04/05/2018
01/05/2018
कविताएँ
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कविताओं के बाद घना अंधेरा है
कविताएँ ही शाम हृदय के आँगन की
कविताएँ ही खिलता हुआ सवेरा हैं
कविताओं में जीवन है अपनापन है
कविताएँ ही होने का एहसास तेरे
कविताओं को देखो गहन समंदर हैं
कविताएँ हैं तो तुम अक्सर पास मेरे
कविताओं में एक गज़ब की खुश्बू है
कविताएँ हैं जीवन की महबूब मेरी
कविताओं के बिन जीवन है व्यर्थ मेरा
कविताएँ हैं सर्द माह में धूप मेरी
कविताएँ हैं सपना इक , इक ख्वाब मेरा
कविताओं में रहना जीवन जीना है
कविताएँ ही उन्नति का संदेश यहाँ
कविताएँ ही जीवनभँवर सफीना हैं
कविताओं में प्यार सदा देखा मैंने
कविताएँ हैं सम्बल, हैं जज़्बात मेरे
कविताएँ मेरे जीवन की दुल्हन हैं
कविताएँ ही सुख दुःख में हैं साथ मेरे
24/04/2018
मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है
मुझे मालूम है इतना तुम्हें मुझसे मोहब्बत है
मुझे तेरी जरूरत है , तुम्हें मेरी जरूरत है
नज़र के सामने रहती है हो तुम मेरे खुदा होकर
मिलन अपना मुकम्मल हो खुदा से ये इबादत है
न जाने कौन सी मिट्टी से उसका तन बनाया है
मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है
कभी माँ उसमें दिखती है कभी वो प्रेमिका दिखती
कभी पत्नी नज़र आती अजब सी एक मूरत है
नही चाहा कभी कुछ पल की खुशियाँ आज तक तुमसे
तुम्हीं बोलो ये झूठा है या फिर कह दो हकीकत है
मुनासिब है मुझे हर पल तुम्हारे देह का पाना
छुपे बिन रूह तक पहुँचूँ सुनो ऐ " नील " आदत है
मुझे तेरी जरूरत है , तुम्हें मेरी जरूरत है
नज़र के सामने रहती है हो तुम मेरे खुदा होकर
मिलन अपना मुकम्मल हो खुदा से ये इबादत है
न जाने कौन सी मिट्टी से उसका तन बनाया है
मेरा दिल आ गया जिस पर सनम वो खूबसूरत है
कभी माँ उसमें दिखती है कभी वो प्रेमिका दिखती
कभी पत्नी नज़र आती अजब सी एक मूरत है
नही चाहा कभी कुछ पल की खुशियाँ आज तक तुमसे
तुम्हीं बोलो ये झूठा है या फिर कह दो हकीकत है
मुनासिब है मुझे हर पल तुम्हारे देह का पाना
छुपे बिन रूह तक पहुँचूँ सुनो ऐ " नील " आदत है
20/04/2018
"नील" तुम्हारा फैन हुआ
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| नील तुम्हारा फैन हुआ |
वो आँखों से तीर चलाना " नील " तुम्हारा फैन हुआ
इन आँखों में वो ही सूरत , वो हम दोनों का जीवन
बहुत दूर सब भेज दिये हैं , मिलना तुमसे बैन हुआ
पंक्षी भी अब कम दिखते हैं , पवन तुम्हीं छूकर आओ
कहना उनसे चाँद निहारें , मैं बिल्कुल बेचैन हुआ
नींद नही आती अब मुझको , न दिन में, न रातों में
इन्तज़ार में तेरे हमदम ! मैं खुद अपना नैन हुआ
काली , घनी , सुहानी रातें , उसमें ये तेरी यादें
आँखों से क्या बारिश करना , जीवन मेरा रैन
18/04/2018
जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम
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| Jindagi Na Milegi Dodara |
सूरज की आँखों में आँखें डालो तुम
सारे सपने आँखों में यूँ पालो तुम
ब्रह्मा का सिंहासन सारा हिल जाए
उठो शेर, अब तो दहाड़ कर बोलो तुम
क्यूँ डरते हो जीवन को आसाँ समझो
बंद पड़े सारे दरवाजे खोलो तुम
इक माँ है, इक बहना है, इक तात तेरे
इक भाई की आँख के आँसू ले लो तुम
जीवन को खुश रखना है , इक काम करो
सारे रिस्ते हँसते हुए सम्हालो तुम
मुझपे रंग चढ़ाना है तो कुछ सोचो
प्यार का रंग पहले अच्छे से घोलो तुम
तुमपे जीवन लुटा दिया हूँ अब क्या दूँ
दे दूँगा बस हँसते - हँसते बोलो तुम
सारे दर्द निकल कर बाहर होंगे तब
जाओ कहीं किनारे मनभर रो लो तुम
मैं पागल हूँ , मुझे छोड़ उसको देखो
"नील" कभी तो गज़ल मेरी भी गा लो तुम
नोट : यहाँ तात सिर्फ पिता के लिए प्रयोग किया गया है ।
16/04/2018
चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं
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| Clicked By Me .... |
चलो तुमको उड़ाता हूँ सलोने आसमाँ पे मैं
तुम्हारे साथ हूँ हरदम ऐ हमदम! इस जहाँ में मैंमुझे तुम यूँ भुलाकर तो नही जी पाओगे
जहाँ तेरी नज़र जाएँगी आऊँगा वहाँ पे मैं
तुम्हारी सादगी पर है निछावर ज़िन्दगी मेरी
मुझे अपना बनाओ तुम महक जाऊँ फिज़ा में मैं
मेरा घर - द्वार कुछ न है , तुम्हारा प्यार है सबकुछ
लिपट कर आ मिलो हमसे कहो आऊँ कहाँ पे मैं
नही जाना बताये बिन मुझे तनहा यहाँ करके
मुझे भी साथ ही रखना जहाँ तुम हो वहाँ पे मैं
करूँगा क्या ज़माने में अकेले दूर मैं तुमसे
कि घुट - घुटकर मरूँगा,और क्या होगा,यहाँ पे मैं
मैं अपने ज़िन्दगी की डोर तेरे हाँथ में रखकर
मिटूँगा इस कदर यारा न आऊँगा यहाँ पे मैं
21/03/2018
मेरे अपने कुछ पसंदीदा शे'र
1. जवानी भी अभी देखा नही मैं
36. जी करता है जन्मदिवस के अवसर पर
लिख दूँ सारा प्यार तुम्हारे चेहरे पर ।।
मुझे दर्शन पढ़ाने लग गये हैं
2. कट गए दिन, कटे हैं माह, कटे वर्ष कई
तुम्हारी याद में ये जिन्दगी न कट जाए
3. सियासत की नज़र हों इस तरफ भी
मेरे पैरों में छाले पड़ गये हैं
4. क्या कहूँ मैं दिन पे दिन हूँ बढ़ रहा
जिन्दगी सैलाब होती जा रही
5. ये जरूरी नही तुम मिलो बस मुझे
पर जरूरी है के याद आती रहो
6. बगावत के उसूलों में मुझे जलकर नही मरना
मुझे हिन्दू भी प्यारा है मुझे मुस्लिम भी प्यारा है
7. मुझे तिरछी नज़र से देखना यूँ
कहो क्या कत्ल करना चाहती हो
8. तुम्हारी नींद क्यों उड़ने लगी है
तुम्हें हमसे मुहब्बत हो गई क्या
9. मुझे परिवार पे है गर्व अपने
मेरे घर में अभी भी एकता है
10. मैं हट कर बैठने वाला नही हूँ
लडूँगा जब तलक है जान मुझमें
11. इन्हें कैसे निकालूँ तुम बताओ
मेरी आँखों में सपने गड़ गये हैं
12. फलक से चाँद-तारे तोड़ लाऊँ
महज़ इस हाँथ में तुम हाँथ रख दो
13. जमीं क्या, आसमाँ बौना लगेगा
तुम्हारा साथ गर मिल जाए मुझको
14. मेरे दिल से अन्धेरा हट गया है
कोई दीपक जला गया शायद
15. नही कुछ और मेरी जिन्दगी में
महज़ तुम और हैं यादें तुम्हारी
16. तुम्हारे सामने यारा सम्हल पाता नही हूँ ,
न जाने कौन से जन्मों के हैं सम्बन्ध गहरे
17. मेरे सुख दुःख सभी कुछ बँट गये हैं
तुम्हारा साथ जब से पा लिया हूँ
18. हमारे दिल के अन्दर चाँद है इक
तेरा चेहरा वहीं देखा है मैंने
19. गज़ल से लबलबाते होंठ तेरे
मिले अनुमति मुझे कुछ पाठ कर लूँ
20. तुम्हारी नाक पे वो कील है या
कोई तारा युँ ही बैठा हुआ है
21. मैं ये दिल रोंक पाऊँ आज कैसे
तुम्हारी रूह ने दस्तक दिया है
22. केसरी हम, हरा तुम उड़ाते रहो
यूँ ही भारत बनाते रहें उम्रभर
23. पूरा घर देखने जब गया गाँव को
सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी
24. हमारे पास रखती हो बड़े एहसास रखती हो
मुझे तुम साँस देने के तज़ुर्बे - खास रखती हो
25. हार कर मत बैठना तुम ज़िन्दगी की दौड़ में
युद्ध का परिणाम आता है सदा लड़ने के बाद
26. बहुत खामोश हैं लफ्ज़ - ए - बयाँ उनकी अदाएँ पर
उतरती यूँ दिल - ओ - दरिया में हैं शाहिल नही दिखता
27. एक निर्णय ले लिए फिर क्या फ़रक पड़ता खुदा
या तो जन्नत राह होगी या तो दोजख का सफर
28. अपनी भी कुछ ख्वाहिशें हैं अपने भी कुछ स्वप्न हैं
छोड़कर इनको बताओ आप ही जाऊँ किधर
29. इस दिलो - दीमाग में क्या कर गई
ज़िक्र होता है तेरा हर बात में
30. मैं फ़लक से भी तोड़ लाऊँ चाँद - तारों को
कभी - कभी मेरा जो साथ तुम निभाया करो
31. ख़ुद ब ख़ुद किस्मत बदल जायेगी बस
ख़ुद के सपनों में ही खुद को देख तू
32. धूप में यूँ ही भटकता रहा सपनें लेकर
छाँव की चाह में अक्सर तेरा आँचल आया
33. इक संसार मेरा था बचपन की यादों का
उसमें तेरा झूम के आना याद अभी है
34. इस देश की रक्षा में अगर प्राण भी जाँए
मिट जाऊँ सर कलम हो शहादत के वास्ते
35. तेरी गोदी में माँ के आँचल का सुख
दिखता प्रेम अपार तुम्हारे चेहरे पर36. जी करता है जन्मदिवस के अवसर पर
लिख दूँ सारा प्यार तुम्हारे चेहरे पर ।।
37. मैं मन्दिर ,मस्जिद गिरिजाघर को क्यों जाऊँ
खुद को मेरा भगवान बना सकती हो क्या
38. माँ की दुवाएँ साथ हैं, बहनों की इबादत
गुस्से भरे पिता हैं मगर प्यार बहुत है
39. बहनें हों उन्मुक्त हमारी जितना चाहें पढ़ पाएँ,
बाबू जी को समझाने की कोशिश करता हूँ
40. चाचा चाची,मामा मामी,भाई भौजी सब
सारे रिस्तों को पाने की कोशिश करता हूँ
41. आज सारे धर्म का बस चाहता हूँ इल्म मैं
कौन ऐसा मंत्र बोलूँ मुक्त कर दूँ जाप से
42. कई दिन, दोपहर हैं साल बीते
गये बचपन से उनको आज देखे
43. यह प्रकृति,यह भोग,वैभव शान्त यह वातावरण
यह धरा पूरी तुम्हारी इस धरा को जीत लो
44. राजधानी देश की रखे रहो दिल्ली मगर,
राजसिंहासन पे अब मजदूर होने चाहिए
45. अधूरी जिन्दगी मैं ढूढता हूँ
कहाँ ये जिन्दगी कुर्बान कर दी
46. दबे पैरों से रेतों पर चली क्यों
मेरी जन्नत !अभी तो दोपहर है
47. मेरे होंठों के मद्धम हैं दबे से
तुम्हारी उँगलियाँ हैं या अधर है
48. इधर तनहा ,अकेला हूँ सदा खुश
तेरी परछाइयाँ जो हमसफ़र हैं
49. मैं झुका न हूँ , झुकूँ न चापलूसों की तरह ,
फिर नही इस देश को आशाभरी सरकार देना
50. बड़ा भोला सा था उस वक़्त जब तुम सीख देती थी ,
किसी से प्राप्त वो शिक्षा - सयानी याद आती है
51. तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ
मैं लिखता हूँ कि मैं ज़िन्दा हूँ ये तुम जान पाओ
धन्यवाद
नीलेन्द्र शुक्ल " नील "
अगर पसंद आये तो अपनी टिप्पणी जरूर दें -
14/03/2018
तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ
तुम्हारी वाहवाही के लिए लिखता नही हूँ
मैं लिखता हूँ कि मैं ज़िन्दा हूँ ये तुम जान पाओ
हमारे कर्म कुछ ऐसे रहें कि जब भी खोजो
कभी मन्दिर, कभी मस्जिद कभी श्मशान पाओ
जमीं पर अब नही दिखती रज़ामन्दी दिलों में
जमीं से टूटकर तारों! खुला आसमान पाओ
जहाँ पर ज्ञान से, गौरव से, धन से गर्व होता हो
जगह वह छोड़ दो प्यारे कोई इंसान पाओ
जमीं छानो, जहाँ छानो, भरा आकाश तुम छानो
महज़ घर छान लो अपना " अनोखा ज्ञान " पाओ ।
भरो बस प्रेम का रस इस समूचे विश्व में तुम
मिटाओ द्वेष यारों इक नया सम्मान पाओ ।
05/03/2018
हर घड़ी
जिन्दगी में तकाज़े मिले हर घड़ी
उनके बदले इरादे मिले हर घड़ी
जिसपे कुर्बान थी ये मि'री जिन्दगी
प्यार में जख्म ताज़े मिले हर घड़ी
पूरा घर देखने जब गया गाँव को
सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी
मैंने जाना है यारों तुम्हीं से जहाँ
मुझको दुश्मन ज़ियादे मिले हर घड़ी
सोच जब से ज़रा सा बढ़ाया हूँ मैं
जंग में मुझको प्यादे मिले हर घड़ी
उनके बदले इरादे मिले हर घड़ी
जिसपे कुर्बान थी ये मि'री जिन्दगी
प्यार में जख्म ताज़े मिले हर घड़ी
पूरा घर देखने जब गया गाँव को
सारे घर मुझको आधे मिले हर घड़ी
मैंने जाना है यारों तुम्हीं से जहाँ
मुझको दुश्मन ज़ियादे मिले हर घड़ी
सोच जब से ज़रा सा बढ़ाया हूँ मैं
जंग में मुझको प्यादे मिले हर घड़ी
02/03/2018
उम्रभर
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| आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ |
जिन्दगी जगमगाती रहे उम्रभर
कोई हँस के लगाती रहे उम्रभर
रंग गाढ़ा हो मन का के छूटे नही
होलिका यूँ ही आती रहे उम्रभर
माँ बहन संग मेरी प्रेमिका भी रहे
मैं खुशी से जियूँ जिन्दगी उम्रभर
प्रेम का रंग कान्हा लिए हाँथ में
राधिका को लगाते रहें उम्रभर
तुम रहो, न रहो, प्रेम तेरा रहे
चित्र पे रंग सजाते रहें उम्रभर
दिव्य फागुन - महीना जिये जिन्दगी
कोकिलें गीत गाती रहें उम्रभर
केसरी हम, हरा तुम उड़ाते रहो
यूँ ही भारत बनाते रहें उम्रभर
एक त्यौहार है भाईचारा का ये
इसको हँस के निभाते रहें उम्रभर
इसमें जो तीसरी लाइन में रंग शब्द है उसका अन्वय "दूसरी और तीसरी" दोनों लाइन से है ।।
धन्यवाद.....
20/02/2018
जब तुम ही एक हृदय में हो
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| Neelendra Shukla " Neel " |
जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।
है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी ।।
मेरी दुनिया तुम मेरी धड़कन तुम
तुम ही साँसें मेरी तड़पन तुम
तुम बिन ऐ मेरे जीवनधन
लगती मुझको दुनिया भारी ।।
जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।
है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी
संसार भरा मैखाना है
मैं और कहीं भी जाऊँ ना
हो सारी दुनिया साथ मगर
मैं फिर तुम्हें भुलाँऊ ना ।।
संग - संग मैं तेरे साथ रहूँ
ऐसी हो कुछ अपनी यारी ।।
जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया सारी ।।
है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी ।।
वो गज़लें मेरी महक उठी
जबसे तुमको मैं पाया हूँ
अब चाँद - सितारे दिखते हैं
तेरे पास मैं जब से आया हूँ
जब साथ हमेशा तेरा हो
फिर जीने की क्या तैय्यारी ।।
जब तुम ही एक हृदय में हो
फिर क्या है ये दुनिया - सारी ।।
है तुमसे ही इक प्रीति मेरी
मैं क्या जानूँ दुनिया - दारी ।।
12/02/2018
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना
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| Neelendra Shukla " Neel " |
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना ।।
गर दूर तुम्हें जाना ही था इक बार बता के जाती तो
तुम कह देती दिल की बातें पर एक बार तुम आती तो
अब धड़कन से तेरी यादों को, तेरे सपनों को, तेरे वादों को
यूँ हमें भुला देना होगा उन प्यारी सी मुलाकातों को
कुछ ख्वाब टूट कर बिखर गये अब सपने मुझे दिखाओ ना
हर बार तुम्हारे रूठने पर हर बार मनाया करता था
हर बार तुम्हें अपनाने को तेरे पास मैं आया करता था
इस बार हुआ है क्या ऐसा क्यों फेर लिए मुँह तुम हमसे
मैं खुशियों में जीने वाला क्यों जोड़ दिया रिस्ता गम से
अब कैसे मैं जी पाऊँगा थोड़ा सा तुम्हीं बताओ ना
वो सर्द रात की कुछ यादें कुछ याद दिलाया करती थी
हम दोनों संग - संग होते थे जन्नत दिखलाया करती थी
दिल के हर चौखट तेरे थे, दिल का सारा आँगन तेरा
पर मैं तो एक खिलौना था, था कोई मनभावन तेरा
उस बार सही, इस बार सही, अब यूँ ही मुझे रुलाओ ना
हर पल इक तुमको खोजा था हर पल तुमको ही पाया था
इतना जादू था चाहत में अपनों से हुआ पराया था
यूँ नदी किनारे बैठ साँझ हम स्वप्न सजाया करते थे
तुम मुझे बुलाया करती थी हम तुम्हें बुलाया करते थे
अब जान गया सारा किस्सा हे प्रियवर ! मुझे बुलाओ ना
आँखें जब मेरी खुलती थी बस इक ही चेहरा दिखता था
उसकी आँखों में जादू था इक सागर गहरा दिखता था
वो मुझमें खूब महकती थी मैं उसमें खूब महकता था
नयनों से वो बातें करती उस पर मन खूब बहकता था
तुमने तड़पाया बहुत मुझे अब और मुझे तड़पाओ ना
मुझको तुमने क्या सोचा है मुझको तुमने क्या जाना है
हर कदम - कदम पे साथ रहा फिर भी क्यूँ न पहचाना है
मधुशाला अब जाता हूँ मैं शायद तुम मेरे साथ नही
इन हाँथों में अब प्याला है शायद अब तेरा हाथ नही
मैं छककर पी के आया हूँ नयनों से जाम पिलाओ ना
कल साँझ हमारे साथ रही अब छोड़ मुझे इतराओ ना
मैं तुम्हें भुलाना चाहूँगा तुम चाहे मुझे भुलाओ ना ।।
कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई
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| कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई .......... |
कान्हा से इश़्क करके बदनाम हो गई
ऐसी हुई मैं बावरी पहचान हो गई
कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - 2
मेरा इश़्क कृष्ण, मेरा प्यार कृष्ण
मेरी जीत कृष्ण, मेरी हार कृष्ण
मेरा रंग कृष्ण, मेरा रूप कृष्ण
मेरी छाया है मेरा धूप कृष्ण
मेरा दुश्मन भी मेरा यार कृष्ण
है सागर में पतवार कृष्ण
मेरे सपनों को मंजिल देगा
बस इक तू पारावार कृष्ण ।
हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - कृष्ण
श्रीकृष्ण - कृष्ण, राधे कृष्ण - 2
इस राह कृष्ण, उस राह कृष्ण
कर दो पूरी सब चाह कृष्ण
संग - संग चलते हो साँसों में
रक्षक हो तुम संत्रासों में
पर्वत में भी तुम, कण में भी
दिखते हो प्रेम में, रण में भी
हैं रूप तुम्हारे इतने कि -
दिखते महलों में, वन में भी
हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - 2
है शत्रू भी वो मित्र कृष्ण
है पावन परम पुनीत कृष्ण
मनका हैं हम वो माला है
हम मधुशाला, वो प्याला है
मेरा मौला है मेरा काज़ी भी
है प्रेमी वो सन्यासी भी
इक राह चुनो नितकर्म करो
हो जाएँगें वो राज़ी भी
हैं कृष्ण कृष्ण, वो कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण - 2
हैं वायु में वो और जल में भी
हैं आज में वो और कल में भी
मेरी मन्नत में, मेरी चाहत में
दिखते हैं वो हर आहट में
हैं सुबह हमारी शाम भी वो
हैं धर्म मेरा ईमान भी वो
इक पीर हरण करने वाले
नटखट है कान्हा श्याम भी वो
हे कृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण कृष्ण
श्रीकृष्ण कृष्ण, राधे कृष्ण
हाँ कृष्ण कृष्ण, श्रीकृष्ण कृष्ण
राधेकृष्ण कृष्ण, श्रीकृष्ण ।।
04/02/2018
तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ
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| Written By Me ...... |
तेरी लक नें किया ऐसा जादू नि हाये मेरा दिल लुटेयाँ
तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ
त्वाडि अँख नु लगे हैं शराबी, शराबी
गल्ल लग दियाँ गुलाबी,
साडि इस थ्वाडि चाल नु दिल लुटेयाँ
गोरी लग दि कुड़ी पंजाबी,
नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ, पराँदा इन्ना शोणा लगेयाँ ।
तेरी लक नें किया ऐसा जादू नि हाये मेरा दिल लुटेयाँ
तेरी अँख से हुआ बेकाबू नि हाये मैनू दिल लुटेयाँ
NOT NOW COMPLETED STILL I'M WORKING IN THIS PANJABI LYRICS ..........
तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
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| नीलेन्द्र शुक्ल " नील " |
तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
मुझे समझो, मुझे जानो, मुझे देखो, पहचानो
मेरी यादें, मेरी बातें, मेरी साँसें, मेरी रातें
मुझे भुला दो, मैं प्रेमी नही, मैं काफिर हूँ
तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
मेरी निगाहें तुम्हें आवाज़ देती हैं
तेरी दुवाएँ नये परवाज़ देती हैं
उड़ता पंक्षी हूँ मैं पहला, और आखिर हूँ
तुम मेरा नाम लेके न बैठो मैं बेवक्त का मुसाफिर हूँ
खुद को बदनाम करके न बैठो मैं तो बेवक्त का मुसाफिर हूँ
02/02/2018
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई
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| नीलेन्द्र शुक्ल " नील " |
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई
वो खड़ी थी जहाँ पे खड़ी रह गई - 2
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2
क्या कभी राधिका थी अलग कृष्ण से
तुम कहो मैं रहूँगा कहाँ सृष्टि में
छोड़कर तुम कहाँ से कहाँ कर गई
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2
तार - दिल के सभी तोड़ कर क्यूँ गये
क्यूँ गये राह में छोड़कर क्यूँ गये
मेरे सपनों का तुम खात्मा कर गई
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2
क्या हुआ बीच में क्यों हुई तुम खफा
मौत दे दो मुझे पर नही ये सजा
यूँ अकेला मुझे बेवफा कर गई ।
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2
मेरी गलियों में अब चाँद निकले भी तो
क्या करूँगा, जमाना ये पिघले भी तो
हुश्न को इश्क से तुम जुदा कर गई
मुझसे पहले मेरी आत्मा मर गई -2
वो खड़ी थी जहाँ पे खड़ी रह गई
मुझसे पहले मेरी ला र ला ला र ला
हूँ हुँ हूँ हूँ हुँ हूँ आह हा आह हा
29/01/2018
पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम
![]() |
| A Good Lyrics According To Me ........ |
पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम ,
मिल जाऊँ नदियों सी मैं सागर हो जाओ तुम
पास हमारे आओ भी न यूँ शरमाओ तुम
पी जाओ पानी जैसे इस गीले - बदन को तुम
कपड़े - सपड़े छोड़ो थोड़ा हुश्न दिखाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको जरा पास तो आओ तुम
बारिश की इन बूंदों को मुझपे बरसाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम
जो भी करना है कर ले आजा तू मेरे घर
कहीं और मत जाना बेबी आके मुझपे मर
जैसा मैं सोची थी बिल्कुल वैसे निकले तुम
जी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम
आग लगी है तन - मन में आ अगन बुझाओ तुम
पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम
हुश्न तुम्हारा यूँ जादू कर जाएगा
शर्म - हया सब छोड़ आग - भड़काएगा
चल फिर थोड़ा मूड बना ह्विश्की दे थोड़ा रम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम
जो भी होगा आगे पीछे सब सह लेना तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम
पी जाओ पानी जैसे इस गीले बदन को तुम
मिल जाऊँ नदियों सी मैं सागर हो जाओ तुम
कपड़े - सपड़े छोड़ो थोड़ा हुश्न - दिखाओ तुम
पी जाऊँगा मैं तुमको ज़रा पास तो आओ तुम
Please Don't Think wrong About This Lyrics Because I'm Trying to Describe Many Types of Lyrics in Different types of Situation According To Bollywood. So See This As A Lyrics I hope you will Understand Me in Right & Proper Way.
If You Have Any Doubt so You Can Ask Me ....
THANK YOU ........
25/01/2018
कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ
![]() |
| नीलेन्द्र शुक्ल " नील " |
कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ
कुछ - कुछ बढ़ने लगा सा हूँ
जब से आए हो जीवन में ,
कुछ - कुछ जुड़ने लगा सा हूँ ।
कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।
बातें तेरी जुबाँ पे हैं
सपने तेरे सुबह से हैं
यूँ ही देखा करो मुझको
आँखें पढ़ने लगा सा हूँ ।
कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।
अल्ला,ईश्वर खुदा सब हैं
जो तू है तो जहाँ सच है
अब तक जाना नही था जो
अब प्यार करने लगा सा हूँ ।
कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।
दूरी यूँ हो गई है जो
खो न दूँ कहीं मैं तुमको
आ जाओ एक होते हैं
कुछ - कुछ डरने लगा सा हूँ ।
कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।
यादें दिन - रात आती हैं
अक्सर मुझको सताती हैं
क्या जादू कर गई हो तुम
तुमपे मरने लगा सा हूँ ।।
कुछ - कुछ उड़ने लगा सा हूँ ।।
23/01/2018
लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी है ।
![]() |
| लेखनी तू शान्त मत होना लड़ाई और भी है ......... |
तू युँ ही चलती चली चल
हार कर मत बैठ पल भर
आ गई है पास तो इक राह दे दे
स्वप्न कर साकार मेरी चाह दे दे
ऐ मेरे मन यूँ मचल मत हौंसला रख, कर पढ़ाई और भी है ।
लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी है ।।
बाज जैसे लक्ष्य पे बस ध्यान हो
तू नही यूँ सोच के सम्मान हो
जो तुझे करना है अपना कर्म कर
लोग पागल कह रहे , न शर्म कर
खुद को तू मजबूत करके कूद जा न देख, खाई और भी हैं
लेखनी तू शान्त मत होना लड़ाई और भी हैं
गिर, सम्हल, उठ जागती रह
स्वप्न तू पहचानती रह
यूँ नही खुद से मुकर तू
जा ज़रा सा सज - सँवर तू
हारना मत जिन्दगी से और सीढ़ी हैं चढ़ाई और भी हैं
लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी हैं ।।
तू सदा ये सोच रख उड़ना है तुझको
खुद के जीवन से अभी जुड़ना है तुझको
जाओ , ढूँढों , खोज लो मन्जिल तुम्हारी
है प्रतीक्षित लग रही सदियों से प्यारी
यूँ नही खुश हो अभी शुरुआत है बाकी , बधाई और भी हैं
लेखनी तू शान्त मत होना , लड़ाई और भी हैं ।।
सोच मत वीवाह की मत कैद हो
ताकि तेरे लक्ष्य न दुर्बेध हों
प्यार कर, वातावरण को देख तू
दे जहाँ को इक नया सन्देश तू
इक नये इतिहास का निर्माण कर प्यारे, सगाई और भी हैं
लेखनी तू शान्त मत होना लड़ाई और भी हैं ।।
13/01/2018
हमारे पास रखती हो बड़े एहसास रखती है
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| Performance At Chinmaya University |
हमारे पास रखती हो बड़े एहसास रखती हो
मुझे तुम साँस देने के तज़ुर्बे - खास रखती हो
बगावत से मुहब्बत तक तुम्हारा फलसफ़ा इतना
जुबाँ खामोश रहती हैं नज़र से बात रखती हो
सदा फूलो फलो यूँ ही कि हर मन्जिल नई चूमों
बहुत है सादगी तुममे अधिक परवाज़ रखती हो
मुक़म्मल है तुम्हारा इश्क़ फिर इतनी ख़फ़ा क्यों हो
मुझे जब देखती हो क्यों दिल - ए - नासाज़ रखती हो
मेरा मन घूमता रहता है अक्सर स्वप्न में मेरे
खिंचा जाता हूँ फिर भी मैं गज़ब अन्दाज़ रखती हो
नहीं दौलत, नहीं सोहरत, नहीं विख्यात हूँ इतना
तुम्हारी सोंच सुन्दर है मुझे सरताज़ रखती हो
फलसफ़ा - दर्शन
परवाज़ - उड़ान
दिल - ए - नासाज़ - हृदय प्रतिकूल
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