26/12/2018

Kerala to Mumbai

 यह एक यात्रा की घटना है इसमें जो भी पात्र हैं वो वास्तविक हैं और कुछ को मैं जानता हूँ कुछ अन्जान।



कल्यान रेलवे स्टेशन -  (23/12/2018 - Sunday)

रिक्सा वाले भाई साहब - कहाँ जाना भाई बोलो, बताओ तो सही मैं छोड़ देता हूँ।
नील - सर वो तो सही है पर मुझे खुद को नहीं पता मुझे कहाँ जाना है ?
हाँ अगर आपके पास मोबाइल हो तो एक कॉल करके बता सकता हूँ कहाँ जाना और क्या करना है।

( तब तक दूसरा ग्राहक पाकर निकल लिया वो, दूसरे रिक्सा वाले से  )

नील - हेल्लो, हेल्लो भाई साहब ! आपके पास मोबाइल है क्या ?
रिक्सा वाले भाई साहब - हाँ है, क्यों ?
नील - भइया एक कॉल करना है
रिक्सावाले भाई साहब - क्यों तुम्हारे पास मोबाइल नहीं है क्या ?
नील - है ना सर ! पर स्विच ऑफ़ है और मुझे एक बहुत जरुरी बात करनी है।

( ऊपर से नीचे तक देखते हुए )

रिक्सावाले - क्या नाम है ?
नील - नीलेन्द्र है भैया
रिक्सावाले - नहीं, नहीं पूरा नाम बताओ
नील - नीलेन्द्र शुक्ल " नील "
रिक्सावाले - ब्राह्मण हो ?
नील - जी हाँ।
रिक्सावाले - लगते नहीं हो यार Identity Card है क्या कोई ?
नील - इन्सान लग रहा हूँ या नहीं सर !
रिक्सावाले - भाई बुरा मत मानना लेकिन देखने में आतंकवादी भी इंसान ही लगते हैं।
नील - हाँ वो तो है सर, पर अभी आप मेरी सहायता कर रहें हैं या नहीं
रिक्सावाले - बेटा माफ़ करना पर इस मामले में मैं थोड़ा सचेत रहता हूँ, इसलिए मैं आपकी मदद नहीं कर सकता।
नील - Okay Okay Sir! No Problem Thank You ..

( ये सब सुनते हुए दूसरे भाई साहब ने कहा )

भाई साहब - किससे बात करनी है भाई?
नील - जिनके पास जाना है उन्हीं भाई साहब के पास।
भाई साहब - भाई लफड़े वाला नं. तो नहीं है ना
नील - नहीं सर !मैं आपके सामने ही बात करूँगा, नहीं तो एक काम करिये पहले आप बात करिये मैं बाद में कर लूँगा।
भाई साहब - लो भाई अब इतना भी शर्मिंदा न करो।

Second Scene -

नील - Hello, Hello हाँ सुरेन्द्र भाई
सुरेन्द्र - हाँ भाई, कौन ?
नील - मैं नीलेन्द्र, वो विवेक भाई ने आपसे बात की थी न मेरे बारे में
सुरेन्द्र - हाँ, हाँ नीलेन्द्र भाई नमस्कार, कहाँ हो आप ?
नील - मैं कल्यान स्टेशन पे खड़ा हूँ सर।
सुरेन्द्र - अच्छा ! पर यार अभी तो 4 ही बजे हैं और मेरी छुट्टी 8 बजे तक होगी
नील - कोई नहीं भाई तब तक मैं इधर - उधर घूमता हूँ, और हाँ ये नं. मेरा नहीं है। मेरा मोबाइल  स्विच ऑफ है So I'll call you ..
सुरेन्द्र - ठीक है भाई! Okay .

Third Scene -

( Mobile भाई को देकर धन्यवाद भाई, घूमते - घूमते एक खाली मोबाइल की दुकान पर )

नील - Hello कैसे हैं सर ?
दुकानवाले - ठीक हूँ भाई।
नील - मुझे आपसे एक जानकारी चाहिये थी
दुकान - जी पूछिए
नील - Actually मेरे No. की Incoming Call बंद हो गई है तो अभी क्या करूँ ?
दुकान - कितने दिन हुए ?
नील - बस यहीं  कुछ 2 - 4 दिन ही हुए हैं।
दुकान - कौन सी सिम है ?
नील - Idea की है भाई
दुकान - एक काम करो 35 वाला Recharge कराओ चालू हो जायेगी
नील - ( सशंकित मन से ) 35 वाले में चालू हो जाएगा ना भाई, उससे अधिक तो नहीं कराना पड़ेगा, और एक बात इस 35 वाले में मुझे पैसे भी मिलेंगे या सिर्फ Incoming ही Start होगी।
दुकान - नहीं नहीं पैसे भी मिलेंगे
नील - तो एक बात बताना Full Talk Time कितने पे है ?
दुकान - 95 सर !
नील - Okay sir कर दीजिये, और ये Mobile Charging पे लगा देते तो अच्छा होता भइया।
दूकान - हाँ हाँ क्यों नहीं, लाओ इधर दो।


 ( Mobil Shop के Just बगल शुध्द शाकाहारी होटल, में चाय पीने के लिए पहुँच कर )

नील - दद्दू  एक चाय मिलेगी !
दादा - हाँ जरूर बेटा क्यों नहीं, हे देखो बाबू को चाय दो।
( बाबू सुनते ही )
नील - कहाँ के हैं आप दद्दू मुम्बई के ही या बाहर के ?
दादा - बेटा हम तो बनारस के हैं, क्यों ?
नील - नहीं वो आपने बाबू कहा ना मुझे, इसलिए मुझे लगा की आप उसी तरफ के होंगे।
दद्दू हमहूँ बनारस 6 साल रहली ह, टूटल - फूटल भोजपुरी हमहूँ के आवेला।
                                   ( चाय पीते हुए )
अच्छा दद्दू एक बात पूछीं
दादा - हाँ हाँ बेटा पूँछो
नील - केतना साल हो गइल मुंबई रहत
दादा - यही 22 - 25 साल भइल होइ बेटा
नील - एक बात बतावा कहाँ ज्यादा सुकून हौ, बम्बई म, की बनारस म।
दादा - अब का कहीं बेटा आपन घर अपनै होला, घरा तौ खैर इहौ अपने हौ, लेकिन रजा बनारस के मजा कुछ औरे हौ।
नील - सही कहला दद्दू जौन स्वाद बनारस के चाय में हौ, ऊ केहरियो देखे के नाही मिलेला।
बहुत दिन बाद " चौचक चाय " पीली ह, मजा आ गएल
केरला में तौ अइसन चाय भेंटाते नइखे।
दादा - केरला में रहा ला का बचवा ?
नील - हाँ दद्दू! केरले में पढ़ी ला
  - कौन दर्जा म हउआ ?
नील - दद्दू, संस्कृत से M.A करत हई





दिल की बातें दिल तक हों तो बेहतर है

Neel With Grand Pa


इस घर से उस घर की बातें बेहतर हैं 
इसकी उसकी सबकी बातें बेहतर है 

इससे - उससे कह के न पछताना तुम 
दिल की बातें दिल तक हों तो बेहतर है 

काल चक्र की सुइयाँ जैसे बढ़ती हैं 
वैसे ही तुम भी बढ़ते तो बेहतर है 

लोगों में परिवर्तन लाकर क्या होगा 
जीने दो, जो जैसा है वो बेहतर है 

उसके अन्दर सही - गलत क्या देखे है 
खुद के अन्दर झाँक वही अब बेहतर है 

खोज - बीन के बाद जहाँ से जो पाया 
वही मुहब्बत मेरे खातिर बेहतर है 

एसी, कूलर, महल , भवन सब फीके हैं 
माँ का गन्दा आँचल मुझको बेहतर है 

बाबा के चेहरे पर शिकन नहीं अब तक 
बाबा अब भी हम लोगों से बेहतर हैं 

06/12/2018

आज के दौर को पहचानने की जुर्रत है

My love My Dear Daughter 
आज के दौर में लोगों को कहाँ फुर्सत है 
आज के दौर में, सबकुछ जो बनी दौलत है 

आज के दौर में, रख ले जहाँ को कदमों में 
आज के दौर को पहचानने की जुर्रत है 

आज के दौर में, कुछ भी नही है पहले सा 
आज के दौर में चहुँओर बनी दहशत है 

आज के दौर में भक्ति हुई है दंगाई 
आज के दौर में जो कटघरे में कुदरत है 

आज के दौर में, सबकुछ सड़ा - गला मिलता 
आज के दौर में, आखिर वो कहाँ  लज्जत है 

आज के दौर में भी यूज़ नेट नही करते 
आज के दौर में, ईश्वर की बड़ी रहमत है 

आज के दौर में भी प्रेमिका नहीं इक भी 
आज के दौर में सबकुछ बनी मुहब्बत है  

05/12/2018

Dear Jindagi

With Nandy Sis Neel
जिन्दगी ख़ामोश इक पतवार है 
जिन्दगी में हर घड़ी त्यौहार है 

जिन्दगी की बात पुस्तक में नहीं 
जिन्दगी हर पल नई फ़नकार है 

जिन्दगी सबकी नहीं है एक सी 
जिन्दगी में राह भी दो - चार हैं 

जिन्दगी भर इश्क जो समझे नहीं 
जिन्दगी भर के लिए बीमार हैं 

जिन्दगी को मनमुताबिक रूप दूँ 
जिन्दगी है,ये नहीं बाजार है 

जिन्दगी हरदम दिखाती आइना 
जिन्दगी सबसे बड़ी सरकार है 

जिन्दगी का इक सलीका है सुनो 
जिन्दगी को जिन्दगी से प्यार है 



इस कदर मुझपे भरोसा मत करो

नील 
इस कदर मुझपे भरोसा मत करो 
मैं तुम्हारे प्यार के लायक नही 

जिन्दगी भर प्यार की बातें करूँ 
गीत गाऊँ मैं कोई गायक नहीं 

मैं तुम्हारा साथ दूँगा क्या पता 
किस अहद हो जाऊँगा मैं गुमशुदा 
तुम जहाँ जाओ, वहाँ मैं भी रहूँ 
सुन ज़रा फिल्मों का मैं नायक नहीं 

जिंदगी में है फ़कीरी क्या करूँ 
जो दिया ईश्वर नें हंसकर ले लिया 
माँगता हूँ, मैं तुम्हें हर रोज़ पर 
क्या कहूँ, वैसा रहा साधक नहीं 

दुःख के आँसू नहीं निकालो

नील 
दुःख के आँसू नहीं निकालो 
सुख की साँस भरो यारा 

अब जब सबकुछ ठीक हो गया 
न एहसास भरो यारा 

तुम भी रूठी, हम भी रूठे 
तुम भी टूटी, हम भी टूटे 
पतझड़ का मौसम करके 
अब न हमराज़ बनो यारा 

कुछ नादानी तुमने भी की 
कुछ नादानी मैंने भी 
कुछ शैतानी तुमने भी की 
कुछ शैतानी मैंने भी 

मंजिल तुमको खोज रही 
अब उसकी तरफ बढ़ो यारा 

कहाँ गई थी बोलो आखिर 
जब मैं टूटा, बिखरा था 
जीवन की गति उल्टी थी तब 
सबकुछ उल्टा दिख रहा था 

जो पढ़ना है वही पढ़ो तुम 
मुझको नही पढ़ो यारा 

ना ही तुझसे हुई मुहब्बत, ना ही और किसी से होगी

नील 
ना ही तुझसे हुई मुहब्बत 
ना ही और किसी से होगी 

इतना पहले बदल चुकी है 
और बता कितना बदलेगी 

वक्त - वक्त की बात नहीं ये 
इस दिल की गहरी बातें हैं 
दिन तो चलो गुज़रते हैं पर 
करवट बहुत बदलती रातें 

तेरी दशा, तुझे अर्पण है 
और भला तू क्या बोलेगी  

पहले दिया उजाला तूने 
अंधकार अब क्यों देती है 
"भूल सको जितना, भूलो तुम "
ये विचार अब क्यों देती है 

इतनी गहरी चोट मुझे दी 
और अभी क्या - क्या तू देगी 

भूल गया मैं सारी बातें 
फिर - फिर नहीं कुरेदो तुम 
जो तुमसे, जो कुछ भी माँगे 
उसको वो सब दे दो तुम 

तुझको मेरी फ़िकर नहीं फिर 
मेरी ख़ातिर क्यों रोयेगी। 

24/11/2018

मेरा ईश्वर, ईश्वर नहीं रहा



मेरा ईश्वर, ईश्वर नहीं रहा
मेरा ईश्वर पिशाच हो गया है

उसे अब अच्छा - बुरा, सही - गलत का ज्ञान
नहीं रहा ,
अब वह तनिक - विचार नहीं करता कुछ
करने से पहले
उन्मत्त है वो, किसी जहरीले - नशे की धुत्त में,
नफरत सी हो गई है ईश्वर के नाम से
उसके नाम से भी अब " बू "आती है मुझे

उसके अंदर किसी
किसी बुरी - आत्मा का प्रवेश हो गया है शायद

वह अब वही देखता है
जो उसे नहीं देखना चाहिए ,
वही करता है
जो उसे नहीं करना चाहिए,
वही सोचता है
जो उसे नहीं सोचना चाहिए
मेरे ईश्वर के दिमाग को दीमक चाट गये हैं शायद
किसी लकड़ी की तरह
जिसका प्रयोग हम कहीं नहीं कर सकते
जो निष्प्रयोजन हमारे बीच सत्ता बनाए हुए है
किसी बेलगाम राजा की भाँति

वो मारते जा रहा है एक - एककर
अच्छे लोगों को,
चबाए जा रहा उनके बच्चों की जिंदगी
किसी दरिन्दे - राक्षस के जैसे

वह विधवा बनाते जा रहा है औरतों को
उसे सुहागन औरतें पसंद नहीं शायद

उसके पास अब कुछ करने को नहीं रहा
सिर्फ इसके कि,
बच्चों को अनाथ बनाना, औरतों को विधवा बनाना
माँ - पिता के सहारे की लाठी तोड़ देना
किसी का बेटा, किसी की बेटी, किसी का भाई
किसी का नाना, चाचा, पापा मौसा और
न जाने कितने लोगों को निगल जाने के अलावा

वो कायर! निहत्थों पे वार करता है
उसे हथियार वालों से डर लगता है

उसे दूसरों की खुशियाँ देखी नहीं जाती
वो सब नष्ट - भ्रष्ट कर देना चाहता है
अपनी बेहूदा - हरकतों से

उसके पास इतना कुछ है
करने को,
कि उसे फुर्सत नहीं मिलनी चाहिए
सृष्टि को सजाने के क्रम में

उसे फूल बचाने चाहिए
काँटे हटाने चाहिए दुनिया को खूबसूरत बनाने के
क्रम में ,
मगर उसे फूल की अपेक्षा काँटे शायद
कुछ अधिक ही पसन्द हैं, इस धरती के लिये

मुझे बस इस बात का दुख है कि
जिसे जहाँ होना चाहिए, वो वहाँ नही है

सच कहूँ तो कभी - कभी ईश्वर के मरने की
आहट सी आती है,
क्योंकि ईश्वर ऐसा नहीं कर सकता
वो तो दयालु हैं, कृपालु हैं और दया के सागर हैं

वो तो बुरे लोगों का भी अहित नहीं चाहते
फिर अच्छे - लोगों भला कैसे चाहेंगे

पर ईश्वर तो नित्य है, अविनाशी है,अखण्ड है
और न जाने किन - किन कृत्रिम - विशेषणों
से नवाजा जा चुका है, किसी अयोग्य - प्रधानमंत्री
की भाँति
बात और कोई नही है
इसीलिए मैं कहता हूँ

मेरा ईश्वर, ईश्वर नहीं रहा
मेरा ईश्वर पिशाच हो गया है


19/11/2018

प्यार मुहब्बत दिल की बातें झूठी हैं

P.C - Isha Sharma

जो भी की सारी फरियादें झूठी हैं 
इसकी, उसकी, सबकी बातें झूठी हैं

देवदास बन जाएंगे, फिर बोलेंगें 
प्यार मुहब्बत दिल की बातें झूठी हैं

12/11/2018

हे सखे! राजा रहो तुम मैं विदूषक ही भला हूँ

Neel

हे सखे! राजा रहो तुम मैं विदूषक ही भला हूँ 
खुद हँसू, जग को हँसाऊँ एक अद्भुद सी कला हूँ

तुम रहो जाकर भवन में मैं यहाँ पर ठीक हूँ 
तुम हँसी हो दिव्यजन की मैं किसी की छींक हूँ 
आसमाँ में , उन सितारों में चमकते चाँद तुम 
मैं हमेशा ही दिखूँगा हो कहाँ गुमनाम तुम 

फिर हँसे हैं लोग मुझपे चाल कुछ ऐसी चला हूँ 

दिन तुम्हारे काट रहे होंगे बहुत ही खूब अब 
पास परियों के रहो , बनते रहो महबूब अब 
रेत की बंजर ज़मीं मुझमें तुम्हे मिल जायेगी 
वो नहीं आई जिसे कहते रहे तुम आएगी 

मैं किसी बेकार,बदबूदार फल जैसे गला हूँ  

तुम सुनाते दण्ड प्यारे, मैं हँसी का मीत हूँ 
तुम निकालो गालियाँ बस मैं सुनाता गीत हूँ 
तुम इन्हें देते रहो दुःख , मैं हँसाऊँगा इन्हें 
जो कहे दुत्कार कर ,वो सब भुलाउँगा इन्हें 

क्या करूँ ऐसी प्रकृति में जन्म से ही मैं पला हूँ 

कष्ट से लड़ता रहा रोना नहीं आया मुझे 
क्या सुनोगे बात न, अब तक समझ पाया मुझे 
इस कदर मदहोश हो, पैसों में खोये हो सदा 
जिन्दगी में त्याग की तालीम सीखो सर्वदा 

क्या करूँ आँसू नहीं आते मुझे ऐसे ढला हूँ 

ये मुझे जीवन मिला हंसने - हंसाने के लिए 
उन गरीबों के यहाँ महफ़िल सजाने के लिए 
जिनके चहरे की शिकन हटती नहीं है उम्रभर 
मैं उन्हीं लोगों का बच्चा हूँ ,यहाँ हूँ बेफ़िकर 

हूँ बहुत निर्धन मगर अब तक नहीं तुमको छला हूँ 

मैं हजारों दुःख लिए सबको हँसाता ही रहा 
हर कदम पे मैं तुम्हें अपना बनाता ही रहा 
चाहने वाले बहुत पर प्यार न देता कोई 
मुझको वो ख़ुशियों भरा संसार न देता कोई 

मैं किसी को कष्ट में छोड़ूँ , नहीं कोई बला हूँ  

हे सखे! राजा रहो तुम मैं विदूषक ही भला हूँ 
खुद हँसू, जग को हँसाऊँ एक अद्भुद सी कला हूँ

08/11/2018

बाकी है

Neel

कुछ कर चुका हूँ , कुछ काम अभी बाकी है
अभी तो आगाज़ है , अंजाम अभी बाकी है

बहुत कहते रहे के क्या है तेरे आँगन में
ये सुबह-ए-बनारस है अवध की शाम अभी बाकी है

मानता हूँ कि नही दूध का धुला मैं , पर
बचाए रख तेरा भी नाम अभी बाकी है

दोस्ती को बना रहा जो आजकल दिलकश
वही है दोस्तों ये जाम अभी बाकी है

रोज़ गीता पे हाँथ रख के कसम खाता है
और कहता है कि ईमान अभी बाकी है

30/10/2018

मैं अपने अंतिम समय में

Pic Credit - Rahul Sharma 

मैं तुमसे ठीक वैसे ही 
प्यार करता हूँ, जैसे
एक माता - पिता अपने बच्चे से 
एक रिसर्चर अपने रिसर्च से

जैसे एक कुम्हार अपने 
बनाए हुए मिट्टी के पात्रों से 
एक पाठक अपनी किताब से 
लेखक विचारों के साथ पेन और कागज से 
समुद्र साहिल से 
और
एक प्रेमी अपनी प्रेमिका से ....

ठीक वैसे ही मैं भी तुम्हें
प्यार करता हूँ

मैंनें तुमसे बेइन्तिहाँ
मुहब्बत की
तुमसे इस बात का जिक्र किये बिन


मैं अपने अन्तिम समय में
किसी पागल की तरह
समुद्र के किनारे बैठ
उतनी बार लिखूँगा तुम्हारा नाम

जितनी बार समुद्र की लहरें उसे मिटाएंगी
जितनी बार लोग मुझे पागल कह के सम्बोधित करेंगे
जितनी बार तुम्हारा नाम मेरी आँखों से ओझल होगा

लिखते - मिटते लिखते - मिटते
एक दिन मैं खुद
तुम्हारे नाम के साथ
उसी समुद्र में लिख - मिट जाऊँगा

पर तुम रोना नहीं
न ही मेरे न होने का शोक मनाना
तुम मुझे खुद में महसूस करना
मैं वहीं कहीं तुम्हें मिलूँगा
तुम्हारी आत्मा की अनन्त गहराइयों में
तुम्हारे साथ ।

मैं किसी का कुछ उधार
नहीं रखना चाहता,
बहुत अधिक दिनों तक

मैंने वादा किया है
मिटृटी से, हवा से ,पानी से ,आकाश से और
अग्नि से
सभी अपना - अपना हिस्सा ले जाएँँगें मुझसे
जब मैं यहाँ से विदा लूँगा

हाँ ,मेरे पास
तुम सभी की यादें हैं , प्यार है ,मुहब्बत है
जो इस धरती की
सबसे - खूबसूरत चीजें हैं मेरे हिसाब से

आप मुझसे वो मत माँगिएगा
माफ़ कीजिएगा, उसे मैं नहीं दे पाउँगा 


मैं अपने अन्तिम समय में 
जैसे लोगों के द्वारा देव ईश्वर अल्लाह 
महसूस किये जाते हैं 
वैसे ही मैं तुम्हें महसूस करूँगा 
तुम्हारे प्यार को पूजात्मक - क्रिया मानकर 











माफ कीजिए, उसे मैं नहीं दे पाऊँगा

माँ ये उमर तुम्हें लग जाए

माँ 
मेरी उमर तुम्हें लग जाए 
माँ ये उमर तुम्हें लग जाए 

लोरी गाती, थपकी देती 
आँचल में माँ मुझे सुलाए

जन्म दिया, धरती पे लाई 
छाती से माँ मुझे लगाई 
सदा हंसाए, सदा दुलारे 
कान्हा जैसे मुझे सँवारे 

जिसकी प्यारी मीठी - मीठी 
बातों से ही मन भर जाए

थम जाती हैं साँसें जिसकी 
मुझको गिरता देखकर 
खिल जाता है चेहरा जिसका 
मुझको उठता देखकर 

गिरना उठना और सम्हलना 
माँ मुझको चलना सिखलाए 

लड़ जाती है मेरी खातिर 
जो बेदर्द - जमाने से 
अब तक फ़िक्र करे माँ मेरी 
इक बच्चे - अन्जाने से 

मुझको थोड़ी चोट लगे जो 
आँखों में आँसू आ जाए 

मेरी उमर तुम्हें लग जाए 
माँ ये उमर तुम्हें लग जाए 

लोरी गाती, थपकी देती 
आँचल में माँ मुझे सुलाए

27/10/2018

नील गए जब से तुम दिल से गीत गया



ऐसे धीरे - धीरे जीवन बीत गया 
जैसे कोई अपना हमदम मीत गया  

बचपन माँ की गोद में गुजरा 
और जवानी प्यार में 
पत्नी संग फिर उम्र बिताया 
और बुढ़ापा याद में 
जीवन का बस लक्ष्य था इतना 
जितना मैंने पाया है 
खुश हूँ अपने इस जीवन से 
जिसमें रंग समाया है 

ऐसे ही इस जीवन को मैं लम्हा - लम्हा जीत गया 

फिर से पा लूँ तुमको 
ये जी करता है 
गोद में ले लूँ तुमको 
पर दिल डरता है 
संग सदा तेरे मैं भी 
रहना चाहूँ 
तुमसे दिल की बातें सब 
कहना चाहूँ 

जब - जब मेरे साथ रहा तू भीत गया 

तेरी भोली बातों का मैं दीवाना 
पागल था थोड़ा , थोड़ा सा बेगाना 
बातें दिल की सुनता 
और सुनाता था 
अब तक मैं छुप - छुप के 
तुमको गाता था 

नील गए जब से तुम दिल से गीत गया 


ऐसे धीरे - धीरे जीवन बीत गया 
जैसे कोई अपना हमदम मीत गया  


24/10/2018

प्रेम



चलो अब शान्त होते हैं 
उन कहकशाओं में कि 
जहाँ से न तुम इस बेसुर्ख़ धरती पे आओ 
और न ही मैं 
उड़ चलते हैं 
अंतरिक्ष में। 

19/10/2018

सपनें सच होते देर नहीं लगते

नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

सपनें सच होते देर नहीं लगते
बस आपको खुद पर भरोसा
और अपनें कर्मों में श्रद्धा होनी चाहिए

ये सारी धरती, ये खुला सारा आसमान
तुम्हारा है ,
और तुम्हीं हो इसके सही हक़दार

तुम्हारा सही किरदार जब तक
तुम्हें नहीं मिल जाता
जीवन के इस रंगमंच पे
लड़ते रहो , संघर्ष करते रहो
उसे हासिल करने के लिए

नहीं बनो तुम " गीता के अर्जुन "
जिसे किसी कृष्ण की जरुरत पड़े

मत रखो अपने मन के भीतर
किसी प्रकार का द्वंद्व

उखाड़ फेंको वो सारी वासनाएँ
जो तुम्हारे लक्ष्य में रोड़ा बनें

प्रयास करो इन्द्रियों को संयमित
करने का

ये मन का द्वंद्व , ये वासनाएँ
और इन इन्द्रियों पर संयम खुद - ब - खुद
हो जाएगा

मैं सच कहता हूँ ,
सपनें सच होते देर नहीं लगते
बस आपको खुद पर भरोसा 
और अपनें कर्मों में श्रद्धा होनी चाहिए


देश में हैं दो बन्दर



का बतियाएँ काका तुमसे
देश में हैं दो बन्दर

एक शहर का नाम बदलता
दूजा घूमे जमकर

जितना वो कहते हैं ,जितना
बोलें उतना लिखो
कान, आँख, मुँह बन्द करो
जों बोलें उसको सीखो
सुनो सदा अनुकूल रहो और
चलना ज़रा सम्हलकर

प्यार , मुहब्बत किये नही वो
और नही कुछ समझें
बदल रहे वो दुनिया यारों
खुद को कभी न बदलें
दोनों कृत्रिम - बातें करते
फेंक रहे हैं छककर

मानवीयता तनिक नही है
सदा काटने दौड़ें
छप्पन इंच की छाती दिखलाकर
होते हैं चौड़े
दोनों की मति भ्रष्ट हुई है
दोनों हैं घनचक्कर

का बतियाएँ काका तुमसे
देश में हैं दो बन्दर

एक शहर का नाम बदलता
दूजा घूमे जमकर

12/10/2018

मोदी जी

Modi Ji 

खेलें खाएँ घूमें नाचें धूम मचाएँ मोदी जी
भाषण देते गला फाड़ के खुब चिल्लाएँ मोदी जी

काशी को दिखला कर सपना क्योटो का फिर निकल लिए
प्लेन में बैठें , आसमान से हाँथ हिलाएँ मोदी जी

क्या बदलाव हुआ है आखिर अच्छे - दिन के आने पर
नन्हें मुन्हें बच्चों से अब भीख मगाएँ मोदी जी

राजनीति हो मानवीयता को लेकर इस भारत में
जाति धर्म मजहब को लेकर नहीं लड़ाएँ मोदी जी

हम गुमराह नहीं होंगें इन लोगों की मौतें लेकर
सबकी खातिर सीमा पे जो जान गवाएँ मोदी जी

गाँवों में घुसकर देखो , बोलो बतियाओ तो समझो
दूर - दूर से " मन की बातें " नहीं सुनाएँ मोदी जी

संस्कृत की क्या दशा हुई है विद्यालय जा - जा देखें
बाहर जाकर ऐसे न भौकाल बनाएँ मोदी जी

लोकतंत्र को लोकतंत्र के जैसे ही रहने देना
लोकतंत्र का लिए पताका न फहराएँ मोदी जी

परेशान हैं अगर बुढ़ापे से सुनिए !इक काम करें
किसी योग्य का राजतिलक करके बैठाएँ मोदी जी

मैंने भी सोचा था कुछ अच्छा होगा इस शासन में
अच्छे - खासे प्यारे - प्यारे ख्वाब दिखाए मोदी जी


10/10/2018

कइसन - कइसन खेल देखावेला ईश्वर

Neel

कइसन - कइसन खेल देखावेला ईश्वर
खुद ही जन्मे , खुदै मुआवेला ईश्वर

का तोहके बतियाई कुछ तुहूँ समझा
ईश्वर के ही नाच नचावेला ईश्वर

देखनी करम करत जेनहन के बचपन से
ओनहन के न बड़ा बनावेला ईश्वर

सुन ला " मँगरू " हाँथ नही हौ कुछ तोहरे
खुदै रोवावे , खुदै हँसावेला ईश्वर

का हो ईश्वर आँधर हौ कि बहिरा हौ
लइकन के हर घड़ी सतावेला ईश्वर 

08/10/2018

उसी में आज रावण देखता हूँ


अधूरा आज सावन देखता हूँ 
कि बस बादल लुभावन देखता हूँ 

जिसे कहता रहा मैं रोज़ ईश्वर 
उसी में आज रावण देखता हूँ 

रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...