06/01/2018

मुहब्बत है मुकम्मल अब अधूरापन नही दिखता

भरे आकाश के नीचे पतड़्गे सा नही दिखता
मैं वो खुश्बू हूँ जो महसूस होता हूँ नही दिखता

अधूरी साँस थी, थे हम, अधूरी ज़िन्दगी मेरी
मुहब्बत है मुकम्मल अब अधूरापन नही दिखता

बहुत खामोश हैं लफ्ज़ - ए - बयाँ उनकी अदाएँ पर
उतरती यूँ दिल - ओ - दरिया में हैं शाहिल नही दिखता

न जाने क्यों बहुत रूठे हुए मगरूर बैठे हैं
मैं जितना इश्क करता हूँ उधर उतना नही दिखता 

30/11/2017

गज़ल



एक निर्णय ले लिए फिर क्या फ़रक पड़ता खुदा
या तो जन्नत राह होगी या तो दोजख का सफर

जिन्दगी को आग की दरिया पे है रखना मुझे
या तो मेरी मौत होगी या रहूँगा मैं अमर

हर कदम पे ले रहे हैं वो परीक्षाएँ मेरी
तुम कहो ! मैं इश्क़ कह दूँ या कहूँ इसको समर

चाँद देखो छिप गया है सूर्य दीवाना सा है
मेरा क्या होगा बताओ आज तुम आई अगर

जो हमेशा दिल की बातें सोंचता, सुनता रहा
आ गया जाने कहाँ से बुद्धिमानों के शहर

चाँद से ऊपर पहुँच कर सूर्य पर रख दूँ कदम
मेरे सारे ख़्वाब जो सजकर बिखर जाएँ इधर

अपनी भी कुछ ख्वाहिशें हैं अपने भी कुछ स्वप्न हैं
छोड़कर इनको बताओ आप ही जाऊँ किधर 

14/11/2017

ज़िक्र होता है तेरा हर बात में

मैं तुम्हारे प्यार की बरसात में
भीग जाऊँगा तुम्हारी याद में

जन्नतें मेरे लिए शायद नही
तू मेरी जन्नत तु ही फ़रियाद में

तुम नदी सी आ मिलो उस छोर पे
मैं समुन्दर सा मिलूँ आजाद मैं

इस दिलो - दीमाग में क्या कर गई
ज़िक्र होता है तेरा हर बात में

हुश्न शोला , होंठ शबनम , आँख हैं दरिया कोई
चाहता हूँ डूब के मरना , जियूँगा बाद में 

30/10/2017

कभी - कभी मेरे गीतों को गुनगुनाया करो ( गज़ल )

Neelendra Shukla " Neel "
कभी - कभी मेरे तुम पास भी तो आया करो
कभी - कभी मेरे होंठों से मुस्कुराया करो

मेरी जुबाँ में सदा नाम तेरा रहता है
कभी - कभी मेरे गीतों को गुनगुनाया करो

कि वो तुम्हारी हर इक साँसें मुझपे गिर्वी हैं
कभी - कभी अपनी साँसें मुझसे ले जाया करो

मैंने अक्सर तुम्हें इस दिल की गली में देखा
कभी - कभी अपने दिल में मुझे बसाया करो

मेरी हर सुब्ह - शाम ढलती है यादों में तेरी
कभी - कभी मुझे अपना भी दिन बनाया करो

मैं फ़लक से भी तोड़ लाऊँ चाँद - तारों को
कभी - कभी मेरा जो साथ तुम निभाया करो

इश्क काफ़िर नही मेरा मुझे मालूम है पर
कभी - कभी मुझे ख़ुद से भी तो मिलाया करो 

26/10/2017

खुद के सपनों में ही खुद को देख तू

ये जमीं और आसमाँ कर एक तू
यूँ न हिम्मत हार लड़कर देख तू

तोड़ दे चट्टान भी आये अगर
इस समर में एक भाला फेंक तू

वो तेरे पैरों तले आ जाएँगें
इक कदम आगे निकल कर देख तू

जीत लोगे सब  तुम्हारा है ज़रा
ज़िन्दगी से डर हटाकर देख तू

क्या रखा है उस बड़े प्रासाद में
आत्मा में झाँक यारा देख तू

सब गिले शिक़वे यहाँ मिट जाएँगें
इस जहाँ में प्यार भर कर देख तू

खुद - ब - खुद किस्मत बदल जाएगी बस 
खुद के सपनों में ही खुद को देख तू 

ये जमीं और आसमाँ कर एक तू
यूँ न हिम्मत हार लड़कर देख तू

तोड़ दे चट्टान भी आये अगर
इस समर में एक भाला फेंक तू


23/10/2017

तू जो आया , तो ख़ुदा भी आया ( गज़ल )

तेरी ज़ुल्फ़ों से हवा का झोंका आया - 2
ऐसा लगता है जैसे कोई नगमा आया

दूर मुझसे थे अभी तक मेरे अहल ए वफ़ा
तू जो आया , तो ख़ुदा भी आया

सारे रिश्ते , सभी नातों नें ठुकराया मुझे
जब नहीं था कोई मेरे पास तो , तू आया

धूप में यूँ ही भटकता रहा सपनें लेकर
छाँव की चाह में अक्सर तेरा आँचल आया

कभी बीमार हुआ जो मैं, ऐ मेरे हमदम !
डबडबाई तेरी आँखों में आँसू आया

वो इबादत चली मेरे संग मेरी दुल्हन बन
तूने जो की थी उसी से मुझमें रंग आया

लोग आख़िर कभी समझे ही नहीं लफ्ज़ ए बयाँ
तूनें समझा यही काफ़ी है ,सब हाँथ आया

तेरी ज़ुल्फ़ों से हवा का झोंका आया
ऐसा लगता है जैसे कोई नगमा आया

दूर मुझसे थे अभी तक मेरे अहल ए वफ़ा
तू जो आया , तो ख़ुदा भी आया


18/10/2017

मेरी ज़िन्दगी में तुम , कुछ यूँ आओ ( Lyrics )

मेरी ज़िन्दगी में तुम , कुछ यूँ आओ
कि मेरी सुब्ह - शाम हो जाए
कि मेरे दिन - रात हो जाएँ
मैं भीगूँ बाँहों में तेरी
कि यूँ बरसात हो जाए
हो जाए ऽऽ , हो जाए ऽऽ

मेरी ज़िन्दगी में तुम , कुछ यूँ आओ
तेरा चेहरा दिखे हर पल
तेरे संग आज़ गुज़रें कल
तेरी परछाईं बन घूमूँ
तुम्हें चाहूँ , तुम्हें पूजूँ
मैं पूजूँ  ऽऽऽ, मैं पूजूँ  ऽऽ


so now it is not complete when i'll complete it then i'll remove this particular line .....
Thank You .  

17/10/2017

तुम आँखों से यूँ देखो मैं दिल देखता हूँ ( its totally lyrics )



तुम आँखों से यूँ देखो मैं दिल से देखता हूँ -2
तेरी यादों की बारिश में तेरे संऽऽभीऽगता हूँऽऽ

यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखता हूँ   ( For boy )


तुम आँखों से यूँ देखो मैं दिल देखती हूँ -2  

तेरे ख़्वाबों की मंज़िल तेरे संग देखती हूँ

यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखती हूँ ( for girl )


अँगड़ाई लेती लहरें शाहिल से टकराती हैं 

इतना तुझको मैं चाहूँ हर पल तू याद आती है 
कितना गहरा है सागर कितना ऊपर है अम्बर 
जो तू संग - संग चल दे तो, मैं मिल देखता हूँऽऽऽ ( for boy )


तुम आँखों से यूँ देखो मैं दिल से देखता हूँ -2 



तू हवा के झोंके जैसा मेरे दिल का चैन चुराए 

तू आये ऐसे दिल में मुझको पागल कर जाए 
दीदार तेरा करना है तुझ संग जीना मरना है 
तू पास जरा आए तो, मैं मिल के देखती हूँऽऽऽ ( for girl )


तुम आँखों से यूँ देखो मैं से दिल देखती हूँ -2 


तेरी यादों की बारिश में तेरे संऽऽग भीऽगता हूँऽऽ  ( For boy )
तेरे ख़्वाबों की मंज़िल तेरे  संग देखती हूँऽऽ  ( for girl )


यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखता हूँ  ( For boy )

यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखती हूँ ( for girl )


यूँ आँखों से तुम देखो मैं दिल से देखती हूँ ( Both )



हर मुश्किलें जो तेरी वो मेरी ( type of lyrics )

हर मुश्किलें जो तेरी वो मेरी
हर मंज़िलें जो तेरी वो मेरी

जाओ जहाँ संग - संग मैं रहूँ
इतनी सी बस ख़्वाहिशें हैं मेरी   ( these lines for girl )

समझो ना तुम मेरे दिल की ज़फ़ा
पास रहोगी तुम्हीं तुम सदा

कैसे तुम्हें भूल पाउँगा मैं
आवाज़ दूँगा ,बुलाऊँगा मैं  ( ....for boys )

दिल में मेरे तुम यूँ  आ जाना
जैसे लकीरें हाँथों में        ( for girl )

वादा है तुमसे जानेमन
हाँ , हम जियेंगे साथ में  ( for boys )

its not now complete now i'm working on this work .... 

15/10/2017

याद अभी है

तुमको घर तक छोड़ के आना याद अभी है
तुमसे दिल के राज़ बताना याद अभी है

इक संसार मेरा था बचपन की यादों का
उसमें तेरा झूम के आना याद अभी है

घर के कोने - कोने में यूँ दौड़ - भागकर
वो तेरा पायल छनकाना याद अभी है

दिल में मेरे दर्द उट्ठा था तेजी से कुछ
और तेरा वो दौड़ के आना याद अभी है

हुश्न - मुहब्बत जलवे तेरे सारे संग थे
ऐसे में बारिश का आना याद अभी है

नादानी करता था जब मैं  जानबूझ कर
और तेरा बातें समझाना याद अभी है

गुम हो जाऊंगा इक दिन ये मुल्क छोड़ कर
फिर मत कहना इक दीवाना याद अभी है

  

याद हैं

हौले - हौले इश्क़ में वो दिल लगाना याद है
याद है हमको अभी भी वो ज़माना  याद है

रात में तनहाइयाँ आकर सताती हैं मगर
देखना मुझको तेरा वो मुस्कुराना याद है

याद हैं मुझको अभी अँगड़ाइयाँ  भरना तेरा
हाँथ से आँखों पे वो पर्दा लगाना याद है

एक आहट जो तेरी आती है मुझको हर जगह
वो तेरा पीछे से आ मुझको सताना याद है

शाम होते ही तेरी आँखों की वो नजरें - बयाँ
और बागों में तेरा मिलना - मिलाना याद है

इस जगह से उस जगह की दूरियाँ काफ़ी मगर
वो तेरी बचपन की इक तस्वीर पाना याद है

इश्क़ अपना यूँ मुकम्मल ही रहा है  उम्र - भर
लाख़ - तूफ़ानों का आना और जाना याद है

सोंचता था एक मैं ही प्यार करता हूँ तुझे
वो मेरी तस्वीर को दिल से लगाना याद है

11/09/2017

तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ ( गज़ल )

बस तुम्हारे लिए...........

मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ
तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ - 2

मैं कहूँ कैसे तुम्हारी आरज़ू हमको नही
चाहता हूँ मैं तुम्हें तुमसे बग़ावत है नही
किस कदर तुमसे कहूँ अपने दिलों की दास्ताँ ।। तू चली आ ....

छुप - छुपा कर देखता तुझको शज़र की छाँव में
डूब जाता हूँ मैं अक्सर उस शहर ,उस गाँव में
हैं तेरी यादें यहाँ करती मेरे मौसम जवाँ ।। तू चली आ ....

आज हो जैसे युँ ही रहना सदा तुम उम्रभर
ज़िन्दगी आसान होगी कट सकेगा ये सफर
साथ ग़र देती रही बनता रहेगा आशियाँ ।। तू चली आ ....

याद हैं मुझको तेरे चेहरे की वो ख़ामोशियाँ
तू सदा करती रही नज़रों से ही लफ़्ज़े - बयाँ
वो घड़ी , वो पल कटे कैसे हमारे दरमियाँ ऽऽऽ  ।। तू चली आ .....

भावनाओं की नदी में डूबकर हूँ सीखता
मैं घने - बादल तले अक्सर तेरे संग भीगता
यूँ गिराया ना करो ज़ुल्फों से काली बिजलियाँ ।।

तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ

मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ
तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ ।।

06/09/2017

कहीं चिराग जल गया शायद

Daughter $ Son
आज अनन्त चतुर्दशी और शिक्षक दिवस के अवसर पर बड़े भइया और भाभी को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई अतः समूचे घर में उल्लास का माहौल छाया हुआ है मुझे पूरा विश्वास है कि आज मेरे पिताजी की मूछें पहले से थोड़ी टाइट और छाती पहले से कुछ और चौड़ी होगी, भइया मन ही मन खुशी से झूम रहे होंगे कि जैसे झूमती हैं लहलहाती हरी फसलें खेतों में, भाभी जी आज अपार कष्ट के बाद एक अलौकिक सुख का अनुभव कर रही होंगी बाबा आजी ,दादा दादी, चाचा चाची और सभी भाइयों भाभियों सहित बहनों में एक खुशी की लहर दौड़ रही होगी मैं बाहर (केरल) हूँ पर मुझे मालूम इस समय मेरे घर का माहौल कैसा होगा -

(मैं यहाँ बाहर हूँ पर मुझको पता है सब यहाँ
किस कदर छाया हुआ होगा मेरे घर कारवाँ )
                           नीलेन्द्र शुक्ल " नील "

कहीं पे फूल खिल गया शायद
कहीं गुलशन महक उठा शायद

मेरे पापा ख़ुशी से झूम उठे ,
कहीं चिराग जल गया शायद

जिसे थे खोजते हम रात के अंधेरों में
आज घर चाँद आ गया शायद

कई दिन बीत गए इन्तज़ार में जिसके
वही मेहमान आ गया शायद ।।

मेरे पापा = बच्चे के बाबा जी ( दादा जी )
                  

19/08/2017

जन्मदिन

जन्मदिन के इस सुअवसर पे तुम्हें अर्पण करूँ क्या
देख लो मेरे हृदय को भावना दर्पण करूँ क्या

पूँछता हूँ मैं अकिंचन आज अपने यार से
बाँट दूँ यह विश्व सारा या समेटूँ प्यार से
शब्द हैं, कुछ अर्थ हैं, कुछ भावनाओं के कुसुम
ला बिछाऊँ आज मैं पैरों तले गुलजार से
बौर की देखो छटा है माह ये ऋतुराज का
दिव्य - मेधा हो प्रभा आलोक हो गणराज का
जिन्दगी सारी खुशी दे जो तुम्हें मंजूर हो
और सारे कष्ट जो भी हैं या हों वो दूर हों
राष्ट्र में हो कीर्ति तेरी राष्ट्र यह वंदन करे
राष्ट्र पे हो तू निछावर राष्ट्र अभिनन्दन करे ।

भावना की बूँद हैं इससे अधिक वर्षण करूँ क्या ।।


19/07/2017

मुहब्बत के वास्ते

दुनिया तू घूमता रहा शोहरत के वास्ते
दो - चार गज़ल बोल मुहब्बत के वास्ते

पर्वत,पठार,पेड़ ,नदी और झरोखे ,
भारत बचाए रख तू इबादत के वास्ते

झूठा नही है चाँद ये नक्षत्र न तारे
दो चार घड़ी रुक जा मुहूरत के वास्ते

हो प्रेम बेहिसाब एक - दूजे मुल्क से
इंसान बन जरा तू शराफत के वास्ते

ले ली है कसम हमनें सुधारूँगा ये जहाँ
बिगड़ी हुई बज्ज़ात सियासत के वास्ते

जो भी लड़े हैं जंग में घायल हैं अभी तक
हर शक्स से मिलूँगा अदायत के वास्ते

हैं ठीक नहीं मुल्क के हालात आजकल
हूँ मौत में खड़ा मैं अक़ीदत के वास्ते

उनको भी खबर हो कि धुआँ यूँ नही उठा
इक आग जलाई है बगावत के वास्ते

इस देश की रक्षा में अगर प्राण भी जाँए
मिट जाऊँ सर कलम हो शहादत के वास्ते



16/06/2017

तुम्हारे चेहरे पर


                            रूपों का विस्तार तुम्हारे चेहरे पर
                            दिखता माँ सा प्यार तुम्हारे चेहरे पर
                            कैसे खुद को रोक सकूँ ,मेरी दुनिया
                            लुट जाए सौ बार तुम्हारे चेहरे पर

                            छोटी बिंदिया माथे पर ऐसे सोहे
                            हों सोलह श्रृंगार तुम्हारे चेहरे पर

                           जब से होंठों ने होंठों को पाया है
                           तब से है त्यौहार तुम्हारे चेहरे पर

                           वर्णन करने में ये छह की छह ऋतुएँ
                           कम पड़ती सरकार तुम्हारे चेहरे पर

                           कान्हा बनकर घूँमूँ तेरी यादों में
                           दिखी राधिका चार तुम्हारे चेहरे पर

                           तेरी गोदी में माँ के आँचल का सुख
                           दिखता प्रेम अपार तुम्हारे चेहरे पर

                           जी करता है जन्मदिवस के अवसर पर
                           लिख दूँ सारा प्यार तुम्हारे चेहरे पर ।।


अपने जन्मदिन (19 जून) के अवसर पर तुम्हारे लिए
एक छोटी सी रचना इस उद्देश्य से कि मेरी
काल्पनिक दुनिया में हमेशा तुम इसी
तरह अपनी यादों के साथ मुझे सजाती रहना
इससे भी गम्भीर विचार देना,अपनी यादों से
लबरेज़ रखना कि हमेशा तरोताज़ा रहूँ मैं
तुम्हारी यादें ही तो हैं जो मुझे ताकत देती हैं
किसी भी कार्य को बेहद सलीके से करने में
तुम्हारा प्यार आकाश की तरह है जो मुझे
ढक रखा है ,तुम्हारी यादें सागर की लहरों की तरह हैं
जो मेरे हृदय को और झकझोरती हैं तरड़्गित करती हैं ।।

30/04/2017

बना सकती हो क्या

मुझको अपना मेहमान बना सकती हो क्या ?
मुझसे थोड़ी पहचान बना सकती हो क्या ?

जिसको भगवान बनाओ उसको पूजो पर
मुझको भोला इन्सान बना सकती हो क्या ?

मैं मन्दिर ,मस्जिद गिरिजाघर को क्यों जाऊँ
खुद को मेरा भगवान बना सकती हो क्या ?

मैं गिनता हूँ उन्मुक्त गगन में तारों को
खुद को तुम मेरा चाँद बना सकती हो क्या ?

छोड़ो सारा संसार गजब की दुनिया है
होंठों से छूकर जान बना सकती हो क्या ?

यूँ मत खोजो दुनिया में अंधे लोगों को
मुझको देखो पति-प्राण बना सकती हो क्या ?

26/04/2017

बहुत हैं

अल्लाह तेरी नज़र में बेशुमार बहुत हैं
ईश्वर नही दिखे कहीं दरबार बहुत हैं ।
इक मैं ही नही प्यार करके पाप किया हूँ ,
धरती पे मेरे जैसे गुनाहगार बहुत हैं

नज़रें जमाए देखती है हुश्न - मुहब्बत
मुझ जैसे उस नज़र में गिरफ्तार बहुत हैं

इस देश की हमदर्द निगाहों से मदद लो
सब नीच ही नही हैं मददगार बहुत हैं

गाँवों की दशा देख शहर ही भला लगे
घर कम ही देखता हूँ मैं दीवार बहुत हैं

माँ की दुवाएँ साथ हैं, बहनों की इबादत
गुस्से भरे पिता हैं मगर प्यार बहुत है

दाढ़ी,जटाएँ देख के भरम में मत पड़ो
पाखण्डियों के नाम बलात्कार बहुत हैं

बहनों की , बेटियों की यूँ इज्जत से न खेलो
शहरों में हवस के लिए बाज़ार बहुत हैं

गैरों का खाके कब तलक आराम करोगे
बाँटो तो सही ,देश में हकदार बहुत हैं

इसका कभी उसका हूँ सदा रोल निभाया
चेहरा है एक दोस्तों किरदार बहुत हैं

दिल से मिला हूँ सबसे नही बुद्धि लगाई
वो सोंचते हैं खुद को समझदार बहुत हैं

हर पाँच - वर्ष बाद दिखें हाँथ जोड़कर
भारत में दिखी नक्कटी सरकार बहुत हैं

दूजे के काँध रख के मियाँ ट्रिगर दबाएँ
इक " नील " तू ही मूर्ख होशियार बहुत हैं ।।

16/04/2017

न जाने कल कहाँ ये दोस्त तेरी दीक्षा हो


प्रिय बचपन की दोस्त दीक्षा मिश्रा जी को समर्पित ये गज़ल बहुत ही सीधी सरल और उदात्त स्वभाव की हैं   -------

महकती हो सदा फूलों सी वो ऐसी फिज़ा हो
खुले हों जुल्फ लहराती हुई कोई निशाँ हो ,
चमकती,चमचमाती धूप हो जैसे शरद की
सुनहरी शान्त सी कोमल हमारी दीक्षा हो ।।

नही चन्दा ,नही सूरज ,नही गुलनार माँगू
सदा खुशियों भरी, पावन पवन वो,दीक्षा हो ।।

अधूरी एक भी किरणें नही टकराएँ उससे,
कि छनकर जाएँ जिसपे रोशनी वो दीक्षा हो ।।

सभी हों राह ऐसी आज जिसपे पैर तेरा
पड़ें ,बिछ जाएँ सारे फूल जिसपे दीक्षा हो ।।

मिटें नापाक वो सारी सभी की भावनाएँ
कि जिसकी सोंच पे बैठी हुई ये दीक्षा हो ।।

बड़ी हसरत,बड़ी चाहत,बड़ा महफूज़ हूँ मैं
जिसे महफूज़ तुम रखना हमारी दीक्षा हो ।।

बहुत शीतल हिलोरें मारती हैं भावनाएँ
कि हो गरमी में जो बदरी सदृश वो,दीक्षा हो ।।

चलो अब नील तुम भी साथ चल लो ,
न जाने कल कहाँ ये दोस्त तेरी दीक्षा हो ।।

14/04/2017

कोशिश करता हूँ

लिखने और मिटाने की मैं कोशिश करता हूँ ,
अक्सर तुझको पाने की मैं कोशिश करता हूँ

सूरज,चन्दा,फूल,खिलौने डालूँ तेरी झोली में
तुझमें खुद मैं घुल जाने की कोशिश करता हूँ

माँ के चरणों की गाथाएँ बाबू जी का प्यार
सुबह-सवेरे दोहराने की कोशिश करता हूँ

बहनें हों उन्मुक्त हमारी जितना चाहें पढ़ पाएँ,
बाबू जी को समझाने की कोशिश करता हूँ

चाचा चाची,मामा मामी,भाई भौजी सब
सारे रिस्तों को पाने की कोशिश करता हूँ

शहरों में वो बात कहाँ जो गाँवों की अमराई में
फिर अपने घर को जाने की कोशिश करता हूँ

जन्नत - स्वर्ग की बातें अद्भुत कौन देख पाया अब तक
इक दूजे को सुलझाने की कोशिश करता हूँ

जिनसे आँखें डरती आई जीवन के हर मंज़र पे ,
उनसे आँख मिलाने की मैं कोशिश करता हूँ ।।

जब - जब अपना रूप बिगाड़ी तानाशाही सरकारें,
तब - तब मैं खुद टकराने की कोशिश करता हूँ ।।

रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!

देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...