21/03/2018

मेरे अपने कुछ पसंदीदा शे'र

1. जवानी भी अभी देखा नही मैं 
     मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं 

2. कट गए दिन, कटे हैं माह, कटे वर्ष कई 
     तुम्हारी याद में ये जिन्दगी न कट जाए 

3. सियासत की नज़र हों इस तरफ भी 
     मेरे पैरों में छाले पड़ गये हैं 

4. क्या कहूँ मैं दिन पे दिन हूँ बढ़ रहा 
      जिन्दगी सैलाब होती जा रही 

5. ये जरूरी नही तुम मिलो बस मुझे 
     पर जरूरी है के याद आती रहो

6. बगावत के उसूलों में मुझे जलकर नही मरना 
    मुझे हिन्दू भी प्यारा है मुझे मुस्लिम भी प्यारा है 

7. मुझे तिरछी नज़र से देखना यूँ 
     कहो क्या कत्ल करना चाहती हो 

8. तुम्हारी नींद क्यों उड़ने लगी है 
     तुम्हें हमसे मुहब्बत हो गई क्या 

9. मुझे परिवार पे है गर्व अपने 
    मेरे घर में अभी भी एकता है 

10. मैं हट कर बैठने वाला नही हूँ 
      लडूँगा जब तलक है जान मुझमें 

11. इन्हें कैसे निकालूँ तुम बताओ 
      मेरी आँखों में सपने गड़ गये हैं 

12. फलक से चाँद-तारे तोड़ लाऊँ 
       महज़ इस हाँथ में तुम हाँथ रख दो 

13. जमीं क्या, आसमाँ बौना लगेगा 
       तुम्हारा साथ गर मिल जाए मुझको 

14. मेरे दिल से अन्धेरा हट गया है 
      कोई दीपक जला गया शायद 

15. नही कुछ और मेरी जिन्दगी में 
       महज़ तुम और हैं यादें तुम्हारी 

16. तुम्हारे सामने यारा सम्हल पाता नही हूँ ,
      न जाने कौन से जन्मों के हैं सम्बन्ध गहरे

17. मेरे सुख दुःख सभी कुछ बँट गये हैं  
       तुम्हारा साथ जब से पा लिया हूँ 

18. हमारे दिल के अन्दर चाँद है इक 
       तेरा चेहरा वहीं देखा है मैंने

19. गज़ल से लबलबाते होंठ तेरे 
      मिले अनुमति मुझे कुछ पाठ कर लूँ

20. तुम्हारी नाक पे वो कील है या
       कोई तारा युँ ही बैठा हुआ है

21. मैं ये दिल रोंक पाऊँ आज कैसे 
      तुम्हारी रूह ने दस्तक दिया है

22. केसरी हम, हरा तुम उड़ाते रहो 
       यूँ ही भारत बनाते रहें उम्रभर

23. पूरा घर देखने जब गया गाँव को
       सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी

24. हमारे पास रखती हो बड़े एहसास रखती हो
      मुझे तुम साँस देने के तज़ुर्बे - खास रखती हो

25. हार कर मत बैठना तुम ज़िन्दगी की दौड़ में
       युद्ध का परिणाम आता है सदा लड़ने के बाद

26. बहुत खामोश हैं लफ्ज़ - ए - बयाँ उनकी अदाएँ पर
      उतरती यूँ दिल - ओ - दरिया में हैं शाहिल नही दिखता

27. एक निर्णय ले लिए फिर क्या फ़रक पड़ता खुदा
         या तो जन्नत राह होगी या तो दोजख का सफर

28. अपनी भी कुछ ख्वाहिशें हैं अपने भी कुछ स्वप्न हैं
         छोड़कर इनको बताओ आप ही जाऊँ किधर 

29. इस दिलो - दीमाग में क्या कर गई
       ज़िक्र होता है तेरा हर बात में

30. मैं फ़लक से भी तोड़ लाऊँ चाँद - तारों को
        कभी - कभी मेरा जो साथ तुम निभाया करो

31. ख़ुद ब ख़ुद किस्मत बदल जायेगी बस
       ख़ुद के सपनों में ही खुद को देख तू

32. धूप में यूँ ही भटकता रहा सपनें लेकर
       छाँव की चाह में अक्सर तेरा आँचल आया

33. इक संसार मेरा था बचपन की यादों का
       उसमें तेरा झूम के आना याद अभी है

34. इस देश की रक्षा में अगर प्राण भी जाँए
       मिट जाऊँ सर कलम हो शहादत के वास्ते

35. तेरी गोदी में माँ के आँचल का सुख
         दिखता प्रेम अपार तुम्हारे चेहरे पर

36.  जी करता है जन्मदिवस के अवसर पर
        लिख दूँ सारा प्यार तुम्हारे चेहरे पर ।।

37. मैं मन्दिर ,मस्जिद गिरिजाघर को क्यों जाऊँ
      खुद को मेरा भगवान बना सकती हो क्या 

38. माँ की दुवाएँ साथ हैं, बहनों की इबादत
       गुस्से भरे पिता हैं मगर प्यार बहुत है

39. बहनें हों उन्मुक्त हमारी जितना चाहें पढ़ पाएँ,
       बाबू जी को समझाने की कोशिश करता हूँ

40. चाचा चाची,मामा मामी,भाई भौजी सब
       सारे रिस्तों को पाने की कोशिश करता हूँ

41. आज सारे धर्म का बस चाहता हूँ इल्म मैं
       कौन ऐसा मंत्र बोलूँ मुक्त कर दूँ जाप से

42. कई दिन, दोपहर हैं साल बीते
       गये बचपन से उनको आज देखे 

43. यह प्रकृति,यह भोग,वैभव शान्त यह वातावरण
       यह धरा पूरी तुम्हारी इस धरा को जीत लो 

44. राजधानी देश की रखे रहो दिल्ली मगर,
      राजसिंहासन पे अब मजदूर होने चाहिए

45. अधूरी जिन्दगी मैं ढूढता हूँ
       कहाँ ये जिन्दगी कुर्बान कर दी 

46. दबे  पैरों से रेतों पर  चली क्यों
       मेरी जन्नत !अभी  तो  दोपहर है 

47. मेरे होंठों के मद्धम हैं दबे से
       तुम्हारी उँगलियाँ हैं या अधर है 

48. इधर तनहा ,अकेला हूँ सदा खुश
       तेरी परछाइयाँ जो हमसफ़र हैं

49. मैं झुका न हूँ , झुकूँ न चापलूसों की तरह ,
        फिर नही इस देश को आशाभरी सरकार देना

50. बड़ा भोला सा था उस वक़्त जब तुम सीख देती थी  ,
        किसी से प्राप्त वो शिक्षा - सयानी याद आती है

51. तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ 
      मैं लिखता हूँ कि मैं ज़िन्दा हूँ ये तुम जान पाओ 

धन्यवाद 
नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

अगर पसंद आये तो अपनी टिप्पणी जरूर दें  -

14/03/2018

तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ

तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ 
मैं लिखता हूँ कि मैं ज़िन्दा हूँ ये तुम जान पाओ 

हमारे कर्म कुछ ऐसे रहें कि जब भी खोजो 
कभी मन्दिर, कभी मस्जिद कभी श्मशान पाओ 

जमीं पर अब नही दिखती रज़ामन्दी दिलों में 
जमीं से टूटकर तारों! खुला आसमान पाओ 

जहाँ पर ज्ञान से, गौरव से, धन से गर्व होता हो 
जगह वह छोड़ दो प्यारे कोई इंसान पाओ 

जमीं छानो, जहाँ छानो, भरा आकाश तुम छानो 
महज़ घर छान लो अपना " अनोखा ज्ञान " पाओ ।

भरो बस प्रेम का रस इस समूचे विश्व में तुम 
मिटाओ द्वेष यारों इक नया सम्मान पाओ ।

05/03/2018

हर घड़ी

जिन्दगी में तकाज़े मिले हर घड़ी
उनके बदले इरादे मिले हर घड़ी

जिसपे कुर्बान थी ये मि'री जिन्दगी
प्यार में जख्म ताज़े मिले हर घड़ी

पूरा घर देखने जब गया गाँव को
सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी

मैंने जाना है यारों तुम्हीं से जहाँ
मुझको दुश्मन ज़ियादे मिले हर घड़ी

सोच जब से ज़रा सा बढ़ाया हूँ मैं
जंग में मुझको प्यादे मिले हर घड़ी

02/03/2018

उम्रभर


आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 
         
जिन्दगी जगमगाती रहे उम्रभर
कोई हँस के लगाती रहे उम्रभर

रंग गाढ़ा हो मन का के छूटे नही
होलिका यूँ ही आती रहे उम्रभर

माँ बहन संग मेरी प्रेमिका भी रहे
मैं खुशी से जियूँ जिन्दगी उम्रभर

प्रेम का रंग कान्हा लिए हाँथ में
राधिका को लगाते रहें उम्रभर

तुम रहो, न रहो, प्रेम तेरा रहे
चित्र पे रंग सजाते रहें उम्रभर

दिव्य फागुन - महीना जिये जिन्दगी
कोकिलें गीत गाती रहें उम्रभर

केसरी हम, हरा तुम उड़ाते रहो
यूँ ही भारत बनाते रहें उम्रभर

एक त्यौहार है भाईचारा का ये
इसको हँस के निभाते रहें उम्रभर


इसमें जो तीसरी लाइन में रंग शब्द है उसका अन्वय "दूसरी और तीसरी" दोनों लाइन से है ।।
धन्यवाद.....

20/02/2018

जब तुम ही एक हृदय में हो

Neelendra Shukla " Neel "

जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।

है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी  ।।

मेरी दुनिया तुम मेरी धड़कन तुम
तुम ही साँसें मेरी तड़पन तुम
तुम बिन ऐ मेरे जीवनधन
लगती मुझको दुनिया भारी ।।

जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।

है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी

संसार भरा मैखाना है
मैं और कहीं भी जाऊँ ना
हो सारी दुनिया साथ मगर
मैं फिर तुम्हें भुलाँऊ ना ।।

संग - संग मैं तेरे साथ रहूँ
ऐसी हो कुछ अपनी यारी ।।

जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।

है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी ।।

वो गज़लें मेरी महक उठी
जबसे तुमको मैं पाया हूँ
अब चाँद - सितारे दिखते हैं
तेरे पास मैं जब से आया हूँ

जब साथ हमेशा तेरा हो
फिर जीने की क्या तैय्यारी ।।

जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया - सारी ।।

है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी ।।

12/02/2018

मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना


Neelendra Shukla " Neel "
कल साँझ हमारे साथ रही अब छोड़ मुझे इतराओ ना
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना ।।

गर दूर तुम्हें जाना ही था इक बार बता के जाती तो
तुम कह देती दिल की बातें पर एक बार तुम आती तो    
अब धड़कन से तेरी यादों को, तेरे सपनों को, तेरे वादों को
यूँ हमें भुला देना होगा उन प्यारी सी मुलाकातों को
 
कुछ ख्वाब टूट कर बिखर गये अब सपने मुझे दिखाओ ना

हर बार तुम्हारे रूठने पर हर बार मनाया करता था
हर बार तुम्हें अपनाने को तेरे पास मैं आया करता था
इस बार हुआ है क्या ऐसा क्यों फेर लिए मुँह तुम हमसे
मैं खुशियों में जीने वाला क्यों जोड़ दिया रिस्ता गम से

अब कैसे मैं जी पाऊँगा थोड़ा सा तुम्हीं बताओ ना

वो सर्द रात की कुछ यादें कुछ याद दिलाया करती थी
हम दोनों संग - संग होते थे जन्नत दिखलाया करती थी
दिल के हर चौखट तेरे थे, दिल का सारा आँगन तेरा
पर मैं तो एक खिलौना था, था कोई मनभावन तेरा

उस बार सही, इस बार सही, अब यूँ ही मुझे रुलाओ ना

हर पल इक तुमको खोजा था हर पल तुमको ही पाया था
इतना जादू था चाहत में अपनों से हुआ पराया था
यूँ नदी किनारे बैठ साँझ हम स्वप्न सजाया करते थे
तुम मुझे बुलाया करती थी हम तुम्हें बुलाया करते थे

अब जान गया सारा किस्सा हे प्रियवर ! मुझे बुलाओ ना

आँखें जब मेरी खुलती थी बस इक ही चेहरा दिखता था
उसकी आँखों में जादू था इक सागर गहरा दिखता था
वो मुझमें खूब महकती थी मैं उसमें खूब महकता था
नयनों से वो बातें करती उस पर मन खूब बहकता था

तुमने तड़पाया बहुत मुझे अब और मुझे तड़पाओ ना

मुझको तुमने क्या सोचा है मुझको तुमने क्या जाना है
हर कदम - कदम पे साथ रहा फिर भी क्यूँ न पहचाना है
मधुशाला अब  जाता हूँ मैं शायद तुम मेरे साथ नही
इन हाँथों में अब प्याला है शायद अब तेरा हाथ नही

मैं छककर पी के आया हूँ नयनों से जाम पिलाओ ना

कल साँझ हमारे साथ रही अब छोड़ मुझे इतराओ ना
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना ।।

कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई


कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई ..........

कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई
ऐसी हुई मैं बावरी पहचान हो गई

कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - 2

मेरा इश़्क कृष्ण, मेरा प्यार कृष्ण
मेरी जीत कृष्ण, मेरी हार कृष्ण
मेरा रंग कृष्ण, मेरा रूप कृष्ण
मेरी छाया है मेरा धूप कृष्ण
मेरा दुश्मन भी मेरा यार कृष्ण
है सागर में पतवार कृष्ण
मेरे सपनों को मंजिल देगा
बस इक तू पारावार कृष्ण ।

हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - कृष्ण
श्रीकृष्ण - कृष्ण, राधे कृष्ण - 2

इस राह कृष्ण, उस राह कृष्ण
कर दो पूरी सब चाह कृष्ण
संग - संग चलते हो साँसों में
रक्षक हो तुम संत्रासों में
पर्वत में भी तुम, कण में भी
दिखते हो प्रेम में, रण में भी
हैं रूप तुम्हारे इतने कि -
दिखते महलों में, वन में भी

हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण  - 2

है शत्रू भी वो मित्र कृष्ण
है पावन परम पुनीत कृष्ण
मनका हैं हम वो माला है
हम मधुशाला, वो प्याला है
मेरा मौला है मेरा काज़ी भी
है प्रेमी वो सन्यासी भी
इक राह चुनो नितकर्म करो
हो जाएँगें वो राज़ी भी

हैं कृष्ण कृष्ण, वो कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - 2

हैं वायु में वो और जल में भी
हैं आज में वो और कल में भी
मेरी मन्नत में, मेरी चाहत में
दिखते हैं वो हर आहट में
हैं सुबह हमारी शाम भी वो
हैं धर्म मेरा ईमान भी वो
इक पीर हरण करने वाले
नटखट है कान्हा श्याम भी वो

हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण
हाँ कृष्ण कृष्ण, श्रीकृष्ण कृष्ण
राधेकृष्ण कृष्ण, श्रीकृष्ण ।।

04/02/2018

तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ

Written By Me ......

तेरी लक नें किया ऐसा जादू नि हाये मेरा दिल लुटेयाँ
तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ

त्वाडि अँख नु लगे हैं शराबी, शराबी
गल्ल लग दियाँ गुलाबी,
साडि इस थ्वाडि चाल नु दिल लुटेयाँ
गोरी लग दि कुड़ी पंजाबी,

नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ, पराँदा इन्ना शोणा लगेयाँ ।

तेरी लक नें किया ऐसा जादू नि हाये मेरा दिल लुटेयाँ
तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ

NOT NOW COMPLETED STILL I'M WORKING IN THIS PANJABI LYRICS ..........

तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ

नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ

मुझे समझो, मुझे जानो, मुझे देखो, पहचानो
मेरी यादें, मेरी बातें, मेरी साँसें, मेरी रातें
मुझे भुला दो, मैं प्रेमी नही, मैं काफिर हूँ

तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ

मेरी निगाहें तुम्हें आवाज़ देती हैं
तेरी दुवाएँ नये परवाज़ देती हैं
उड़ता पंक्षी हूँ मैं पहला, और आखिर हूँ

तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ 

02/02/2018

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई


नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई
वो खड़ी थी जहाँ पे खड़ी रह गई - 2
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2

क्या कभी राधिका थी अलग कृष्ण से
तुम कहो मैं रहूँगा कहाँ सृष्टि में
छोड़कर तुम कहाँ से कहाँ कर गई

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2

तार - दिल के सभी तोड़ कर क्यूँ गये
क्यूँ गये राह में छोड़कर क्यूँ गये
मेरे सपनों का तुम खात्मा कर गई

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2

क्या हुआ बीच में क्यों हुई तुम खफा
मौत दे दो मुझे पर नही ये सजा
यूँ अकेला मुझे बेवफा कर गई ।

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई  -2

मेरी गलियों में अब चाँद निकले भी तो
क्या करूँगा, जमाना ये पिघले भी तो
हुश्न को इश्क से तुम जुदा कर गई

मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2
वो खड़ी थी जहाँ पे खड़ी रह गई
मुझसे पहले मेरी ला र ला ला र ला
हूँ हुँ हूँ हूँ हुँ हूँ आह हा आह हा

29/01/2018

पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम

A Good Lyrics According To Me ........

पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम ,
मिल जाऊँ नदियों सी मैं सागर हो जाओ तुम

पास हमारे आओ भी न यूँ शरमाओ तुम
पी जाओ पानी जैसे इस गीले - बदन को तुम

कपड़े - सपड़े छोड़ो थोड़ा हुश्न दिखाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको जरा पास तो आओ तुम

बारिश की इन बूंदों को मुझपे बरसाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम

जो भी करना है कर ले आजा तू मेरे घर
कहीं और मत जाना बेबी आके मुझपे मर
जैसा मैं सोची थी बिल्कुल वैसे निकले तुम
जी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम

आग लगी है तन - मन में आ अगन बुझाओ तुम
पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम

हुश्न तुम्हारा यूँ जादू कर जाएगा
शर्म - हया सब छोड़ आग - भड़काएगा
चल फिर थोड़ा मूड बना ह्विश्की दे थोड़ा रम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम

जो भी होगा आगे पीछे सब सह लेना तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम

पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम
मिल जाऊँ नदियों सी मैं सागर हो जाओ तुम

कपड़े - सपड़े छोड़ो थोड़ा हुश्न - दिखाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम

Please Don't Think wrong About This Lyrics Because I'm Trying to Describe Many Types of Lyrics in Different types of Situation According To Bollywood. So See This As A Lyrics  I hope you will Understand Me in Right & Proper Way.
If You Have Any Doubt so You Can Ask Me ....
THANK YOU ........



25/01/2018

कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ


नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ
कुछ - कुछ बढ़ने लगा सा हूँ
जब से आए हो जीवन में ,
कुछ - कुछ जुड़ने लगा सा हूँ ।

कुछ -  कुछ  उड़ने लगा सा हूँ ।।

बातें तेरी जुबाँ पे हैं
सपने तेरे सुबह से हैं
यूँ ही देखा करो मुझको
आँखें पढ़ने लगा सा हूँ ।

कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।

अल्ला,ईश्वर खुदा सब हैं
जो तू है तो जहाँ सच है
अब तक जाना नही था जो
अब प्यार करने लगा सा हूँ ।

कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।

दूरी यूँ हो गई है जो
खो न दूँ कहीं मैं तुमको
आ जाओ एक होते हैं
कुछ - कुछ डरने लगा सा हूँ ।

कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।

यादें दिन - रात आती हैं
अक्सर मुझको सताती हैं
क्या जादू कर गई हो तुम
तुमपे मरने लगा सा हूँ ।।

कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।




23/01/2018

लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी है ।

लेखनी तू शान्त मत होना लड़ाई और भी है  .........
लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी है ।

तू युँ ही चलती चली चल
हार कर मत बैठ पल भर
आ गई है पास तो इक राह दे दे
स्वप्न कर साकार मेरी चाह दे दे

ऐ मेरे मन यूँ मचल मत हौंसला रख, कर पढ़ाई और भी है ।
लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी है ।।

बाज जैसे लक्ष्य पे बस ध्यान हो
तू नही यूँ सोच के सम्मान हो
जो तुझे करना है अपना कर्म कर
लोग पागल कह रहे , न शर्म कर

खुद को तू मजबूत करके कूद जा न देख, खाई और भी हैं
लेखनी तू शान्त मत होना लड़ाई और भी हैं

गिर, सम्हल, उठ जागती रह
स्वप्न तू पहचानती रह
यूँ नही खुद से मुकर तू
जा ज़रा सा सज - सँवर तू

हारना मत जिन्दगी से और सीढ़ी हैं चढ़ाई और भी हैं
लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी हैं ।।

तू सदा ये सोच रख उड़ना है तुझको
खुद के जीवन से अभी जुड़ना है तुझको
जाओ , ढूँढों , खोज लो मन्जिल तुम्हारी
है प्रतीक्षित लग रही सदियों से प्यारी

यूँ नही खुश हो अभी शुरुआत है बाकी , बधाई और भी हैं
लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी हैं ।।

सोच मत वीवाह की मत कैद हो
ताकि तेरे लक्ष्य न दुर्बेध हों
प्यार कर, वातावरण को देख तू
दे जहाँ को इक नया सन्देश तू

इक नये इतिहास का निर्माण कर प्यारे, सगाई और भी हैं
लेखनी तू शान्त मत होना लड़ाई और भी हैं ।।


13/01/2018

हमारे पास रखती हो बड़े एहसास रखती है

Performance At Chinmaya University

हमारे पास रखती हो बड़े एहसास रखती हो
मुझे तुम साँस देने के तज़ुर्बे - खास रखती हो

बगावत से मुहब्बत तक तुम्हारा फलसफ़ा इतना
जुबाँ खामोश रहती हैं नज़र से बात रखती हो

सदा फूलो फलो यूँ ही कि हर मन्जिल नई चूमों
बहुत है सादगी तुममे अधिक परवाज़ रखती हो

मुक़म्मल है तुम्हारा इश्क़ फिर इतनी ख़फ़ा क्यों हो
मुझे जब देखती हो क्यों दिल - ए - नासाज़ रखती हो

मेरा मन घूमता रहता है अक्सर स्वप्न में मेरे 
खिंचा जाता हूँ फिर भी मैं गज़ब अन्दाज़ रखती हो 

नहीं दौलत, नहीं सोहरत, नहीं विख्यात हूँ इतना 
तुम्हारी सोंच सुन्दर है मुझे सरताज़ रखती हो 



फलसफ़ा - दर्शन 
परवाज़ - उड़ान
दिल - ए - नासाज़ - हृदय प्रतिकूल 

हार कर मत बैठना तुम ज़िन्दगी की दौड़ में


नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

हार कर मत बैठना तुम ज़िन्दगी की दौड़ में
युद्ध का परिणाम आता है सदा लड़ने के बाद

बोलना कैसे हमें है और उठना, बैठना
सीख पाओगे सही वृद्धों के संग रहने के बाद

फेंकना नंगा मुझे बीहड़ से रेगिस्तान में
भर सकेगें पेट अपना वो मेरे मरने के बाद

जिन्दगी संग काटने की बात करके आए थे
वो मुझे पहचान बैठे चार पल रहने के बाद

रक्त उनके हाँथ हैं है रक्त ही सारा बदन
हैं अभी खामोश वो जुल्मों - सितम सहने के बाद

देख लेना, सोंच लेना, पूछ लेना, जाँच लेना
यूँ नही ठुकराना तुम औरों के मुँह सुनने के बाद

आशियाने में गज़ब की भीड़ रहती है सदा
ऐसे मत मुँह फेरना अपनों के आ जाने के बाद 

ये सब भ्रम है सब माया है


हर हर महादेव!

ये सब भ्रम है सब माया है 
जग में जो खोया पाया है 
कुछ यहाँ नही अपना प्यारे
यूँ देख नही सपना प्यारे 
जो भी कुछ है सब नस्वर है 
क्या गाड़ी, क्या ऊँचा घर है 
जीवन के पन्ने पलट जरा 
आँखों से मिट्टी धूल हटा 
हों सारे रिस्तेदार सही 
तुम रख लो पहरेदार सही 
यदि मौत तुम्हें आनी है तो 
देता न साथ फिर साया है 

ये सब भ्रम है सब माया है 
जग में जो खोया पाया है ।2 

क्या भाई बन्धु यार यहाँ 
क्या बन्धन का संसार यहाँ 
सब मायाजाल मोह भ्रम है 
इनमें कर रहा व्यर्थ श्रम है 
ये कोई तेरे साथ नही 
लगने वाला कुछ हाथ नही 
मुँह मोड़ नही सच्चाई से 
मत दौड़ युँ ही अच्छाई से 
तुम मानो मुझे नही मानो 
वो गया है ,जो भी आया है 

ये सब भ्रम है सब माया है 
जग में जो खोया - पाया है । 2

ईश्वर अनादि अविनाशी है 
सुन मोक्षद्वार इक काशी है 
बस उनमें ध्यान लगाओ तुम 
बम - बम हर - हर को पाओ तुम 
कर आत्ममुक्ति न देहमुक्ति 
ब्रह्मन् को सोच लगा ले युक्ति 
सबकुछ अनित्य अभिमानी है 
जिसे आत्मज्ञान वो ज्ञानी है 

ये सोच सदा पाले रखना 
अपना न कोई पराया है । 2 

ये सब भ्रम है सब माया है 
जग में जो खोया पाया है ।

06/01/2018

मुहब्बत है मुकम्मल अब अधूरापन नही दिखता

भरे आकाश के नीचे पतड़्गे सा नही दिखता
मैं वो खुश्बू हूँ जो महसूस होता हूँ नही दिखता

अधूरी साँस थी, थे हम, अधूरी ज़िन्दगी मेरी
मुहब्बत है मुकम्मल अब अधूरापन नही दिखता

बहुत खामोश हैं लफ्ज़ - ए - बयाँ उनकी अदाएँ पर
उतरती यूँ दिल - ओ - दरिया में हैं शाहिल नही दिखता

न जाने क्यों बहुत रूठे हुए मगरूर बैठे हैं
मैं जितना इश्क करता हूँ उधर उतना नही दिखता 

30/11/2017

गज़ल



एक निर्णय ले लिए फिर क्या फ़रक पड़ता खुदा
या तो जन्नत राह होगी या तो दोजख का सफर

जिन्दगी को आग की दरिया पे है रखना मुझे
या तो मेरी मौत होगी या रहूँगा मैं अमर

हर कदम पे ले रहे हैं वो परीक्षाएँ मेरी
तुम कहो ! मैं इश्क़ कह दूँ या कहूँ इसको समर

चाँद देखो छिप गया है सूर्य दीवाना सा है
मेरा क्या होगा बताओ आज तुम आई अगर

जो हमेशा दिल की बातें सोंचता, सुनता रहा
आ गया जाने कहाँ से बुद्धिमानों के शहर

चाँद से ऊपर पहुँच कर सूर्य पर रख दूँ कदम
मेरे सारे ख़्वाब जो सजकर बिखर जाएँ इधर

अपनी भी कुछ ख्वाहिशें हैं अपने भी कुछ स्वप्न हैं
छोड़कर इनको बताओ आप ही जाऊँ किधर 

14/11/2017

ज़िक्र होता है तेरा हर बात में

मैं तुम्हारे प्यार की बरसात में
भीग जाऊँगा तुम्हारी याद में

जन्नतें मेरे लिए शायद नही
तू मेरी जन्नत तु ही फ़रियाद में

तुम नदी सी आ मिलो उस छोर पे
मैं समुन्दर सा मिलूँ आजाद मैं

इस दिलो - दीमाग में क्या कर गई
ज़िक्र होता है तेरा हर बात में

हुश्न शोला , होंठ शबनम , आँख हैं दरिया कोई
चाहता हूँ डूब के मरना , जियूँगा बाद में 

30/10/2017

कभी - कभी मेरे गीतों को गुनगुनाया करो ( गज़ल )

Neelendra Shukla " Neel "
कभी - कभी मेरे तुम पास भी तो आया करो
कभी - कभी मेरे होंठों से मुस्कुराया करो

मेरी जुबाँ में सदा नाम तेरा रहता है
कभी - कभी मेरे गीतों को गुनगुनाया करो

कि वो तुम्हारी हर इक साँसें मुझपे गिर्वी हैं
कभी - कभी अपनी साँसें मुझसे ले जाया करो

मैंने अक्सर तुम्हें इस दिल की गली में देखा
कभी - कभी अपने दिल में मुझे बसाया करो

मेरी हर सुब्ह - शाम ढलती है यादों में तेरी
कभी - कभी मुझे अपना भी दिन बनाया करो

मैं फ़लक से भी तोड़ लाऊँ चाँद - तारों को
कभी - कभी मेरा जो साथ तुम निभाया करो

इश्क काफ़िर नही मेरा मुझे मालूम है पर
कभी - कभी मुझे ख़ुद से भी तो मिलाया करो 

26/10/2017

खुद के सपनों में ही खुद को देख तू

ये जमीं और आसमाँ कर एक तू
यूँ न हिम्मत हार लड़कर देख तू

तोड़ दे चट्टान भी आये अगर
इस समर में एक भाला फेंक तू

वो तेरे पैरों तले आ जाएँगें
इक कदम आगे निकल कर देख तू

जीत लोगे सब  तुम्हारा है ज़रा
ज़िन्दगी से डर हटाकर देख तू

क्या रखा है उस बड़े प्रासाद में
आत्मा में झाँक यारा देख तू

सब गिले शिक़वे यहाँ मिट जाएँगें
इस जहाँ में प्यार भर कर देख तू

खुद - ब - खुद किस्मत बदल जाएगी बस 
खुद के सपनों में ही खुद को देख तू 

ये जमीं और आसमाँ कर एक तू
यूँ न हिम्मत हार लड़कर देख तू

तोड़ दे चट्टान भी आये अगर
इस समर में एक भाला फेंक तू


23/10/2017

तू जो आया , तो ख़ुदा भी आया ( गज़ल )

तेरी ज़ुल्फ़ों से हवा का झोंका आया - 2
ऐसा लगता है जैसे कोई नगमा आया

दूर मुझसे थे अभी तक मेरे अहल ए वफ़ा
तू जो आया , तो ख़ुदा भी आया

सारे रिश्ते , सभी नातों नें ठुकराया मुझे
जब नहीं था कोई मेरे पास तो , तू आया

धूप में यूँ ही भटकता रहा सपनें लेकर
छाँव की चाह में अक्सर तेरा आँचल आया

कभी बीमार हुआ जो मैं, ऐ मेरे हमदम !
डबडबाई तेरी आँखों में आँसू आया

वो इबादत चली मेरे संग मेरी दुल्हन बन
तूने जो की थी उसी से मुझमें रंग आया

लोग आख़िर कभी समझे ही नहीं लफ्ज़ ए बयाँ
तूनें समझा यही काफ़ी है ,सब हाँथ आया

तेरी ज़ुल्फ़ों से हवा का झोंका आया
ऐसा लगता है जैसे कोई नगमा आया

दूर मुझसे थे अभी तक मेरे अहल ए वफ़ा
तू जो आया , तो ख़ुदा भी आया


18/10/2017

मेरी ज़िन्दगी में तुम , कुछ यूँ आओ ( Lyrics )

मेरी ज़िन्दगी में तुम , कुछ यूँ आओ
कि मेरी सुब्ह - शाम हो जाए
कि मेरे दिन - रात हो जाएँ
मैं भीगूँ बाँहों में तेरी
कि यूँ बरसात हो जाए
हो जाए ऽऽ , हो जाए ऽऽ

मेरी ज़िन्दगी में तुम , कुछ यूँ आओ
तेरा चेहरा दिखे हर पल
तेरे संग आज़ गुज़रें कल
तेरी परछाईं बन घूमूँ
तुम्हें चाहूँ , तुम्हें पूजूँ
मैं पूजूँ  ऽऽऽ, मैं पूजूँ  ऽऽ


so now it is not complete when i'll complete it then i'll remove this particular line .....
Thank You .  

17/10/2017

तुम आँखों से यूँ देखो मैं दिल देखता हूँ ( its totally lyrics )



तुम आँखों से यूँ देखो मैं दिल से देखता हूँ -2
तेरी यादों की बारिश में तेरे संऽऽभीऽगता हूँऽऽ

यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखता हूँ   ( For boy )


तुम आँखों से यूँ देखो मैं दिल देखती हूँ -2  

तेरे ख़्वाबों की मंज़िल तेरे संग देखती हूँ

यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखती हूँ ( for girl )


अँगड़ाई लेती लहरें शाहिल से टकराती हैं 

इतना तुझको मैं चाहूँ हर पल तू याद आती है 
कितना गहरा है सागर कितना ऊपर है अम्बर 
जो तू संग - संग चल दे तो, मैं मिल देखता हूँऽऽऽ ( for boy )


तुम आँखों से यूँ देखो मैं दिल से देखता हूँ -2 



तू हवा के झोंके जैसा मेरे दिल का चैन चुराए 

तू आये ऐसे दिल में मुझको पागल कर जाए 
दीदार तेरा करना है तुझ संग जीना मरना है 
तू पास जरा आए तो, मैं मिल के देखती हूँऽऽऽ ( for girl )


तुम आँखों से यूँ देखो मैं से दिल देखती हूँ -2 


तेरी यादों की बारिश में तेरे संऽऽग भीऽगता हूँऽऽ  ( For boy )
तेरे ख़्वाबों की मंज़िल तेरे  संग देखती हूँऽऽ  ( for girl )


यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखता हूँ  ( For boy )

यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखती हूँ ( for girl )


यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखती हूँ ( Both )



हर मुश्किलें जो तेरी वो मेरी ( type of lyrics )

हर मुश्किलें जो तेरी वो मेरी
हर मंज़िलें जो तेरी वो मेरी

जाओ जहाँ संग - संग मैं रहूँ
इतनी सी बस ख़्वाहिशें हैं मेरी   ( these lines for girl )

समझो ना तुम मेरे दिल की ज़फ़ा
पास रहोगी तुम्हीं तुम सदा

कैसे तुम्हें भूल पाउँगा मैं
आवाज़ दूँगा ,बुलाऊँगा मैं  ( ....for boys )

दिल में मेरे तुम यूँ  आ जाना
जैसे लकीरें हाँथों में        ( for girl )

वादा है तुमसे जानेमन
हाँ , हम जियेंगे साथ में  ( for boys )

its not now complete now i'm working on this work .... 

15/10/2017

याद अभी है

तुमको घर तक छोड़ के आना याद अभी है
तुमसे दिल के राज़ बताना याद अभी है

इक संसार मेरा था बचपन की यादों का
उसमें तेरा झूम के आना याद अभी है

घर के कोने - कोने में यूँ दौड़ - भागकर
वो तेरा पायल छनकाना याद अभी है

दिल में मेरे दर्द उट्ठा था तेजी से कुछ
और तेरा वो दौड़ के आना याद अभी है

हुश्न - मुहब्बत जलवे तेरे सारे संग थे
ऐसे में बारिश का आना याद अभी है

नादानी करता था जब मैं  जानबूझ कर
और तेरा बातें समझाना याद अभी है

गुम हो जाऊंगा इक दिन ये मुल्क छोड़ कर
फिर मत कहना इक दीवाना याद अभी है

  

याद हैं

हौले - हौले इश्क़ में वो दिल लगाना याद है
याद है हमको अभी भी वो ज़माना  याद है

रात में तनहाइयाँ आकर सताती हैं मगर
देखना मुझको तेरा वो मुस्कुराना याद है

याद हैं मुझको अभी अँगड़ाइयाँ  भरना तेरा
हाँथ से आँखों पे वो पर्दा लगाना याद है

एक आहट जो तेरी आती है मुझको हर जगह
वो तेरा पीछे से आ मुझको सताना याद है

शाम होते ही तेरी आँखों की वो नजरें - बयाँ
और बागों में तेरा मिलना - मिलाना याद है

इस जगह से उस जगह की दूरियाँ काफ़ी मगर
वो तेरी बचपन की इक तस्वीर पाना याद है

इश्क़ अपना यूँ मुकम्मल ही रहा है  उम्र - भर
लाख़ - तूफ़ानों का आना और जाना याद है

सोंचता था एक मैं ही प्यार करता हूँ तुझे
वो मेरी तस्वीर को दिल से लगाना याद है

11/09/2017

तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ ( गज़ल )

बस तुम्हारे लिए...........

मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ
तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ - 2

मैं कहूँ कैसे तुम्हारी आरज़ू हमको नही
चाहता हूँ मैं तुम्हें तुमसे बग़ावत है नही
किस कदर तुमसे कहूँ अपने दिलों की दास्ताँ ।। तू चली आ ....

छुप - छुपा कर देखता तुझको शज़र की छाँव में
डूब जाता हूँ मैं अक्सर उस शहर ,उस गाँव में
हैं तेरी यादें यहाँ करती मेरे मौसम जवाँ ।। तू चली आ ....

आज हो जैसे युँ ही रहना सदा तुम उम्रभर
ज़िन्दगी आसान होगी कट सकेगा ये सफर
साथ ग़र देती रही बनता रहेगा आशियाँ ।। तू चली आ ....

याद हैं मुझको तेरे चेहरे की वो ख़ामोशियाँ
तू सदा करती रही नज़रों से ही लफ़्ज़े - बयाँ
वो घड़ी , वो पल कटे कैसे हमारे दरमियाँ ऽऽऽ  ।। तू चली आ .....

भावनाओं की नदी में डूबकर हूँ सीखता
मैं घने - बादल तले अक्सर तेरे संग भीगता
यूँ गिराया ना करो ज़ुल्फों से काली बिजलियाँ ।।

तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ

मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ
तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ ।।

06/09/2017

कहीं चिराग जल गया शायद

Daughter $ Son
आज अनन्त चतुर्दशी और शिक्षक दिवस के अवसर पर बड़े भइया और भाभी को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई अतः समूचे घर में उल्लास का माहौल छाया हुआ है मुझे पूरा विश्वास है कि आज मेरे पिताजी की मूछें पहले से थोड़ी टाइट और छाती पहले से कुछ और चौड़ी होगी, भइया मन ही मन खुशी से झूम रहे होंगे कि जैसे झूमती हैं लहलहाती हरी फसलें खेतों में, भाभी जी आज अपार कष्ट के बाद एक अलौकिक सुख का अनुभव कर रही होंगी बाबा आजी ,दादा दादी, चाचा चाची और सभी भाइयों भाभियों सहित बहनों में एक खुशी की लहर दौड़ रही होगी मैं बाहर (केरल) हूँ पर मुझे मालूम इस समय मेरे घर का माहौल कैसा होगा -

(मैं यहाँ बाहर हूँ पर मुझको पता है सब यहाँ
किस कदर छाया हुआ होगा मेरे घर कारवाँ )
                           नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

कहीं पे फूल खिल गया शायद
कहीं गुलशन महक उठा शायद

मेरे पापा ख़ुशी से झूम उठे ,
कहीं चिराग जल गया शायद

जिसे थे खोजते हम रात के अंधेरों में
आज घर चाँद आ गया शायद

कई दिन बीत गए इन्तज़ार में जिसके
वही मेहमान आ गया शायद ।।

मेरे पापा = बच्चे के बाबा जी ( दादा जी )
                  

19/08/2017

जन्मदिन

जन्मदिन के इस सुअवसर पे तुम्हें अर्पण करूँ क्या
देख लो मेरे हृदय को भावना दर्पण करूँ क्या

पूँछता हूँ मैं अकिंचन आज अपने यार से
बाँट दूँ यह विश्व सारा या समेटूँ प्यार से
शब्द हैं, कुछ अर्थ हैं, कुछ भावनाओं के कुसुम
ला बिछाऊँ आज मैं पैरों तले गुलजार से
बौर की देखो छटा है माह ये ऋतुराज का
दिव्य - मेधा हो प्रभा आलोक हो गणराज का
जिन्दगी सारी खुशी दे जो तुम्हें मंजूर हो
और सारे कष्ट जो भी हैं या हों वो दूर हों
राष्ट्र में हो कीर्ति तेरी राष्ट्र यह वंदन करे
राष्ट्र पे हो तू निछावर राष्ट्र अभिनन्दन करे ।

भावना की बूँद हैं इससे अधिक वर्षण करूँ क्या ।।


19/07/2017

मुहब्बत के वास्ते

दुनिया तू घूमता रहा शोहरत के वास्ते
दो - चार गज़ल बोल मुहब्बत के वास्ते

पर्वत,पठार,पेड़ ,नदी और झरोखे ,
भारत बचाए रख तू इबादत के वास्ते

झूठा नही है चाँद ये नक्षत्र न तारे
दो चार घड़ी रुक जा मुहूरत के वास्ते

हो प्रेम बेहिसाब एक - दूजे मुल्क से
इंसान बन जरा तू शराफत के वास्ते

ले ली है कसम हमनें सुधारूँगा ये जहाँ
बिगड़ी हुई बज्ज़ात सियासत के वास्ते

जो भी लड़े हैं जंग में घायल हैं अभी तक
हर शक्स से मिलूँगा अदायत के वास्ते

हैं ठीक नहीं मुल्क के हालात आजकल
हूँ मौत में खड़ा मैं अक़ीदत के वास्ते

उनको भी खबर हो कि धुआँ यूँ नही उठा
इक आग जलाई है बगावत के वास्ते

इस देश की रक्षा में अगर प्राण भी जाँए
मिट जाऊँ सर कलम हो शहादत के वास्ते



16/06/2017

तुम्हारे चेहरे पर


                            रूपों का विस्तार तुम्हारे चेहरे पर
                            दिखता माँ सा प्यार तुम्हारे चेहरे पर
                            कैसे खुद को रोक सकूँ ,मेरी दुनिया
                            लुट जाए सौ बार तुम्हारे चेहरे पर

                            छोटी बिंदिया माथे पर ऐसे सोहे
                            हों सोलह श्रृंगार तुम्हारे चेहरे पर

                           जब से होंठों ने होंठों को पाया है
                           तब से है त्यौहार तुम्हारे चेहरे पर

                           वर्णन करने में ये छह की छह ऋतुएँ
                           कम पड़ती सरकार तुम्हारे चेहरे पर

                           कान्हा बनकर घूँमूँ तेरी यादों में
                           दिखी राधिका चार तुम्हारे चेहरे पर

                           तेरी गोदी में माँ के आँचल का सुख
                           दिखता प्रेम अपार तुम्हारे चेहरे पर

                           जी करता है जन्मदिवस के अवसर पर
                           लिख दूँ सारा प्यार तुम्हारे चेहरे पर ।।


अपने जन्मदिन (19 जून) के अवसर पर तुम्हारे लिए
एक छोटी सी रचना इस उद्देश्य से कि मेरी
काल्पनिक दुनिया में हमेशा तुम इसी
तरह अपनी यादों के साथ मुझे सजाती रहना
इससे भी गम्भीर विचार देना,अपनी यादों से
लबरेज़ रखना कि हमेशा तरोताज़ा रहूँ मैं
तुम्हारी यादें ही तो हैं जो मुझे ताकत देती हैं
किसी भी कार्य को बेहद सलीके से करने में
तुम्हारा प्यार आकाश की तरह है जो मुझे
ढक रखा है ,तुम्हारी यादें सागर की लहरों की तरह हैं
जो मेरे हृदय को और झकझोरती हैं तरड़्गित करती हैं ।।

30/04/2017

बना सकती हो क्या

मुझको अपना मेहमान बना सकती हो क्या ?
मुझसे थोड़ी पहचान बना सकती हो क्या ?

जिसको भगवान बनाओ उसको पूजो पर
मुझको भोला इन्सान बना सकती हो क्या ?

मैं मन्दिर ,मस्जिद गिरिजाघर को क्यों जाऊँ
खुद को मेरा भगवान बना सकती हो क्या ?

मैं गिनता हूँ उन्मुक्त गगन में तारों को
खुद को तुम मेरा चाँद बना सकती हो क्या ?

छोड़ो सारा संसार गजब की दुनिया है
होंठों से छूकर जान बना सकती हो क्या ?

यूँ मत खोजो दुनिया में अंधे लोगों को
मुझको देखो पति-प्राण बना सकती हो क्या ?

26/04/2017

बहुत हैं

अल्लाह तेरी नज़र में बेशुमार बहुत हैं
ईश्वर नही दिखे कहीं दरबार बहुत हैं ।
इक मैं ही नही प्यार करके पाप किया हूँ ,
धरती पे मेरे जैसे गुनाहगार बहुत हैं

नज़रें जमाए देखती है हुश्न - मुहब्बत
मुझ जैसे उस नज़र में गिरफ्तार बहुत हैं

इस देश की हमदर्द निगाहों से मदद लो
सब नीच ही नही हैं मददगार बहुत हैं

गाँवों की दशा देख शहर ही भला लगे
घर कम ही देखता हूँ मैं दीवार बहुत हैं

माँ की दुवाएँ साथ हैं, बहनों की इबादत
गुस्से भरे पिता हैं मगर प्यार बहुत है

दाढ़ी,जटाएँ देख के भरम में मत पड़ो
पाखण्डियों के नाम बलात्कार बहुत हैं

बहनों की , बेटियों की यूँ इज्जत से न खेलो
शहरों में हवस के लिए बाज़ार बहुत हैं

गैरों का खाके कब तलक आराम करोगे
बाँटो तो सही ,देश में हकदार बहुत हैं

इसका कभी उसका हूँ सदा रोल निभाया
चेहरा है एक दोस्तों किरदार बहुत हैं

दिल से मिला हूँ सबसे नही बुद्धि लगाई
वो सोंचते हैं खुद को समझदार बहुत हैं

हर पाँच - वर्ष बाद दिखें हाँथ जोड़कर
भारत में दिखी नक्कटी सरकार बहुत हैं

दूजे के काँध रख के मियाँ ट्रिगर दबाएँ
इक " नील " तू ही मूर्ख होशियार बहुत हैं ।।

16/04/2017

न जाने कल कहाँ ये दोस्त तेरी दीक्षा हो


प्रिय बचपन की दोस्त दीक्षा मिश्रा जी को समर्पित ये गज़ल बहुत ही सीधी सरल और उदात्त स्वभाव की हैं   -------

महकती हो सदा फूलों सी वो ऐसी फिज़ा हो
खुले हों जुल्फ लहराती हुई कोई निशाँ हो ,
चमकती,चमचमाती धूप हो जैसे शरद की
सुनहरी शान्त सी कोमल हमारी दीक्षा हो ।।

नही चन्दा ,नही सूरज ,नही गुलनार माँगू
सदा खुशियों भरी, पावन पवन वो,दीक्षा हो ।।

अधूरी एक भी किरणें नही टकराएँ उससे,
कि छनकर जाएँ जिसपे रोशनी वो दीक्षा हो ।।

सभी हों राह ऐसी आज जिसपे पैर तेरा
पड़ें ,बिछ जाएँ सारे फूल जिसपे दीक्षा हो ।।

मिटें नापाक वो सारी सभी की भावनाएँ
कि जिसकी सोंच पे बैठी हुई ये दीक्षा हो ।।

बड़ी हसरत,बड़ी चाहत,बड़ा महफूज़ हूँ मैं
जिसे महफूज़ तुम रखना हमारी दीक्षा हो ।।

बहुत शीतल हिलोरें मारती हैं भावनाएँ
कि हो गरमी में जो बदरी सदृश वो,दीक्षा हो ।।

चलो अब नील तुम भी साथ चल लो ,
न जाने कल कहाँ ये दोस्त तेरी दीक्षा हो ।।

14/04/2017

कोशिश करता हूँ

लिखने और मिटाने की मैं कोशिश करता हूँ ,
अक्सर तुझको पाने की मैं कोशिश करता हूँ

सूरज,चन्दा,फूल,खिलौने डालूँ तेरी झोली में
तुझमें खुद मैं घुल जाने की कोशिश करता हूँ

माँ के चरणों की गाथाएँ बाबू जी का प्यार
सुबह-सवेरे दोहराने की कोशिश करता हूँ

बहनें हों उन्मुक्त हमारी जितना चाहें पढ़ पाएँ,
बाबू जी को समझाने की कोशिश करता हूँ

चाचा चाची,मामा मामी,भाई भौजी सब
सारे रिस्तों को पाने की कोशिश करता हूँ

शहरों में वो बात कहाँ जो गाँवों की अमराई में
फिर अपने घर को जाने की कोशिश करता हूँ

जन्नत - स्वर्ग की बातें अद्भुत कौन देख पाया अब तक
इक दूजे को सुलझाने की कोशिश करता हूँ

जिनसे आँखें डरती आई जीवन के हर मंज़र पे ,
उनसे आँख मिलाने की मैं कोशिश करता हूँ ।।

जब - जब अपना रूप बिगाड़ी तानाशाही सरकारें,
तब - तब मैं खुद टकराने की कोशिश करता हूँ ।।

30/03/2017

हाशिए पर गंगा

माँ,
मैं देख रहा हूँ
तुम्हारी पीड़ा,तुम्हारे कष्ट

मैं देख रहा हूँ ,
कि कैसे तुम्हारे हृदय पे करती हैं चोट ,
मथ देती हैं तुम्हारे पेट को
झकझोर देती हैं पूरी की पूरी शरीर
ये आधुनिक नावें,
काला कर चुकी हैं समूचे जल को अपने धुआँ से ।

मैं देख रहा हूँ ,
कि कैसे तुम्हारे नाम पे खेली जा रही है
ओछी - राजनीति ,
खर्च किए जा रहे हैं हजारों करोड़ रूपये
पवित्रता ,स्वच्छता और निर्मल बनाने का नाम दे - देकर ।

क्या किसी ने कभी अपनी माँ से राजनीति खेली है क्या ?

मैं देख रहा हूँ कि लगातार
तुम धंसती जा रही हो राजनीतिक - दलदल में
जहाँ लोग तुम्हारा सहारा नही बन रहे हैं
अपितु दिखा रहे हैं तुम्हें हाँथ
औपचारिकता पूरी करने के लिए
तुम्हारे नाम पर गद्दी पे बने रहने के लिए ।

माँ,
मैं देख रहा हूँ ,
कि कैसे दोहन हो रहा है तुम्हारा
इस ग्लोब्लाइजेशन के दौर में ।
लगातार तुम्हारी कोख में फेंका जा रहा है
कचरा ,तैर रहा है मैला
और तो और मुर्दे भी तैरते दिख जाते हैं कभी - कभी ।

शहर के कल - कारखाने ,फैक्ट्रियाँ
और असंख्य गंदी नालियाँ तुमसे आके मिलती हैं
प्रदूषित करती हैं तुम्हें ,
और तुम बड़ी ही सहजता से स्वीकारती हो उन्हें,
सहती हो ।

टूट गई हैं तुम्हारी लहरें
समाप्त होता जा रहा है तुम्हारा जल
अब मैं तुम्हें बूढ़ी कहूँ या बीमार
कुछ सूझता नही है ।

अब तुम ही कहो
मैं तुम्हारा चारण बनूँ ,
गाऊँ तुम्हारे पवित्रता की झूठी स्तुतियाँ
या स्वच्छता का कोरा लिबास पहनाऊँ तुम्हें
या कह दूँ मैं सही - सही सारी बातें ।

मैं क्या करूँ माँ ,मैं क्या करूँ
असमंजस में हूँ ,
सही कहूँगा तो तुम्हारे भक्तों को ठेस पहुँचेगी
और गुण गाऊँ तो तुम्हारे साथ धोखा होगा
क्या करूँ माँ ,मैं क्या करूँ ।।

08/03/2017

विवाह (एक दृश्य)

 Shubh Vivaah
आस्था का देव से अब हो रहा संगम यहाँ ।
सात फेरों से सजा है प्यार का बंधन यहाँ ।।

माह बाकी है अभी से हो रही तैयारियाँ,
सज रहें हैं घर सुहावन सज रही हैं क्यारियाँ
मित्र ,बन्धु संग साथी फोनकर - कर कह रहे
छोड़ दूँगा इस महोत्सव में भरी पिचकारियाँ
फिर तुम्हें उन सात रंगों में रंगूँगा इस कदर
भूल जाओगी सभी दुःख,और आओगी निखर

प्रेम की बातें मगर यह दे रही उलझन यहाँ ।।

बीतती है रात जग - जग ,बीतते हैं दिन सभी
अब नही कहता कोई कुछ काम कर लो तुम कभी
मिल रहा है स्नेह सबसे ,मिल रहा है प्यार भी
हो रहा है आजकल मेरा बहुत सत्कार भी
मैं अचम्भित हो रही हूँ बदलते व्यवहार से
ये बहन भी दूर होती जा रही इस यार से

देवतासम मानते सब कर रहे वन्दन यहाँ ।।

कर रही चहुँओर से अटखेलियाँ भाभी सभी
जा नही सकती अकेली ,रोंकते हैं सब अभी
चहलकदमी हो रही फिर वो अकेली कौन है
भर गया घर - द्वार रिस्तेदार से फिर मौन है
और मेरे गाँव की परिहास करती हैं सखी
बँध गयी ना हे प्रिये !जो खूब तुम बहती रही

लग रही हल्दी तुम्हें ,अब लग रहा चन्दन यहाँ ।।

यूँ अकेली बैठकर है देखती निज रूप को
और दर्पण में खिलाई सर्दियों में धूप को
हाँथ मेंहदी से सजे हैं ,हैं महावर पैर में
खो गई है स्वप्न - सुन्दर से सुहाने सैर में
फिर झिझकती है युँ ही जैसे कि दरवाजा खुला
दी चलो नीचे रही हैं माँ तुम्हें कब से बुला

सज रही है ,संवरती है ,लग रहा उबटन यहाँ ।।

और अब समधी सहित बारात आई द्वार पर
फट रहे गोले चमत्कृत हो रहा आकाश - घर
देखती सखियाँ सभी हैं इस परम - त्यौहार को
देखती हैं संग ही अपने सखी के प्यार को
गूँजता वातावरण है दिव्य मंत्रोच्चार से
हैं पधारे आज चतुरानन मेरे उद्गार से

आज दूल्हा खुश हुआ ,मुस्का रही दुल्हन यहाँ ।।

एक दूजे के गले में डालने माला लगे
तालियों की गड़गड़ाहट पुष्प बरसाने लगे
और अब विवाह की वह पुण्य वेला आ गई
हो गया विवाह ,अब वादे निभाने है चली
कर चुकी अर्पण ,समर्पण भाव - मन सब रीतियाँ
मिल रही है प्रेम से उद्गार करती प्रीतियाँ

काल - वेला बढ़ रही ज्यों बढ़ रही धड़कन यहाँ ।।

चँहचहाती ,कूकती थी जो कभी आँगन तले
सोचती है ,पोछती आँसू लिपटती है गले
माँ,बहन,भाई,पिता सब रो रहे हैं इस कदर
नयन से आँसू नही ,गिरता समुन्दर फूट कर
साथ है अब छूटता आई विदाई की घड़ी
रो रहे हैं वृक्ष - वन सब, यह प्रकृति भी रो पड़ी

नील (आज) करते देवगण भी अतिथि अभिनन्दन यहाँ ।।

आस्था का देव से अब हो रहा संगम यहाँ ।
सात फेरों से सजा है प्यार का बन्धन यहाँ ।।


यह कविता मैं अपने दो दोस्तों को समर्पित करता हूँ -------
दीक्षा मिश्रा (बचपन की दोस्त) और पूजा त्रिपाठी ( बुआ जी )
 मेरी तरफ से आप दोनों को आपके विवाहोत्सव की ढ़ेर सारी
शुभकामनाएँ,बधाइयाँ ।।

रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...