10/03/2019
07/03/2019
गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ
![]() |
| Happy Women's Day |
ना जाने दो अब और कहीं
गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ
बहना रक्षा की डोरी है
मैं उसका भइयादूज हूँ माँ
बचपन से लेकर आज तलक
तेरा आँचल मुझको भावे
तेरी गोदी में सर रखूँ
सो जाऊँ ऐसी नींद आवे
फिर क्या है जन्नत और स्वर्ग
फिर क्या मन्दिर क्या मस्जिद है
छोटा सा बच्चा बन जाऊँ
माँ, बस मेरी इतनी जिद है
मैं तेरा अपना बेटा हूँ
ना यादों का सन्दूक हूँ माँ
बहना मेरी परछाई सी
चलती रहती आगे पीछे
थोड़ा भी डाट लगाऊँ तो
वो देखे बस ऊपर नीचे
ना मुझसे आँख मिलाती वो
रोती अन्दर भग जाती वो
फिर हँसकर वो बाहर आती
कहती है भइया भूत बनो
शंकर, भोलेबाबा, काशी के
शुद्धरूप अवधूत बनो
वो मेरी रानी गुड़िया है
मैं उसका प्यारा भूत हूँ माँ
अब रही तुम्हारी बात प्रिये
तुम मेरे जीवनसाथी हो
मैं जलता हूँ गर दीपक सा
है प्यार तेल, तुम बाती हो
इतनी सुमधुर आवाज़ तेरी
लगती है माँ की लोरी सी
जितना मन ऊपर भेजो तुम
मैं पतंग और तुम डोरी सी
हम दोनों हैं इक दूजे के
वो कोयल है मैं कूक हूँ माँ
हम दोनों कर्म करें मिलकर
वो गोली मैं बन्दूक हूँ माँ
भारत में अपनापन देखो
शबरी का दिल - दर्पण देखो
वो राम, राम गर कहे गए
सीता का पावन - मन देखो
उर्मिला बेचारी कहाँ गई
पति से वियोग उसका भी था
लक्ष्मण भटकें वन - उपवन में
कैसा दुर्योग ये उसका था
लड़कर यमराज से ले आई
प्राणों को सत्यवती जाकर
विष पी डाला सब मीरा नें
कान्हा की भक्ति में खोकर
इनकी गौरव - गाथा सम्मुख
मैं शब्दों में दो टूक हूँ माँ
अब वर्तमान इस भारत के
बारे में अनुसंधान करें
रौशन भारत करने वाली
महिलाओं का कुछ ज्ञान करें
पूरी सेना को धूल चटाने
वाली लक्ष्मीबाई थी
कल्पना उड़ी तो आसमान से
मिलकर वापस आई थी
मस्तानी पद्मावती प्रेम की
अद्भुद अमिट कहानी थी
पद्मा थी पतिव्रता यारों
मस्तानी तो दीवानी थी
सानिया और पी.वी सिंधू
मैदानों में डट जाती हैं
भारत का ध्वजा - पताका ले
सबसे ऊपर लहराती हैं
बबिता, पी. टी. ऊषा नें
अपने लक्ष्यों पे बस ध्यान दिया
इसलिए हमारे भारत नें
महिलाओं का सम्मान किया
मैं सुनो इसी वंशज का हूँ
इसलिए तेरे अनुरूप हूँ माँ
भारत में अपनापन देखो
शबरी का दिल - दर्पण देखो
वो राम, राम गर कहे गए
सीता का पावन - मन देखो
उर्मिला बेचारी कहाँ गई
पति से वियोग उसका भी था
लक्ष्मण भटकें वन - उपवन में
कैसा दुर्योग ये उसका था
लड़कर यमराज से ले आई
प्राणों को सत्यवती जाकर
विष पी डाला सब मीरा नें
कान्हा की भक्ति में खोकर
इनकी गौरव - गाथा सम्मुख
मैं शब्दों में दो टूक हूँ माँ
अब वर्तमान इस भारत के
बारे में अनुसंधान करें
रौशन भारत करने वाली
महिलाओं का कुछ ज्ञान करें
पूरी सेना को धूल चटाने
वाली लक्ष्मीबाई थी
कल्पना उड़ी तो आसमान से
मिलकर वापस आई थी
मस्तानी पद्मावती प्रेम की
अद्भुद अमिट कहानी थी
पद्मा थी पतिव्रता यारों
मस्तानी तो दीवानी थी
सानिया और पी.वी सिंधू
मैदानों में डट जाती हैं
भारत का ध्वजा - पताका ले
सबसे ऊपर लहराती हैं
बबिता, पी. टी. ऊषा नें
अपने लक्ष्यों पे बस ध्यान दिया
इसलिए हमारे भारत नें
महिलाओं का सम्मान किया
मैं सुनो इसी वंशज का हूँ
इसलिए तेरे अनुरूप हूँ माँ
ना जाने दो अब और कहीं
गोदी में मैं महफूज़ हूँ माँ
बहना रक्षा की डोरी है
मैं उसका भइयादूज हूँ माँ
02/03/2019
पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा
![]() |
| Rahul Gandhi Ji |
पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा
तू साठ साल न दै पाया
अब तू सबका सोना देब्या
आलू डइहिं सोना निकरी
घर मा ना इक कोना देब्या
अब तुहीं बतावा का करब्या
बुद्धि चकराति अहै तोहर
कइ ल्या बियाह दुलहिन लावा
तू मजा करा बनके सौहर
यातौ जस लरका अहा अबै
लरिकै जइसे बर्ताव करा
जेतना होय पावै कम बोला
जनता मा ना दुर्भाव भरा
निर्लज्ज बहुत होय गा बाट्या
माई के बारे मा सोचा
पूरा ई देश हँसत बाटै
कुछ जान समझ ल्या तौ बोला
अइसेन नीलाम करा इज्जत
कुछ थोर बहुत जउनै बाटै
तोहका सुन ल्या सुधरै चाही
बुध्दि कुछ बाटै की नाही
जउनै मुँह आवै नहीं कहा
चालीस - पैतालिस उमरि अहै
अब तक ना तू कुछ कइ पाया
अपनै तू क्षेत्र नहीं देख्या
केहू का न सुख दै पाया
फिर तोहसे का उम्मीद रहै
तू का कइ पउब्या भारत मा
आपन छत न सम्हार पाया
तू का कइ पउब्या हर छत मा
पहिले कुछ ट्यूसन कोंचिंग ल्या
फिर तू भाषण खातिर आया
बेटवा देख्या घर बचा रहै
घर चोर बहुत सातिर आवा
स्विस मा सब पइसा भरि आईं
भउजी फिर से लूटै आईं
लेकिन अब कहाँ लूट पउबू
सब समझ गएन बेउहार हियाँ
माई बेटवा घर वापस जा
गिर गा सारा आचार हियाँ
मेहमान नवाजी बहुत कीन
मेहमान चला रस्ता नापा
तू एक बार खोखला किहा
भारत फिर से तू ना भापा
ल्या बैग उठावा घरै बढ़ा
बस तुम्हरे दूइनौ के कारण
दद्दू कुछ बोल नहीं पायें
उनके काहे मन मोह लिहू
ओनहू नाही कुछ दइ पायें
विद्वान रहें वै बहुत मगर
उनके संगति गड़बड़ होइ गै
गद्दी पै बइठे रहें मगर
घर मलकिन तौ बंचड़ होइ गै
यह बरे कुछू न कइ पायें
सत्ता मा बस जागें सोएँ
गलती वै कउनो करे रहें
अइसेन तौ वै चुप नहीं रहें
अब जउन भवा होइगा छोड़ा
पपुआ तोहार होइ गा घोड़ा
अपने बेटवा का समझावा
मुड़वा मा कुछ बुद्धि डावा
मोदी बाबा जब डाटत थीं
चड्ढी पकड़े ऊ भागत थै
पगलाय जात है कबो - कबो
आँखी ऊ मारै लागत थै
खेलिस हरदम आइस - पाइस
ऊ अउर कुछू न कइ पाइस
बस आँख मिचौली करत रहा
बस तुम्हरे दूइनौ के कारण
दद्दू कुछ बोल नहीं पायें
उनके काहे मन मोह लिहू
ओनहू नाही कुछ दइ पायें
विद्वान रहें वै बहुत मगर
उनके संगति गड़बड़ होइ गै
गद्दी पै बइठे रहें मगर
घर मलकिन तौ बंचड़ होइ गै
यह बरे कुछू न कइ पायें
सत्ता मा बस जागें सोएँ
गलती वै कउनो करे रहें
अइसेन तौ वै चुप नहीं रहें
अब जउन भवा होइगा छोड़ा
पपुआ तोहार होइ गा घोड़ा
अपने बेटवा का समझावा
मुड़वा मा कुछ बुद्धि डावा
मोदी बाबा जब डाटत थीं
चड्ढी पकड़े ऊ भागत थै
पगलाय जात है कबो - कबो
आँखी ऊ मारै लागत थै
खेलिस हरदम आइस - पाइस
ऊ अउर कुछू न कइ पाइस
बस आँख मिचौली करत रहा
पप्पू बाट्या पप्पुवै रहा
01/03/2019
तुम साथ नहीं, ये गम न हो
![]() |
| नील |
तुम साथ नहीं, ये गम न हो
पर प्यार हमारा कम न हो
जिन यादों से दुनिया देखी
उन यादों के मरहम न हों
चलती सनसनी हवाएँ हैं
पर आती नहीं दुवाएँ हैं
मैं नफ़रत की दीवारों को
तोड़ूँ सारे व्यभिचारों को
चलती सनसनी हवाएँ हैं
पर आती नहीं दुवाएँ हैं
मैं नफ़रत की दीवारों को
तोड़ूँ सारे व्यभिचारों को
ऐसा पल न हो जीवन में
तुम पास रहो हमदम न हो
तुम किसी फूल की तरह खिलो
बन धार नदी की सदा मिलो
सागर से थोड़ा प्यार करो
मैं तुम्हें भरूँ, तुम मुझे भरो
इस कदर हमारा प्यार पले
उन्मुक्त रहें बन्धन न हो
जीवन में जितने मोड़ मिले
मुझको सारे बेजोड़ मिले
मैं खुलकर ये कह सकता हूँ
सबसे दूरी सह सकता हूँ
जिससे दूरी बनती जाए
हो और कोई दुल्हन न हो
तुम किसी फूल की तरह खिलो
बन धार नदी की सदा मिलो
सागर से थोड़ा प्यार करो
मैं तुम्हें भरूँ, तुम मुझे भरो
इस कदर हमारा प्यार पले
उन्मुक्त रहें बन्धन न हो
जीवन में जितने मोड़ मिले
मुझको सारे बेजोड़ मिले
मैं खुलकर ये कह सकता हूँ
सबसे दूरी सह सकता हूँ
जिससे दूरी बनती जाए
हो और कोई दुल्हन न हो
27/02/2019
जोगी के भेष मा भोगी हैं
![]() |
| ढोंगी - बाबा |
जोगी के भेष मा भोगी हैं
खुद का वै किशन बतावथीं
रोमंटिक गाना गावत थीं
अंग्रेजी - पिक्चर वै देखैं
गोपियन का साथ देखावत थीं
पकड़ाय गएन कइयौ बाबा
देख्या नाही नम्बर आवै
पिछवाड़े पै डण्डा परिहैं
लगब्या खुद ही कूदै - फांदै
हम नहीं कुछू अब अउर सुनब
जउनै देखब हम वही कहब
सन्यासी नाहीं ढ़ोगी हैं
हाँथन मा हाँथ मिलाय रहें
चिकनी - चुपड़ी बतियाय रहें
लइकिनियौ अब पगलानि अहैं
बाबा खातिर दुबरानि अहैं
इनहू के बुद्धि मरी अहै
इनका का बोली चाड़ि अहैं
बाबा का तौ समझै चाही
उनपै समाज केतना थूकी
अब अउर कुछू ना कहि जाई
उनपै श्रद्धा न होए पाई
कामुकता के वै रोगी हैं
गोड़े पै पीठि पै डण्डा
जब परै लाग खुलगा झण्डा
सारा सन्यास उतर भागी
मूड़े पै जब सोंटा बाजी
यैह बरे अबै समझाय रहिन
दलदल छोड़ौ, गोहराय रहिन
कुछ देखौ समझौ जान लियौ
कुछ बात हमारौ मान लियौ
न कुछू बताउब, अहन निडर
बोलथिं, पूछा बहुत मगर
बोलते नाही यै घोघी हैं
गोड़े पै पीठि पै डण्डा
जब परै लाग खुलगा झण्डा
सारा सन्यास उतर भागी
मूड़े पै जब सोंटा बाजी
यैह बरे अबै समझाय रहिन
दलदल छोड़ौ, गोहराय रहिन
कुछ देखौ समझौ जान लियौ
कुछ बात हमारौ मान लियौ
न कुछू बताउब, अहन निडर
बोलथिं, पूछा बहुत मगर
बोलते नाही यै घोघी हैं
26/02/2019
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
![]() |
| Chennai - Trip |
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
मिलती हैं मुझसे आकर मैं चाहूँ मुझमें ठहरें
मैं क्या हूँ, मुझमें क्या है सबकुछ वो मुझे बताती
जब भी लहरों को सुनता हूँ अपना मुझे बनाती
मुझको मुझे मिलाती हैं वो मुझमें आकर तैरें
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
सारा जग है शोर मचाता मेरे अगल - बगल में
पर वो नहीं सुनाई देता है मुझको उस पल में
आवाजें आती हैं मुझ तक दिखे न इक भी चेहरे
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
लहरों पर लहरों को देखा साँझ हुआ मन गदगद
तिस पर सूरज की किरणें दिखती हैं सुन्दर - अद्भुद
डूब रहा था मैं खुद में वो मिलीं डुबा दी गहरे
ये समुद्र की लहरें यारों ये समुद्र की लहरें
मिलती हैं मुझसे आकर मैं चाहूँ मुझमें ठहरें
19/02/2019
तुम्हारे होंठ का गर आचमन कर लूँ प्रिये
![]() |
| Akanksha Ji |
कहो तो खुशनुमा अपना चमन कर लूँ प्रिये
जमीं क्या आसमाँ को भी नमन कर लूँ प्रिये
मिलेगा फल मुझे उस दिव्य चारो - धाम का
तुम्हारे होंठ का गर आचमन कर लूँ प्रिये
जुबाँ से जो बयाँ न हो सके वो खूबसूरत
तुम्हारे रूप को, तुमको सनम कर लूँ प्रिये
बहुत तड़पा चुकी हैं आप मुझसे दूर होकर
अजी अब पास भी आओ सितम कर लूँ प्रिये
रहूँ गाता तुम्हें हर वक़्त अपनी जिन्दगी में
तुम्हारे गीत को अपना भजन कर लूँ प्रिये
रहूँ संग - संग विधाता की बनाई सृष्टि में
तुम्हारे नाम अपना हर जनम कर लूँ प्रिये
17/02/2019
मृगतृष्णा से सम्बन्ध न हो
![]() |
| Akanksha Ji |
विश्वास रहे पर अंध न हो
मृगतृष्णा से सम्बन्ध न हो
जब प्रेम शाश्वत सत्य दिखे
उस पर कोई प्रतिबन्ध न हो
गतिशील बनाओ जीवन को
उन्नति के पथ पर बढ़ो सदा
इतना खुदपर विश्वास रहे
जीवन में कोई द्वंद्व न हो
जो ठान लिए वो कर गुजरें
जीवन के लक्ष्य से न मुकरें
माँ और पिता के शरण रहें
आज़ाद रहें स्वच्छंद न हों
तुम प्रेम लिखो सौ बार मगर
सामाजिक - गतिविधियाँ भी हों
भावों की हो परिपक्व - दशा
कविता हो केवल छ्न्द न हो
जो बीत गया वो जाने दो
अपनों को गले लगाने दो
जीवन में ऐसे कर्म करो
खुश्बू हों, पर दुर्गन्ध न हो
मुझपे वो चाल चले जायें
हर बार मारने को आयें
माता के भाई होने से -
मामा तो हों, पर कंस न हों
कितने भी तुम विख्यात रहो
कितना भी ज्ञान अथाह रखो
जीवन को ऐसे सरल रखो
जीवन में कोई दम्भ न हो
15/02/2019
13/02/2019
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
हमरे भइया भउजी अच्छे
उनके सबके प्यारे बच्चे
सब तोहका चाची मानत थीं
फोटू देखतै पहिचानत थीं
फोनवा पै हमसे कहत रहें
हमहू मिलबै अब चाची से
छोटकी बहिनी हमसे बोलीं
बतियाइब नवकी भाभी से
मम्मिउ तोहका अपनाय लिहीं
पहिलेन ऊ लड्डू खाय लिहीं
पापा का जइसेन खबर मिली
अँखियन के तारा होय गयू
हमरे घर मा सब अच्छे हैं
जेतना मन चाहै पड्यू - लिख्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
ना चाही हो घोड़ा, हाँथी
हमका चाही जीवनसाथी
जेहिके साथे जीवन काटब
आपन सुख - दुःख संग संग बाँटब
लड़ि मरि के खाब - खियाइब सब
सपना हम पूर कराइब सब
दुनिया वालेन के काम अहै
वै चिल्लइहैं, चिल्लाए द्या
हरदम हम तोहरे साथ रहब
उनका सबका तू जाये द्या
ई वादा है हमार तुमसे
आपन बियाह होई झम से
दुनिया केतनीउ शैतान बनै
केतनौ तुमका परशान करै
हम जउन कही बस सुनत रह्यू
छोड़िउ ना संगे - साथ बह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
तोहरौ आपन बिचार होइहैं
जे जगह - जगह पै समझइहैं
मिलके जीवन - गति बढ़त रही
सीढ़ी दर सीढ़ी चढ़त रही
जेतनी उन्नति हम कइ पउबै
ओतने ऊपर तोहका लउबै
तोहका हम आपन मान लेहे
तोहका आखिर पहिचान लेहे
बस हमहीं बोली ठीक नहीं
बोला आखिर आजादि अहा
हमरे घर आवै का तोहका
अब पापा के औलादि अहा
मन मा जब जउन रहै तोहरे
कहि दिहू न ज्यादा कष्ट सह्यू
ई कउनो नहीं जरूरी है
हम जउन कही तू वही कह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
जीवन भर हमरे साथ रह्यू
09/02/2019
का हो दादा रामबचन
![]() |
| Goolge |
का हो दादा रामबचन
मूँछ तोहारौ फरिकै लाग
देखा हम पानी मा आग
जब से बेटवा अफ़सर होइगा
भाव तोहारौ अब सर होइगा
पैसा, गाड़ी, गहना माँग्या
खाना, पीना , रहना माँग्या
समधी के इक बाल न पूछ्या
का बीतत है हाल न पूछ्या
तोहका सब स्टंडर चाही
तोहरेव बिटिया का बर चाही
सुना ध्यान से जउन कहा सब
बेटवा बेंचै जात अहा अब
बिटिया से तू लइके धन
तोहका एक सिकन्दर चाही
खुला गगन ई अम्बर चाही
कला, संस्कृति सीख्या नाही
तोहका केवल नम्बर चाही
काहे हरदम हड़कावत ह्या
काहे ओहके गरियावत ह्या
थोर से ओहके अबै जियै द्या
घूमै,टहरै, खाय पियै द्या
ज्यादा गरम करा न पारा
माना तीर बहुत तू मार् या
वहू के कुछ अभिलाषा होई
कुछू बनै के आशा होई
बेटवव के अब पढ़ ल्या मन
घर - दुवार के पता नहीं बा
बहुत फकीरी छाइ बाटै
जब आई बाबा के पेन्सन
बुवौ घरे पै धाई बाटै
जीवन नाही नरक होइ गवा
बाबौ का अब स्वरग होइ गवा
नहीं देखातै अब घर केहू
कपड़ा का अब धोवै रेहू
आँसू नाही खून चुवत है
बहुत गरीबी है, रोवत है
होली अउर दिवाली नाही
बिन पैसा घरवाली नाही
ओहके खातिर कउन चमन
पुलिस गाँव मा घुसी अहै अब
कउनो शायद चक्कर होइगा
जर - जोरू के बात करिन
दूनौ भाई मा टक्कर होइगा
मूड़ फुरौव्वल कइके राजू
दुइनौ अस्पताल मा बाटें
एक दिना मा करें लड़ाई
दुसरे दिन घर पतरी चाटें
होतै ठीक पुलिस घर धमकी
पइसा लइके ठोंकेस सोटा
बप्पा सर पै हाँथ रखे सोचैं
ई सिक्का खोंटा होइगा
नहीं बतावा ढ़ेर जतन
लागत है सठियात अहा तू
दिन पै दिन बौरात अहा तू
लरिकन के दौड़ावत बाट्या
मतलब बिना, थकावत बाट्या
ई लै आवा, ऊ लै आवा
कुछ ना कुछ तौ अबै खियावा
छिनभर मा तोहका सब चाही
नहीं बना अब एतना हाही
राम नाम तौ लिहा नही तू
दान - पुन्न कुछ किहा नहीं तू
गुस्सा नाक पै रखा नाही
बाट्या तू अब बच्चा नाही
जब देखा तानत थ्या गन
घर - दुवार के पता नहीं बा
बहुत फकीरी छाइ बाटै
जब आई बाबा के पेन्सन
बुवौ घरे पै धाई बाटै
जीवन नाही नरक होइ गवा
बाबौ का अब स्वरग होइ गवा
नहीं देखातै अब घर केहू
कपड़ा का अब धोवै रेहू
आँसू नाही खून चुवत है
बहुत गरीबी है, रोवत है
होली अउर दिवाली नाही
बिन पैसा घरवाली नाही
ओहके खातिर कउन चमन
पुलिस गाँव मा घुसी अहै अब
कउनो शायद चक्कर होइगा
जर - जोरू के बात करिन
दूनौ भाई मा टक्कर होइगा
मूड़ फुरौव्वल कइके राजू
दुइनौ अस्पताल मा बाटें
एक दिना मा करें लड़ाई
दुसरे दिन घर पतरी चाटें
होतै ठीक पुलिस घर धमकी
पइसा लइके ठोंकेस सोटा
बप्पा सर पै हाँथ रखे सोचैं
ई सिक्का खोंटा होइगा
नहीं बतावा ढ़ेर जतन
लागत है सठियात अहा तू
दिन पै दिन बौरात अहा तू
लरिकन के दौड़ावत बाट्या
मतलब बिना, थकावत बाट्या
ई लै आवा, ऊ लै आवा
कुछ ना कुछ तौ अबै खियावा
छिनभर मा तोहका सब चाही
नहीं बना अब एतना हाही
राम नाम तौ लिहा नही तू
दान - पुन्न कुछ किहा नहीं तू
गुस्सा नाक पै रखा नाही
बाट्या तू अब बच्चा नाही
जब देखा तानत थ्या गन
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ
लेकर चलना मुझे भी तू जाए जहाँ
तेरे ना होने से होना मेरा कहाँ
तुमको पलकों पे रखा हूँ शाम ओ सहर
दिल में उठती तरंगें हैं , उठती लहर
नीदें मेरी चुराने की क्या दूँ सज़ा
दिल की धड़कन बढ़ाती है तू आजकल
संग - संग रहना मेरे साथी तू साथ चल
रखना मुझको भी हमदम, रहना जहाँ
मैं गुज़रा हुआ ज़माना हूँ
![]() |
तुम मुझे भुला ना पाओगी
मैं किस्सा बहुत सुहाना हूँ
मैं सदा तुम्हें याद आऊँगा
मैं गुज़रा हुआ ज़माना हूँ
फिर से आओ संसार - जियें
फिर से आओ इक साथ चलें
फिर नदियों में कलकल हो
फिर से मन में कुछ हलचल हो
मुझपे थोड़ा विश्वास करो
फिर से आओ आगाज़ करो
कल तक जो साथ तुम्हारे था
देखो तो वही खज़ाना हूँ
जब तक हम दोनों संग - संग हैं
तब तक ये चाँद सितारे हैं
जब तक संगम हम दोनों का
बस तब तक ही ये प्यारे हैं
अब पास महज़ कुछ यादें हैं
जीवन की यही मुरादें हैं
फुर्सत हो तो, आ जाना तुम
मैं बन्दा वही पुराना हूँ
08/02/2019
मेरी माँ का हाँथ मेरे सर रहता है
![]() |
| From Google |
सबके सर पर इक - इक छप्पर रहता है
वो दुखिया है शायद बेघर रहता है
मैं बढ़ता हूँ इसमें नहीं अजूबा कुछ
मेरी माँ का हाँथ मेरे सर रहता है
एड़ी से चोटी तक ज़ोर लगाओ तुम
हर पंक्षी के पास सुनो पर रहता है
बाहर का माहौल बहुत ही बत्तर है
जब तक बहन नहीं आये, डर रहता है
मत घबराओ प्रिये ! तुम्हारी यादों का
इस दिल में मदमस्त - समन्दर रहता है
06/02/2019
सुना लरिकवा करिया रहि गा
![]() |
| Me With My One Of Best Brother Manu Bhai |
सुना लरिकवा करिया रहि गा
सेन्ट मार के जाए ऑफिस
फेरन - हन्डसम खूब चपोतिस
रगरेस पूरा चेहरा आपन
रोजै गरल - फ्रेंड के ख्वाहिस
तनिकौ नहीं बदल पाएस ई
जइसे रहल हौ, वइसे रहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
हीरो बनबै कहत रहा ऊ
घूमत,नाचत फिरत रहा ऊ
चक्कर मारै गली - गली के
प्यार मुहब्बत करत रहा ऊ
पप्पा बोलेन माई से के, देख
बेटवना तोहर बहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
दारू, हुक्का, चिलम लगावै
ऐय्यासी मा खूब लुटावै
कहनी - करनी मा अंतर हौ
रात - रात भर घरे न आवे
कइसे लाई वापस ओहके
नाही कउनो जरिया रहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
मारै - पीटै महतारी के
झरी लगावै ऊ गारी के
उल्टा - सीधा बकत रहत है
खात पियत है परा रहत है
तनिकौ नहीं चलै पावै अब
लरिका नाहीं लढ़िया रहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
दादी जब - जब काम बतावें
गुर्रावे ,संग आँख दिखावे
दादा ओहके देख जरत हैं
बोलें, काहे नहीं मरत है
पूरा गाँव मोहल्ला बोले
पेट गइल अब हड़िया रहि गा
सुना लरिकवा करिया रहि गा
05/02/2019
मैं लिखता हूँ शब के साये में बैठा
![]() |
| BHU - Ruiya ( Sanskrit Blok ) |
वो कहता है उसको जहाँ झुकाना है
मैं कहता हूँ मुझे दिलों तक जाना है
सबका अपना - अपना यहाँ सफ़र यारों
सबको अपनी - अपनी मंज़िल जाना
मैं लिखता हूँ शब के साये में बैठा
उनको अब्भी भी महफ़िल तक जाना है
बच्चों को खुश रखते हैं पापा मेरे
ज्ञानी हैं, फिर भी ज़ाहिल तक जाना है
मैंनें भी कुछ सोच रखा है जीवन में
इस साहिल से उस साहिल तक जाना है
04/02/2019
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रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!
देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...
-
स्त्रियों, क्या चाहती हो ? हमेशा की तरह अब भी पुरुषों के तलवों तले रहना उनके हाँ में हाँ मिलाना या खुद को अधिकृत समझ ली हो उनक...
-
बस तुम्हारे लिए........... मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ - 2 मैं कहूँ कैसे तुम्हारी...




















