22/04/2019
21/04/2019
20/04/2019
तुम्हें कैसे सम्हालूँगा बताओ
सनम यूँ ही नही तुम दिल लगाओ
नही मुझको अभी अपना बनाओ
सम्हाले दिल सम्हलता ही नही जब
तुम्हें कैसे सम्हालूँगा बताओ
19/04/2019
ख़ुदा ये सब सभी को यूँ नहीं देता
जिसे जो चाहिए उसको नहीं देता
मुहब्बत, सादगी सबको नहीं देता
तुझे जो कुछ मिला है क़द्र कर उसकी
ख़ुदा ये सब सभी को यूँ नहीं देता
तुझे देखें तो मेरा नाम बुलाया जाये
![]() |
| Teri Parchhaiyan Jo Humsafar Hain. |
तेरे चेहरे पे मेरे रूप का साया जाये
तुझे देखें तो मेरा नाम बुलाया जाये
कम से कम याद रखेंगे मुझे वो हर लम्हा
दोस्ती छोड़ के, दुश्मन ही बनाया जाये
दुखी रहूँ तो उन्हें मेरी ख़बर मत देना
सुखी रहूँ तो मेरी माँ को बुलाया जाये
वो जो ख़ामोश खड़े हैं सभी बच्चे बाहर
मेरी महफ़िल में उन्हें प्यार से लाया जाये
ज़ुस्तज़ू है मुझे उस दिन का, कि जिस दिन यारा
तेरे घर में मुझे मेहमान बनाया जाये
तड़प रहा है मेरे सामने मेरा मौला
नील भरपेट उसे भोज कराया जाये
तड़प रहा है मेरे सामने मेरा मौला
नील भरपेट उसे भोज कराया जाये
18/04/2019
नील! तुमको चुना मुकम्मल है
| काश इतना बुरा नही होता |
वक्त ये बेवफा नही होता
उम्र लगती है नाम होने में
कोई यूँ ही बडा नही होता
लोग गर छेडते नही मुझको
जंग कोई लडा नही होता
आदमी जिन्दगी समझते जो
फलसफा ही बना नही होता
बात सुनता अगर बडों की तू
यार ये क़हक़हा नहीं होता
एक दूजे से प्यार न हो तो
फालतू वास्ता नही होता
नील! तुमको चुना मुकम्मल है
वगर्ना रास्ता नही होता
17/04/2019
अल्लाह देखता है उससे डरें हुज़ूर
![]() |
| Corporate Walk With Laden |
अच्छाइयों के रास्ते बढ़ते रहें हुज़ूर
जीवन के रंगमंच पे कुछ तो करें हुजूर
इन जंग की बातों से सुलह कर लिया जाये
ऐसा करो न तुम मरो,न हम मरें हुजूर
ईश्वर ने बहुत सोच के इंसान बनाया
इंसानियत को समझें खुशियाँ भरें हुज़ूर
दूजों को कोसना क्या हम ख़ुद को बदल लें
ये काम यहीं करके, आगे बढ़ें हुज़ूर
वो आग फूँकते हैं भीतर जो तुम्हारे
खुल्ला जवाब दे दो हम क्यूँ लड़ें हुज़ूर
माना कि सबसे बच के लूटे हो ज़माना
अल्लाह देखता है उससे डरें हुज़ूर
16/04/2019
अंगारों पे चलता हूँ मैं
![]() |
| Neel, Kavya Moti, Harsh Bhai |
बंजारों सा बढ़ता हूँ मैं
अंगारों पे चलता हूँ मैं
किन लोगों से डरना यारों
सरकारों से लड़ता हूँ मैं
टकराता हूँ चट्टानों से
कब डरता हूँ परिणामों से
जो भी होगा सब निश्चित है
जो डरता है वो ही चित है
सब सोंच - सोंच रुक जाते हैं
आगे भविष्य गढ़ता हूँ मैं
दीवानों सा पागलपन है
सपनों में ही रहता मन है
पथरीली राहों पर दौड़ू
सबका सब मैं अपना कर लूँ
देखे मैंने उल्लास बहुत
देखे मैंने मधुमास बहुत
अब खुद को भी मैं देख सकूँ
इसलिए शिखर चढ़ता हूँ मैं
डरना कैसा गद्दारों से
क्या प्यार करूँ दीवारों से
मन में जिसका भी कलरव है
जीवन में सबकुछ संभव है
खुद को जिसमें खुश पाओगे
जैसा सोंचे बन जाओगे
दूजों को पढ़ता नहीं कभी
अक्सर खुद को पढ़ता हूँ मैं
बंजारों सा बढ़ता हूँ मैं
अंगारों पे चलता हूँ मैं
किन लोगों से डरना यारों
सरकारों से लड़ता हूँ मैं
13/04/2019
12/04/2019
लोग क्यूँ वाह वाह करते हैं
![]() |
| Neel |
लोग ख़ुद को तबाह करते हैं
जानते हैं, गुनाह करते हैं
रात आती है चाँद तारों संग
रात को हम सियाह करते हैं
चाहता हूँ मैं बाख़ुदा जिसको
आज उससे निकाह करते हैं
घूमते हैं, बड़े नज़ाकत से
और हमपे निगाह करते हैं
ख़्वाहिश -ए - पूर्णिमा की है उनको
हम अमावस की चाह करते हैं
जुर्म के बाद था अदालत में
लोग फिर भी गवाह करते हैं
रात आती है चाँद तारों संग
रात को हम सियाह करते हैं
चाहता हूँ मैं बाख़ुदा जिसको
आज उससे निकाह करते हैं
घूमते हैं, बड़े नज़ाकत से
और हमपे निगाह करते हैं
ख़्वाहिश -ए - पूर्णिमा की है उनको
हम अमावस की चाह करते हैं
जुर्म के बाद था अदालत में
लोग फिर भी गवाह करते हैं
बोलता हूँ फ़िजूल ही यारों
लोग क्यूँ वाह वाह करते हैं
11/04/2019
प्रेम शिव हैं, निशान काशी में
![]() |
| Kashi, Banaras,Varanasi |
ईश शव औ' मशान काशी में
रोज सुनता अज़ान काशी में
केरला में महज़ बदन मेरा
घूमता है धियान काशी में
एक ही घाट पर दिखे दोनों
ईश,अल्ला महान काशी में
पाठ करते बटुक ऋचाओं का
वेद, गीता, पुराण काशी में
सुब्ह से शाम तक महादेवा
गूँजती है जुबान काशी में
एक मैं ही यहाँ अकेला हूँ
और सारा जहान काशी में
ख्वाहिशें हैं नहीं बहुत मेरी
चाहता इक मकान काशी में
ख्वाहिशें हैं नहीं बहुत मेरी
चाहता इक मकान काशी में
प्रेम पाकीज़गी में दिखता है
प्रेम शिव हैं, निशान काशी में
" केरला में महज़ बदन मेरा " का मतलब ये बिल्कुल नहीं है की मैं केरला पसन्द नहीं करता केरला मुझे बहुत पसन्द है यहाँ के लोग, यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता, यहाँ की उदारता पर कुछ मामलों को लेकर स्वार्थी होना पड़ता है महादेव की ख़ातिर ।
" केरला में महज़ बदन मेरा " का मतलब ये बिल्कुल नहीं है की मैं केरला पसन्द नहीं करता केरला मुझे बहुत पसन्द है यहाँ के लोग, यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता, यहाँ की उदारता पर कुछ मामलों को लेकर स्वार्थी होना पड़ता है महादेव की ख़ातिर ।
तुम्हें जीवन बना लिया हूँ मैं
![]() |
| Neel - Teri Parchhaiyan Jo Humsafar Hain. |
आज लो मन बना लिया हूँ मैं
आज चिलमन हटा लिया हूँ मैं
होंठ पे रंग लगा के, रंगों से
और भी रंग बना लिया हूँ मैं
आज क़ातिल अदाएँ देखूँगा
आज दर्पण लगा लिया हूँ मैं
इश्क आबाद करेगा मुझको
सोंचकर संग बना लिया हूँ मैं
एक पूरी ग़ज़ल समूची तुम
तुम्हें जीवन बना लिया हूँ मैं
मुझको मेरा कल दो ना
![]() |
पापा पापा फल दो ना
थोड़ा सा सम्बल दो ना
मुझको भी पढ़ना लिखना है
मुझको मेरा कल दो ना
मुझको भी कुछ करना है
भइया जैसा बनना है
आँखमिचौली नहीं खेलना
मुझको आगे बढ़ना है
मैं भी उड़ना सीखूँगी
मुझको जीवनजल दो ना
मुझको क्यूँ कमजोर समझते ?
मुझसे क्यूँ बातें न करते ?
सामाजिक बदलाव करेंगे
सबमें हम समभाव भरेंगे
मेरे प्रश्नों से क्यूँ चुप हो
आखिर कुछ तो हल दो ना
10/04/2019
होंठ पर होंठ रख दिया रब्बा
![]() |
आज चमका गया फिज़ा रब्बा
झूमते लोग जा ब जा रब्बा
कई सालों के बाद आया है
मेरे घर पर मेरा ख़ुदा रब्बा
हाँथ में चीख रहा था भाई
बोलकर चल दिया विदा रब्बा
बोलना था मुझे बहुत कुछ पर
होंठ पर होंठ रख दिया रब्बा
जिससे उम्मीद थी रफ़ीक़ी की
क़त्ल कर के फँसा गया रब्बा
ढूढंता हूँ दरख़्त सपनों में
सामने कुछ नहीं बचा रब्बा
चाँद तक लोग आ गए लेकिन
गाँव उनको नहीं दिखा रब्बा
देखता हूँ जहाँ में तन्हाई
गा रहा हूँ मैं मर्सिया रब्बा
जा ब जा - जगह जगह
रफ़ीक़ी - दोस्ती
दरख़्त - पेड़
09/04/2019
तुम आई हो मेरे जीवन में मेरे यार के जैसी
![]() |
| Dhadak - Google |
किसी पतवार के जैसी, किसी मल्हार के जैसी
तुम आई हो मेरे जीवन में मेरे यार के जैसी
मेरे घर - द्वार के जैसे, किसी परिवार के जैसे
तुम आये हो मेरे जीवन में इक संसार के जैसे
सुबह से शाम तक घूँमूँ
हुआ पागल तुम्हें ढूँढूँ
चमकता चाँद सा चेहरा किसी रुख़्सार के जैसे
मेरी साँसों में घुलते हो
मेरे सपनों में मिलते हो
जहाँ देखूँ, जहाँ जाऊँ
हमारे साथ चलते हो
हमारे जिस्म से जाकर
हमारी रूह छूते हो
मेरी धड़कन धड़कती है किसी झनकार के जैसे
अभी तक मुन्तज़िर था मैं
अभी शायद मुनव्वर हूँ
जमीं की ख़्वाहिशें समझूँ
मुकम्मल एक अम्बर हूँ
तड़प देखा तुम्हारी मैं
बरसना चाहता हूँ अब
तुम्हें बस देखता जाऊँ तेरे दीदार के जैसे
तुम्हीं बोलो कहाँ गुम हो
तसव्वुर में तुम्हीं तुम हो
मेरे जीवन में आ जाओ मेरे अधिकार के जैसे
अभी तो है बहुत थोड़ा
मुझे छू लो करो पूरा
मुझे अपना बनाओ तुम मेरे सरकार के जैसे
08/04/2019
कविता, पुस्तक और तुम
यादें कितनी खूबसूरत
होती हैं, मालूम है तुम्हें
तुम्हारी यादें कल बीजरूप में
पनपी और कविताएँ बनी
धीरे धीरे बढ़ी, बढ़ती गई
और इतना बढ़ गई
कि आज फसलरूपी पुस्तक
तुम्हारे सामने है
इसे उठाओ, पढ़ो
और देखो
मेरी नजरों से कितनी खूबसूरत दिखती हो
शायद वो खूबसूरती नहीं
दिखा पाए कोई भी दर्पण तुम्हें
तुम्हारी दी हुई कला
नहीं मालूम
मुझे कहाँ तक लेके जाएगी
लेकिन हाँ अभी तक जो भी पाया हूँ
जहाँ भी हूँ सच बहुत खुश हूँ
जहाँ भी हूँ सच बहुत खुश हूँ
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बस तुम्हारे लिए........... मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ - 2 मैं कहूँ कैसे तुम्हारी...
















