26/06/2019

तिरंगा बेटियां लहरा रही हैं


कहीं पर कोयलें कुछ गा रही हैं 
मधुर संगीत की धुन आ रही है 

निकलकर आज दरवाजों से बाहर 
तिरंगा बेटियां लहरा रही हैं 

तुम्हारे आंख की ख़ामोशियां सब 
हमारी आंख से बतला रही हैं 

खुली रंजिश में टकराता है भारत 
हमारे देश की दरियादिली है 

मुहब्बत सरफ़रोशी की तमन्ना 
मुहब्बत ही जमीं समझा रही है 

हृदय आकांक्षा से भर गया है 
बालाएं जो रही वो जा रही हैं

कहां से छू गई मुझको सरापा
हवा ये नील को बहका रही है 

चली आई मुझे शंकर बनाने



कभी ईश्वर कभी कंकर बनाने 
लगा घर सा कोई अन्दर बनाने 

सती के रूप में मेरी मुहब्बत
चली आई मुझे शंकर बनाने 

बहुत सी बात थी खामोशियों में
जुबां उसको लगी जर्जर बनाने 

चुनावी मसअला छाने लगा है 
लगे अब खुशनुमा मंज़र बनाने

अधूरी सांस भी थी टूटने को 
तभी वो आ गए रहबर बनाने 

मुहब्बत नील का पर्याय है सर 
इसे क्यों आ गए कमतर बनाने 

01/05/2019

मजदूरों को कब किसनें फुर्सत देखा


अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की हार्दिक शुभकामनायें 😭-
ये इनको खुश करने की है चाल महज 
मजदूरों को कब किसनें फुर्सत देखा

30/04/2019

जा मौज़ करा ई चुम्बन दिन


आलम्बन दिन उद्दीपन दिन 
जा मौज़ करा ई चुम्बन दिन 

दुई - दुई  के पाँति बंधी अहै 
आपस मा दुइनौ बिज़ी अहैं 
आँखिन मा आँख घुसेरे हैं 
चुम्मू पर वै मुँह फेरे हैं 

ओहके अब मन ललचान अहै 
कइद्या उनके अभिनन्दन दिन 

घर से सज धज के निकरे हैं 
खाना - पानी सब बिसरे हैं 
आँखिन मा लाखन ख़्वाब अहै 
हाँथन मा फूल गुलाब अहै 

कुछ के ख़ातिर ई अच्छा है 
कुछ के ख़ातिर ई लंठन दिन 

पइसा से पर्स भरे रइहा 
वै जउन कहँय ओतने करिहा 
बड़का ऊ मॉल घुमावत थीं 
रसगुल्ला चाट खवावत थीं 

कुछ हार, अँगूठी ड्रेस देइहैं 
कुछ बिंदिया चूड़ी कंगन दिन 

बातन - बातन मा प्यार बढ़ा 
मूढ़े चुम्बन त्यौहार चढ़ा 
नाचब गाउब बढ़िया होइहैं 
हमरे - तुम्हरे लरिका होइहैं 

वै दूनौ बातैं करत रहें 
हरदी माटी औ चन्दन दिन

जिस्म हमारा इक पल का, इक पल सा मैं

Lover of Mother Father & Lover.

कुछ चीजों में सच में बहुत निकम्मा हूँ कुछ चीजों में बिल्कुल गंगाजल सा मैं

मुझको मत देखो, अपनी आँखें देखो देखो चिपका हूँ उनमें काजल सा मैं

तेरी मम्मी मुझको ऐसे देख रही जैसे उनकी बिटिया का हूँ कल सा मैं

तुम बारिश हो मेरे भीतर रहती हो मैं फैला आकाश, तेरा बादल सा मैं

जब से तुमसे प्यार हुआ माँ कहती है बेटा है बदमाश बहुत, पागल सा मैं

और छनकने लगती हो तुम मेरे संग तेरे नाज़ुक पैरों का पायल सा मैं

मेरी माँ नें कठिन तपस्या की होगी तब जाकर वो पाई मुझको, फल सा मैं

नील तुम्हारे बीच हमेशा होगा पर जिस्म हमारा इक पल का, इक पल सा मैं

29/04/2019

हर जख्मों की एक दवा तेरा चुम्बन


करता ही रहता है अक्सर आलिङ्गन हर जख्मों की एक दवा तेरा चुम्बन

वो रहती है अक्सर मेरी बाहों में इससे ज्यादा क्या होगा दीवानापन

आजीवन की एक पालिशी जैसी है डूबा हूँ उसमें, वो मेरा जीवनधन

उसके चेहरे जैसा दूजा क्या होगा चौबिस घंटे लगती एक सजी दुल्हन

आओ ना घर मिलते हैं भैया भाभी फिर से हरा - भरा हो जाये घर आँगन

नील उसे जैसे देखा दिल हार गया माँ! इतनी चुम्मू है उसकी जानेमन

देखे पसन्द करके उसको मना किया


खाला का घर नहीं है जो मन हुआ किया
देखे पसन्द करके उसको मना किया 

क्या सोंचती होगी कि कहाँ कौन कमी है 
इस दौलत - ए - नाचीज़ नें क्या - क्या करा दिया 

खुद से हुई है नफ़रत उसको रुला दिया 
कुछ दिन के लिए उसको ये सिलसिला दिया 

तुम तो पढ़े लिखे हो फिर भी ये हाल है 
घर ही मना न पाये तो क्या भला किया 

मन कर रहा था उठ के तमाचा मैं खींच दूँ 
कुछ सोच - समझकर के उनको विदा किया 

तू है कहाँ छुपा हुआ ओ नील ! बेख़बर 
उसका चराग़ उसने फिर से बुझा दिया  






हर बच्चों के पा - मम्मी हों

Neel 
फल फूल रहे न चटनी हो 
जीवन भर बुक न रटनी हो 

जीवन डूबा हो मस्ती में 
न फोन रहे न पत्नी हो 

उन लोगों से बातें करना 
जिन लोगों में न गर्मी हो 

पर बिटिया देख ताक लेना 
वो शायद नहीं अधर्मी हो 

उसके कमरे में जाओ पर 
बचना की न बेशर्मी हो

तेरी आँखों की मधुशाला
मेरी आँखों में चढ़नी हो 

डी.जे फीजे से बेहतर है 
शादी में बन्ना - बन्नी हो 

इतना भी पंख पसारो मत 
जेबों में नहीं चवन्नी हो 

मौला इतना एहसान करो 
हर बच्चों के पा - मम्मी हों 

इक बारी मुझे ख़बर करना 
हे नील! जमीं जब बिकनी हो 



28/04/2019

मेरे भीतर वो बनने की लियाक़त है तो है

Neel
मेरी आँखों में गर तेरी नज़ाक़त है तो है 
परीशाँ रात - दिन करता शरारत है तो है 

मुझे कब कौन रोका है मुझे कब कौन रोकेगा 
जो तुमसे हो गई है अब मुहब्बत है तो है 

हमारे पास में खुद को बहुत महफूज़ पाती है 
मेरा कर्त्तव्य है उसकी हिफाज़त है तो है 

मुझे कुछ भी नहीं खोना मुझे कुछ भी नहीं पाना 
मगर फिर भी ख़ुदा से ये इबादत है तो है 

मुझे मालूम है यारों मेरी ताक़त का अन्दाज़ा 
मेरे भीतर वो बनने की लियाक़त है तो है 

नहीं यूँ बोलना अक़्सर, बहुत बढ़चढ़ के बोले हो 
बड़े होने से प्यारे ! ये नसीहत है तो है 


27/04/2019

उसके इक इक हिस्सों में खो जाता हूँ

उसके इक इक हिस्सों में खो जाता हूँ 
जीवन के कुछ लम्हों में खो जाता हूँ 
मैं तो अक्सर अपनों में खो जाता हूँ 

संबंधों में गाढ़ापन बढ़ता जाए 
उन पाकीज़ा रिश्तों में खो जाता हूँ 

वो अक्सर ही मिलने आया करती है 
डूबा रहता सपनों में खो जाता हूँ 

सर पर थीसिस नाच रही है ज़ोरों से 
लिखने बैठूँ, नज़्मों में खो जाता हूँ 

शहरों में सबकुछ मिलता है मिलने दो 
मैं तो गाँवों, कस्बों में खो जाता हूँ 

मुझको दी है मेरी माँ नें एक बहन 
उसके प्यारे किस्सों में खो जाता हूँ 

कई लड़कियों से देखा बातें करते 
वो कहता है, जिस्मों में खो जाता हूँ 

मेरी भी ख़्वाहिश है बीबी सजी रहे 
साड़ी, कपड़ो, गहनों में खो जाता हूँ 

रातें कैसे गुज़र रहीं मालूम नही 
उसके इक इक हिस्सों में खो जाता हूँ 

25/04/2019

बात इतनी बड़ी नहीं होती


प्यार करती, खड़ी नहीं होती 
काश वो नकचढ़ी नहीं होती 

बात बढ़ती है बात करने से 
बात इतनी बड़ी नहीं होती 




22/04/2019

कमर उस पर सुराही हो गई है

अभिज्ञान शाकुन्तलम 
मिटी ठण्डी, रजाई हो गई है 
मेरी जाँ से सगाई हो गई है 

बदन है संगमरमर सा तुम्हारा 
कमर उस पर सुराही हो गई है 

21/04/2019

मुहब्बत जिस्म का धंधा नहीं है


जहाँ में हर कोई गन्दा नहीं है 
महज़ आँखें नहीं, अन्धा नहीं है 

मुहब्बत दो दिलों का राब्ता है 
मुहब्बत जिस्म का धंधा नहीं है 

चलो बेटा अभी स्कूल जाओ 
पढ़ाई है, कोई फन्दा नहीं है 

बहुत ही खूबसूरत लिख रहा है 
मगर वो आदमी उम्दा नहीं है 

20/04/2019

तुम्हें कैसे सम्हालूँगा बताओ

सनम यूँ ही नही तुम दिल लगाओ 
नही मुझको अभी अपना बनाओ 

सम्हाले दिल सम्हलता ही नही जब 
तुम्हें कैसे सम्हालूँगा बताओ 

19/04/2019

ख़ुदा ये सब सभी को यूँ नहीं देता

जिसे जो चाहिए उसको नहीं देता 
मुहब्बत, सादगी सबको नहीं देता 

तुझे जो कुछ मिला है क़द्र कर उसकी 
ख़ुदा ये सब सभी को यूँ नहीं देता 




तुझे देखें तो मेरा नाम बुलाया जाये

Teri Parchhaiyan Jo Humsafar Hain.
तेरे चेहरे पे मेरे रूप का साया जाये 
तुझे देखें तो मेरा नाम बुलाया जाये 

कम से कम याद रखेंगे मुझे वो हर लम्हा 
दोस्ती छोड़ के, दुश्मन ही बनाया जाये 

दुखी रहूँ तो उन्हें मेरी ख़बर मत देना 
सुखी रहूँ तो मेरी माँ को बुलाया जाये 

वो जो ख़ामोश खड़े हैं सभी बच्चे बाहर 
मेरी महफ़िल में उन्हें प्यार से लाया जाये 

ज़ुस्तज़ू है मुझे उस दिन का, कि जिस दिन यारा 
तेरे घर में मुझे मेहमान बनाया जाये

तड़प रहा है मेरे सामने मेरा मौला
नील भरपेट उसे भोज कराया जाये 




  

18/04/2019

नील! तुमको चुना मुकम्मल है

काश इतना बुरा नही होता 
वक्त ये बेवफा नही होता 

उम्र लगती है नाम होने में 
कोई यूँ ही बडा नही होता 

लोग गर छेडते नही मुझको 
जंग कोई लडा नही होता 

 आदमी जिन्दगी समझते जो 
     फलसफा ही बना नही होता    

बात सुनता अगर बडों की तू 
यार ये क़हक़हा नहीं होता 

एक दूजे से प्यार न हो तो 
फालतू वास्ता नही होता

नील! तुमको चुना मुकम्मल है 
वगर्ना रास्ता नही होता 

17/04/2019

अल्लाह देखता है उससे डरें हुज़ूर

Corporate Walk With Laden
अच्छाइयों के रास्ते बढ़ते रहें हुज़ूर 
जीवन के रंगमंच पे कुछ तो करें हुजूर 

इन जंग की बातों से सुलह कर लिया जाये 
ऐसा करो न तुम मरो,न हम मरें हुजूर 

ईश्वर ने बहुत सोच के इंसान बनाया 
इंसानियत को समझें खुशियाँ भरें हुज़ूर 

दूजों को कोसना क्या हम ख़ुद को बदल लें 
ये काम यहीं करके, आगे बढ़ें हुज़ूर 

वो आग फूँकते हैं भीतर जो तुम्हारे 
खुल्ला जवाब दे दो हम क्यूँ लड़ें  हुज़ूर 

माना कि सबसे बच के लूटे हो ज़माना 
अल्लाह देखता है उससे डरें हुज़ूर 

16/04/2019

अंगारों पे चलता हूँ मैं

Neel, Kavya Moti, Harsh Bhai
बंजारों सा बढ़ता हूँ मैं 
अंगारों पे चलता हूँ मैं 

किन लोगों से डरना यारों 
सरकारों से लड़ता हूँ मैं 

टकराता हूँ चट्टानों से 
कब डरता हूँ परिणामों से 
जो भी होगा सब निश्चित है 
जो डरता है वो ही चित है 

सब सोंच - सोंच रुक जाते हैं 
आगे भविष्य गढ़ता हूँ मैं 

दीवानों सा पागलपन है 
सपनों में ही रहता मन है 
पथरीली राहों पर दौड़ू 
सबका सब मैं अपना कर लूँ 
देखे मैंने उल्लास बहुत 
देखे मैंने मधुमास बहुत 

अब खुद को भी मैं देख सकूँ 
इसलिए शिखर चढ़ता हूँ मैं 

डरना कैसा गद्दारों से 
क्या प्यार करूँ दीवारों से 
मन में जिसका भी कलरव है 
जीवन में सबकुछ संभव है 
खुद को जिसमें खुश पाओगे 
जैसा सोंचे बन जाओगे 

दूजों को पढ़ता नहीं कभी 
अक्सर खुद को पढ़ता हूँ मैं 

बंजारों सा बढ़ता हूँ मैं 
अंगारों पे चलता हूँ मैं 

किन लोगों से डरना यारों 
सरकारों से लड़ता हूँ मैं

जिसमें जाओ चरमावस्था तक जाओ

                                                         

                                                      कर्म ज्ञान औ' मोक्षावस्था तक जाओ                             
                                                       जाना है तो ब्रह्मावस्था तक जाओ 

                                                    नफ़रत, सोहरत, धर्म मुहब्बत जो भी हो 
                                                      जिसमें जाओ चरमावस्था तक जाओ 

                                                       तुम सैनिक हो लड़ना धर्म तुम्हारा है 
                                                      लड़ते - लड़ते विजयावस्था तक जाओ 

                                                         विषयों में इतनी अनुरक्ति हो जाए 
                                                        कामावस्था विरहावस्था तक जाओ

रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...