07/09/2018

राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

Neel

नही कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

जब से मेरा जन्म हुआ है
व्यक्त हूँ मैं, अव्यक्त नही हूँ

मुझे हर जगह भेद दिखे है
सुखद - दुखद परिवेश दिखे है
यथाशक्ति सब देखूँ - समझूँ
किसी का अन्धा भक्त नही हूँ

नही कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

रक्षक , कृषक , गरीबों का हूँ
इस धरती भारत माँ का हूँ
मरते हुए उन्हीं देवों की
साँस बनूँ मैं रक्त नही हूँ

नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

भूत - प्रेत चण्डाल के जैसे
है मन महाकाल के जैसे
मुझसे इतना नही डरो तुम
इतना भी मैं सख़्त नहीं हूँ

नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

खुद को मुझ तक लाकर देखो
अपना मुझे बनाकर देखो
जीवन अर्पित कर दूँगा बस
बैठा हूँ मैं , मैं पस्त नही हूँ

नहीं कोई ज्ञानी - ध्यानी हूँ
राग - द्वेष विमुक्त नही हूँ

जब से मेरा जन्म हुआ है
व्यक्त हूँ मैं , अव्यक्त नही हूँ ।

06/09/2018

नज़र कैसे मिलाऊँ मैं

Give Me Right Path...

मेरे अन्दर छुपा है क्या
तुम्हें कैसे दिखाऊँ मैं

नज़र के सामने हो तुम
नज़र कैसे मिलाऊँ मैं

मेरे अन्दर .......

बहुत ही सुर्ख़ - आरिज़ हैं
सुनो इस वक्त बारिश है
नही जाओ युँ ही बाहर
मेरी कुछ और साजिश है

तुझे देखूँ , तुझे सोंचूँ
तुझे खुद में ही पाऊँ मैं

मेरे अन्दर ......

हया अपनी हटाओ तुम
मुझे साक़ी पिलाओ तुम
ज़रा रुख़्सार को अपने
हमारे पास लाओ तुम

गुलाबी - होंठ से तेरे
ये लब कैसे मिलाऊँ मैं

मेरे अन्दर ......

बहुत ही खूबसूरत है  बनाया
तुमको कुदरत नें
हमारे दिल में इक हलचल
मचा रखी है क़ुर्बत नें

मेरा मन हर घड़ी कहता
तुम्हें दुल्हन बनाऊँ मैं

मेरे अन्दर ......

मेरे अन्दर छुपा है क्या
तुम्हें कैसे दिखाऊँ मैं

नज़र के सामने हो तुम
नज़र कैसे मिलाऊँ मैं 

आकाश में उड़ जाने दे

Akash & Neel

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में, उड़ जाने दे

जुड़ जाने दे जुड़ जाने
मुझको हवा संग जुड़ जाने दे

कुछ स्वप्न हैं कुछ ख्वाब हैं
हर पल यहाँ इक आप हैं
इस राह में बेचैन हूँ
उस राह में मुड़ जाने दे ....

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में , उड़ जाने दे

कर दे मुझे आजाद तू
न कर मुझे बर्बाद तू
वो मञ्जिलें हैं , मञ्जिलें
मुझको उधर बढ़ जाने दे

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में, उड़ जाने दे

है लक्ष्य बस मेरा यही
तू साथ दे सब है सही
लम्बा सफर ऊँची डगर
हर हाल में चढ़ जाने दे

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में उड़ जाने दे

जुड़ जाने दे जुड़ जाने दे
मुझको हवा संग जुड़ जाने दे


03/09/2018

लड़कियाँ जन्नत की कोई हूर थोड़ी हैं


छोड़ दे ऐसे नशे मजबूर थोड़ी है 
आ गई दिल्ली, बहुत अब दूर थोड़ी है 

फूँकना मत ये जवानी इस नशे की आग में 
लड़कियाँ जन्नत की कोई हूर थोड़ी हैं 

हर घड़ी बस तुम विवश हो ये कहाँ की बात है 
इस जमाने में यही दस्तूर थोड़ी है 

उसको गर होगी मुहब्बत आएगी वो दौड़कर 
हैं महज़ नखरे , कोई मजबूर थोड़ी है 

हमको भी उसकी अदाएँ देखकर अच्छी लगी 
पर उसी के दायरे में चूर थोड़ी हैं 

तुम कोई जारा नही न वीर कोई मैं रहा 
छोड़ दे तू इस अहद मशहूर थोड़ी हैं 

भग गये वो राह में हमको अकेले छोड़कर 
ये मेरी शुरुआत थी भरपूर थोड़ी है 

01/09/2018

किसे अपना कहूँ कहूँ किसे पराया मैं


किसे अपना कहूँ कहूँ किसे पराया मैं
दूर वो ही रहे जिनको करीब पाया मैं

उन्हें पसन्द है लोगों से खेलना शायद
यही धोखा हुआ अपनों को ही अपनाया मैं

हृदय - दहक उठा है दिल में शोले फूटे हैं
किसी ने आग लगाई या खुद जलाया मैं

उसे मंजूर ही नही थी मुहब्बत मेरी
मैं ही पागल था जो यारों अलख जगाया मैं

मैंने चाहा कि चलो मार दूँ मैं भी ठोकर
गया शराब पी दौलत सभी लुटाया मैं

नशा कहाँ है उस शराब में जो उसमें है
खुद को भूला नही उसको कहाँ भुलाया मैं

30/08/2018

तू जीत गई मैं हार गया


तू जीत गई मैं हार गया 

अब आजा मेरे आँगन में 
            वर्ना मेरा संसार गया ।  तू जीत ...
      
     दो दिल की बात समझना था 
    मुझको जीवन में भरना था 
मैंने तुमको अपनाया है 
    दिल के अन्दर ही पाया है 
      मैं खुद को भूलना चाहा पर 
     न दिल से तेरा प्यार गया ।

       तू जीत गई मैं हार गया -2 

   दिल के दरवाजों पे है तू 
    मन सपनों, ख्वाबों में है तू 
तेरी बाँहों की जन्नत में 
खुद को पाऊँ मैं मन्नत में 
यारा इक तेरे जाने से 
मेरा प्यारा - परिवार गया ।

तू जीत गई मैं हार गया - 2 

हर माह तुम्हारे होने से 
मुझको सावन से लगते थे 
पलकों पे बैठाकर तुमको 
मेरे दिन पावन लगते थे 
तुम आ जाओ इस जीवन में 
मैंने ये जीवन वार दिया ।

तू जीत गई मैं हार गया - 2 
उड़ के आजा इस आँगन में 
वर्ना मेरा संसार गया ।

तू जीत गई मैं हार गया ।

क्लेशों में

प्रियतम नें अलगाव लिखा है खत में और संदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

मानव देखा जाता है अब रंग रुपों और वेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

देखता हूँ मैं जब जिसको सब रहते हैं आवेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

खेतों में है आग लगी जीते हैं कुछ अवशेषों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

ज्ञान अथाह भले ही हो नौकरी नही है रेसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

लोग स्वयं का मान बेंच देते हैं रुपयों - पैसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में 

25/08/2018

रक्षाबंधन


मेरी बहना , मेरी बहना , मेरी बहना तू - 2
साथ दूँगा जिन्दगी भर याद रखना तू ।।

तेरे दम पर जिन्दगी हंसकर गुज़रती है
तू रहे जो साथ ये सजती - सँवरती है
हौंसलों में पर लगा आकाश रहना तू ।।

मेरी बहना , मेरी बहना , मेरी बहना तू - 2

रेशमी - धागों का कैसे कर्ज चुकताऊँ
तेरे चेहरे की हंसी वाज़िब सदा पाऊँ
जो भी चाहे, जब कभी भी आके कहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू

एक माँ से हम नही पर एक माँ से हैं
जिस्म दो हैं पर कसम से एक जाँ से हैं
यूँ किसी मद्धम पवन सी संग बहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू

ख्वाहिशें हैं छीनकर खाने की संग रोटी
क्या हैं ये सोना हो या हीरा हो या मोती
मेरे जीवन का अनोखा एक गहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू - 2
साथ दूँगा जिन्दगी भर याद रखना तू
मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू ।।







23/08/2018

खुदा खैर करे


इतनी मीठी तेरी पुकार खुदा खैर करे
लौट आए वो बरकरार खुदा खैर करे

इतनी भोली सी है नादान - सादगी उसकी
सादगी में बसा खुमार खुदा खैर करे

मुंतज़िर था मैं जिस वख़त का उसी को लेकर
सामने आ गया है यार खुदा खैर करे

आँख मिलती रही हर रोज़ हम मिले ही नही
बीच में उफ्फ ये संसार खुदा खैर करे

उसके लफ्ज़ों से शहद गिरती रही शामो - सहर
भा गया मुझको वो रुख़्सार खुदा खैर करे 

18/08/2018

मानव हो तो मानव का सम्मान करो



मानवता थोड़ी भी हो तो दान करो
हे ईश्वर! हम लोगों का कल्याण करो

हम सब हैं नादान नही मालुम हमको
बच जाएँ ये जान ज़रा वरदान करो

रोते और बिलखते बच्चे दिखते हैं
आँखें खोलो ईश्वर! इनका ध्यान करो

अपने लोगों का जीवन खतरे में है
जागो यारों पूजा और अज़ान करो

भाषाओं को लेकर वैर नही पालो
मानव हो तो मानव का सम्मान करो

जीवन में सुख - दुःख हर इक पे आते हैं
हर पल लोगों में रहकर कुछ काम करो

प्यार - मुहब्बत से ही धरती चलती है
कुछ सीखो जीवन में कुछ आयाम करो

वो अंधा , पागल है, बहरा, गूँगा है
यारों हाँथ बढ़ाओ न अभिमान करो

सबको रहने, खाने - पीने का सुख हो
ऐसा ही कुछ दिग्विजयी अभियान करो

केरला के हालात देखकर यहाँ के लोगों को देखकर बहुत ही परेशान हूँ
कहने को बहुत कुछ कह सकता हूँ पर ये भाषणबाजी का वक्त नही है
ये वक्त है साथ देने का , मदद करने का और अपनों को बचाने का तो मैं आप सभी से ये उम्मीद करता हूँ कि Please As Much As Possible Donate प्रिय भाइयों , बहनों , मित्रों गुरुजनों और स्वजनों मैं आप सभी से विनम्र - निवेदन करता हूँ जितना हो सके उतना ही मदद करें पर करें जरूर आपको अगर पैसे Donate करने हैं तो Please आप खुलकर कहें हम आपको Valid Account देंगे जहाँ आप अपनी तरफ से इन भाइयों बहनों माताओं की सहायता कर सकें ।

Please Contact - 9645668581 - Nischal Prakash
                              9009228090 - Harsh Agrawal
                              8573934590 - Neelendra Shukla
                              9304184366 - Aaditya Raja
                

10/08/2018

गीत

Pic Credit - Shiksha Mishra 
कर्म करते चल मुसाफिर कर्म करते चल - 2
सोच ले कुछ धर्म अपना शर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर  ......

सोच मत फल के लिए
जो फल मिले या न
भज ले ईश्वर को ज़रा
ये कल मिले या न

जो मिले हैं ग्रन्थ उनका मर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......

दान दे थोड़ा भजन कर
और निजचिन्तन
क्यों बना है ? क्या करेगा ?
इसपे कुछ मन्थन

धर्म से गद्दी तू अपनी गर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......

छोड़ने में तू सतत प्रेरित
हो राग - द्वेष
और अभिवर्धन करे सम्पन्न
हो यह देश

त्याग दे तू क्रोध खुद को नर्म (नम्र) करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर .......

क्या पता ये जिन्दगी
फिर से मिले या न
क्या पता ये कर्मभूमि
फिर मिले या न

दूर कर खुद की कमी कुछ धर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर कर्म करते चल -2

सोच ले कुछ धर्म अपना शर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर  ...... कर्म करते चल ।।

09/08/2018

एक ही सच है हमारी जिन्दगी का


ठोकरें खाते रहे हर वक्त लेकिन
होशियारी अब तलक आई नही है

दूरियाँ कुछ यूँ हुई इस जिन्दगी में
लग रहा है पास परछाई नही है

जब कभी ये मन मेरा रोता है जीभर
चुप कराने को कोई भाई नही है

एक ही सच है हमारी जिन्दगी में
मौत वो जो अब तलक आई नही है 

18/07/2018

सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है



सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है
कहाँ चल दिये खुद को हमसे मिलाकर

शहर अजनबी सा ये हमको लगे है
कहाँ चल दिये साथी हमें आज़मा कर

कहाँ तुम चले से गये हो बता दो
दिखाओ नही प्यार अपना जता दो
इबादत तुम्हारी सदा है मेरे संग
कहाँ आ गया तुमको अपना बनाकर

ज़िन्दगी ये तेरे बिन सिमट सी गई है
मैं सच कह रहा यारा , मिट सी गई है
मुकम्मल बयाँ थी तुम्हारी वो बातें
ये क्या कर दिया तुमनें सपने सजाकर

तड़पता मेरा मन तुम्हारे बिना है
कि आओगे कब तुम दिनों-दिन गिना है
बहुत दिन सोयी पड़ी थी ये आँखें
ये क्या कर दिया तुमनें इनको जगाकर

सुनहरा सफर था, सुनहरी थी राहें
सुनहरा था जीवन , सुनहरी वो बाँहें
नज़ारे बदलते गये ज़िन्दगी के -
ये क्या कर दिया तुमनें नज़रें चुराकर

@नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

09/06/2018

क्या करना

Poem 

कपड़ों का बाजार बनाकर क्या करना
जीवन को किरदार बनाकर क्या करना
हम भी जी लेंगें मुर्दों की दुनिया में
फिर झूठी सरकार बनाकर क्या करना

घर का मालिक देख रहा मरते भाई
ये पिद्दी सरदार बनाकर क्या करना

बच जाएँ माँ ,बहनें तब तो बात बनें
अथवा ये आचार बनाकर क्या करना

मैं पागल हूँ, अच्छा हूँ, मैं ज़िन्दा हूँ
झूठा - मूठा प्यार बनाकर क्या करना

एक रहे कोई पर जीवन भर अपना
गैरों का संसार बनाकर क्या करना

साँसें , नब्ज़, हवा गर्मी से व्याकुल हैं
ऐसे अँखियाँ चार मिलाकर क्या करना

जिस घर की दहलीज मुझे घुसने न दे
ऐसे घर परिवार बनाकर क्या करना

18/05/2018

मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं



वही अब दूर जाने लग गये हैं 
हमें अनहद रुलाने लग गये हैं 

जवानी भी अभी देखा नही मैं 
मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं 

बहुत दिन बाद आया गाँव अपने 
कि शायद इक ज़माने लग गये हैं 

मैं जिनके संग अक्सर खेलता था अँख - मिचौली 
वही आँखें चुराने लग गये हैं 

बहुत ज्ञानी हैं वो, ध्यानी हैं वो हर शास्त्र पढ़कर 
मुझे पागल बुलाने लग गये हैं 

जियेंगे साथ हम ये जिंदगी वादे किये थे 
मेरी मय्यत सजाने लग गये हैं 

हमारी जिन्दगी पावन हुई इन दोस्तों से 
मुझे अपना बनाने लग गये हैं 

बहुत ही क्रोध आता था उन्हें तब देखकर मुझको 
वही अब गीत गाने लग गये हैं 


जो आया है उसका जाना स्वाभाविक है

Farewell Pictures Of Varun Sir 
जीवन में सुख - दुःख का आना स्वाभाविक है 
जीवन को हर पल समझाना स्वाभाविक है 

जीवन के हर पहलू पर सब साथ न होंगे
जो आया है उसका जाना स्वाभाविक है 

गुरु ईश्वर हैं, मात - पिता हैं, भाई - बन्धु 
इन सबमें भी खुद को पाना स्वाभाविक है 

भावुक - हृदय हमेशा बस रोना ही सीखा 
आँखों में आँसू का आना स्वाभाविक है 

जीवन में टकराते हैं कुछ प्यार भरे पल 
उन सब में इस पल का आना स्वाभाविक है 

हम संसार बदलने वाले बच्चे सारे 
हम सबका यूँ उड़ते जाना स्वाभाविक है 

इक प्यारे शिक्षक से यारों दूरी होना 
ऐसे में मन का घबराना स्वाभाविक है 


जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएँ वरुन सर आप यूँ ऊँचाइयाँ छूते रहें 
और जीवन को एक प्रोफेसर की भाँति नही अपितु एक शिक्षक की तरह जीते रहें जैसे हम सभी के लिए यहाँ थे आप ईश्वर से यही प्रार्थना है मेरी 
आपके असंख्य शिष्य हों जो आपको हम सभी से भी ज्यादा प्यार दे सकें और आपका जीवन खुशियों से भरा रहे ।

04/05/2018

आदमी ही थे वो ऐसे खुदा नही होते




मौज़ में गालियाँ दो - चार निकल जाती हैं
हमारे यार हैं अच्छे खफ़ा नही होते

रोंकना था उन्हें, बाँधा था पैर में उसके
इश्क फरियाद है " दो दिल " जुदा नही होते

वो जो करते रहे दिन - रात हुकूमत तुम पर
आदमी ही थे वो ऐसे खुदा नही होते

मौज़ - प्यार 

01/05/2018

कविताएँ


कविताएँ जब तक हैं तब तक हम तुम हैं
कविताओं के बाद घना अंधेरा है
कविताएँ ही शाम हृदय के आँगन की
कविताएँ ही खिलता हुआ सवेरा हैं

कविताओं में जीवन है अपनापन है
कविताएँ ही होने का एहसास तेरे
कविताओं को देखो गहन समंदर हैं
कविताएँ हैं तो तुम अक्सर पास मेरे

कविताओं में एक गज़ब की खुश्बू है
कविताएँ हैं जीवन की महबूब मेरी
कविताओं के बिन जीवन है व्यर्थ मेरा
कविताएँ हैं सर्द माह में धूप मेरी

कविताएँ हैं सपना इक , इक ख्वाब मेरा
कविताओं में रहना जीवन जीना है
कविताएँ ही उन्नति का संदेश यहाँ
कविताएँ ही जीवनभँवर सफीना हैं

कविताओं में प्यार सदा देखा मैंने
कविताएँ हैं सम्बल, हैं जज़्बात मेरे
कविताएँ मेरे जीवन की दुल्हन हैं
कविताएँ ही सुख दुःख में हैं साथ मेरे

24/04/2018

मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है

मुझे मालूम है इतना तुम्हें मुझसे मोहब्बत है
मुझे तेरी जरूरत है , तुम्हें मेरी जरूरत है

नज़र के सामने रहती है हो तुम मेरे खुदा होकर
मिलन अपना मुकम्मल हो खुदा से ये इबादत है

न जाने कौन सी मिट्टी से उसका तन बनाया है
मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है

कभी माँ उसमें दिखती है कभी वो प्रेमिका दिखती
कभी पत्नी नज़र आती अजब सी एक मूरत है

नही चाहा कभी कुछ पल की खुशियाँ आज तक तुमसे
तुम्हीं बोलो ये झूठा है या फिर कह दो हकीकत है

मुनासिब है मुझे हर पल तुम्हारे देह का पाना
छुपे बिन रूह तक पहुँचूँ सुनो ऐ " नील " आदत है


20/04/2018

"नील" तुम्हारा फैन हुआ

नील तुम्हारा फैन हुआ 
जब जब पायल छनकी तेरी , दिल को मेरे चैन हुआ
वो आँखों से तीर चलाना " नील " तुम्हारा फैन हुआ

इन आँखों में वो ही सूरत , वो हम दोनों का जीवन
बहुत दूर सब भेज दिये हैं , मिलना तुमसे बैन हुआ

पंक्षी भी अब कम दिखते हैं , पवन तुम्हीं छूकर आओ
कहना उनसे चाँद निहारें , मैं बिल्कुल बेचैन हुआ

नींद नही आती अब मुझको , न दिन में, न रातों में
इन्तज़ार में तेरे हमदम ! मैं खुद अपना नैन हुआ

काली , घनी , सुहानी रातें , उसमें ये तेरी यादें
आँखों से क्या बारिश करना , जीवन मेरा रैन 

18/04/2018

जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम

Jindagi Na Milegi Dodara 

सूरज की आँखों में आँखें डालो तुम
सारे सपने आँखों में यूँ पालो तुम

ब्रह्मा का सिंहासन सारा हिल जाए
उठो शेर, अब तो दहाड़ कर बोलो तुम

क्यूँ डरते हो जीवन को आसाँ समझो
बंद पड़े सारे दरवाजे खोलो तुम

इक माँ है, इक बहना है, इक तात तेरे
इक भाई की आँख के आँसू ले लो तुम

जीवन को खुश रखना है , इक काम करो
सारे रिस्ते हँसते हुए सम्हालो तुम

मुझपे रंग चढ़ाना है तो कुछ सोचो
प्यार का रंग पहले अच्छे से घोलो तुम

तुमपे जीवन लुटा दिया हूँ अब क्या दूँ
दे दूँगा बस हँसते - हँसते बोलो तुम

सारे दर्द निकल कर बाहर होंगे तब
जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम

मैं पागल हूँ , मुझे छोड़ उसको देखो
"नील" कभी तो गज़ल मेरी भी गा लो तुम

नोट : यहाँ तात सिर्फ पिता के लिए प्रयोग किया गया है ।

16/04/2018

चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं

Clicked By Me ....
    

चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं
                       तुम्हारे साथ हूँ हरदम ऐ हमदम! इस जहाँ में मैं

                       मुझे तुम यूँ भुलाकर तो नही जी पाओगे
                       जहाँ तेरी नज़र जाएँगी आऊँगा वहाँ पे मैं

                       तुम्हारी सादगी पर है निछावर ज़िन्दगी मेरी
                       मुझे अपना बनाओ तुम महक जाऊँ फिज़ा में मैं

                       मेरा घर - द्वार कुछ न है , तुम्हारा प्यार है सबकुछ
                       लिपट कर आ मिलो हमसे कहो आऊँ कहाँ पे मैं

                       नही जाना बताये बिन मुझे तनहा यहाँ करके
                       मुझे भी साथ ही रखना जहाँ तुम हो वहाँ पे मैं

                       करूँगा क्या ज़माने में अकेले दूर मैं तुमसे
                       कि घुट - घुटकर मरूँगा,और क्या होगा,यहाँ पे मैं

                       मैं अपने ज़िन्दगी की डोर तेरे हाँथ में रखकर
                       मिटूँगा इस कदर यारा न आऊँगा यहाँ पे मैं 

21/03/2018

मेरे अपने कुछ पसंदीदा शे'र

1. जवानी भी अभी देखा नही मैं 
     मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं 

2. कट गए दिन, कटे हैं माह, कटे वर्ष कई 
     तुम्हारी याद में ये जिन्दगी न कट जाए 

3. सियासत की नज़र हों इस तरफ भी 
     मेरे पैरों में छाले पड़ गये हैं 

4. क्या कहूँ मैं दिन पे दिन हूँ बढ़ रहा 
      जिन्दगी सैलाब होती जा रही 

5. ये जरूरी नही तुम मिलो बस मुझे 
     पर जरूरी है के याद आती रहो

6. बगावत के उसूलों में मुझे जलकर नही मरना 
    मुझे हिन्दू भी प्यारा है मुझे मुस्लिम भी प्यारा है 

7. मुझे तिरछी नज़र से देखना यूँ 
     कहो क्या कत्ल करना चाहती हो 

8. तुम्हारी नींद क्यों उड़ने लगी है 
     तुम्हें हमसे मुहब्बत हो गई क्या 

9. मुझे परिवार पे है गर्व अपने 
    मेरे घर में अभी भी एकता है 

10. मैं हट कर बैठने वाला नही हूँ 
      लडूँगा जब तलक है जान मुझमें 

11. इन्हें कैसे निकालूँ तुम बताओ 
      मेरी आँखों में सपने गड़ गये हैं 

12. फलक से चाँद-तारे तोड़ लाऊँ 
       महज़ इस हाँथ में तुम हाँथ रख दो 

13. जमीं क्या, आसमाँ बौना लगेगा 
       तुम्हारा साथ गर मिल जाए मुझको 

14. मेरे दिल से अन्धेरा हट गया है 
      कोई दीपक जला गया शायद 

15. नही कुछ और मेरी जिन्दगी में 
       महज़ तुम और हैं यादें तुम्हारी 

16. तुम्हारे सामने यारा सम्हल पाता नही हूँ ,
      न जाने कौन से जन्मों के हैं सम्बन्ध गहरे

17. मेरे सुख दुःख सभी कुछ बँट गये हैं  
       तुम्हारा साथ जब से पा लिया हूँ 

18. हमारे दिल के अन्दर चाँद है इक 
       तेरा चेहरा वहीं देखा है मैंने

19. गज़ल से लबलबाते होंठ तेरे 
      मिले अनुमति मुझे कुछ पाठ कर लूँ

20. तुम्हारी नाक पे वो कील है या
       कोई तारा युँ ही बैठा हुआ है

21. मैं ये दिल रोंक पाऊँ आज कैसे 
      तुम्हारी रूह ने दस्तक दिया है

22. केसरी हम, हरा तुम उड़ाते रहो 
       यूँ ही भारत बनाते रहें उम्रभर

23. पूरा घर देखने जब गया गाँव को
       सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी

24. हमारे पास रखती हो बड़े एहसास रखती हो
      मुझे तुम साँस देने के तज़ुर्बे - खास रखती हो

25. हार कर मत बैठना तुम ज़िन्दगी की दौड़ में
       युद्ध का परिणाम आता है सदा लड़ने के बाद

26. बहुत खामोश हैं लफ्ज़ - ए - बयाँ उनकी अदाएँ पर
      उतरती यूँ दिल - ओ - दरिया में हैं शाहिल नही दिखता

27. एक निर्णय ले लिए फिर क्या फ़रक पड़ता खुदा
         या तो जन्नत राह होगी या तो दोजख का सफर

28. अपनी भी कुछ ख्वाहिशें हैं अपने भी कुछ स्वप्न हैं
         छोड़कर इनको बताओ आप ही जाऊँ किधर 

29. इस दिलो - दीमाग में क्या कर गई
       ज़िक्र होता है तेरा हर बात में

30. मैं फ़लक से भी तोड़ लाऊँ चाँद - तारों को
        कभी - कभी मेरा जो साथ तुम निभाया करो

31. ख़ुद ब ख़ुद किस्मत बदल जायेगी बस
       ख़ुद के सपनों में ही खुद को देख तू

32. धूप में यूँ ही भटकता रहा सपनें लेकर
       छाँव की चाह में अक्सर तेरा आँचल आया

33. इक संसार मेरा था बचपन की यादों का
       उसमें तेरा झूम के आना याद अभी है

34. इस देश की रक्षा में अगर प्राण भी जाँए
       मिट जाऊँ सर कलम हो शहादत के वास्ते

35. तेरी गोदी में माँ के आँचल का सुख
         दिखता प्रेम अपार तुम्हारे चेहरे पर

36.  जी करता है जन्मदिवस के अवसर पर
        लिख दूँ सारा प्यार तुम्हारे चेहरे पर ।।

37. मैं मन्दिर ,मस्जिद गिरिजाघर को क्यों जाऊँ
      खुद को मेरा भगवान बना सकती हो क्या 

38. माँ की दुवाएँ साथ हैं, बहनों की इबादत
       गुस्से भरे पिता हैं मगर प्यार बहुत है

39. बहनें हों उन्मुक्त हमारी जितना चाहें पढ़ पाएँ,
       बाबू जी को समझाने की कोशिश करता हूँ

40. चाचा चाची,मामा मामी,भाई भौजी सब
       सारे रिस्तों को पाने की कोशिश करता हूँ

41. आज सारे धर्म का बस चाहता हूँ इल्म मैं
       कौन ऐसा मंत्र बोलूँ मुक्त कर दूँ जाप से

42. कई दिन, दोपहर हैं साल बीते
       गये बचपन से उनको आज देखे 

43. यह प्रकृति,यह भोग,वैभव शान्त यह वातावरण
       यह धरा पूरी तुम्हारी इस धरा को जीत लो 

44. राजधानी देश की रखे रहो दिल्ली मगर,
      राजसिंहासन पे अब मजदूर होने चाहिए

45. अधूरी जिन्दगी मैं ढूढता हूँ
       कहाँ ये जिन्दगी कुर्बान कर दी 

46. दबे  पैरों से रेतों पर  चली क्यों
       मेरी जन्नत !अभी  तो  दोपहर है 

47. मेरे होंठों के मद्धम हैं दबे से
       तुम्हारी उँगलियाँ हैं या अधर है 

48. इधर तनहा ,अकेला हूँ सदा खुश
       तेरी परछाइयाँ जो हमसफ़र हैं

49. मैं झुका न हूँ , झुकूँ न चापलूसों की तरह ,
        फिर नही इस देश को आशाभरी सरकार देना

50. बड़ा भोला सा था उस वक़्त जब तुम सीख देती थी  ,
        किसी से प्राप्त वो शिक्षा - सयानी याद आती है

51. तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ 
      मैं लिखता हूँ कि मैं ज़िन्दा हूँ ये तुम जान पाओ 

धन्यवाद 
नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

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14/03/2018

तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ

तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ 
मैं लिखता हूँ कि मैं ज़िन्दा हूँ ये तुम जान पाओ 

हमारे कर्म कुछ ऐसे रहें कि जब भी खोजो 
कभी मन्दिर, कभी मस्जिद कभी श्मशान पाओ 

जमीं पर अब नही दिखती रज़ामन्दी दिलों में 
जमीं से टूटकर तारों! खुला आसमान पाओ 

जहाँ पर ज्ञान से, गौरव से, धन से गर्व होता हो 
जगह वह छोड़ दो प्यारे कोई इंसान पाओ 

जमीं छानो, जहाँ छानो, भरा आकाश तुम छानो 
महज़ घर छान लो अपना " अनोखा ज्ञान " पाओ ।

भरो बस प्रेम का रस इस समूचे विश्व में तुम 
मिटाओ द्वेष यारों इक नया सम्मान पाओ ।

05/03/2018

हर घड़ी

जिन्दगी में तकाज़े मिले हर घड़ी
उनके बदले इरादे मिले हर घड़ी

जिसपे कुर्बान थी ये मि'री जिन्दगी
प्यार में जख्म ताज़े मिले हर घड़ी

पूरा घर देखने जब गया गाँव को
सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी

मैंने जाना है यारों तुम्हीं से जहाँ
मुझको दुश्मन ज़ियादे मिले हर घड़ी

सोच जब से ज़रा सा बढ़ाया हूँ मैं
जंग में मुझको प्यादे मिले हर घड़ी

02/03/2018

उम्रभर


आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 
         
जिन्दगी जगमगाती रहे उम्रभर
कोई हँस के लगाती रहे उम्रभर

रंग गाढ़ा हो मन का के छूटे नही
होलिका यूँ ही आती रहे उम्रभर

माँ बहन संग मेरी प्रेमिका भी रहे
मैं खुशी से जियूँ जिन्दगी उम्रभर

प्रेम का रंग कान्हा लिए हाँथ में
राधिका को लगाते रहें उम्रभर

तुम रहो, न रहो, प्रेम तेरा रहे
चित्र पे रंग सजाते रहें उम्रभर

दिव्य फागुन - महीना जिये जिन्दगी
कोकिलें गीत गाती रहें उम्रभर

केसरी हम, हरा तुम उड़ाते रहो
यूँ ही भारत बनाते रहें उम्रभर

एक त्यौहार है भाईचारा का ये
इसको हँस के निभाते रहें उम्रभर


इसमें जो तीसरी लाइन में रंग शब्द है उसका अन्वय "दूसरी और तीसरी" दोनों लाइन से है ।।
धन्यवाद.....

20/02/2018

जब तुम ही एक हृदय में हो

Neelendra Shukla " Neel "

जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।

है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी  ।।

मेरी दुनिया तुम मेरी धड़कन तुम
तुम ही साँसें मेरी तड़पन तुम
तुम बिन ऐ मेरे जीवनधन
लगती मुझको दुनिया भारी ।।

जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।

है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी

संसार भरा मैखाना है
मैं और कहीं भी जाऊँ ना
हो सारी दुनिया साथ मगर
मैं फिर तुम्हें भुलाँऊ ना ।।

संग - संग मैं तेरे साथ रहूँ
ऐसी हो कुछ अपनी यारी ।।

जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।

है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी ।।

वो गज़लें मेरी महक उठी
जबसे तुमको मैं पाया हूँ
अब चाँद - सितारे दिखते हैं
तेरे पास मैं जब से आया हूँ

जब साथ हमेशा तेरा हो
फिर जीने की क्या तैय्यारी ।।

जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया - सारी ।।

है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी ।।

12/02/2018

मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना


Neelendra Shukla " Neel "
कल साँझ हमारे साथ रही अब छोड़ मुझे इतराओ ना
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना ।।

गर दूर तुम्हें जाना ही था इक बार बता के जाती तो
तुम कह देती दिल की बातें पर एक बार तुम आती तो    
अब धड़कन से तेरी यादों को, तेरे सपनों को, तेरे वादों को
यूँ हमें भुला देना होगा उन प्यारी सी मुलाकातों को
 
कुछ ख्वाब टूट कर बिखर गये अब सपने मुझे दिखाओ ना

हर बार तुम्हारे रूठने पर हर बार मनाया करता था
हर बार तुम्हें अपनाने को तेरे पास मैं आया करता था
इस बार हुआ है क्या ऐसा क्यों फेर लिए मुँह तुम हमसे
मैं खुशियों में जीने वाला क्यों जोड़ दिया रिस्ता गम से

अब कैसे मैं जी पाऊँगा थोड़ा सा तुम्हीं बताओ ना

वो सर्द रात की कुछ यादें कुछ याद दिलाया करती थी
हम दोनों संग - संग होते थे जन्नत दिखलाया करती थी
दिल के हर चौखट तेरे थे, दिल का सारा आँगन तेरा
पर मैं तो एक खिलौना था, था कोई मनभावन तेरा

उस बार सही, इस बार सही, अब यूँ ही मुझे रुलाओ ना

हर पल इक तुमको खोजा था हर पल तुमको ही पाया था
इतना जादू था चाहत में अपनों से हुआ पराया था
यूँ नदी किनारे बैठ साँझ हम स्वप्न सजाया करते थे
तुम मुझे बुलाया करती थी हम तुम्हें बुलाया करते थे

अब जान गया सारा किस्सा हे प्रियवर ! मुझे बुलाओ ना

आँखें जब मेरी खुलती थी बस इक ही चेहरा दिखता था
उसकी आँखों में जादू था इक सागर गहरा दिखता था
वो मुझमें खूब महकती थी मैं उसमें खूब महकता था
नयनों से वो बातें करती उस पर मन खूब बहकता था

तुमने तड़पाया बहुत मुझे अब और मुझे तड़पाओ ना

मुझको तुमने क्या सोचा है मुझको तुमने क्या जाना है
हर कदम - कदम पे साथ रहा फिर भी क्यूँ न पहचाना है
मधुशाला अब  जाता हूँ मैं शायद तुम मेरे साथ नही
इन हाँथों में अब प्याला है शायद अब तेरा हाथ नही

मैं छककर पी के आया हूँ नयनों से जाम पिलाओ ना

कल साँझ हमारे साथ रही अब छोड़ मुझे इतराओ ना
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना ।।

कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई


कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई ..........

कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई
ऐसी हुई मैं बावरी पहचान हो गई

कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - 2

मेरा इश़्क कृष्ण, मेरा प्यार कृष्ण
मेरी जीत कृष्ण, मेरी हार कृष्ण
मेरा रंग कृष्ण, मेरा रूप कृष्ण
मेरी छाया है मेरा धूप कृष्ण
मेरा दुश्मन भी मेरा यार कृष्ण
है सागर में पतवार कृष्ण
मेरे सपनों को मंजिल देगा
बस इक तू पारावार कृष्ण ।

हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - कृष्ण
श्रीकृष्ण - कृष्ण, राधे कृष्ण - 2

इस राह कृष्ण, उस राह कृष्ण
कर दो पूरी सब चाह कृष्ण
संग - संग चलते हो साँसों में
रक्षक हो तुम संत्रासों में
पर्वत में भी तुम, कण में भी
दिखते हो प्रेम में, रण में भी
हैं रूप तुम्हारे इतने कि -
दिखते महलों में, वन में भी

हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण  - 2

है शत्रू भी वो मित्र कृष्ण
है पावन परम पुनीत कृष्ण
मनका हैं हम वो माला है
हम मधुशाला, वो प्याला है
मेरा मौला है मेरा काज़ी भी
है प्रेमी वो सन्यासी भी
इक राह चुनो नितकर्म करो
हो जाएँगें वो राज़ी भी

हैं कृष्ण कृष्ण, वो कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - 2

हैं वायु में वो और जल में भी
हैं आज में वो और कल में भी
मेरी मन्नत में, मेरी चाहत में
दिखते हैं वो हर आहट में
हैं सुबह हमारी शाम भी वो
हैं धर्म मेरा ईमान भी वो
इक पीर हरण करने वाले
नटखट है कान्हा श्याम भी वो

हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण
हाँ कृष्ण कृष्ण, श्रीकृष्ण कृष्ण
राधेकृष्ण कृष्ण, श्रीकृष्ण ।।

04/02/2018

तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ

Written By Me ......

तेरी लक नें किया ऐसा जादू नि हाये मेरा दिल लुटेयाँ
तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ

त्वाडि अँख नु लगे हैं शराबी, शराबी
गल्ल लग दियाँ गुलाबी,
साडि इस थ्वाडि चाल नु दिल लुटेयाँ
गोरी लग दि कुड़ी पंजाबी,

नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ, पराँदा इन्ना शोणा लगेयाँ ।

तेरी लक नें किया ऐसा जादू नि हाये मेरा दिल लुटेयाँ
तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ

NOT NOW COMPLETED STILL I'M WORKING IN THIS PANJABI LYRICS ..........

तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ

नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ

मुझे समझो, मुझे जानो, मुझे देखो, पहचानो
मेरी यादें, मेरी बातें, मेरी साँसें, मेरी रातें
मुझे भुला दो, मैं प्रेमी नही, मैं काफिर हूँ

तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ

मेरी निगाहें तुम्हें आवाज़ देती हैं
तेरी दुवाएँ नये परवाज़ देती हैं
उड़ता पंक्षी हूँ मैं पहला, और आखिर हूँ

तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ 

02/02/2018

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई


नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई
वो खड़ी थी जहाँ पे खड़ी रह गई - 2
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2

क्या कभी राधिका थी अलग कृष्ण से
तुम कहो मैं रहूँगा कहाँ सृष्टि में
छोड़कर तुम कहाँ से कहाँ कर गई

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2

तार - दिल के सभी तोड़ कर क्यूँ गये
क्यूँ गये राह में छोड़कर क्यूँ गये
मेरे सपनों का तुम खात्मा कर गई

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2

क्या हुआ बीच में क्यों हुई तुम खफा
मौत दे दो मुझे पर नही ये सजा
यूँ अकेला मुझे बेवफा कर गई ।

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई  -2

मेरी गलियों में अब चाँद निकले भी तो
क्या करूँगा, जमाना ये पिघले भी तो
हुश्न को इश्क से तुम जुदा कर गई

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2
वो खड़ी थी जहाँ पे खड़ी रह गई
मुझसे पहले मेरी ला र ला ला र ला
हूँ हुँ हूँ हूँ हुँ हूँ आह हा आह हा

29/01/2018

पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम

A Good Lyrics According To Me ........

पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम ,
मिल जाऊँ नदियों सी मैं सागर हो जाओ तुम

पास हमारे आओ भी न यूँ शरमाओ तुम
पी जाओ पानी जैसे इस गीले - बदन को तुम

कपड़े - सपड़े छोड़ो थोड़ा हुश्न दिखाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको जरा पास तो आओ तुम

बारिश की इन बूंदों को मुझपे बरसाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम

जो भी करना है कर ले आजा तू मेरे घर
कहीं और मत जाना बेबी आके मुझपे मर
जैसा मैं सोची थी बिल्कुल वैसे निकले तुम
जी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम

आग लगी है तन - मन में आ अगन बुझाओ तुम
पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम

हुश्न तुम्हारा यूँ जादू कर जाएगा
शर्म - हया सब छोड़ आग - भड़काएगा
चल फिर थोड़ा मूड बना ह्विश्की दे थोड़ा रम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम

जो भी होगा आगे पीछे सब सह लेना तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम

पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम
मिल जाऊँ नदियों सी मैं सागर हो जाओ तुम

कपड़े - सपड़े छोड़ो थोड़ा हुश्न - दिखाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम

Please Don't Think wrong About This Lyrics Because I'm Trying to Describe Many Types of Lyrics in Different types of Situation According To Bollywood. So See This As A Lyrics  I hope you will Understand Me in Right & Proper Way.
If You Have Any Doubt so You Can Ask Me ....
THANK YOU ........



रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...