26/12/2016
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रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है!
देसभक्त कै चोला पहिने विसधर नाग पले है रामराज कै रहा तिरस्कृत रावणराज भले है ।। मोदी - मोदी करें जनमभर कुछू नहीं कै पाइन बाति - बाति...
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स्त्रियों, क्या चाहती हो ? हमेशा की तरह अब भी पुरुषों के तलवों तले रहना उनके हाँ में हाँ मिलाना या खुद को अधिकृत समझ ली हो उनक...
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बस तुम्हारे लिए........... मैं अधूरे ख़्वाब लेकर के बता जाऊँ कहाँ तू चली आ , तू चली आ , तू चली आ अब यहाँ - 2 मैं कहूँ कैसे तुम्हारी...

7 comments:
बहुत सुन्दर नेक कामना
धन्यवाद कविता मैम ।
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 01 जनवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
बहुत बहुत आभार यशोदा मैम मेरे गीत को स्नेह देने के
लिए और नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको और
" पाँच लिंकों का आनन्द में " सभी काव्यप्रेमियों को सभी
श्रेष्ठ कवियों को ।
धन्यवाद सर
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको भी
aapke har nayi kavita ke sath naye tarah ki nikhar bhi mil rahi hai padhane par... meri subhkamnaye sada aapke sath hai or aasha hai yasi hi kavitaye age bhi padhane ke liye milti rahengi....
अमर रहें ये शाब्दिक रचना, धन्य लेखनी तुम्हारी
हर नव वर्ष में खिलती रहे कविताओं की फुलवारी
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