13/04/2019
12/04/2019
लोग क्यूँ वाह वाह करते हैं
![]() |
| Neel |
लोग ख़ुद को तबाह करते हैं
जानते हैं, गुनाह करते हैं
रात आती है चाँद तारों संग
रात को हम सियाह करते हैं
चाहता हूँ मैं बाख़ुदा जिसको
आज उससे निकाह करते हैं
घूमते हैं, बड़े नज़ाकत से
और हमपे निगाह करते हैं
ख़्वाहिश -ए - पूर्णिमा की है उनको
हम अमावस की चाह करते हैं
जुर्म के बाद था अदालत में
लोग फिर भी गवाह करते हैं
रात आती है चाँद तारों संग
रात को हम सियाह करते हैं
चाहता हूँ मैं बाख़ुदा जिसको
आज उससे निकाह करते हैं
घूमते हैं, बड़े नज़ाकत से
और हमपे निगाह करते हैं
ख़्वाहिश -ए - पूर्णिमा की है उनको
हम अमावस की चाह करते हैं
जुर्म के बाद था अदालत में
लोग फिर भी गवाह करते हैं
बोलता हूँ फ़िजूल ही यारों
लोग क्यूँ वाह वाह करते हैं
11/04/2019
प्रेम शिव हैं, निशान काशी में
![]() |
| Kashi, Banaras,Varanasi |
ईश शव औ' मशान काशी में
रोज सुनता अज़ान काशी में
केरला में महज़ बदन मेरा
घूमता है धियान काशी में
एक ही घाट पर दिखे दोनों
ईश,अल्ला महान काशी में
पाठ करते बटुक ऋचाओं का
वेद, गीता, पुराण काशी में
सुब्ह से शाम तक महादेवा
गूँजती है जुबान काशी में
एक मैं ही यहाँ अकेला हूँ
और सारा जहान काशी में
ख्वाहिशें हैं नहीं बहुत मेरी
चाहता इक मकान काशी में
ख्वाहिशें हैं नहीं बहुत मेरी
चाहता इक मकान काशी में
प्रेम पाकीज़गी में दिखता है
प्रेम शिव हैं, निशान काशी में
" केरला में महज़ बदन मेरा " का मतलब ये बिल्कुल नहीं है की मैं केरला पसन्द नहीं करता केरला मुझे बहुत पसन्द है यहाँ के लोग, यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता, यहाँ की उदारता पर कुछ मामलों को लेकर स्वार्थी होना पड़ता है महादेव की ख़ातिर ।
" केरला में महज़ बदन मेरा " का मतलब ये बिल्कुल नहीं है की मैं केरला पसन्द नहीं करता केरला मुझे बहुत पसन्द है यहाँ के लोग, यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता, यहाँ की उदारता पर कुछ मामलों को लेकर स्वार्थी होना पड़ता है महादेव की ख़ातिर ।
तुम्हें जीवन बना लिया हूँ मैं
![]() |
| Neel - Teri Parchhaiyan Jo Humsafar Hain. |
आज लो मन बना लिया हूँ मैं
आज चिलमन हटा लिया हूँ मैं
होंठ पे रंग लगा के, रंगों से
और भी रंग बना लिया हूँ मैं
आज क़ातिल अदाएँ देखूँगा
आज दर्पण लगा लिया हूँ मैं
इश्क आबाद करेगा मुझको
सोंचकर संग बना लिया हूँ मैं
एक पूरी ग़ज़ल समूची तुम
तुम्हें जीवन बना लिया हूँ मैं
मुझको मेरा कल दो ना
![]() |
पापा पापा फल दो ना
थोड़ा सा सम्बल दो ना
मुझको भी पढ़ना लिखना है
मुझको मेरा कल दो ना
मुझको भी कुछ करना है
भइया जैसा बनना है
आँखमिचौली नहीं खेलना
मुझको आगे बढ़ना है
मैं भी उड़ना सीखूँगी
मुझको जीवनजल दो ना
मुझको क्यूँ कमजोर समझते ?
मुझसे क्यूँ बातें न करते ?
सामाजिक बदलाव करेंगे
सबमें हम समभाव भरेंगे
मेरे प्रश्नों से क्यूँ चुप हो
आखिर कुछ तो हल दो ना
10/04/2019
होंठ पर होंठ रख दिया रब्बा
![]() |
आज चमका गया फिज़ा रब्बा
झूमते लोग जा ब जा रब्बा
कई सालों के बाद आया है
मेरे घर पर मेरा ख़ुदा रब्बा
हाँथ में चीख रहा था भाई
बोलकर चल दिया विदा रब्बा
बोलना था मुझे बहुत कुछ पर
होंठ पर होंठ रख दिया रब्बा
जिससे उम्मीद थी रफ़ीक़ी की
क़त्ल कर के फँसा गया रब्बा
ढूढंता हूँ दरख़्त सपनों में
सामने कुछ नहीं बचा रब्बा
चाँद तक लोग आ गए लेकिन
गाँव उनको नहीं दिखा रब्बा
देखता हूँ जहाँ में तन्हाई
गा रहा हूँ मैं मर्सिया रब्बा
जा ब जा - जगह जगह
रफ़ीक़ी - दोस्ती
दरख़्त - पेड़
09/04/2019
तुम आई हो मेरे जीवन में मेरे यार के जैसी
![]() |
| Dhadak - Google |
किसी पतवार के जैसी, किसी मल्हार के जैसी
तुम आई हो मेरे जीवन में मेरे यार के जैसी
मेरे घर - द्वार के जैसे, किसी परिवार के जैसे
तुम आये हो मेरे जीवन में इक संसार के जैसे
सुबह से शाम तक घूँमूँ
हुआ पागल तुम्हें ढूँढूँ
चमकता चाँद सा चेहरा किसी रुख़्सार के जैसे
मेरी साँसों में घुलते हो
मेरे सपनों में मिलते हो
जहाँ देखूँ, जहाँ जाऊँ
हमारे साथ चलते हो
हमारे जिस्म से जाकर
हमारी रूह छूते हो
मेरी धड़कन धड़कती है किसी झनकार के जैसे
अभी तक मुन्तज़िर था मैं
अभी शायद मुनव्वर हूँ
जमीं की ख़्वाहिशें समझूँ
मुकम्मल एक अम्बर हूँ
तड़प देखा तुम्हारी मैं
बरसना चाहता हूँ अब
तुम्हें बस देखता जाऊँ तेरे दीदार के जैसे
तुम्हीं बोलो कहाँ गुम हो
तसव्वुर में तुम्हीं तुम हो
मेरे जीवन में आ जाओ मेरे अधिकार के जैसे
अभी तो है बहुत थोड़ा
मुझे छू लो करो पूरा
मुझे अपना बनाओ तुम मेरे सरकार के जैसे
08/04/2019
कविता, पुस्तक और तुम
यादें कितनी खूबसूरत
होती हैं, मालूम है तुम्हें
तुम्हारी यादें कल बीजरूप में
पनपी और कविताएँ बनी
धीरे धीरे बढ़ी, बढ़ती गई
और इतना बढ़ गई
कि आज फसलरूपी पुस्तक
तुम्हारे सामने है
इसे उठाओ, पढ़ो
और देखो
मेरी नजरों से कितनी खूबसूरत दिखती हो
शायद वो खूबसूरती नहीं
दिखा पाए कोई भी दर्पण तुम्हें
तुम्हारी दी हुई कला
नहीं मालूम
मुझे कहाँ तक लेके जाएगी
लेकिन हाँ अभी तक जो भी पाया हूँ
जहाँ भी हूँ सच बहुत खुश हूँ
जहाँ भी हूँ सच बहुत खुश हूँ
07/04/2019
मोदी जी का ये अभियान
चलो आज गंगा चलते हैं
वहीं पाप अपने मलते हैं
साबुन ले लो सैम्पू ले लो
कूद - कूद कचरा करते हैं
चलो वहाँ कुछ खेल भी लेना
पॉलीथिन में तेल भी लेना
मूतो और हगो भी इसमें
बालों वाला जैल भी लेना
चलो वहाँ कन्याएँ होंगी
नई नई बालाएँ होंगी
चड्डी देखो बॉडी देखो
उसके होंठ गुलाबी देखो
और नहीं कुछ देख सके तो
बाजू वाली भाभी देखो
ये पकते गंगा में ज्ञान
शौचालय को फोड़ दिए हैं
डस्टविन को तोड़ दिए हैं
चलो कहीं पे घूम के आयें
तम्बाकू मल झूम के खायें
पिच्च - पिच्च हैं थूंके उसमें
ट्रेन में खुलकर शोर मचाएँ
ओये मूँगफली दे देना
चटनी ज़रा बढ़ा के देना
फोड़ - फोड़ के खाएँ कैसे
छिलका वहीं बहायें कैसे
बिना टिकट के सफर किये हैं
भाषण में दोपहर किये हैं
नेता मंत्री चोर हैं साले
किसी शहर के गंदे नाले
पूरी संसद आज उतरती
ऐसे लोगों में आ रूकती
ऐसे भी हैं लोग महान
कभी पक्ष में नहीं रहेंगे
तनिक कष्ट भी नहीं सहेंगे
जितना चाहे कार्य करो तुम
एक कार्य भी नहीं कहेंगे
बस दोषों को गिनना इनको
नहीं कभी कुछ करना इनको
06/04/2019
04/04/2019
तुम्हारा नाम जपती हैं, भरे संसार में मोहन
![]() |
| साभार - गूगल |
भ्रमर गुंजार करते हैं तुम्हारे बाग़ में मोहन।
परीशाँ गोपियाँ घूमें तेरे दीदार को मोहन
भटकती राधिका प्यारी सुबह से कुछ नहीं खाई
दिल - ए - गुलज़ार करती हैं तुम्हारे प्यार में मोहन
वो खुद को भूल बैठी हैं, तुम्हें वो चाहती इतना
तुम्हारा नाम जपती हैं, भरे संसार में मोहन
लुटाती हैं दिल - ए - ख्वाहिश, चमन में खुशबुओं जैसे
लजाती हैं बहुत तुमसे नयनव्यापार में मोहन
तुम्हीं सम्बल, तुम्हीं ताकत, तुम्हीं हो जिन्दगी उनकी
तुम्हीं पे हैं निछावर वो, तेरी सरकार में मोहन
01/04/2019
मैं अपने जैसों कि ख़ातिर लिखता हूँ
जब जब प्यार मुहब्बत आख़िर लिखता हूँ
अक्सर ये सब तेरी ख़ातिर लिखता हूँ
तुम लिखते होंगे विद्वानों के ख़ातिर
मैं अपने जैसों कि ख़ातिर लिखता हूँ
Subscribe to:
Posts (Atom)
रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!
देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...
-
स्त्रियों, क्या चाहती हो ? हमेशा की तरह अब भी पुरुषों के तलवों तले रहना उनके हाँ में हाँ मिलाना या खुद को अधिकृत समझ ली हो उनक...
-
बस तुम्हारे लिए........... मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ - 2 मैं कहूँ कैसे तुम्हारी...

















