैं भी तुम्हारा साथ 
देता ही रहूँगा 

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा 

तुम हजारों क्या करोड़ों लो 
परीक्षाएँ हमारी 
या मुझे दे दो अभी से आप 
अपनी ज़िम्मेदारी 
मैं तुम्हें उन चाँद - तारों तक नहीं ले 
जाऊँगा पर 
मैं तुम्हें नज़्मों में अपने घोलकर
ऐसे कहूँगा 

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा 

इश्क क्या है क्या मुहब्बत और ये 
नफ़रत भला क्या 
तुम हमारे पास हो जब तो कहो 
सोहरत भला क्या 
मानता हूँ मैं मुकम्मल इश्क का 
लम्बा - सफ़र है 
तुम जिधर बहती रहोगी मैं उधर 
बहता रहूँगा 

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा

तुम नहीं चिन्ता करो बस साथ
यूँ देती रहो तुम
हाँथ से अपने सदा ये हाँथ
भर देती रहो तुम
ये भरा संसार दुःख देता रहा
सदियों तलक
मैं भरे संसार का दुःख छोड़कर
आगे बढूँगा

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा

चाहतें इतनी हमारी संग तुम्हारे
घूम लूँ मैं
तुम मुझे यूँ देखती जाओ तुम्हें
अब चूम लूँ मैं
और फिर इन मुट्ठियों में हो भरा
संसार अपना
खूबसूरत ज़िन्दगी संग खूब मैं
सपनें गढ़ूँगा

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा

09/01/2019

मेरी धड़कन में तेरी धड़कन है

Pic from google " Vivah Movie "

मेरी धड़कन में तेरी धड़कन है 
मेरी आँखों में तेरा चेहरा है 
मेरे लफ्जों में तेरी बातें हैं 
मुझे लगता है प्यार गहरा है 

जिस्म क्या रूह तक मेरी छू लो 
मुझमें खो जाओ ये जहाँ भूलो 
इश्क़ में है खुदा खुदाई भी 
इश्क़ में प्यार है जुदाई भी 

तुम न आ पाये आज फिर मिलने 
मुझे लगता है घर पे पहरा है 

मेरी धड़कन में ...... 


ये है चिन्मया परिवार

Chinmaya Family 


ये है चिन्मया परिवार, ये है चिन्मया परिवार 
जिनके उच्च - विचारों से तर जाता है सारा संसार।।

ये है चिन्मया परिवार ..... 

जीवन का दर्शन सिखलाए, मन के सारे द्वंद्व मिटाये 
गीता, वेद और उपनिषदों का जो सारतत्व समझाये 

मानों जीवन की गहराई पर फलते हों शुद्ध - विचार 

ये है चिन्मया परिवार ..... 

प्राचीन - अर्वाचीन मिलाकर, प्राची और प्रतीची पाकर 
गुरुजन ज्ञान बाँटते प्रायः, हम सब शिष्यों को समझाकर 

जैसी उत्तम - प्रकृति यहाँ कि वैसे ही शिक्षक का प्यार 

ये है चिन्मया परिवार ..... 

जीवन क्या है वही बतायें, स्वामी जी शुभ - राह दिखाएँ 
चिड़िया चहकें, कोकिल कूँकें, मद्धम धीमी बारिश आये 

ऐसा दिव्य, मनोहर, पावन है ये शंकर का घर - द्वार 

ये है चिन्मया परिवार ..... 

हिल - मिलकर रहते हैं सारे, प्यारे बच्चे सभी यहाँ रे   
जैसे उपवन में हों फूल, कई तरह के न्यारे - न्यारे 

सुन्दर - धरती पर ये स्वर्गरूप है ईश्वर का उपहार 

ये है चिन्मया परिवार, ये है चिन्मया परिवार 
जिनके उच्च - विचारों से तर जाता है सारा संसार।।

ये है चिन्मया परिवार .....


Chinmaya Vishwavidyapeeth


04/01/2019

इश्क का भी कोई ठिकाना ना

Serial & Film Writer at Bollywood - Prabhat Bandhulya  Bhaiya 


इश्क काफ़िर है, मेरे जैसा है 
इश्क का भी कोई ठिकाना ना 

आँख में प्यार नहीं है उसके 
आँख में है महज़ फ़साना ना 

गलतियाँ उसने मेरे सर रख दी 
और कुछ था नहीं बहाना ना 

इश्क के बाद हूँ मैं दर्शन में 
यार अब फ़िर करीब आना ना 

चलो कुछ तो बचा है जीने को 
और अब आग तुम लगाना ना 

प्यार कर गीत, ग़ज़ल, कविता लिख 
प्यार में है बहुत ख़ज़ाना ना 

बोलता है तो लोग सुनते हैं 
शे'र ही बोल, ग़ज़ल गाना ना 

"नील"आखिर कहाँ तू जाएगा 
क्रूर हैं लोग, ये ज़माना ना   

02/01/2019

समुद्री - लहरों सी तुम

नील 

तुम बिल्कुल समुद्री - लहरों सी हो
जितनी तेज करीब आती हो 
उतनी ही तेज वापस जाती हो, मुझे अकेला छोड़ 
तुम्हारा समुद्र सा ठहराव जरूर है मुझमें 
पर समुद्री - लहरों सी तुम मुझमें नहीं ठहर पाती बहुत देर तक 

26/12/2018

Kerala to Mumbai

 यह एक यात्रा की घटना है इसमें जो भी पात्र हैं वो वास्तविक हैं और कुछ को मैं जानता हूँ कुछ अन्जान।



कल्यान रेलवे स्टेशन -  (23/12/2018 - Sunday)

रिक्सा वाले भाई साहब - कहाँ जाना भाई बोलो, बताओ तो सही मैं छोड़ देता हूँ।
नील - सर वो तो सही है पर मुझे खुद को नहीं पता मुझे कहाँ जाना है ?
हाँ अगर आपके पास मोबाइल हो तो एक कॉल करके बता सकता हूँ कहाँ जाना और क्या करना है।

( तब तक दूसरा ग्राहक पाकर निकल लिया वो, दूसरे रिक्सा वाले से  )

नील - हेल्लो, हेल्लो भाई साहब ! आपके पास मोबाइल है क्या ?
रिक्सा वाले भाई साहब - हाँ है, क्यों ?
नील - भइया एक कॉल करना है
रिक्सावाले भाई साहब - क्यों तुम्हारे पास मोबाइल नहीं है क्या ?
नील - है ना सर ! पर स्विच ऑफ़ है और मुझे एक बहुत जरुरी बात करनी है।

( ऊपर से नीचे तक देखते हुए )

रिक्सावाले - क्या नाम है ?
नील - नीलेन्द्र है भैया
रिक्सावाले - नहीं, नहीं पूरा नाम बताओ
नील - नीलेन्द्र शुक्ल " नील "
रिक्सावाले - ब्राह्मण हो ?
नील - जी हाँ।
रिक्सावाले - लगते नहीं हो यार Identity Card है क्या कोई ?
नील - इन्सान लग रहा हूँ या नहीं सर !
रिक्सावाले - भाई बुरा मत मानना लेकिन देखने में आतंकवादी भी इंसान ही लगते हैं।
नील - हाँ वो तो है सर, पर अभी आप मेरी सहायता कर रहें हैं या नहीं
रिक्सावाले - बेटा माफ़ करना पर इस मामले में मैं थोड़ा सचेत रहता हूँ, इसलिए मैं आपकी मदद नहीं कर सकता।
नील - Okay Okay Sir! No Problem Thank You ..

( ये सब सुनते हुए दूसरे भाई साहब ने कहा )

भाई साहब - किससे बात करनी है भाई?
नील - जिनके पास जाना है उन्हीं भाई साहब के पास।
भाई साहब - भाई लफड़े वाला नं. तो नहीं है ना
नील - नहीं सर !मैं आपके सामने ही बात करूँगा, नहीं तो एक काम करिये पहले आप बात करिये मैं बाद में कर लूँगा।
भाई साहब - लो भाई अब इतना भी शर्मिंदा न करो।

Second Scene -

नील - Hello, Hello हाँ सुरेन्द्र भाई
सुरेन्द्र - हाँ भाई, कौन ?
नील - मैं नीलेन्द्र, वो विवेक भाई ने आपसे बात की थी न मेरे बारे में
सुरेन्द्र - हाँ, हाँ नीलेन्द्र भाई नमस्कार, कहाँ हो आप ?
नील - मैं कल्यान स्टेशन पे खड़ा हूँ सर।
सुरेन्द्र - अच्छा ! पर यार अभी तो 4 ही बजे हैं और मेरी छुट्टी 8 बजे तक होगी
नील - कोई नहीं भाई तब तक मैं इधर - उधर घूमता हूँ, और हाँ ये नं. मेरा नहीं है। मेरा मोबाइल  स्विच ऑफ है So I'll call you ..
सुरेन्द्र - ठीक है भाई! Okay .

Third Scene -

( Mobile भाई को देकर धन्यवाद भाई, घूमते - घूमते एक खाली मोबाइल की दुकान पर )

नील - Hello कैसे हैं सर ?
दुकानवाले - ठीक हूँ भाई।
नील - मुझे आपसे एक जानकारी चाहिये थी
दुकान - जी पूछिए
नील - Actually मेरे No. की Incoming Call बंद हो गई है तो अभी क्या करूँ ?
दुकान - कितने दिन हुए ?
नील - बस यहीं  कुछ 2 - 4 दिन ही हुए हैं।
दुकान - कौन सी सिम है ?
नील - Idea की है भाई
दुकान - एक काम करो 35 वाला Recharge कराओ चालू हो जायेगी
नील - ( सशंकित मन से ) 35 वाले में चालू हो जाएगा ना भाई, उससे अधिक तो नहीं कराना पड़ेगा, और एक बात इस 35 वाले में मुझे पैसे भी मिलेंगे या सिर्फ Incoming ही Start होगी।
दुकान - नहीं नहीं पैसे भी मिलेंगे
नील - तो एक बात बताना Full Talk Time कितने पे है ?
दुकान - 95 सर !
नील - Okay sir कर दीजिये, और ये Mobile Charging पे लगा देते तो अच्छा होता भइया।
दूकान - हाँ हाँ क्यों नहीं, लाओ इधर दो।


 ( Mobil Shop के Just बगल शुध्द शाकाहारी होटल, में चाय पीने के लिए पहुँच कर )

नील - दद्दू  एक चाय मिलेगी !
दादा - हाँ जरूर बेटा क्यों नहीं, हे देखो बाबू को चाय दो।
( बाबू सुनते ही )
नील - कहाँ के हैं आप दद्दू मुम्बई के ही या बाहर के ?
दादा - बेटा हम तो बनारस के हैं, क्यों ?
नील - नहीं वो आपने बाबू कहा ना मुझे, इसलिए मुझे लगा की आप उसी तरफ के होंगे।
दद्दू हमहूँ बनारस 6 साल रहली ह, टूटल - फूटल भोजपुरी हमहूँ के आवेला।
                                   ( चाय पीते हुए )
अच्छा दद्दू एक बात पूछीं
दादा - हाँ हाँ बेटा पूँछो
नील - केतना साल हो गइल मुंबई रहत
दादा - यही 22 - 25 साल भइल होइ बेटा
नील - एक बात बतावा कहाँ ज्यादा सुकून हौ, बम्बई म, की बनारस म।
दादा - अब का कहीं बेटा आपन घर अपनै होला, घरा तौ खैर इहौ अपने हौ, लेकिन रजा बनारस के मजा कुछ औरे हौ।
नील - सही कहला दद्दू जौन स्वाद बनारस के चाय में हौ, ऊ केहरियो देखे के नाही मिलेला।
बहुत दिन बाद " चौचक चाय " पीली ह, मजा आ गएल
केरला में तौ अइसन चाय भेंटाते नइखे।
दादा - केरला में रहा ला का बचवा ?
नील - हाँ दद्दू! केरले में पढ़ी ला
  - कौन दर्जा म हउआ ?
नील - दद्दू, संस्कृत से M.A करत हई





दिल की बातें दिल तक हों तो बेहतर है

Neel With Grand Pa


इस घर से उस घर की बातें बेहतर हैं 
इसकी उसकी सबकी बातें बेहतर है 

इससे - उससे कह के न पछताना तुम 
दिल की बातें दिल तक हों तो बेहतर है 

काल चक्र की सुइयाँ जैसे बढ़ती हैं 
वैसे ही तुम भी बढ़ते तो बेहतर है 

लोगों में परिवर्तन लाकर क्या होगा 
जीने दो, जो जैसा है वो बेहतर है 

उसके अन्दर सही - गलत क्या देखे है 
खुद के अन्दर झाँक वही अब बेहतर है 

खोज - बीन के बाद जहाँ से जो पाया 
वही मुहब्बत मेरे खातिर बेहतर है 

एसी, कूलर, महल , भवन सब फीके हैं 
माँ का गन्दा आँचल मुझको बेहतर है 

बाबा के चेहरे पर शिकन नहीं अब तक 
बाबा अब भी हम लोगों से बेहतर हैं 

06/12/2018

आज के दौर को पहचानने की जुर्रत है

My love My Dear Daughter 
आज के दौर में लोगों को कहाँ फुर्सत है 
आज के दौर में, सबकुछ जो बनी दौलत है 

आज के दौर में, रख ले जहाँ को कदमों में 
आज के दौर को पहचानने की जुर्रत है 

आज के दौर में, कुछ भी नही है पहले सा 
आज के दौर में चहुँओर बनी दहशत है 

आज के दौर में भक्ति हुई है दंगाई 
आज के दौर में जो कटघरे में कुदरत है 

आज के दौर में, सबकुछ सड़ा - गला मिलता 
आज के दौर में, आखिर वो कहाँ  लज्जत है 

आज के दौर में भी यूज़ नेट नही करते 
आज के दौर में, ईश्वर की बड़ी रहमत है 

आज के दौर में भी प्रेमिका नहीं इक भी 
आज के दौर में सबकुछ बनी मुहब्बत है  

रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...