06/09/2018

आकाश में उड़ जाने दे

Akash & Neel

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में, उड़ जाने दे

जुड़ जाने दे जुड़ जाने
मुझको हवा संग जुड़ जाने दे

कुछ स्वप्न हैं कुछ ख्वाब हैं
हर पल यहाँ इक आप हैं
इस राह में बेचैन हूँ
उस राह में मुड़ जाने दे ....

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में , उड़ जाने दे

कर दे मुझे आजाद तू
न कर मुझे बर्बाद तू
वो मञ्जिलें हैं , मञ्जिलें
मुझको उधर बढ़ जाने दे

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में, उड़ जाने दे

है लक्ष्य बस मेरा यही
तू साथ दे सब है सही
लम्बा सफर ऊँची डगर
हर हाल में चढ़ जाने दे

उड़ जाने दे उड़ जाने दे
आकाश में उड़ जाने दे

जुड़ जाने दे जुड़ जाने दे
मुझको हवा संग जुड़ जाने दे


03/09/2018

लड़कियाँ जन्नत की कोई हूर थोड़ी हैं


छोड़ दे ऐसे नशे मजबूर थोड़ी है 
आ गई दिल्ली, बहुत अब दूर थोड़ी है 

फूँकना मत ये जवानी इस नशे की आग में 
लड़कियाँ जन्नत की कोई हूर थोड़ी हैं 

हर घड़ी बस तुम विवश हो ये कहाँ की बात है 
इस जमाने में यही दस्तूर थोड़ी है 

उसको गर होगी मुहब्बत आएगी वो दौड़कर 
हैं महज़ नखरे , कोई मजबूर थोड़ी है 

हमको भी उसकी अदाएँ देखकर अच्छी लगी 
पर उसी के दायरे में चूर थोड़ी हैं 

तुम कोई जारा नही न वीर कोई मैं रहा 
छोड़ दे तू इस अहद मशहूर थोड़ी हैं 

भग गये वो राह में हमको अकेले छोड़कर 
ये मेरी शुरुआत थी भरपूर थोड़ी है 

01/09/2018

किसे अपना कहूँ कहूँ किसे पराया मैं


किसे अपना कहूँ कहूँ किसे पराया मैं
दूर वो ही रहे जिनको करीब पाया मैं

उन्हें पसन्द है लोगों से खेलना शायद
यही धोखा हुआ अपनों को ही अपनाया मैं

हृदय - दहक उठा है दिल में शोले फूटे हैं
किसी ने आग लगाई या खुद जलाया मैं

उसे मंजूर ही नही थी मुहब्बत मेरी
मैं ही पागल था जो यारों अलख जगाया मैं

मैंने चाहा कि चलो मार दूँ मैं भी ठोकर
गया शराब पी दौलत सभी लुटाया मैं

नशा कहाँ है उस शराब में जो उसमें है
खुद को भूला नही उसको कहाँ भुलाया मैं

30/08/2018

तू जीत गई मैं हार गया


तू जीत गई मैं हार गया 

अब आजा मेरे आँगन में 
            वर्ना मेरा संसार गया ।  तू जीत ...
      
     दो दिल की बात समझना था 
    मुझको जीवन में भरना था 
मैंने तुमको अपनाया है 
    दिल के अन्दर ही पाया है 
      मैं खुद को भूलना चाहा पर 
     न दिल से तेरा प्यार गया ।

       तू जीत गई मैं हार गया -2 

   दिल के दरवाजों पे है तू 
    मन सपनों, ख्वाबों में है तू 
तेरी बाँहों की जन्नत में 
खुद को पाऊँ मैं मन्नत में 
यारा इक तेरे जाने से 
मेरा प्यारा - परिवार गया ।

तू जीत गई मैं हार गया - 2 

हर माह तुम्हारे होने से 
मुझको सावन से लगते थे 
पलकों पे बैठाकर तुमको 
मेरे दिन पावन लगते थे 
तुम आ जाओ इस जीवन में 
मैंने ये जीवन वार दिया ।

तू जीत गई मैं हार गया - 2 
उड़ के आजा इस आँगन में 
वर्ना मेरा संसार गया ।

तू जीत गई मैं हार गया ।

क्लेशों में

प्रियतम नें अलगाव लिखा है खत में और संदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

मानव देखा जाता है अब रंग रुपों और वेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

देखता हूँ मैं जब जिसको सब रहते हैं आवेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

खेतों में है आग लगी जीते हैं कुछ अवशेषों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

ज्ञान अथाह भले ही हो नौकरी नही है रेसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

लोग स्वयं का मान बेंच देते हैं रुपयों - पैसों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में

ऐसे ही यह विश्व बँट गया देशों और प्रदेशों में
ज्यादा है कुछ बात नही बस तरह - तरह के क्लेशों में 

25/08/2018

रक्षाबंधन


मेरी बहना , मेरी बहना , मेरी बहना तू - 2
साथ दूँगा जिन्दगी भर याद रखना तू ।।

तेरे दम पर जिन्दगी हंसकर गुज़रती है
तू रहे जो साथ ये सजती - सँवरती है
हौंसलों में पर लगा आकाश रहना तू ।।

मेरी बहना , मेरी बहना , मेरी बहना तू - 2

रेशमी - धागों का कैसे कर्ज चुकताऊँ
तेरे चेहरे की हंसी वाज़िब सदा पाऊँ
जो भी चाहे, जब कभी भी आके कहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू

एक माँ से हम नही पर एक माँ से हैं
जिस्म दो हैं पर कसम से एक जाँ से हैं
यूँ किसी मद्धम पवन सी संग बहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू

ख्वाहिशें हैं छीनकर खाने की संग रोटी
क्या हैं ये सोना हो या हीरा हो या मोती
मेरे जीवन का अनोखा एक गहना तू ।।

मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू - 2
साथ दूँगा जिन्दगी भर याद रखना तू
मेरी बहना, मेरी बहना, मेरी बहना तू ।।







23/08/2018

खुदा खैर करे


इतनी मीठी तेरी पुकार खुदा खैर करे
लौट आए वो बरकरार खुदा खैर करे

इतनी भोली सी है नादान - सादगी उसकी
सादगी में बसा खुमार खुदा खैर करे

मुंतज़िर था मैं जिस वख़त का उसी को लेकर
सामने आ गया है यार खुदा खैर करे

आँख मिलती रही हर रोज़ हम मिले ही नही
बीच में उफ्फ ये संसार खुदा खैर करे

उसके लफ्ज़ों से शहद गिरती रही शामो - सहर
भा गया मुझको वो रुख़्सार खुदा खैर करे 

18/08/2018

मानव हो तो मानव का सम्मान करो



मानवता थोड़ी भी हो तो दान करो
हे ईश्वर! हम लोगों का कल्याण करो

हम सब हैं नादान नही मालुम हमको
बच जाएँ ये जान ज़रा वरदान करो

रोते और बिलखते बच्चे दिखते हैं
आँखें खोलो ईश्वर! इनका ध्यान करो

अपने लोगों का जीवन खतरे में है
जागो यारों पूजा और अज़ान करो

भाषाओं को लेकर वैर नही पालो
मानव हो तो मानव का सम्मान करो

जीवन में सुख - दुःख हर इक पे आते हैं
हर पल लोगों में रहकर कुछ काम करो

प्यार - मुहब्बत से ही धरती चलती है
कुछ सीखो जीवन में कुछ आयाम करो

वो अंधा , पागल है, बहरा, गूँगा है
यारों हाँथ बढ़ाओ न अभिमान करो

सबको रहने, खाने - पीने का सुख हो
ऐसा ही कुछ दिग्विजयी अभियान करो

केरला के हालात देखकर यहाँ के लोगों को देखकर बहुत ही परेशान हूँ
कहने को बहुत कुछ कह सकता हूँ पर ये भाषणबाजी का वक्त नही है
ये वक्त है साथ देने का , मदद करने का और अपनों को बचाने का तो मैं आप सभी से ये उम्मीद करता हूँ कि Please As Much As Possible Donate प्रिय भाइयों , बहनों , मित्रों गुरुजनों और स्वजनों मैं आप सभी से विनम्र - निवेदन करता हूँ जितना हो सके उतना ही मदद करें पर करें जरूर आपको अगर पैसे Donate करने हैं तो Please आप खुलकर कहें हम आपको Valid Account देंगे जहाँ आप अपनी तरफ से इन भाइयों बहनों माताओं की सहायता कर सकें ।

Please Contact - 9645668581 - Nischal Prakash
                              9009228090 - Harsh Agrawal
                              8573934590 - Neelendra Shukla
                              9304184366 - Aaditya Raja
                

10/08/2018

गीत

Pic Credit - Shiksha Mishra 
कर्म करते चल मुसाफिर कर्म करते चल - 2
सोच ले कुछ धर्म अपना शर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर  ......

सोच मत फल के लिए
जो फल मिले या न
भज ले ईश्वर को ज़रा
ये कल मिले या न

जो मिले हैं ग्रन्थ उनका मर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......

दान दे थोड़ा भजन कर
और निजचिन्तन
क्यों बना है ? क्या करेगा ?
इसपे कुछ मन्थन

धर्म से गद्दी तू अपनी गर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर ......

छोड़ने में तू सतत प्रेरित
हो राग - द्वेष
और अभिवर्धन करे सम्पन्न
हो यह देश

त्याग दे तू क्रोध खुद को नर्म (नम्र) करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर .......

क्या पता ये जिन्दगी
फिर से मिले या न
क्या पता ये कर्मभूमि
फिर मिले या न

दूर कर खुद की कमी कुछ धर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर कर्म करते चल -2

सोच ले कुछ धर्म अपना शर्म करते चल
कर्म करते चल मुसाफिर  ...... कर्म करते चल ।।

09/08/2018

एक ही सच है हमारी जिन्दगी का


ठोकरें खाते रहे हर वक्त लेकिन
होशियारी अब तलक आई नही है

दूरियाँ कुछ यूँ हुई इस जिन्दगी में
लग रहा है पास परछाई नही है

जब कभी ये मन मेरा रोता है जीभर
चुप कराने को कोई भाई नही है

एक ही सच है हमारी जिन्दगी में
मौत वो जो अब तलक आई नही है 

18/07/2018

सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है



सफर ज़िन्दगी का ये कटता नही है
कहाँ चल दिये खुद को हमसे मिलाकर

शहर अजनबी सा ये हमको लगे है
कहाँ चल दिये साथी हमें आज़मा कर

कहाँ तुम चले से गये हो बता दो
दिखाओ नही प्यार अपना जता दो
इबादत तुम्हारी सदा है मेरे संग
कहाँ आ गया तुमको अपना बनाकर

ज़िन्दगी ये तेरे बिन सिमट सी गई है
मैं सच कह रहा यारा , मिट सी गई है
मुकम्मल बयाँ थी तुम्हारी वो बातें
ये क्या कर दिया तुमनें सपने सजाकर

तड़पता मेरा मन तुम्हारे बिना है
कि आओगे कब तुम दिनों-दिन गिना है
बहुत दिन सोयी पड़ी थी ये आँखें
ये क्या कर दिया तुमनें इनको जगाकर

सुनहरा सफर था, सुनहरी थी राहें
सुनहरा था जीवन , सुनहरी वो बाँहें
नज़ारे बदलते गये ज़िन्दगी के -
ये क्या कर दिया तुमनें नज़रें चुराकर

@नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

09/06/2018

क्या करना

Poem 

कपड़ों का बाजार बनाकर क्या करना
जीवन को किरदार बनाकर क्या करना
हम भी जी लेंगें मुर्दों की दुनिया में
फिर झूठी सरकार बनाकर क्या करना

घर का मालिक देख रहा मरते भाई
ये पिद्दी सरदार बनाकर क्या करना

बच जाएँ माँ ,बहनें तब तो बात बनें
अथवा ये आचार बनाकर क्या करना

मैं पागल हूँ, अच्छा हूँ, मैं ज़िन्दा हूँ
झूठा - मूठा प्यार बनाकर क्या करना

एक रहे कोई पर जीवन भर अपना
गैरों का संसार बनाकर क्या करना

साँसें , नब्ज़, हवा गर्मी से व्याकुल हैं
ऐसे अँखियाँ चार मिलाकर क्या करना

जिस घर की दहलीज मुझे घुसने न दे
ऐसे घर परिवार बनाकर क्या करना

18/05/2018

मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं



वही अब दूर जाने लग गये हैं 
हमें अनहद रुलाने लग गये हैं 

जवानी भी अभी देखा नही मैं 
मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं 

बहुत दिन बाद आया गाँव अपने 
कि शायद इक ज़माने लग गये हैं 

मैं जिनके संग अक्सर खेलता था अँख - मिचौली 
वही आँखें चुराने लग गये हैं 

बहुत ज्ञानी हैं वो, ध्यानी हैं वो हर शास्त्र पढ़कर 
मुझे पागल बुलाने लग गये हैं 

जियेंगे साथ हम ये जिंदगी वादे किये थे 
मेरी मय्यत सजाने लग गये हैं 

हमारी जिन्दगी पावन हुई इन दोस्तों से 
मुझे अपना बनाने लग गये हैं 

बहुत ही क्रोध आता था उन्हें तब देखकर मुझको 
वही अब गीत गाने लग गये हैं 


जो आया है उसका जाना स्वाभाविक है

Farewell Pictures Of Varun Sir 
जीवन में सुख - दुःख का आना स्वाभाविक है 
जीवन को हर पल समझाना स्वाभाविक है 

जीवन के हर पहलू पर सब साथ न होंगे
जो आया है उसका जाना स्वाभाविक है 

गुरु ईश्वर हैं, मात - पिता हैं, भाई - बन्धु 
इन सबमें भी खुद को पाना स्वाभाविक है 

भावुक - हृदय हमेशा बस रोना ही सीखा 
आँखों में आँसू का आना स्वाभाविक है 

जीवन में टकराते हैं कुछ प्यार भरे पल 
उन सब में इस पल का आना स्वाभाविक है 

हम संसार बदलने वाले बच्चे सारे 
हम सबका यूँ उड़ते जाना स्वाभाविक है 

इक प्यारे शिक्षक से यारों दूरी होना 
ऐसे में मन का घबराना स्वाभाविक है 


जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएँ वरुन सर आप यूँ ऊँचाइयाँ छूते रहें 
और जीवन को एक प्रोफेसर की भाँति नही अपितु एक शिक्षक की तरह जीते रहें जैसे हम सभी के लिए यहाँ थे आप ईश्वर से यही प्रार्थना है मेरी 
आपके असंख्य शिष्य हों जो आपको हम सभी से भी ज्यादा प्यार दे सकें और आपका जीवन खुशियों से भरा रहे ।

04/05/2018

आदमी ही थे वो ऐसे खुदा नही होते




मौज़ में गालियाँ दो - चार निकल जाती हैं
हमारे यार हैं अच्छे खफ़ा नही होते

रोंकना था उन्हें, बाँधा था पैर में उसके
इश्क फरियाद है " दो दिल " जुदा नही होते

वो जो करते रहे दिन - रात हुकूमत तुम पर
आदमी ही थे वो ऐसे खुदा नही होते

मौज़ - प्यार 

01/05/2018

कविताएँ


कविताएँ जब तक हैं तब तक हम तुम हैं
कविताओं के बाद घना अंधेरा है
कविताएँ ही शाम हृदय के आँगन की
कविताएँ ही खिलता हुआ सवेरा हैं

कविताओं में जीवन है अपनापन है
कविताएँ ही होने का एहसास तेरे
कविताओं को देखो गहन समंदर हैं
कविताएँ हैं तो तुम अक्सर पास मेरे

कविताओं में एक गज़ब की खुश्बू है
कविताएँ हैं जीवन की महबूब मेरी
कविताओं के बिन जीवन है व्यर्थ मेरा
कविताएँ हैं सर्द माह में धूप मेरी

कविताएँ हैं सपना इक , इक ख्वाब मेरा
कविताओं में रहना जीवन जीना है
कविताएँ ही उन्नति का संदेश यहाँ
कविताएँ ही जीवनभँवर सफीना हैं

कविताओं में प्यार सदा देखा मैंने
कविताएँ हैं सम्बल, हैं जज़्बात मेरे
कविताएँ मेरे जीवन की दुल्हन हैं
कविताएँ ही सुख दुःख में हैं साथ मेरे

24/04/2018

मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है

मुझे मालूम है इतना तुम्हें मुझसे मोहब्बत है
मुझे तेरी जरूरत है , तुम्हें मेरी जरूरत है

नज़र के सामने रहती है हो तुम मेरे खुदा होकर
मिलन अपना मुकम्मल हो खुदा से ये इबादत है

न जाने कौन सी मिट्टी से उसका तन बनाया है
मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है

कभी माँ उसमें दिखती है कभी वो प्रेमिका दिखती
कभी पत्नी नज़र आती अजब सी एक मूरत है

नही चाहा कभी कुछ पल की खुशियाँ आज तक तुमसे
तुम्हीं बोलो ये झूठा है या फिर कह दो हकीकत है

मुनासिब है मुझे हर पल तुम्हारे देह का पाना
छुपे बिन रूह तक पहुँचूँ सुनो ऐ " नील " आदत है


20/04/2018

"नील" तुम्हारा फैन हुआ

नील तुम्हारा फैन हुआ 
जब जब पायल छनकी तेरी , दिल को मेरे चैन हुआ
वो आँखों से तीर चलाना " नील " तुम्हारा फैन हुआ

इन आँखों में वो ही सूरत , वो हम दोनों का जीवन
बहुत दूर सब भेज दिये हैं , मिलना तुमसे बैन हुआ

पंक्षी भी अब कम दिखते हैं , पवन तुम्हीं छूकर आओ
कहना उनसे चाँद निहारें , मैं बिल्कुल बेचैन हुआ

नींद नही आती अब मुझको , न दिन में, न रातों में
इन्तज़ार में तेरे हमदम ! मैं खुद अपना नैन हुआ

काली , घनी , सुहानी रातें , उसमें ये तेरी यादें
आँखों से क्या बारिश करना , जीवन मेरा रैन 

18/04/2018

जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम

Jindagi Na Milegi Dodara 

सूरज की आँखों में आँखें डालो तुम
सारे सपने आँखों में यूँ पालो तुम

ब्रह्मा का सिंहासन सारा हिल जाए
उठो शेर, अब तो दहाड़ कर बोलो तुम

क्यूँ डरते हो जीवन को आसाँ समझो
बंद पड़े सारे दरवाजे खोलो तुम

इक माँ है, इक बहना है, इक तात तेरे
इक भाई की आँख के आँसू ले लो तुम

जीवन को खुश रखना है , इक काम करो
सारे रिस्ते हँसते हुए सम्हालो तुम

मुझपे रंग चढ़ाना है तो कुछ सोचो
प्यार का रंग पहले अच्छे से घोलो तुम

तुमपे जीवन लुटा दिया हूँ अब क्या दूँ
दे दूँगा बस हँसते - हँसते बोलो तुम

सारे दर्द निकल कर बाहर होंगे तब
जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम

मैं पागल हूँ , मुझे छोड़ उसको देखो
"नील" कभी तो गज़ल मेरी भी गा लो तुम

नोट : यहाँ तात सिर्फ पिता के लिए प्रयोग किया गया है ।

16/04/2018

चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं

Clicked By Me ....
    

चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं
                       तुम्हारे साथ हूँ हरदम ऐ हमदम! इस जहाँ में मैं

                       मुझे तुम यूँ भुलाकर तो नही जी पाओगे
                       जहाँ तेरी नज़र जाएँगी आऊँगा वहाँ पे मैं

                       तुम्हारी सादगी पर है निछावर ज़िन्दगी मेरी
                       मुझे अपना बनाओ तुम महक जाऊँ फिज़ा में मैं

                       मेरा घर - द्वार कुछ न है , तुम्हारा प्यार है सबकुछ
                       लिपट कर आ मिलो हमसे कहो आऊँ कहाँ पे मैं

                       नही जाना बताये बिन मुझे तनहा यहाँ करके
                       मुझे भी साथ ही रखना जहाँ तुम हो वहाँ पे मैं

                       करूँगा क्या ज़माने में अकेले दूर मैं तुमसे
                       कि घुट - घुटकर मरूँगा,और क्या होगा,यहाँ पे मैं

                       मैं अपने ज़िन्दगी की डोर तेरे हाँथ में रखकर
                       मिटूँगा इस कदर यारा न आऊँगा यहाँ पे मैं 

रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...