05/02/2019

मैं लिखता हूँ शब के साये में बैठा

BHU - Ruiya ( Sanskrit Blok )

वो कहता है उसको जहाँ झुकाना है 
मैं कहता हूँ मुझे दिलों तक जाना है 

सबका अपना - अपना यहाँ सफ़र यारों 
सबको अपनी - अपनी मंज़िल जाना 

मैं लिखता हूँ शब के साये में बैठा 
उनको अब्भी भी महफ़िल तक जाना है 

बच्चों को खुश रखते हैं पापा मेरे 
ज्ञानी हैं, फिर भी ज़ाहिल तक जाना है 

मैंनें  भी कुछ सोच रखा है जीवन में 
इस साहिल से उस साहिल तक जाना है 

भूखों की नज़र हर घड़ी रोटी पे रही है



आशिक की नज़र हर घड़ी चोटी पे रही है 
गिद्धों की नज़र हर घड़ी बोटी पे रही है 

मानो नहीं मानो मगर ये सत्य है साहब 
भूखों की नज़र हर घड़ी रोटी पे रही है 


04/02/2019

दिल की बात निकलकर बाहर आ जाए



बातें बोलो आँख सजल कर आ जाएँ 
झूमें नाचें और सम्हलकर आ जाएँ 

इतना प्यार करो, इतनी बेचैनी दो 
दिल की बात निकलकर बाहर आ जाए 

मौका दो  उसको, पूरी आज़ादी दो 
क्या मालूम संसार बदलकर आ जाए

इतना उन्हें खिलाओ, इतनी सेवा दो
बाबा सौ वर्षों तक चलकर आ जाएँ 


मेरी माँ सामने जब हो उदासी दूर रहती है

कन्हैय्या यशोदा और देवकी के साथ 

दवा लेता हूँ अक्सर और खाँसी दूर रहती है 
मुहब्बत गर हकीकत हो तो राशी दूर रहती है 

बहुत ही याद आती है तुम्हारी अब अकेले में 
 मेरी माँ सामने हो तो उदासी दूर रहती है 

जिसे मैं चाहता हूँ हे प्रिये! मैं नाम दे बैठा
 है इस दिल में, मग़र कॉलेज से थोड़ा दूर रहती है 

02/02/2019

कविता, नज़्मों, गज़लों सी बन जाती है



वो हँसती है मेरा दिल बहलाती है 
दिल की सारी बातें मुझे बताती है 

उससे बातें कर के मेरा दिन गुज़रे 
उसके फोटो संग रातें कट जाती हैं 

ज़िक्र हमारा करती बातों - बातों में 
बातों - बातों में परिचय दे जाती है 

Fb, Whats app, Insta ,Twitter सब पे है 
सबसे मुझको इश्क बहुत समझाती  है 

दिल की बातें वो भी कहना चाहे पर 
ना जाने क्यों कहने में शर्माती है 

दिन, तारीख़ महीना सबकुछ याद उसे 
इक मुद्दत से मुझको पढ़ती जाती है

छोटी - छोटी बातों पर लड़ती रहती
वो मेरी जीवन - साथी बन जाती है 

जब भी उसको लिखने बैठा सिद्दत से 
कविता, नज़्मों, गज़लों सी बन जाती है 


तुम्हें नसीब सोचता हूँ मैं




बहुत अजीब सोचता हूँ मैं 
उसे रक़ीब सोचता हूँ मैं

आज इज़हार करूँगा तुमको 
रोज़ तरक़ीब सोचता हूँ मैं 

बाँह में तुम बिखर गई मेरे 
तुम्हें हबीब सोचता हूँ मैं

एक तुम हो, हसीन जीवन है 
मुझे, अमीर सोचता हूँ मैं 

सीखता हूँ मैं बारहाँ तुमसे 
तुम्हें अदीब सोचता हूँ मैं

आज सबकुछ मेरे तुम्हीं तुम हो
तुम्हें नसीब सोचता हूँ मैं 








29/01/2019

बातों - बातों में गज़ले बन जाती हैं

Neel

बातों - बातों में घर तक आ जाती है 
बातों - बातों में दुनिया बन जाती है 

बातों - बातों में निकले हैं शे'र कई 
बातों - बातों में गज़ले बन जाती हैं 

बातों - बातों से दुश्मन बढ़ते जाते 
बातों - बातों में संधि हो जाती है 

बातों - बातों में बहनों से प्यार हुआ 
बातों - बातों में मुझको पा जाती हैं 

बातों - बातों में वर्षा की बात चली 
बातों - बातों में बारिश हो जाती है 

बातों - बातों में माँ नें थप्पड़ मारा 
बातों - बातों में ही खुद रो जाती है 

बातों - बातों में सपनों नें रुख़ बदला 
बातों - बातों में किस्मत बन जाती है 

बातों - बातों में मेरी जाने - जाना 
बातों - बातों में मुझको बहलाती है 

बातों - बातों में जीवन कट जाता है 
बातों - बातों में यादें रह जाती हैं 

28/01/2019

" नील " तमाशेबाज़ नहीं है, दर्पण है



Akanksha Joshi

ना जाने क्यों आज बहुत वो बेमन हैं 
उनको कोई छोड़ गया है, उलझन है 

मेरा अब तक दुश्मन नहीं बना कोई 
उनकी ख़ातिर पूरी दुनिया दुश्मन है 

जितनी माँग हुई थी, वो न दे पाए 
शादी में उखड़ी - उखड़ी सी समधन है 

सबकुछ छोड़ सकूँ तुझको कैसे छोड़ू 
तू ही तो मेरी बहना! जीवन - धन है 

इक अर्शे के बाद सही उस तट जाओ 
मुक्ति मिल जायेगी प्यारे! संगम है 

पूरी दुनिया मुझको सुन्दर दिखती है 
इस पल मेरे साथ, हमारी हमदम हैं 

तुमको हँसना है मुझपे, हँसते रहना 
" नील " तमाशेबाज़ नहीं है, दर्पण है 

22/01/2019

किसी पे आ गया जो दिल तो मुहब्बत कीजे

Neel At Chinmaya Vishwavidyapeeth

तमाशाई बहुत हैं लोग मगर क्या कीजे
किसी पे आ गया जो दिल तो मुहब्बत कीजे 

हौंसलों में उड़ान भर के आसमाँ चूमूँ 
मेरे हिस्से की आज फिर से इबादत कीजे 

छोड़ देते हैं सब, हमराज़ नहीं है कोई 
खुद ही, खुद को सदा ख़ुश रखने की आदत कीजे 

मुझे जो बोलना है बोल, मग़र प्यारे सुन 
नहीं परिवार को कुछ कहने की जुरअत कीजे 

पाक - ए -हिज्राँ की नज़र है जो बढ़ रहा हूँ मैं 
छोड़ भी दीजिये अब यूँ नहीं कुर्बत कीजे 

काम करना है अगर देख कभी सड़कों पर 
अपने इस मुल्क के बच्चों की हिफ़ाजत कीजे 

छोड़कर द्वेष, भेदभाव सभी आज यहाँ 
सारा संसार मिलाकर इसे भारत कीजे 


पाक - ए -हिज्राँ - विरह का पवित्र दुःख 
कुर्बत - निकटता , सामीप्य 

21/01/2019

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा

Neel At Panjabi Dhaba In Kerala.

जिन्दगी की कश्मक़श में उलझनें 
आती हैं लेकिन 
उलझनों से भागना सीख़ा नहीं मैंने 
कभी भी 
जब तलक हैं प्राण, हैं साँसें 
मुक़म्मल जिन्दगी है 
तब तलक मैं भी तुम्हारा साथ 
देता ही रहूँगा 

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा 

तुम हजारों क्या करोड़ों लो 
परीक्षाएँ हमारी 
या मुझे दे दो अभी से आप 
अपनी ज़िम्मेदारी 
मैं तुम्हें उन चाँद - तारों तक नहीं ले 
जाऊँगा पर 
मैं तुम्हें नज़्मों में अपने घोलकर
ऐसे कहूँगा 

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा 

इश्क क्या है क्या मुहब्बत और ये 
नफ़रत भला क्या 
तुम हमारे पास हो जब तो कहो 
सोहरत भला क्या 
मानता हूँ मैं मुकम्मल इश्क का 
लम्बा - सफ़र है 
तुम जिधर बहती रहोगी मैं उधर 
बहता रहूँगा 

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा

तुम नहीं चिन्ता करो बस साथ
यूँ देती रहो तुम
हाँथ से अपने सदा ये हाँथ
भर देती रहो तुम
ये भरा संसार दुःख देता रहा
सदियों तलक
मैं भरे संसार का दुःख छोड़कर
आगे बढूँगा

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा

चाहतें इतनी हमारी संग तुम्हारे
घूम लूँ मैं
तुम मुझे यूँ देखती जाओ तुम्हें
अब चूम लूँ मैं
और फिर इन मुट्ठियों में हो भरा
संसार अपना
खूबसूरत ज़िन्दगी संग खूब मैं
सपनें गढ़ूँगा

मैं तुम्हारा था ,तुम्हारा हूँ , तुम्हारा ही रहूँगा

09/01/2019

मेरी धड़कन में तेरी धड़कन है

Pic from google " Vivah Movie "

मेरी धड़कन में तेरी धड़कन है 
मेरी आँखों में तेरा चेहरा है 
मेरे लफ्जों में तेरी बातें हैं 
मुझे लगता है प्यार गहरा है 

जिस्म क्या रूह तक मेरी छू लो 
मुझमें खो जाओ ये जहाँ भूलो 
इश्क़ में है खुदा खुदाई भी 
इश्क़ में प्यार है जुदाई भी 

तुम न आ पाये आज फिर मिलने 
मुझे लगता है घर पे पहरा है 

मेरी धड़कन में ...... 


ये है चिन्मया परिवार

Chinmaya Family 


ये है चिन्मया परिवार, ये है चिन्मया परिवार 
जिनके उच्च - विचारों से तर जाता है सारा संसार।।

ये है चिन्मया परिवार ..... 

जीवन का दर्शन सिखलाए, मन के सारे द्वंद्व मिटाये 
गीता, वेद और उपनिषदों का जो सारतत्व समझाये 

मानों जीवन की गहराई पर फलते हों शुद्ध - विचार 

ये है चिन्मया परिवार ..... 

प्राचीन - अर्वाचीन मिलाकर, प्राची और प्रतीची पाकर 
गुरुजन ज्ञान बाँटते प्रायः, हम सब शिष्यों को समझाकर 

जैसी उत्तम - प्रकृति यहाँ कि वैसे ही शिक्षक का प्यार 

ये है चिन्मया परिवार ..... 

जीवन क्या है वही बतायें, स्वामी जी शुभ - राह दिखाएँ 
चिड़िया चहकें, कोकिल कूँकें, मद्धम धीमी बारिश आये 

ऐसा दिव्य, मनोहर, पावन है ये शंकर का घर - द्वार 

ये है चिन्मया परिवार ..... 

हिल - मिलकर रहते हैं सारे, प्यारे बच्चे सभी यहाँ रे   
जैसे उपवन में हों फूल, कई तरह के न्यारे - न्यारे 

सुन्दर - धरती पर ये स्वर्गरूप है ईश्वर का उपहार 

ये है चिन्मया परिवार, ये है चिन्मया परिवार 
जिनके उच्च - विचारों से तर जाता है सारा संसार।।

ये है चिन्मया परिवार .....


Chinmaya Vishwavidyapeeth


04/01/2019

इश्क का भी कोई ठिकाना ना

Serial & Film Writer at Bollywood - Prabhat Bandhulya  Bhaiya 


इश्क काफ़िर है, मेरे जैसा है 
इश्क का भी कोई ठिकाना ना 

आँख में प्यार नहीं है उसके 
आँख में है महज़ फ़साना ना 

गलतियाँ उसने मेरे सर रख दी 
और कुछ था नहीं बहाना ना 

इश्क के बाद हूँ मैं दर्शन में 
यार अब फ़िर करीब आना ना 

चलो कुछ तो बचा है जीने को 
और अब आग तुम लगाना ना 

प्यार कर गीत, ग़ज़ल, कविता लिख 
प्यार में है बहुत ख़ज़ाना ना 

बोलता है तो लोग सुनते हैं 
शे'र ही बोल, ग़ज़ल गाना ना 

"नील"आखिर कहाँ तू जाएगा 
क्रूर हैं लोग, ये ज़माना ना   

02/01/2019

समुद्री - लहरों सी तुम

नील 

तुम बिल्कुल समुद्री - लहरों सी हो
जितनी तेज करीब आती हो 
उतनी ही तेज वापस जाती हो, मुझे अकेला छोड़ 
तुम्हारा समुद्र सा ठहराव जरूर है मुझमें 
पर समुद्री - लहरों सी तुम मुझमें नहीं ठहर पाती बहुत देर तक 

26/12/2018

Kerala to Mumbai

 यह एक यात्रा की घटना है इसमें जो भी पात्र हैं वो वास्तविक हैं और कुछ को मैं जानता हूँ कुछ अन्जान।



कल्यान रेलवे स्टेशन -  (23/12/2018 - Sunday)

रिक्सा वाले भाई साहब - कहाँ जाना भाई बोलो, बताओ तो सही मैं छोड़ देता हूँ।
नील - सर वो तो सही है पर मुझे खुद को नहीं पता मुझे कहाँ जाना है ?
हाँ अगर आपके पास मोबाइल हो तो एक कॉल करके बता सकता हूँ कहाँ जाना और क्या करना है।

( तब तक दूसरा ग्राहक पाकर निकल लिया वो, दूसरे रिक्सा वाले से  )

नील - हेल्लो, हेल्लो भाई साहब ! आपके पास मोबाइल है क्या ?
रिक्सा वाले भाई साहब - हाँ है, क्यों ?
नील - भइया एक कॉल करना है
रिक्सावाले भाई साहब - क्यों तुम्हारे पास मोबाइल नहीं है क्या ?
नील - है ना सर ! पर स्विच ऑफ़ है और मुझे एक बहुत जरुरी बात करनी है।

( ऊपर से नीचे तक देखते हुए )

रिक्सावाले - क्या नाम है ?
नील - नीलेन्द्र है भैया
रिक्सावाले - नहीं, नहीं पूरा नाम बताओ
नील - नीलेन्द्र शुक्ल " नील "
रिक्सावाले - ब्राह्मण हो ?
नील - जी हाँ।
रिक्सावाले - लगते नहीं हो यार Identity Card है क्या कोई ?
नील - इन्सान लग रहा हूँ या नहीं सर !
रिक्सावाले - भाई बुरा मत मानना लेकिन देखने में आतंकवादी भी इंसान ही लगते हैं।
नील - हाँ वो तो है सर, पर अभी आप मेरी सहायता कर रहें हैं या नहीं
रिक्सावाले - बेटा माफ़ करना पर इस मामले में मैं थोड़ा सचेत रहता हूँ, इसलिए मैं आपकी मदद नहीं कर सकता।
नील - Okay Okay Sir! No Problem Thank You ..

( ये सब सुनते हुए दूसरे भाई साहब ने कहा )

भाई साहब - किससे बात करनी है भाई?
नील - जिनके पास जाना है उन्हीं भाई साहब के पास।
भाई साहब - भाई लफड़े वाला नं. तो नहीं है ना
नील - नहीं सर !मैं आपके सामने ही बात करूँगा, नहीं तो एक काम करिये पहले आप बात करिये मैं बाद में कर लूँगा।
भाई साहब - लो भाई अब इतना भी शर्मिंदा न करो।

Second Scene -

नील - Hello, Hello हाँ सुरेन्द्र भाई
सुरेन्द्र - हाँ भाई, कौन ?
नील - मैं नीलेन्द्र, वो विवेक भाई ने आपसे बात की थी न मेरे बारे में
सुरेन्द्र - हाँ, हाँ नीलेन्द्र भाई नमस्कार, कहाँ हो आप ?
नील - मैं कल्यान स्टेशन पे खड़ा हूँ सर।
सुरेन्द्र - अच्छा ! पर यार अभी तो 4 ही बजे हैं और मेरी छुट्टी 8 बजे तक होगी
नील - कोई नहीं भाई तब तक मैं इधर - उधर घूमता हूँ, और हाँ ये नं. मेरा नहीं है। मेरा मोबाइल  स्विच ऑफ है So I'll call you ..
सुरेन्द्र - ठीक है भाई! Okay .

Third Scene -

( Mobile भाई को देकर धन्यवाद भाई, घूमते - घूमते एक खाली मोबाइल की दुकान पर )

नील - Hello कैसे हैं सर ?
दुकानवाले - ठीक हूँ भाई।
नील - मुझे आपसे एक जानकारी चाहिये थी
दुकान - जी पूछिए
नील - Actually मेरे No. की Incoming Call बंद हो गई है तो अभी क्या करूँ ?
दुकान - कितने दिन हुए ?
नील - बस यहीं  कुछ 2 - 4 दिन ही हुए हैं।
दुकान - कौन सी सिम है ?
नील - Idea की है भाई
दुकान - एक काम करो 35 वाला Recharge कराओ चालू हो जायेगी
नील - ( सशंकित मन से ) 35 वाले में चालू हो जाएगा ना भाई, उससे अधिक तो नहीं कराना पड़ेगा, और एक बात इस 35 वाले में मुझे पैसे भी मिलेंगे या सिर्फ Incoming ही Start होगी।
दुकान - नहीं नहीं पैसे भी मिलेंगे
नील - तो एक बात बताना Full Talk Time कितने पे है ?
दुकान - 95 सर !
नील - Okay sir कर दीजिये, और ये Mobile Charging पे लगा देते तो अच्छा होता भइया।
दूकान - हाँ हाँ क्यों नहीं, लाओ इधर दो।


 ( Mobil Shop के Just बगल शुध्द शाकाहारी होटल, में चाय पीने के लिए पहुँच कर )

नील - दद्दू  एक चाय मिलेगी !
दादा - हाँ जरूर बेटा क्यों नहीं, हे देखो बाबू को चाय दो।
( बाबू सुनते ही )
नील - कहाँ के हैं आप दद्दू मुम्बई के ही या बाहर के ?
दादा - बेटा हम तो बनारस के हैं, क्यों ?
नील - नहीं वो आपने बाबू कहा ना मुझे, इसलिए मुझे लगा की आप उसी तरफ के होंगे।
दद्दू हमहूँ बनारस 6 साल रहली ह, टूटल - फूटल भोजपुरी हमहूँ के आवेला।
                                   ( चाय पीते हुए )
अच्छा दद्दू एक बात पूछीं
दादा - हाँ हाँ बेटा पूँछो
नील - केतना साल हो गइल मुंबई रहत
दादा - यही 22 - 25 साल भइल होइ बेटा
नील - एक बात बतावा कहाँ ज्यादा सुकून हौ, बम्बई म, की बनारस म।
दादा - अब का कहीं बेटा आपन घर अपनै होला, घरा तौ खैर इहौ अपने हौ, लेकिन रजा बनारस के मजा कुछ औरे हौ।
नील - सही कहला दद्दू जौन स्वाद बनारस के चाय में हौ, ऊ केहरियो देखे के नाही मिलेला।
बहुत दिन बाद " चौचक चाय " पीली ह, मजा आ गएल
केरला में तौ अइसन चाय भेंटाते नइखे।
दादा - केरला में रहा ला का बचवा ?
नील - हाँ दद्दू! केरले में पढ़ी ला
  - कौन दर्जा म हउआ ?
नील - दद्दू, संस्कृत से M.A करत हई





दिल की बातें दिल तक हों तो बेहतर है

Neel With Grand Pa


इस घर से उस घर की बातें बेहतर हैं 
इसकी उसकी सबकी बातें बेहतर है 

इससे - उससे कह के न पछताना तुम 
दिल की बातें दिल तक हों तो बेहतर है 

काल चक्र की सुइयाँ जैसे बढ़ती हैं 
वैसे ही तुम भी बढ़ते तो बेहतर है 

लोगों में परिवर्तन लाकर क्या होगा 
जीने दो, जो जैसा है वो बेहतर है 

उसके अन्दर सही - गलत क्या देखे है 
खुद के अन्दर झाँक वही अब बेहतर है 

खोज - बीन के बाद जहाँ से जो पाया 
वही मुहब्बत मेरे खातिर बेहतर है 

एसी, कूलर, महल , भवन सब फीके हैं 
माँ का गन्दा आँचल मुझको बेहतर है 

बाबा के चेहरे पर शिकन नहीं अब तक 
बाबा अब भी हम लोगों से बेहतर हैं 

06/12/2018

आज के दौर को पहचानने की जुर्रत है

My love My Dear Daughter 
आज के दौर में लोगों को कहाँ फुर्सत है 
आज के दौर में, सबकुछ जो बनी दौलत है 

आज के दौर में, रख ले जहाँ को कदमों में 
आज के दौर को पहचानने की जुर्रत है 

आज के दौर में, कुछ भी नही है पहले सा 
आज के दौर में चहुँओर बनी दहशत है 

आज के दौर में भक्ति हुई है दंगाई 
आज के दौर में जो कटघरे में कुदरत है 

आज के दौर में, सबकुछ सड़ा - गला मिलता 
आज के दौर में, आखिर वो कहाँ  लज्जत है 

आज के दौर में भी यूज़ नेट नही करते 
आज के दौर में, ईश्वर की बड़ी रहमत है 

आज के दौर में भी प्रेमिका नहीं इक भी 
आज के दौर में सबकुछ बनी मुहब्बत है  

05/12/2018

Dear Jindagi

With Nandy Sis Neel
जिन्दगी ख़ामोश इक पतवार है 
जिन्दगी में हर घड़ी त्यौहार है 

जिन्दगी की बात पुस्तक में नहीं 
जिन्दगी हर पल नई फ़नकार है 

जिन्दगी सबकी नहीं है एक सी 
जिन्दगी में राह भी दो - चार हैं 

जिन्दगी भर इश्क जो समझे नहीं 
जिन्दगी भर के लिए बीमार हैं 

जिन्दगी को मनमुताबिक रूप दूँ 
जिन्दगी है,ये नहीं बाजार है 

जिन्दगी हरदम दिखाती आइना 
जिन्दगी सबसे बड़ी सरकार है 

जिन्दगी का इक सलीका है सुनो 
जिन्दगी को जिन्दगी से प्यार है 



इस कदर मुझपे भरोसा मत करो

नील 
इस कदर मुझपे भरोसा मत करो 
मैं तुम्हारे प्यार के लायक नही 

जिन्दगी भर प्यार की बातें करूँ 
गीत गाऊँ मैं कोई गायक नहीं 

मैं तुम्हारा साथ दूँगा क्या पता 
किस अहद हो जाऊँगा मैं गुमशुदा 
तुम जहाँ जाओ, वहाँ मैं भी रहूँ 
सुन ज़रा फिल्मों का मैं नायक नहीं 

जिंदगी में है फ़कीरी क्या करूँ 
जो दिया ईश्वर नें हंसकर ले लिया 
माँगता हूँ, मैं तुम्हें हर रोज़ पर 
क्या कहूँ, वैसा रहा साधक नहीं 

दुःख के आँसू नहीं निकालो

नील 
दुःख के आँसू नहीं निकालो 
सुख की साँस भरो यारा 

अब जब सबकुछ ठीक हो गया 
न एहसास भरो यारा 

तुम भी रूठी, हम भी रूठे 
तुम भी टूटी, हम भी टूटे 
पतझड़ का मौसम करके 
अब न हमराज़ बनो यारा 

कुछ नादानी तुमने भी की 
कुछ नादानी मैंने भी 
कुछ शैतानी तुमने भी की 
कुछ शैतानी मैंने भी 

मंजिल तुमको खोज रही 
अब उसकी तरफ बढ़ो यारा 

कहाँ गई थी बोलो आखिर 
जब मैं टूटा, बिखरा था 
जीवन की गति उल्टी थी तब 
सबकुछ उल्टा दिख रहा था 

जो पढ़ना है वही पढ़ो तुम 
मुझको नही पढ़ो यारा 

रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...